ओड़िशा की आठवीं की किताब में 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' की एंट्री, नई शिक्षा नीति पर फिर उठे सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने चार वरिष्ठ SCERT अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिनमें पूर्व निदेशक सहित तीन सहायक निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।

Jun 29, 2026 - 18:22
ओड़िशा की आठवीं की किताब में 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' की एंट्री, नई शिक्षा नीति पर फिर उठे सवाल

भुवनेश्वर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार की गई ओडिशा की नई स्कूली किताबें एक बार फिर विवादों में हैं। पहले हजारों गलतियों को लेकर सरकार की किरकिरी हुई थी, अब आठवीं कक्षा की कला शिक्षा की पुस्तक 'कृति' में लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' और कश्मीरी लोकगीत 'रिंद पोश माल' के बोल शामिल किए जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है।

पुस्तक के "मो संगीत जगत" अध्याय में इन दोनों गीतों को शामिल किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। यूजर्स का कहना है कि ओडिशा के विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध ओड़िया लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के बजाय बॉलीवुड से लोकप्रिय हुए गीतों को पढ़ाना समझ से परे है।

सोशल मीडिया पर तंज की बौछार

जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और व्यंग्यात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सवाल किया कि क्या अब स्कूली शिक्षा का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना है या बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना?

पहले 1,678 गलतियां, अब नया विवाद

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां मिलने का मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना था। इनमें तथ्यात्मक, भाषाई और संपादन संबंधी गंभीर गलतियां शामिल थीं, जिसके बाद सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने चार वरिष्ठ SCERT अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिनमें पूर्व निदेशक सहित तीन सहायक निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।

जांच समिति ने भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए 14 अहम सिफारिशें दी हैं। इनमें मास्टर एराटा रजिस्टर, छात्रों तक समय पर संशोधन पहुंचाने की व्यवस्था और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग क्वालिटी एश्योरेंस सेल बनाने का सुझाव शामिल है।

अब उठ रहे बड़े सवाल

ताजा विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि स्कूली पाठ्यक्रम में स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए या देशभर में लोकप्रिय हो चुके गीतों को। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी होना चाहिए।

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