Johnson & Johnson, GSK और Alkem जैसी नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बनाकर देशभर में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भांडा फोड

कली दवाओं का यह रैकेट बेहद संगठित और हाई-टेक तरीके से चलाया जा रहा था. गिरोह के लोग संपर्क करने के लिए फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे. नकली दवाओं के लिए पैकेजिंग बॉक्स अलग-अलग जगहों से खरीदे जाते थे. फॉयल और ब्लिस्टर पैकिंग का सामान हिमाचल प्रदेश के बद्दी से मंगवाया जाता था. हरियाणा के जींद और हिमाचल के बद्दी की फैक्ट्रियों में नकली दवाएं तैयार की जाती थीं. तैयार नकली दवाओं की सप्लाई रेल और सड़क मार्ग से पूरे देश में की जाती थी. पैसों का लेन-देन फर्जी बैंक खातों और हवाला चैनलों के जरिए होता था.

Aug 6, 2025 - 19:04
Johnson & Johnson, GSK और Alkem जैसी नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बनाकर देशभर में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भांडा फोड

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी-गैंग स्क्वॉड ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली दवाइयों के एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के सरगना राजेश मिश्रा समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. भारी मात्रा में नकली तैयार दवाइयां और उन्हें बनाने का सामान जब्त किया गया है. ये रैकेट बहुत ही संगठित और हाई-टेक तरीके से चलाया जा रहा था. पैसों का लेन-देन हवाला के जरिए होता था. पुलिस के मुताबिक, ये गिरोह Johnson & Johnson, GSK और Alkem जैसी नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बनाकर देशभर में बेचता था. गिरोह का जाल देश के कई हिस्सों में फैला था. मुरादाबाद, देवरिया, गोरखपुर , पानीपत, जींद , बद्दी और सोलन से ये गोरखधंधा चलाया जा रहा था.
मुखबिर से हेड कांस्टेबल जितेंद्र को इनपुट मिला था कि नकली दवाइयों की एक बड़ी खेप दिल्ली लाई जा रही है. सूचना के आधार पर 30 जुलाई 2025 को सिविल लाइंस इलाके के एक पेट्रोल पंप पर जाल बिछाया गया. यूपी नंबर की एक वैगनआर कार जैसे ही वहां पहुंची, उसे रोककर उसमें बैठे मोहम्मद आलम और मोहम्मद सलीम को हिरासत में ले लिया गया.
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी मुरादाबाद के रहने वाले हैं. तलाशी में इनके पास से भारी मात्रा में नकली Ultracet और Augmentin की गोलियां बरामद हुईं. मौके पर मौजूद Johnson & Johnson और GSK के प्रतिनिधियों ने इन दवाइयों की पैकिंग और स्टैंपिंग देखकर नकली करार दिया. बाद में लैब टेस्ट में भी इनके नकली होने की पुष्टि हो गई. पुलिस जांच में पता चला कि नकली दवाओं का यह रैकेट बेहद संगठित और हाई-टेक तरीके से चलाया जा रहा था. गिरोह के लोग संपर्क करने के लिए फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे. नकली दवाओं के लिए पैकेजिंग बॉक्स अलग-अलग जगहों से खरीदे जाते थे. फॉयल और ब्लिस्टर पैकिंग का सामान हिमाचल प्रदेश के बद्दी से मंगवाया जाता था. हरियाणा के जींद और हिमाचल के बद्दी की फैक्ट्रियों में नकली दवाएं तैयार की जाती थीं. तैयार नकली दवाओं की सप्लाई रेल और सड़क मार्ग से पूरे देश में की जाती थी. पैसों का लेन-देन फर्जी बैंक खातों और हवाला चैनलों के जरिए होता था.

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