लाल किले से बदलेगा स्वतंत्रता दिवस का इतिहास, पहली बार PM के भाषण से पहले गूंजेगा पूरा 'वंदे मातरम्'

अब तक लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' की प्रस्तुति प्रमुख रूप से होती रही है। लेकिन इस बार समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम्' को विशेष स्थान दिया गया है। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की भावना जगाने का एक बड़ा माध्यम बना था। क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव? इस फैसले के पीछे 2026 का ऐतिहासिक संयोग सबसे बड़ी वजह है। इस वर्ष 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह कालजयी रचना मूल रूप से उनके उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति का शक्तिशाली प्रतीक बन गई।

Aug 14, 2026 - 18:06
लाल किले से बदलेगा स्वतंत्रता दिवस का इतिहास, पहली बार PM के भाषण से पहले गूंजेगा पूरा 'वंदे मातरम्'

नई दिल्ली। भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से होने वाले मुख्य समारोह में एक ऐसी नई परंपरा की शुरुआत होगी, जो आजादी के बाद पहली बार देखने को मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से ठीक पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की सामूहिक प्रस्तुति होगी और खास बात यह है कि इसे इसके सभी छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

अब तक लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' की प्रस्तुति प्रमुख रूप से होती रही है। लेकिन इस बार समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम्' को विशेष स्थान दिया गया है। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की भावना जगाने का एक बड़ा माध्यम बना था।

क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

इस फैसले के पीछे 2026 का ऐतिहासिक संयोग सबसे बड़ी वजह है। इस वर्ष 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह कालजयी रचना मूल रूप से उनके उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति का शक्तिशाली प्रतीक बन गई।

दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बदलाव की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम्' ने लाखों भारतीयों में उत्साह और जोश पैदा किया था। इसकी 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से इसे विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया गया है।

'वंदे मातरम्' को मिला कानूनी संरक्षण

इस वर्ष समारोह से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के बाद 'वंदे मातरम्' को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालने या इसका अपमान करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।

विरासत से विकसित भारत तक—दोहरी थीम

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम में भारत के अतीत और भविष्य, दोनों को जोड़ने की कोशिश की गई है। आयोजन के दो प्रमुख केंद्र होंगे—'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की भूमिका।

यानी इस बार लाल किले का मंच केवल स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत को याद नहीं करेगा, बल्कि आने वाले भारत के सपने और उसमें युवाओं की भूमिका को भी सामने रखेगा।

समारोह में दिखेंगे कई खास आकर्षण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। ध्वजारोहण के बाद परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।

समारोह के दौरान फूलों की वर्षा भी आकर्षण का हिस्सा होगी। वहीं 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर विशेष ध्वज के साथ आसमान में उड़ान भरता दिखाई देगा।

दिल्ली में संभावित बारिश को देखते हुए लाल किले परिसर की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। परिसर की नालियों और सीवेज व्यवस्था की विशेष सफाई कराई जा रही है, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में भी समारोह के आयोजन में किसी तरह की बाधा न आए।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस इसलिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक विरासत, राष्ट्रभक्ति और विकसित भारत के भविष्य को एक ही मंच पर जोड़ने वाला यादगार अवसर बनने जा रहा है।

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