80 साल का सफर: आजादी के वक्त 34 करोड़ से 2026 में 147 करोड़ पार, चार गुने से ज्यादा हुई भारत की आबादी
भारत की आजादी के समय, यानी 1947 में, देश की आबादी करीब 34 करोड़ (340 मिलियन) थी। आजादी के बाद हुई पहली जनगणना यानी 1951 में भारत की आबादी लगभग 36.1 करोड़ दर्ज की गई। इसके बाद देश की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई। 1981 तक भारत की आबादी बढ़कर करीब 68.3 करोड़ हो गई। यानी महज तीन दशकों में देश की आबादी लगभग दोगुनी हो गई। 1951 से 1981 के बीच सबसे तेज बढ़ी आबादी 1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि का दौर बेहद तेज रहा। उस समय जन्मदर काफी अधिक थी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में लगातार गिरावट आई। इसका सीधा असर जनसंख्या वृद्धि पर पड़ा।
नई दिल्ली: भारत इस साल अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद से देश ने सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। आजादी के समय भारत के सामने जहां विभाजन, गरीबी, भुखमरी और सीमित संसाधनों जैसी गंभीर चुनौतियां थीं, वहीं आज भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है।
आजादी के समय कितनी थी भारत की आबादी?
भारत की आजादी के समय, यानी 1947 में, देश की आबादी करीब 34 करोड़ (340 मिलियन) थी। आजादी के बाद हुई पहली जनगणना यानी 1951 में भारत की आबादी लगभग 36.1 करोड़ दर्ज की गई।
इसके बाद देश की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई। 1981 तक भारत की आबादी बढ़कर करीब 68.3 करोड़ हो गई। यानी महज तीन दशकों में देश की आबादी लगभग दोगुनी हो गई।
1951 से 1981 के बीच सबसे तेज बढ़ी आबादी
1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि का दौर बेहद तेज रहा। उस समय जन्मदर काफी अधिक थी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में लगातार गिरावट आई। इसका सीधा असर जनसंख्या वृद्धि पर पड़ा।
1961 से 1971 के दशक में भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर करीब 24.8 प्रतिशत रही, जिसे देश के इतिहास में सबसे अधिक वृद्धि दरों में गिना जाता है।
2001 में पार हुआ 100 करोड़ का आंकड़ा
1981 के बाद भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आने लगी, लेकिन आबादी का आधार इतना बड़ा हो चुका था कि कुल संख्या लगातार बढ़ती रही।
2001 में भारत की आबादी 100 करोड़ यानी 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। इसके बाद 2011 की जनगणना में देश की आबादी करीब 121 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई।
2026 में 147 करोड़ से ज्यादा आबादी
अब 2026 में भारत की अनुमानित आबादी करीब 147.66 करोड़ बताई जा रही है। यानी 1947 में करीब 34 करोड़ की आबादी के मुकाबले आज देश की आबादी चार गुने से भी ज्यादा हो चुकी है।
आबादी के इस विशाल विस्तार के साथ भारत के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। वहीं बड़ी आबादी भारत के लिए विशाल मानव संसाधन और बाजार का अवसर भी प्रस्तुत करती है।
1947 से 2026 तक का सफर सिर्फ आबादी बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारत की पूरी तस्वीर है—34 करोड़ से करीब 148 करोड़ तक पहुंचा देश अब दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में अपनी नई भूमिका तय कर रहा है।
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