36 देशों से 274 भगोड़े भारत लौटे: मोदी सरकार ने प्रत्यर्पण को बनाया राष्ट्रीय प्राथमिकता, कानूनों और तकनीक से मिली रफ्तार

सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कानूनों में संशोधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका परिणाम यह रहा कि वर्षों से विदेशों में छिपे कई आरोपी अब भारतीय कानून के दायरे में लाए जा सके हैं। 2014 से पहले धीमी थी प्रत्यर्पण प्रक्रिया सरकार का कहना है कि 2014 से पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई चुनौतियों से घिरी हुई थी। कई मामलों में दस्तावेज अधूरे होते थे, विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी रहती थी और कानूनी प्रक्रियाएं लंबी खिंच जाती थीं।

Aug 4, 2026 - 18:18
36 देशों से 274 भगोड़े भारत लौटे: मोदी सरकार ने प्रत्यर्पण को बनाया राष्ट्रीय प्राथमिकता, कानूनों और तकनीक से मिली रफ्तार

नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट

भारत से फरार होकर विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के मार्गदर्शन में भगोड़ों की वापसी को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कानूनों में संशोधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका परिणाम यह रहा कि वर्षों से विदेशों में छिपे कई आरोपी अब भारतीय कानून के दायरे में लाए जा सके हैं।

2014 से पहले धीमी थी प्रत्यर्पण प्रक्रिया

सरकार का कहना है कि 2014 से पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई चुनौतियों से घिरी हुई थी। कई मामलों में दस्तावेज अधूरे होते थे, विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी रहती थी और कानूनी प्रक्रियाएं लंबी खिंच जाती थीं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2004 से 2013 के बीच औसतन हर वर्ष केवल चार भगोड़े अपराधियों को ही भारत वापस लाया जा सका, जबकि बड़ी संख्या में प्रत्यर्पण अनुरोध वर्षों तक लंबित पड़े रहे।

कानूनों में बदलाव से बढ़ी कार्रवाई की ताकत

सरकार ने बताया कि 2019 में एनआईए और यूएपीए कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिससे आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कार्रवाई को मजबूती मिली।

इसके बाद 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भी भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रावधान जोड़े गए। विशेष रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार यह व्यवस्था की गई कि यदि आरोपी जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसकी गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी।

'भारतपोल' से इंटरपोल नेटवर्क हुआ मजबूत

सरकार ने जानकारी दी कि जनवरी 2025 में 'भारतपोल' (Bharatpol) की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से सीधे जोड़ा गया।

सरकार के अनुसार, पहले जहां सूचनाओं के आदान-प्रदान में लंबा समय लगता था, वहीं अब कई मामलों में आवश्यक जानकारी तीन से दस दिनों के भीतर साझा की जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हुई है।

401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी

सरकार ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित अपराधियों की गिरफ्तारी और लोकेशन साझा करने में मदद मिलती है।

सरकार का दावा

केंद्र सरकार का कहना है कि कानूनों में सुधार, एजेंसियों के बेहतर समन्वय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से भारत अब भगोड़े अपराधियों के खिलाफ पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और तेज कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने के अभियान को और अधिक गति दी जाएगी।

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