तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की चिंता को किया दरकिनार; चिकन नेक के करीब बढ़ती ड्रैगन की मौजूदगी से बढ़ा रणनीतिक तनाव

बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से जब भारत की ओर से जताई गई सुरक्षा चिंताओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ विकास संबंधी रणनीतियों में बेहतर समन्वय, जल संसाधन प्रबंधन, व्यापार और जनकल्याण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Jun 29, 2026 - 18:28
तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की चिंता को किया दरकिनार; चिकन नेक के करीब बढ़ती ड्रैगन की मौजूदगी से बढ़ा रणनीतिक तनाव

तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की चिंता को किया दरकिनार; चिकन नेक के करीब बढ़ती ड्रैगन की मौजूदगी से बढ़ा रणनीतिक तनाव

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नई दिल्ली: बांग्लादेश के तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) को लेकर भारत की गंभीर सुरक्षा चिंताओं के बावजूद चीन अपने रुख पर कायम है। बीजिंग ने साफ शब्दों में कहा है कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और न ही किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से संचालित होगा। चीन के इस बयान को भारत की आपत्तियों को सीधे तौर पर खारिज करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की चिंता पर चीन का जवाब

बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से जब भारत की ओर से जताई गई सुरक्षा चिंताओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,
"चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ विकास संबंधी रणनीतियों में बेहतर समन्वय, जल संसाधन प्रबंधन, व्यापार और जनकल्याण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

चीन ने बताया जनकल्याण की परियोजना

गुओ जियाकुन ने तीस्ता परियोजना को बांग्लादेश के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह जनकल्याण से जुड़ी एक बड़ी परियोजना है और चीन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तीस्ता नदी का बेसिन सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है। यही संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और इसे भारत की रणनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है।

ऐसे में यदि इस क्षेत्र के आसपास चीन की आर्थिक, तकनीकी या बुनियादी ढांचे से जुड़ी मौजूदगी बढ़ती है तो भविष्य में उसका रणनीतिक प्रभाव भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि भारत इस परियोजना में चीन की बढ़ती भूमिका को केवल विकास परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है।

बढ़ सकता है रणनीतिक तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन इस परियोजना के जरिए तीस्ता क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक मौजूदगी मजबूत करता है, तो इसका असर केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक मजबूती पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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