आज़ादी के बाद महंगाई के 6 सबसे खतरनाक दौर, जब आम आदमी की कमर टूट गई
अगर असर की बात करें, तो 1973-74 और 1991 को भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे गंभीर महंगाई संकटों में गिना जाता है। लेकिन आम आदमी की रसोई पर सबसे ज्यादा असर 1998 के प्याज संकट और 2009-13 की लगातार ऊंची महंगाई ने डाला। वहीं कोरोना काल ने दिखा दिया कि वैश्विक संकट का असर सीधे हर भारतीय की जेब तक पहुंचता है।
भारत में 2026 में महंगाई दर 3.48% तक पहुंच चुकी है और आने वाले महीनों में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन देश इससे पहले भी कई ऐसे दौर देख चुका है, जब महंगाई ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह हिला दी थी। कहीं तेल संकट ने आग लगाई, कहीं सूखे ने रसोई खाली कर दी, तो कहीं प्याज ने सरकार तक गिरा दी।
1. 1973-74: तेल संकट और 25% से ज्यादा महंगाई
1973 में अरब देशों के तेल प्रतिबंध के बाद कच्चे तेल की कीमतें चार गुना तक बढ़ गईं। भारत उस समय आयातित तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर था। ऊपर से लगातार सूखे ने खाद्यान्न उत्पादन तबाह कर दिया।
WPI महंगाई दर 25.2% तक पहुंच गई
गेहूं, चीनी और खाने के तेल के दाम बेकाबू हो गए
विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ा
1973 के बजट को “ब्लैक बजट” कहा गया
2. 1979-80: ईरान क्रांति और दूसरा तेल झटका
ईरान की इस्लामिक क्रांति और बाद में ईरान-इराक युद्ध ने वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित किया। बाजार में डर इतना बढ़ा कि तेल की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गईं।
1980 में महंगाई 11.35% तक पहुंची
कई राज्यों में सूखे ने हालात और बिगाड़े
सरकार को तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति बनानी पड़ी
3. 1991: जब भारत दिवालिया होने की कगार पर था
1991 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ तीन हफ्तों के आयात के बराबर बचा था। खाड़ी युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापार संकट ने अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया।
महंगाई करीब 13.6% तक पहुंची
भारत को IMF से कर्ज लेना पड़ा
47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा
इसी संकट से 1991 के आर्थिक सुधार (LPG Reforms) शुरू हुए
4. 1998-2000: प्याज ने बदल दी राजनीति
प्याज की फसल खराब हुई और कीमतें आसमान पर पहुंच गईं। दिल्ली समेत कई शहरों में लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया।
नवंबर 1998 में महंगाई 19.7% तक पहुंची
प्याज की कीमतों ने चुनावी मुद्दा बना लिया
दिल्ली में बीजेपी सरकार को हार का सामना करना पड़ा
5. 2009-2013: लगातार दोहरे अंक की महंगाई
वैश्विक मंदी के बाद दुनिया भर में खर्च बढ़ा और कमोडिटी की कीमतें उछल गईं। भारत में खराब मानसून और बाढ़ ने खाद्य संकट को और बढ़ाया।
जनवरी 2013 में खुदरा महंगाई 10.79% तक पहुंची
खाद्य महंगाई 13.36% रही
पेट्रोल, दाल, सब्जियां और गैस सब महंगे हुए
जनता में नाराजगी बढ़ी और अन्ना आंदोलन को भी बल मिला
6. 2020-2022: कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर
कोरोना लॉकडाउन ने सप्लाई चेन तोड़ दी। इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध ने खाद्य तेल और ईंधन की कीमतों में आग लगा दी।
2020 में CPI महंगाई 6.6% पहुंची
मई 2022 में WPI महंगाई 16.63% के रिकॉर्ड स्तर पर गई
पेट्रोल, डीजल और खाने-पीने की चीजें तेजी से महंगी हुईं
आखिर सबसे बुरा दौर कौन सा था?
अगर असर की बात करें, तो 1973-74 और 1991 को भारत के आर्थिक इतिहास के सबसे गंभीर महंगाई संकटों में गिना जाता है।
लेकिन आम आदमी की रसोई पर सबसे ज्यादा असर 1998 के प्याज संकट और 2009-13 की लगातार ऊंची महंगाई ने डाला। वहीं कोरोना काल ने दिखा दिया कि वैश्विक संकट का असर सीधे हर भारतीय की जेब तक पहुंचता है।
What's Your Reaction?






