परिसीमन और FCRA पर विजय सरकार का बड़ा वार, तमिलनाडु विधानसभा में मोदी सरकार के खिलाफ दो प्रस्ताव; DMK ने भी दिया साथ
TVK की ओर से मंत्री आधव अर्जुन ने विधानसभा में DMK को धन्यवाद देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए पार्टी आभार की पात्र है। DMK का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि पार्टी केंद्र के परिसीमन संबंधी प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है। विधानसभा में सामने आए इस रुख ने तमिलनाडु की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने महज दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार की दो अहम पहलों—परिसीमन और FCRA संशोधन विधेयक—के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराए। खास बात यह रही कि इन दोनों प्रस्तावों को मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी DMK ने भी समर्थन दिया। इस तरह तमिलनाडु इन दोनों मुद्दों पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य बन गया है।
परिसीमन पर विधानसभा में दो घंटे चली तीखी बहस
12 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र से अपील की गई कि लोकसभा में कुल सीटों की संख्या 543 पर ही कायम रखी जाए और जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले राज्यों को परिसीमन का नुकसान न उठाना पड़े।
प्रस्ताव पर विधानसभा में करीब दो घंटे तक जोरदार बहस हुई, जिसके बाद इसे सदन की मंजूरी मिल गई। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन के कारण महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण में और देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण को गंभीरता से लागू किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं मिलना चाहिए।
DMK ने बदला रुख, विजय सरकार के प्रस्ताव का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ DMK का समर्थन रहा। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट रुख है कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का स्वागत करते हुए कहा कि परिसीमन के प्रभाव को लेकर देश को सबसे पहले सचेत करने वाले आंदोलनों में DMK प्रमुख रहा है।
TVK की ओर से मंत्री आधव अर्जुन ने विधानसभा में DMK को धन्यवाद देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए पार्टी आभार की पात्र है।
DMK का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि पार्टी केंद्र के परिसीमन संबंधी प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है। विधानसभा में सामने आए इस रुख ने तमिलनाडु की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
चिदंबरम ने कहा—543 सीटें नहीं बढ़नी चाहिए
कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने भी तमिलनाडु विधानसभा के कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या 543 पर कायम रहनी चाहिए। उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी को कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि इन राज्यों ने दशकों तक परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियां लागू की हैं।
चिदंबरम ने FCRA विधेयक पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने मांग की कि विधेयक को सिर्फ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला है।
FCRA संशोधन के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव
इससे एक दिन पहले मंगलवार को विजय सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराया था। इस प्रस्ताव को भी DMK का समर्थन मिला।
स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि FCRA में प्रस्तावित बदलाव परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं। खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण संस्थानों के कामकाज पर इसके असर को लेकर चिंता जताई गई।
केंद्र सरकार की ओर से मौजूदा मानसून सत्र में FCRA विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी थी, लेकिन विपक्षी दलों और ईसाई संगठनों के विरोध के बीच इसे फिलहाल JPC के पास भेज दिया गया है।
NEET पर भी केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव
विजय सरकार ने NEET के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में केंद्र से NEET समाप्त करने और 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश देने की मांग की गई।
इस प्रस्ताव को भी व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला। DMK के साथ AIADMK, PMK और वाम दलों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया। वहीं बीजेपी विधायक भोजराजन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
तमिलनाडु की राजनीति में नई धुरी?
परिसीमन, FCRA और NEET जैसे राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विधानसभा से लगातार प्रस्ताव पारित कराकर विजय सरकार ने केंद्र के साथ टकराव का स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। वहीं परिसीमन के मुद्दे पर DMK का TVK सरकार के साथ खड़ा होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु विधानसभा के इन प्रस्तावों से दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर एक व्यापक राजनीतिक मोर्चा तैयार होगा? आने वाले दिनों में केंद्र और तमिलनाडु के बीच इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।
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