जनगणना 2027 में पहली बार जाति की गिनती, 40 सवालों से जुटेगा देश का पूरा सामाजिक-आर्थिक डेटा! कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि पहली बार जातिगत विवरण दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी यह पूछेंगे कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है या नहीं और उसकी जाति क्या है। सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नावली में जातियों की कोई तैयार सूची देने के बजाय उत्तरदाता द्वारा बताई गई जानकारी दर्ज किए जाने की संभावना है। जातिगत जनगणना कराने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लिया था। कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल
नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना 2027 अब सिर्फ आबादी की गिनती नहीं होगी, बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय ढांचे की विस्तृत तस्वीर सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान लोगों की गिनती के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवाल अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें पहली बार जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश के अनुसार, लोगों से उनकी वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति की स्थिति, जाति, माता-पिता की जानकारी, मातृभाषा, शिक्षा, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और दिव्यांगता सहित कई अहम जानकारियां ली जाएंगी।
जाति का भी होगा पूरा ब्योरा
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि पहली बार जातिगत विवरण दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी यह पूछेंगे कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है या नहीं और उसकी जाति क्या है। सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नावली में जातियों की कोई तैयार सूची देने के बजाय उत्तरदाता द्वारा बताई गई जानकारी दर्ज किए जाने की संभावना है।
जातिगत जनगणना कराने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लिया था।
कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल
सरकार द्वारा अधिसूचित सवालों में कई ऐसे प्रश्न भी हैं जो पहली नजर में सामान्य जनगणना से अलग दिखाई देते हैं। लोगों से कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस होने की जानकारी भी मांगी जाएगी।
इसके अलावा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवालों में पूछा जाएगा कि व्यक्ति ने पिछले वर्ष काम किया या नहीं, उसका पेशा क्या है, वह किस उद्योग, व्यापार या सेवा से जुड़ा है और उसकी आर्थिक गतिविधि की श्रेणी क्या है।
पलायन और जन्मस्थान का भी रिकॉर्ड
गणनाकर्मी लोगों से उनका जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, पलायन का कारण, वर्तमान गांव या शहर में रहने की अवधि और स्थायी आवासीय पता भी पूछेंगे। इससे देश में आंतरिक पलायन की तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी।
विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या, वर्तमान विवाह से हुए बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जीवित जन्मे बच्चों की जानकारी भी ली जाएगी।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
भारत की यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के रूप में कराई जाएगी। लोगों को घर-घर जाकर जानकारी देने के अलावा सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 17 से 31 अगस्त के बीच लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे।
हिमपात वाले क्षेत्रों—लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित इलाकों—में लोगों की गिनती 1 से 30 सितंबर के बीच होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया अगले वर्ष होगी।
2021 की जनगणना कोरोना के कारण टली थी
देश में हर दस वर्ष में होने वाली जनगणना वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
जनगणना का पहला चरण 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना का काम शामिल है।
जाति, शिक्षा, रोजगार, पलायन, डिजिटल साक्षरता और पहचान से जुड़े सवालों के साथ जनगणना 2027 देश की बदलती सामाजिक और आर्थिक तस्वीर का एक बेहद व्यापक डेटाबेस तैयार करने जा रही है।
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