जिसे बनाया स्टार, वही बनी चुनौती! ममता की करीबी नेता ने बदले सुर टीएमसी में 'ऑपरेशन बगावत'! एक हार ने टीएमसी को कर दिया टुकड़े-टुकड़े?
वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया है। बागी खेमे के समर्थन से Ritabrata Banerjee को विपक्ष का नेता बनाए जाने का दावा किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता मिलने की खबरों ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
ममता बनर्जी ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को अपने ही अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। लेकिन आज बंगाल की राजनीति में जो कुछ हो रहा है, वह टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों में पार्टी के भीतर बगावत की ऐसी लहर उठी है कि बड़े नेताओं के इस्तीफे और खुले विरोध अब सामान्य घटनाएं लगने लगी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद Sayani Ghosh का नाम भी उन सांसदों में लिया जा रहा है जो पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सांसद Kakoli Ghosh Dastidar के नेतृत्व में करीब 20 सांसदों का एक समूह लोकसभा में अलग पहचान बनाने और एनडीए को समर्थन देने पर विचार कर रहा है। इस दावे को लेकर टीएमसी और बागी नेताओं के बीच खुली राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई है।
वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया है। बागी खेमे के समर्थन से Ritabrata Banerjee को विपक्ष का नेता बनाए जाने का दावा किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता मिलने की खबरों ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या यह केवल असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी है या फिर टीएमसी वास्तव में अपने सबसे बड़े राजनीतिक विभाजन की ओर बढ़ रही है? अगर सांसदों और विधायकों का यह असंतोष और बढ़ता है, तो बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को निकाल पाती हैं या फिर टीएमसी का यह आंतरिक विद्रोह बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
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