दिल्ली में NEETपेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार पर सीजेपी ने कहा कि "इतना अंहकार ठीक नही"

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने अदालत के रुख पर सवाल उठाए। इसी बीच सोशल मीडिया पर सौरव दास की एक पोस्ट भी तेजी से वायरल हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी की आलोचना की। यह पोस्ट व्यापक रूप से साझा की जा रही है, हालांकि यह एक व्यक्तिगत राय है।

Jul 22, 2026 - 17:31
दिल्ली में NEETपेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार पर सीजेपी ने कहा कि "इतना अंहकार ठीक नही"

दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है। अदालत की टिप्पणी—"हमें वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है... अपना और हमारा समय बर्बाद मत कीजिए"—ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब नागरिक कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो को सबूत के रूप में पेश करना चाहते हैं, तो क्या अदालत को कम से कम उन्हें देखने पर विचार नहीं करना चाहिए था।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने गुरुवार को मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। वकील ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित बल प्रयोग हुआ और उसके वीडियो उपलब्ध हैं। हालांकि, अदालत ने वीडियो देखने से इनकार करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने अदालत के रुख पर सवाल उठाए। इसी बीच सोशल मीडिया पर सौरव दास की एक पोस्ट भी तेजी से वायरल हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी की आलोचना की। यह पोस्ट व्यापक रूप से साझा की जा रही है, हालांकि यह एक व्यक्तिगत राय है।

यह मामला 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित 'संसद चलो' मार्च से जुड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र और युवा कार्यकर्ता दिल्ली में जुटे थे। उनकी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार किए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि संवेदनशील मामलों में तत्काल सुनवाई और प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्यों के प्रति न्यायालय का दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए। वहीं, अदालत ने फिलहाल केवल तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया है; इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि याचिका के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय दे दिया गया है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow