AI से लिखी याचिका, कोर्ट में खुल गई पोल: सुप्रीम कोर्ट ने पूछे शब्दों के मतलब, याचिकाकर्ता चुप”
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधे लुधियाना से चलकर आ गए।” अदालत ने आगे कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपनी दलीलों की भाषा समझते हैं, तो वे कुछ सवालों के जवाब दें। प्रधान न्यायाधीश ने यहां तक कहा कि यदि वह अंग्रेजी के सवालों में 30 प्रतिशत अंक भी ले आएं, तो अदालत मान लेगी कि याचिका उन्होंने खुद तैयार की है।
Supreme Court of India में पीएम केयर्स फंड से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिलचस्प स्थिति सामने आई, जब अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों और उनकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए।
यह मामला न्यायमूर्ति Surya Kant, न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति R. Mahadevan की पीठ के सामने आया। सुनवाई के दौरान पीठ को उस समय संदेह हुआ जब लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी रजनीश सिद्धू अपनी याचिका पर बहस करने के लिए खड़े हुए।
सिद्धू ने जैसे ही अपनी लिखित दलीलें पढ़नी शुरू कीं, अदालत ने उनकी शैक्षणिक योग्यता और पृष्ठभूमि के बारे में सवाल पूछना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और इससे पहले उन्होंने कभी कोई याचिका दाखिल नहीं की थी।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधे लुधियाना से चलकर आ गए।” अदालत ने आगे कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपनी दलीलों की भाषा समझते हैं, तो वे कुछ सवालों के जवाब दें। प्रधान न्यायाधीश ने यहां तक कहा कि यदि वह अंग्रेजी के सवालों में 30 प्रतिशत अंक भी ले आएं, तो अदालत मान लेगी कि याचिका उन्होंने खुद तैयार की है।
इसके बाद अदालत ने याचिका में इस्तेमाल किए गए कुछ कानूनी शब्दों के अर्थ पूछे, लेकिन याचिकाकर्ता उनका संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अंततः रजनीश सिद्धू ने यह स्वीकार किया कि याचिका तैयार करने में उन्होंने एआई टूल्स की मदद ली थी।
इस घटनाक्रम के बाद अदालत ने इस बात पर गंभीरता जताई कि जनहित याचिकाओं में तकनीक और एआई का उपयोग किस तरह हो रहा है और क्या याचिकाकर्ता वास्तव में याचिका की सामग्री को समझते भी हैं या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य में अदालतों में एआई के उपयोग और उसकी विश्वसनीयता पर महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है।
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