जाति जनगणना पर कांग्रेस का बड़ा सवाल: OBC कॉलम क्यों नहीं?
कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा योजना में बदलाव कर OBC को SC और ST की तरह स्पष्ट श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। पार्टी का तर्क है कि यदि जाति का नाम लोगों से खुले तौर पर लिखवाया गया तो अलग-अलग उपनाम और स्थानीय पहचान दर्ज होने से आंकड़ों में भारी बिखराव पैदा हो सकता है और वास्तविक जातीय तस्वीर सामने लाना मुश्किल होगा।
नई दिल्ली: जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मांग की है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जाति जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए और बिहार व तेलंगाना में अपनाई गई सर्वे की पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए।
जयराम रमेश के मुताबिक, बिहार में 2 अक्टूबर 2023 को और तेलंगाना में फरवरी 2025 में सामने आए जातीय सर्वे के मॉडल से सीख लेते हुए देशव्यापी जाति जनगणना कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार का अभी भी समय है, क्योंकि जनगणना की प्रक्रिया फिलहाल कुछ ही क्षेत्रों में शुरू हुई है।
कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा योजना में बदलाव कर OBC को SC और ST की तरह स्पष्ट श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। पार्टी का तर्क है कि यदि जाति का नाम लोगों से खुले तौर पर लिखवाया गया तो अलग-अलग उपनाम और स्थानीय पहचान दर्ज होने से आंकड़ों में भारी बिखराव पैदा हो सकता है और वास्तविक जातीय तस्वीर सामने लाना मुश्किल होगा।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर अंतिम फैसला किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की राय भी ली जानी चाहिए। कांग्रेस के अनुसार राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यही मांग रखी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार जाति जनगणना की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर OBC के लिए अलग कॉलम और स्पष्ट विकल्प शामिल करेगी? विपक्ष इसे सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीतियों के लिए जरूरी कदम बता रहा है। वहीं, इस संबंध में लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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