विवादों से कंगना का पुराना नाता! ‘वंदे मातरम’ पर फिर गरजीं, शर्मिला टैगोर की राय से जताई खुली असहमति
हालांकि, कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पहले ही तेज है। बीजेपी ने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े कांग्रेस मुख्यालय के एक वीडियो को लेकर कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान का आरोप लगाया है और सार्वजनिक माफी की मांग की है। हर संवेदनशील मुद्दे पर कंगना की एंट्री, फिर क्यों छिड़ती है बहस? कंगना रनौत का नाम विवादित और संवेदनशील मुद्दों पर मुखर बयान देने वाले फिल्मी चेहरों में लगातार सामने आता रहा है। यही वजह है कि उनका कोई भी राजनीतिक या सामाजिक बयान अक्सर चर्चा और तीखी प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन जाता है। ‘वंदे मातरम’ पर उनका ताजा बयान भी इसी सिलसिले की नई कड़ी बन गया है।
नई दिल्ली: ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी सियासी और सामाजिक बहस अब बॉलीवुड तक पहुंच गई है। दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुलकर अपनी असहमति जाहिर की है। कंगना ने शर्मिला टैगोर के अपने विचार रखने के अधिकार का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही उनकी कविता की व्याख्या को मानने से इनकार कर दिया।
कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो साझा करते हुए कहा कि कविता और गीतों को केवल उनके शब्दों के शाब्दिक अर्थ से नहीं समझा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, साहित्य में प्रतीकों और रूपकों के जरिए गहरे भाव व्यक्त किए जाते हैं। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और देश की शक्ति को जगाने वाली रचना के तौर पर देखने की बात कही।
‘वंदे मातरम’ पर कंगना की अलग दलील, फिर सुर्खियों में बयान
कंगना ने शक्ति के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान के नजरिए से देखना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से ‘हिंदू-मुस्लिम मानसिकता’ से ऊपर उठकर इस रचना के व्यापक राष्ट्रीय भाव को समझने की अपील की।
हालांकि, कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पहले ही तेज है। बीजेपी ने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े कांग्रेस मुख्यालय के एक वीडियो को लेकर कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान का आरोप लगाया है और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
हर संवेदनशील मुद्दे पर कंगना की एंट्री, फिर क्यों छिड़ती है बहस?
कंगना रनौत का नाम विवादित और संवेदनशील मुद्दों पर मुखर बयान देने वाले फिल्मी चेहरों में लगातार सामने आता रहा है। यही वजह है कि उनका कोई भी राजनीतिक या सामाजिक बयान अक्सर चर्चा और तीखी प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन जाता है। ‘वंदे मातरम’ पर उनका ताजा बयान भी इसी सिलसिले की नई कड़ी बन गया है।
एक तरफ कंगना अपनी बात को राष्ट्रवाद और साहित्यिक प्रतीकों की व्याख्या के रूप में रख रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आलोचक सवाल उठा सकते हैं कि क्या हर संवेदनशील मुद्दे पर इतनी मुखर राजनीतिक प्रतिक्रिया बहस को और ज्यादा गरम नहीं कर देती?
फिलहाल ‘वंदे मातरम’ पर जारी विवाद में कंगना की एंट्री ने बहस को एक बार फिर बॉलीवुड, राजनीति और राष्ट्रवाद के चौराहे पर ला खड़ा किया है।
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