जलवायु संकट का नया रूप: हीटवेव, आग और सूखा मिलकर बढ़ा रहे प्रजातियों पर खतरा! 2050 तक 74% आवास क्षेत्र हीटवेव से प्रभावित
सबसे बड़ा खतरा उन क्षेत्रों को है जो जैव विविधता से समृद्ध हैं—जैसे अमेजन बेसिन, अफ्रीका और भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया। यानी जहां सबसे ज्यादा प्रजातियां हैं, वहीं सबसे बड़ा संकट भी मंडरा रहा है। 2050 तक 22 पारिस्थितिक क्षेत्र ऐसे होंगे जहां आधे से ज्यादा हिस्से पर दो या उससे अधिक चरम घटनाओं का खतरा होगा यह संख्या 2085 तक बढ़कर 236 क्षेत्रों तक पहुंच सकती है
जलवायु संकट का नया खतरा: सिर्फ तापमान नहीं, बल्कि लगातार आने वाली आपदाएं बनेंगी विनाश का कारण! पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुई एक नई स्टडी ने जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। इस अध्ययन में जलवायु पूर्वानुमानों के साथ प्रजातियों के विस्तृत आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें IUCN रेड लिस्ट जैसे महत्वपूर्ण स्रोत भी शामिल रहे।“जलवायु परिवर्तन के प्रभाव—खासतौर पर चरम मौसम घटनाएं—अब भी संरक्षण योजनाओं में कम आंकी जा रही हैं। यह केवल धीरे-धीरे बढ़ते तापमान की कहानी नहीं है।”
दरअसल, असली खतरा उन लगातार और एक के बाद एक आने वाली चरम घटनाओं से है, जो मिलकर कहीं ज्यादा विनाशकारी असर डालती हैं। रिसर्च बताती है कि जब सूखा, हीटवेव, आग और बाढ़ जैसी घटनाएं क्रमिक रूप से होती हैं, तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।इसका उदाहरण ऑस्ट्रेलिया बुशफायर 2019–2020 में देखने को मिला, जहां आग लगने से पहले पड़े सूखे ने पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर दिया। परिणामस्वरूप, पौधों और जानवरों की प्रजातियों में गिरावट 27% से 40% तक अधिक दर्ज की गई।अध्ययन में 33,936 स्थलीय कशेरुकी प्रजातियों और 794 पारिस्थितिक क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया। निष्कर्ष चिंताजनक हैं—
2050 तक, मध्यम-उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में
74% आवास क्षेत्र हीटवेव की चपेट में होंगे
16% क्षेत्र जंगल की आग
8% क्षेत्र सूखे
3% क्षेत्र बाढ़ के खतरे में आएंगे
सबसे बड़ा खतरा उन क्षेत्रों को है जो जैव विविधता से समृद्ध हैं—जैसे अमेजन बेसिन, अफ्रीका और भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया। यानी जहां सबसे ज्यादा प्रजातियां हैं, वहीं सबसे बड़ा संकट भी मंडरा रहा है।
2050 तक 22 पारिस्थितिक क्षेत्र ऐसे होंगे जहां आधे से ज्यादा हिस्से पर दो या उससे अधिक चरम घटनाओं का खतरा होगा
यह संख्या 2085 तक बढ़कर 236 क्षेत्रों तक पहुंच सकती है
सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि 2085 तक 36% आवास क्षेत्र ऐसे होंगे जहां एक साथ कई प्रकार की चरम जलवायु घटनाएं प्रभाव डालेंगी।
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