2036 तक चीन से आगे निकलेगा भारत! 10.8 करोड़ ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ बदल देंगे दुनिया का बाजार

NIQ और World Data Lab के मुताबिक, जो व्यक्ति रोजाना 90 डॉलर यानी करीब 7,500 रुपये से अधिक खर्च करता है, उसे इस कैटेगरी में रखा जाता है। इसका मतलब यह है कि 2036 तक भारत में अगर 10.8 करोड़ एफ्लुएंट कंज्यूमर होते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में 10.8 करोड़ करोड़पति पैदा हो जाएंगे। इसका मतलब है कि इतने लोगों की दैनिक उपभोग और खर्च करने की क्षमता उस स्तर तक पहुंच जाएगी, जहां वे प्रीमियम और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स एवं सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेंगे।

Aug 24, 2026 - 16:00
2036 तक चीन से आगे निकलेगा भारत! 10.8 करोड़ ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ बदल देंगे दुनिया का बाजार

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो आने वाले दशक में देश के उपभोक्ता बाजार की पूरी तस्वीर बदल सकती है। NielsenIQ (NIQ) और World Data Lab की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2036 तक भारत में ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ की संख्या चीन से अधिक हो सकती है। यह बदलाव सिर्फ उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि वैश्विक कंपनियों, निवेशकों और ब्रांड्स के लिए भारत के बढ़ते बाजार की ताकत का संकेत है।

आखिर कौन होता है ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ का मतलब सीधे तौर पर करोड़पति या बेहद अमीर व्यक्ति नहीं होता। यह संपत्ति या आय नहीं, बल्कि रोजाना खर्च करने की क्षमता पर आधारित कैटेगरी है।

NIQ और World Data Lab के मुताबिक, जो व्यक्ति रोजाना 90 डॉलर यानी करीब 7,500 रुपये से अधिक खर्च करता है, उसे इस कैटेगरी में रखा जाता है।

इसका मतलब यह है कि 2036 तक भारत में अगर 10.8 करोड़ एफ्लुएंट कंज्यूमर होते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में 10.8 करोड़ करोड़पति पैदा हो जाएंगे। इसका मतलब है कि इतने लोगों की दैनिक उपभोग और खर्च करने की क्षमता उस स्तर तक पहुंच जाएगी, जहां वे प्रीमियम और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स एवं सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेंगे।

भारत की अगली बड़ी ताकत—मिडिल क्लास से एफ्लुएंट क्लास तक का सफर

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल आबादी और तेजी से बदलता उपभोक्ता वर्ग है। आय बढ़ने, शहरीकरण, रोजगार के नए अवसरों, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवनशैली में बदलाव के साथ बड़ी संख्या में भारतीय परिवार धीरे-धीरे उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ता वर्ग में प्रवेश कर रहे हैं।

रिपोर्ट में ‘कोर कंज्यूमर’ भी एक महत्वपूर्ण श्रेणी है। इसमें वे लोग आते हैं जो रोजाना 13 से 90 डॉलर के बीच खर्च करते हैं। 2026 में भारत में ऐसे करीब 64.9 करोड़ कोर कंज्यूमर बताए गए हैं।

यही विशाल उपभोक्ता आधार आने वाले वर्षों में भारत के एफ्लुएंट कंज्यूमर वर्ग के विस्तार की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

चीन के मुकाबले भारत क्यों बढ़ रहा है?

भारत और चीन दोनों दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में हैं, लेकिन दोनों की जनसांख्यिकीय और आर्थिक दिशा अलग-अलग हो रही है।

भारत में अपेक्षाकृत युवा आबादी, बढ़ता शहरीकरण, बढ़ती आय और तेजी से विस्तार करता उपभोक्ता बाजार कंपनियों के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रहा है। दूसरी ओर, चीन में जनसंख्या संबंधी चुनौतियां और बदलती आर्थिक परिस्थितियां उसके उपभोक्ता बाजार की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं।

यही अंतर आने वाले वर्षों में भारत को एफ्लुएंट कंज्यूमर के मामले में चीन से आगे ले जा सकता है।

इसका सबसे बड़ा फायदा किन सेक्टर्स को होगा?

अगर भारत में उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, तो इसका सीधा असर कई उद्योगों पर दिखाई देगा।

प्रीमियम कारों से लेकर स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, ज्वेलरी, ट्रैवल, होटल, रेस्टोरेंट, हेल्थकेयर, एजुकेशन, रियल एस्टेट और डिजिटल सेवाओं तक—कंपनियों के लिए भारतीय ग्राहक पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

खासकर प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड्स के लिए भारत आने वाले दशक में दुनिया के सबसे आकर्षक बाजारों में शामिल हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्यों बड़ा संकेत है?

किसी भी कंपनी के लिए सिर्फ आबादी मायने नहीं रखती, बल्कि यह मायने रखता है कि उस आबादी के पास खर्च करने के लिए कितना पैसा और कितनी क्षमता है।

अगर भारत में 2036 तक करोड़ों लोग उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ता वर्ग में पहुंचते हैं, तो कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीति में भारत को और ज्यादा प्राथमिकता दे सकती हैं।

इसका मतलब भारत में नए स्टोर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, होटल, रिटेल नेटवर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रीमियम सेवाओं में निवेश बढ़ सकता है।

भारत के लिए असली कहानी सिर्फ संख्या नहीं है

2036 का यह अनुमान भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश के बदलते आर्थिक चरित्र की तस्वीर पेश करता है।

भारत अब सिर्फ कम लागत वाला बड़ा बाजार नहीं रहना चाहता। तेजी से बढ़ता उपभोक्ता वर्ग उसे एक ऐसे बाजार में बदल सकता है जहां ग्राहक बेहतर क्वालिटी, ब्रांड, सुविधा और प्रीमियम अनुभव के लिए अधिक खर्च करने को तैयार होंगे।

यानी आने वाले वर्षों में भारत की कहानी सिर्फ ‘कितने लोग हैं’ की नहीं होगी, बल्कि ‘कितने लोग कितना खर्च कर सकते हैं’ की होगी।

और अगर अनुमान सही साबित होता है, तो 2036 वह दौर हो सकता है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक के रूप में चीन को एक अहम पैमाने पर पीछे छोड़ देगा।

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