“तेल भी हमारा, इजाज़त भी हमारी: भारत को रूसी तेल पर अमेरिका की ‘मियाद वाली मंजूरी’”

प्रेस सचिव के मुताबिक, यह रूसी तेल पहले से समुद्र में मौजूद था और इसे स्वीकार करने से रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी रहा है और उसने पहले ही प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक दी थी, इसलिए यह फैसला अस्थायी व्यवस्था के तौर पर लिया गया है।

Mar 11, 2026 - 18:28
“तेल भी हमारा, इजाज़त भी हमारी: भारत को रूसी तेल पर अमेरिका की ‘मियाद वाली मंजूरी’”

भारत-रूस तेल सौदे पर अमेरिका की अस्थायी छूट, व्हाइट हाउस ने दी सफाई
United States ने कहा है कि उसने ऊर्जा आपूर्ति में आई अस्थायी कमी को देखते हुए India को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल स्वीकार करने की अस्थायी अनुमति दी है। यह बयान White House की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने एक संवाददाता सम्मेलन में दिया।
लेविट ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रपति Donald Trump, वित्त मंत्री Scott Bessent और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की सलाह के बाद लिया गया। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में आई अस्थायी कमी को देखते हुए भारत को यह सीमित छूट दी गई है।

प्रेस सचिव के मुताबिक, यह रूसी तेल पहले से समुद्र में मौजूद था और इसे स्वीकार करने से रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी रहा है और उसने पहले ही प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक दी थी, इसलिए यह फैसला अस्थायी व्यवस्था के तौर पर लिया गया है।

दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया था। अमेरिकी प्रशासन का आरोप था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से Russia को Russian invasion of Ukraine के दौरान आर्थिक मदद मिल रही है।

हालांकि, पिछले महीने अमेरिका और भारत ने व्यापार को लेकर एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की थी। इसके बाद ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने का आदेश जारी किया।

ट्रंप ने कहा था कि भारत ने मॉस्को से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। अब 30 दिन की यह छूट वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए उठाया गया एक अस्थायी कदम माना जा रहा है।

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