“दिल्ली आबकारी केस में नया मोड़: केजरीवाल-सिसोदिया ने हाईकोर्ट से कहा—बदलें जज, नहीं दिख रही निष्पक्षता”

दरअसल, पिछले सप्ताह दिल्ली की Rouse Avenue Court ने कथित दिल्ली शराब नीति भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 21 अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में असफल रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसी मुख्य रूप से सरकारी गवाहों के बयानों पर निर्भर दिख रही है और अदालत से “डॉट्स को जोड़ने” की अपेक्षा कर रही है, जबकि ठोस सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

Mar 11, 2026 - 18:04
“दिल्ली आबकारी केस में नया मोड़: केजरीवाल-सिसोदिया ने हाईकोर्ट से कहा—बदलें जज, नहीं दिख रही निष्पक्षता”

दिल्ली की कथित आबकारी नीति से जुड़े मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और इस मामले के अन्य आरोपियों ने Delhi High Court के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई किसी दूसरी बेंच को सौंपने की मांग की है।

आरोपियों ने अपने पत्र में कहा है कि इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस Swarna Kanta Sharma के रुख में सुनवाई के दौरान पक्षपात दिखाई देता है। उनका कहना है कि आबकारी नीति से जुड़े मामलों में जस्टिस शर्मा द्वारा पहले पारित किए गए कई आदेशों को बाद में Supreme Court of India ने पलट दिया था। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए केस को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर किया जाना चाहिए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच को सौंपी जाती है तो इससे न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

दरअसल, पिछले सप्ताह दिल्ली की Rouse Avenue Court ने कथित दिल्ली शराब नीति भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 21 अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में असफल रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसी मुख्य रूप से सरकारी गवाहों के बयानों पर निर्भर दिख रही है और अदालत से “डॉट्स को जोड़ने” की अपेक्षा कर रही है, जबकि ठोस सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के बाद जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने सभी 23 आरोपियों को बरी किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई और उसके अधिकारियों के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर फिलहाल रोक लगा दी है।

अब इस मामले में बेंच बदलने की मांग के बाद कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।

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