क्राइम होगा, अपराध नहीं! बिहार में कानून की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी?
मुख्यमंत्री के इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखा तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बिहार में 'Crime' हो सकता है, लेकिन 'अपराध' नहीं! उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चयन प्रक्रिया और बिहार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी ने अपने बयान में सम्राट चौधरी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ऐसे आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली लुकआउट | राजनीतिक व्यंग्य
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। बयान सुनकर ऐसा लगता है मानो बिहार में अपराध नियंत्रण की समस्या का समाधान कानून-व्यवस्था सुधारने से नहीं, बल्कि शब्दों का अर्थ बदलने से निकाल लिया गया हो!
एक सरकारी मंच से मुख्यमंत्री महोदय ने फरमाया—
"हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं। कोई अपराधी नहीं है।"
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री जी बिहार की कानून-व्यवस्था की बात कर रहे थे या हिंदी और अंग्रेजी के बीच कोई नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर रहे थे?
अगर Crime हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं, तो क्या अब अपराधियों को भी अपनी भाषा चुनने की आजादी मिलेगी? पुलिस एफआईआर हिंदी में लिखेगी या अंग्रेजी में? और अदालत में भी क्या अपराध की परिभाषा भाषा देखकर तय होगी?
बयान की गंभीरता से ज्यादा उसकी व्याख्या पर बहस हो रही है।
दरअसल, यह बयान उस समय आया जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में बिहार में नदी जल प्रबंधन को लेकर समझौते की चर्चा हो रही थी। मुख्यमंत्री ने बिहार की दो बड़ी चुनौतियां बताईं—आबादी और पानी। उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाली सात बड़ी नदियों के पानी का सही प्रबंधन हो जाए तो बिहार की तस्वीर बदल सकती है।
बिहार को पानी की समस्या से मुक्ति दिलाना निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी है कि जिस राज्य को विकास, रोजगार, उद्योग और बेहतर कानून-व्यवस्था की जरूरत है, वहां अपराध पर ऐसी टिप्पणी आखिर किस सोच को दर्शाती है?
तेजस्वी यादव ने भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री के इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखा तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बिहार में 'Crime' हो सकता है, लेकिन 'अपराध' नहीं! उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चयन प्रक्रिया और बिहार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए।
तेजस्वी ने अपने बयान में सम्राट चौधरी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ऐसे आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब असली सवाल मुख्यमंत्री जी से है—
बिहार को ऐसी शब्दों की बाजीगरी चाहिए या अपराधियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई, जिसका असर जमीन पर दिखाई दे?
क्योंकि जनता को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि अपराध को Crime कहा जाए या अपराध। उसे फर्क पड़ता है कि सड़क पर निकलते समय वह सुरक्षित है या नहीं।
कानून की भाषा बदलने से कानून-व्यवस्था नहीं बदलती, मुख्यमंत्री जी!
What's Your Reaction?






