“सोशल मीडिया पर अदालत के खिलाफ टिप्पणी? सींगों से पकड़ेंगे – CJI की सख्त चेतावनी”

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि इस चैप्टर को दोबारा लिखा जाता है तो इसे तब तक प्रकाशित न किया जाए, जब तक विषय विशेषज्ञों की समिति इसकी समीक्षा कर मंजूरी न दे दे। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री में न्यायपालिका जैसे संवेदनशील विषयों को बेहद जिम्मेदारी और संतुलन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

Mar 11, 2026 - 18:40
“सोशल मीडिया पर अदालत के खिलाफ टिप्पणी? सींगों से पकड़ेंगे – CJI की सख्त चेतावनी”

NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, न्यायपालिका पर टिप्पणी करने वालों को चेतावनी
Supreme Court of India ने NCERT की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस Surya Kant ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से न्यायपालिका के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन्हें अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे लोगों को “सींगों से पकड़ेंगे” और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने Government of India को निर्देश दिया कि वह ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्यक्तियों की पहचान करे, जिन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ऐसे लोग देश के बाहर बैठे होंगे, तब भी उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अदालत के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को विदेश से भी खींचकर लाया जा सकता है, क्योंकि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने National Council of Educational Research and Training (NCERT) के रुख पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि वह एनसीईआरटी के निदेशक के रुख से भी उतना ही परेशान है और यह निराशाजनक है कि इस मामले से जुड़ी कमेटी में एक भी प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल नहीं है।

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि इस चैप्टर को दोबारा लिखा जाता है तो इसे तब तक प्रकाशित न किया जाए, जब तक विषय विशेषज्ञों की समिति इसकी समीक्षा कर मंजूरी न दे दे। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सामग्री में न्यायपालिका जैसे संवेदनशील विषयों को बेहद जिम्मेदारी और संतुलन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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