बड़ी खबर: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर; चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। चढ़ावा विवाद पर ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाया, जबकि अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला अभी बाकी है।

Jul 6, 2026 - 17:53
बड़ी खबर: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर; चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख

अयोध्या | श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। वहीं ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

यह बैठक सोमवार दोपहर 3:30 बजे महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की शुरुआत में क्या हुआ?

बैठक की शुरुआत ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने एजेंडा प्रस्तुत करते हुए की। उन्होंने चढ़ावा विवाद पर चर्चा के साथ-साथ चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर विचार करने का प्रस्ताव रखा।

सूत्रों के अनुसार, चर्चा निष्पक्ष रखने के लिए सुझाव दिया गया कि दोनों संबंधित सदस्य प्रारंभिक विचार-विमर्श के दौरान बैठक से अलग रहें। बाद में उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही गई। बताया जा रहा है कि दोनों बैठक में शामिल नहीं हुए।

महंत नृत्य गोपाल दास ने जताया दुख

सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान महंत नृत्य गोपाल दास ने पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

बैठक में इस पूरे घटनाक्रम को "पाप" की संज्ञा देते हुए ट्रस्ट सदस्यों ने इसकी गंभीरता पर चिंता जताई।

अनिल मिश्रा पर फैसला अभी बाकी

जहां चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, वहीं अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर ट्रस्ट की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इस पर आगे की बैठक या विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जा सकता है।

मुख्य बिंदु
चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट ने मंजूर किया।
अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला फिलहाल लंबित।
चढ़ावा विवाद पर ट्रस्ट ने अपनाया सख्त रुख।
महंत नृत्य गोपाल दास ने घटना को अत्यंत दुखद बताया।
दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर।

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