नेपाल में कुदरत का कहर: बाढ़ ने मचाई तबाही, हजारों घर तबाह; 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक लापता

भारत के 11 और चीन के 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में लगे हैं। भारत की टीम मेलुंग (चिलिमे) और स्याफ्रुबेसी में, जबकि चीन की टीम अपर त्रिशूली-3ए में सुरंग बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीम भी राहत अभियान में शामिल है।

Aug 31, 2026 - 17:40
नेपाल में कुदरत का कहर: बाढ़ ने मचाई तबाही, हजारों घर तबाह; 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक लापता

काठमांडू: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हजारों लोगों के बेघर होने के बीच राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल को इस मुश्किल घड़ी में भारत, चीन समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद मिल रही है।

39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 323 से अधिक विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं।

लापता लोगों की तलाश और उनके परिजनों से समन्वय के लिए विदेश मंत्रालय ने एक विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया है। राजनयिक मिशनों के जरिए विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी लगातार अपडेट की जा रही है।

भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें संभाल रही हैं मोर्चा

नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।

भारत के 11 और चीन के 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में लगे हैं। भारत की टीम मेलुंग (चिलिमे) और स्याफ्रुबेसी में, जबकि चीन की टीम अपर त्रिशूली-3ए में सुरंग बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीम भी राहत अभियान में शामिल है।

इसके अलावा भारत से 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम डीएनए विश्लेषण के लिए 29 अगस्त से नेपाल में मौजूद है।

कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल की इस भयावह त्रासदी के बीच भारत, चीन, जापान, अमेरिका, UAE, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने राहत एवं बचाव सामग्री उपलब्ध कराई है।

राहत सामग्री में ब्रिज यूनिट, जनरेटर, सोलर लैंप, डीएनए टेस्टिंग किट, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाद्य सामग्री और दवाइयां शामिल हैं।

इसके अलावा म्यांमार, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया और सिंगापुर समेत कई अन्य देशों से भी सहायता पहुंचाई जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र (UN), WHO, WFP और UNICEF जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं।

तबाही के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती पुनर्निर्माण

बाढ़ ने सिर्फ जनजीवन को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं।

नेपाल सरकार फिलहाल नुकसान और जरूरतों का प्रारंभिक आकलन कर रही है। इसके बाद Post-Disaster Needs Assessment (PDNA) के जरिए वास्तविक नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

सरकार को आशंका है कि बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से व्यापक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल सुरक्षित

आपदा के बीच मृतकों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण जिन शवों की तत्काल पहचान संभव नहीं हो पा रही है, उनके DNA सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं।

जरूरत पड़ने पर भविष्य में इन नमूनों का परिवारों के DNA रिकॉर्ड से मिलान कर मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

प्रधानमंत्री खुद संभाल रहे राहत अभियान की निगरानी

नेपाल के प्रधानमंत्री राहत, बचाव और समन्वय अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं। सरकार विभिन्न एजेंसियों, पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने में जुटी है।

नेपाल इस समय एक बड़ी मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देशों का सहयोग राहत और पुनर्निर्माण की उम्मीद को मजबूत कर रहा है।

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