महंगाई की चिंता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% MoSPI के ताजा आंकड़ों ने चौंकाया; अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक GDP 7.8% बढ़ी, नॉमिनल GDP में 10.3% की तेजी
GDP की गणना में किन आंकड़ों का इस्तेमाल? GDP की गणना एक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें औद्योगिक उत्पादन, कीमतों, बैंकिंग सेवाओं और विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया जाता है। MoSPI ने GDP के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में खपत, निवेश और अन्य खर्चों से जुड़े आंकड़े भी जारी किए हैं। ये आंकड़े दो आधारों पर उपलब्ध कराए गए हैं—2022-23 की स्थिर कीमतों और मौजूदा कीमतों पर। क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई को लेकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़ों ने तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से सोमवार, 31 अगस्त को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में बनी चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास गति को बरकरार रखा है। इसी अवधि में नॉमिनल GDP में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
महंगाई के बीच मजबूत आर्थिक प्रदर्शन
हाल के दिनों में महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंकाएं जताई जा रही थीं। ऐसे समय में पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि को अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
GDP के आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि देश में उत्पादन, खपत, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की स्थिति किस दिशा में जा रही है।
2022-23 अब GDP का नया बेस ईयर
इस बार GDP के आंकड़ों की गणना वित्त वर्ष 2022-23 को नए बेस ईयर के रूप में लेकर की गई है। सरकार ने 27 फरवरी 2026 को GDP की वार्षिक और तिमाही गणना के लिए नई सीरीज जारी की थी।
इसके बाद 5 जून 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के GDP के शुरुआती यानी प्रोविजनल आंकड़े जारी किए गए थे। नई सीरीज के तहत अब अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर को अधिक व्यापक और अपडेटेड डेटा के आधार पर पेश किया जा रहा है।
पुराने GDP आंकड़ों में भी संशोधन
MoSPI ने केवल पहली तिमाही के आंकड़े ही जारी नहीं किए हैं, बल्कि पिछले वर्षों के आंकड़ों को भी अपडेट किया है। मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के वार्षिक GDP आंकड़ों को संशोधित किया है।
इसके लिए नए उपलब्ध डेटा के साथ विभिन्न सरकारी विभागों और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
इसके अलावा वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही से लेकर 2025-26 की चौथी तिमाही तक के तिमाही GDP आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के प्रोविजनल GDP आंकड़ों में भी नए डेटा को शामिल किया गया है।
GDP की गणना में किन आंकड़ों का इस्तेमाल?
GDP की गणना एक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें औद्योगिक उत्पादन, कीमतों, बैंकिंग सेवाओं और विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया जाता है।
MoSPI ने GDP के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में खपत, निवेश और अन्य खर्चों से जुड़े आंकड़े भी जारी किए हैं। ये आंकड़े दो आधारों पर उपलब्ध कराए गए हैं—2022-23 की स्थिर कीमतों और मौजूदा कीमतों पर।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती, आर्थिक गतिविधियों और विकास की गति को लेकर सकारात्मक संकेत देते हैं।
हालांकि, आने वाली तिमाहियों में महंगाई, वैश्विक बाजार की स्थिति, निवेश और घरेलू मांग जैसे कारक भारत की आर्थिक वृद्धि की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल पहली तिमाही के आंकड़ों ने एक बात साफ कर दी है—महंगाई की चिंता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत रफ्तार के साथ की है।
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