यूपी चुनाव 2027: छह महीने पहले ही सियासी संग्राम तेज, BJP–SP–BSP ने कसी कमर
वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी 2027 की तैयारियों को लेकर अपने संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में जिला और महानगर अध्यक्षों की बैठक हुई। मतदाता सूची की समीक्षा, नए मतदाताओं को जोड़ने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने को लेकर पार्टी ने विस्तृत रणनीति पर चर्चा की। अखिलेश यादव के निर्देशन में हुई इस बैठक में विधानसभा क्षेत्रों से कंप्यूटर की जानकारी रखने वाले और फॉर्म-6 से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया। साफ है कि सपा चुनाव से पहले अपने वोटर नेटवर्क को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में अभी करीब छह महीने का वक्त बाकी है, लेकिन बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। सोमवार को राजधानी लखनऊ में तीनों प्रमुख दलों की अलग-अलग अहम बैठकें हुईं, जिनमें बूथ मैनेजमेंट से लेकर मतदाता सूची और चुनावी रणनीति तक पर मंथन किया गया।
बीजेपी ने बनाई बूथ से लेकर जनता तक पहुंचने की रणनीति
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बीजेपी की प्रदेश स्तरीय ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यशाला आयोजित हुई। करीब 700 पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी और दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हुए।
बैठक में आगामी राजनीतिक अभियानों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को घर-घर तक पहुंचाने पर बीजेपी का खास फोकस रहा।
सपा का फोकस वोटर लिस्ट और बूथ नेटवर्क पर
वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी 2027 की तैयारियों को लेकर अपने संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में जिला और महानगर अध्यक्षों की बैठक हुई। मतदाता सूची की समीक्षा, नए मतदाताओं को जोड़ने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने को लेकर पार्टी ने विस्तृत रणनीति पर चर्चा की।
अखिलेश यादव के निर्देशन में हुई इस बैठक में विधानसभा क्षेत्रों से कंप्यूटर की जानकारी रखने वाले और फॉर्म-6 से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया। साफ है कि सपा चुनाव से पहले अपने वोटर नेटवर्क को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
BSP ने 75 जिलाध्यक्षों को दिया चुनावी टास्क
बहुजन समाज पार्टी ने भी लखनऊ में प्रदेश के सभी 75 जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। संगठन विस्तार, आर्थिक स्थिति मजबूत करने, जनाधार बढ़ाने और बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने पर चर्चा हुई।
बैठक में संभावित प्रत्याशियों और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक को लेकर भी मंथन हुआ। मायावती ने योगी सरकार और अखिलेश यादव पर महिलाओं को लेकर की जा रही कैश योजनाओं की घोषणाओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के समय ‘रेवड़ियां’ बांटकर महिलाओं को लुभाने की कोशिश की जाती है और बाद में जनता को धोखा मिलता है।
छह महीने पहले ही शुरू हुआ ‘मिशन 2027’
तीनों दलों की सोमवार की बैठकों से एक बात साफ है—यूपी की सियासी जंग अब सिर्फ चुनाव की तारीख घोषित होने का इंतजार नहीं कर रही। बीजेपी जहां सरकार के काम और संगठन की ताकत के सहारे मैदान तैयार कर रही है, वहीं सपा वोटर लिस्ट और बूथ नेटवर्क को धार देने में जुटी है। दूसरी ओर बसपा अपने संगठन और खोए जनाधार को मजबूत करने की कोशिश में है।
2027 का चुनाव अभी दूर जरूर है, लेकिन यूपी में उसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आने वाले महीनों में संगठन, वोटर और बूथ—इन तीनों मोर्चों पर होने वाली तैयारियां ही तय करेंगी कि चुनावी मुकाबले में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत जमीन तैयार कर पाती है।
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