ईरान-अमेरिका जंग का असर पडेगा बुरी तरह दुनिया पर! असर अभी से दिखने लगा!
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश में पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी की किल्लत के कारण बुरा असर पड़ा है। बांग्लादेश में कई विश्वविद्यालय बंद कर दिये गये हैं, जबकि पाकिस्तान में शहबाज़ शरीफ की सरकार ने तेल संकट के कारण स्कूल बंद कर दिये हैं, सभी सरकारी वाहनों में तेल की खपत 50 प्रतिशत घटाने का आदेश दिया है। सभी दफ्तरों में हफ्ते में 4 दिन काम कराने का निर्देश दिया गया है। भारत में अभी ऐसे हालात नहीं है। देश के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है, और सरकार का कहना है कि अभी पेट्रोल डीज़ल के दाम बढाने का कोई इरादा नहीं है। केवल एलपीजी के दाम बढाये गये हैं। सवाल ये है कि अगर अन्तरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढेंगी, तो हम कब तक इसके असर से बच पाएंगे? ये जंग अगर लंबी खिंची तो क्या होगा?
ईरान-अमेरिका जंग का असर पूरी दुनिया में दिखने लगा है। अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत सोमवार को 114 डॉलर तक पहुंची लेकिन मंगलवार को यह घटकर 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। एलएनजी गैस के दाम एक हफ्ते में करीब दुगुने हो गए हैं। भारत के कई शहरों जैसे बेंगलुरु और मुंबई में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई की रुकावट के कारण होटलों पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि सरकार का कहना है कि एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सभी रिफायनरी कंपनियों से कहा गया है।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश में पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी की किल्लत के कारण बुरा असर पड़ा है। बांग्लादेश में कई विश्वविद्यालय बंद कर दिये गये हैं, जबकि पाकिस्तान में शहबाज़ शरीफ की सरकार ने तेल संकट के कारण स्कूल बंद कर दिये हैं, सभी सरकारी वाहनों में तेल की खपत 50 प्रतिशत घटाने का आदेश दिया है। सभी दफ्तरों में हफ्ते में 4 दिन काम कराने का निर्देश दिया गया है।
भारत में अभी ऐसे हालात नहीं है। देश के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है, और सरकार का कहना है कि अभी पेट्रोल डीज़ल के दाम बढाने का कोई इरादा नहीं है। केवल एलपीजी के दाम बढाये गये हैं। सवाल ये है कि अगर अन्तरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढेंगी, तो हम कब तक इसके असर से बच पाएंगे? ये जंग अगर लंबी खिंची तो क्या होगा?
सोमवार को आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई को औपचारिक रूप से ईरान का सुप्रीम लीडर चुने जाने का ऐलान किया गया। तेहरान में हज़ारों लोगों ने मुज्तबा खामेनेई के नाम के ऐलान का स्वागत किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने मुज्तबा खामेनेई को बधाई दी लेकिन अमेरिका ने दावा किया कि मुज्तबा भी ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रह पाएंगे।
मुज्तबा के सुप्रीम लीडर चुने जाने के तुरंत बाद ईरान ने इजराइल, सऊदी अरब, क़तर, ओमान, कुवैत, बहरीन और अमीरात पर हमले तेज़ कर दिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन साथ में ये भी कहा कि वो युद्ध के जल्द खत्म होने का ऐलान नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा कि हम काफी हद तक जीत चुके हैं, लेकिन अभी ये जीत पर्याप्त नहीं है। इधर, ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर अमेरिका और इज़राइल के हमले जारी रहे तो वह होरमूज़ स्ट्रेट से एक लीटर तेल जाने नहीं देगा।
57 साल के मुज्तबा आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के छह बच्चों में दूसरे बेटे हैं। 28 फ़रवरी को हुए इज़राइल के हमले में मुज्तबा के बड़े भाई और उनकी बीवी की मौत हुई थी। अली खामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा खुद सामने नहीं आए हैं। इससे पहले भी उन्होंने अब तक न तो कोई तक़रीर की है, न ही कोई इंटरव्यू दिया, इसलिए ईरान के बाहर कम ही लोग उनको जानते हैं। लेकिन ये सच है कि पिछले कई सालों से आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की सत्ता की असल ताक़त मुज्तबा के ही हाथ में थी।
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