“होर्मुज बंद, दुनिया बेहाल: तेल 200 डॉलर पार जाने की चेतावनी, भारत में महंगाई विस्फोट तय!”
अगर जून 2026 तक होर्मुज खुल जाता है, तो बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है और ब्रेंट क्रूड फिर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है। यदि सितंबर 2026 तक संकट जारी रहा, तो दुनिया मंदी की ओर बढ़ सकती है। सबसे खराब स्थिति में यदि 2026 के अंत तक होर्मुज बंद रहा, तो तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है और वैश्विक GDP में भारी गिरावट आ सकती है।
अमेरिका-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उथल-पुथल मची हुई है और इसका सबसे बड़ा असर तेल और गैस की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते के बाधित होने से दुनिया के सामने इस सदी का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।
ग्लोबल एनर्जी रिसर्च फर्म Wood Mackenzie ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक तेल और भारी मात्रा में LNG सप्लाई प्रभावित हो चुकी है।
रिपोर्ट में तीन संभावित स्थितियां बताई गई हैं:
अगर जून 2026 तक होर्मुज खुल जाता है, तो बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है और ब्रेंट क्रूड फिर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है।
यदि सितंबर 2026 तक संकट जारी रहा, तो दुनिया मंदी की ओर बढ़ सकती है।
सबसे खराब स्थिति में यदि 2026 के अंत तक होर्मुज बंद रहा, तो तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है और वैश्विक GDP में भारी गिरावट आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा। LPG, LNG, जेट फ्यूल और डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है। कुछ रिपोर्टों में डीजल और जेट फ्यूल के दाम 300 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की आशंका जताई गई है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल और 90% गैस आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर:
पेट्रोल-डीजल महंगा करेगी
ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ाएगी
महंगाई को और तेज करेगी
व्यापार घाटा बढ़ाएगी
GDP ग्रोथ पर दबाव डालेगी
विशेषज्ञों के अनुसार अगर संकट लंबा चला तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है और होर्मुज दोबारा खुल जाता है, तो बाजार तेजी से स्थिर हो सकता है। लेकिन फिलहाल वैश्विक बाजार में डर और अनिश्चितता बनी हुई है।
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