PM CARES Fund: दो साल बाद ऑडिट रिपोर्ट जारी, 8,452 करोड़ रुपये पर उठे बड़े सवाल
PM CARES Fund की पूरी वित्तीय जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने में दो साल की देरी क्यों हुई? 8,452.06 करोड़ रुपये में से अब तक कितनी राशि और किन मदों में खर्च की गई? फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी 7,846.6 करोड़ रुपये की रकम से कितना ब्याज अर्जित हुआ? इस फंड में आने वाले प्रत्येक बड़े योगदान और उसके उपयोग की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होनी चाहिए? जब प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री इसके शीर्ष स्तर पर मौजूद हैं, तो इसे RTI और संसदीय सवालों से बाहर रखने का तर्क क्या है? क्या PM CARES Fund को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कोई नया नियम लाएगी?
नई दिल्ली: दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक फंड में फिलहाल 8,452.06 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें 7,846.6 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में और करीब 605.4 करोड़ रुपये सेविंग अकाउंट में रखे गए हैं।
कोरोना महामारी के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए इस फंड को लेकर शुरुआत से ही पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं। अब ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतने बड़े फंड की पूरी जानकारी सार्वजनिक होने में दो साल क्यों लगे?
8,452 करोड़ रुपये की रकम, लेकिन हिसाब-किताब पर सवाल क्यों?
PM CARES Fund की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और केंद्रीय मंत्री इसके ट्रस्टी के तौर पर जुड़े हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस फंड की संरचना में देश के शीर्ष संवैधानिक पदों से जुड़े लोग शामिल हैं, उसकी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर इतनी लंबी चुप्पी क्यों रही?
अगर फंड पूरी तरह जनहित और आपदा राहत के लिए बनाया गया था, तो इसके संचालन, खर्च और निवेश की जानकारी सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों हुई?
सरकारी फंड नहीं, तो फिर जनता के सवालों का जवाब कौन देगा?
सबसे बड़ा विवाद इसी बिंदु पर है। सरकार का रुख रहा है कि PM CARES Fund एक सरकारी फंड नहीं है। इसी आधार पर इसे RTI के दायरे से बाहर माना गया है और संसद में भी इसके लेनदेन से जुड़े सवालों पर सीमित जानकारी उपलब्ध कराई जाती रही है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर प्रधानमंत्री इस फंड के अध्यक्ष हैं, केंद्रीय मंत्री इसके सदस्य हैं और फंड का गठन राष्ट्रीय आपदा जैसी परिस्थिति से निपटने के लिए किया गया था, तो फिर इसे सार्वजनिक जवाबदेही से दूर रखने का आधार क्या है?
क्या केवल यह कह देना पर्याप्त है कि फंड सरकारी नहीं है?
दो साल की देरी पर भी सवाल
ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में हुई देरी भी सवालों के घेरे में है। आखिर रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे सार्वजनिक करने में इतना लंबा समय क्यों लगा?
क्या जनता को अपने ही नाम पर जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये की जानकारी मांगने के लिए दो साल इंतजार करना चाहिए?
PM CARES Fund में देश-विदेश से बड़े पैमाने पर योगदान आया था। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि कितना पैसा आया, कितना खर्च हुआ, कहां खर्च हुआ और अभी कितनी रकम किस रूप में मौजूद है?
अब सरकार से सीधे सवाल
PM CARES Fund की पूरी वित्तीय जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने में दो साल की देरी क्यों हुई?
8,452.06 करोड़ रुपये में से अब तक कितनी राशि और किन मदों में खर्च की गई?
फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी 7,846.6 करोड़ रुपये की रकम से कितना ब्याज अर्जित हुआ?
इस फंड में आने वाले प्रत्येक बड़े योगदान और उसके उपयोग की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होनी चाहिए?
जब प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री इसके शीर्ष स्तर पर मौजूद हैं, तो इसे RTI और संसदीय सवालों से बाहर रखने का तर्क क्या है?
क्या PM CARES Fund को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कोई नया नियम लाएगी?
PM CARES Fund को लेकर बहस सिर्फ 8,452 करोड़ रुपये की रकम की नहीं है। असली सवाल है पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे का।
जब पैसा जनता की मदद के नाम पर जुटाया गया, तो जनता को उसके हर बड़े खर्च और हर बड़े फैसले की जानकारी क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
Delhi Lookout का सीधा सवाल है—PM CARES Fund का पूरा हिसाब जनता के सामने कब आएगा?
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