यूपी कांग्रेस में बड़ा उलटफेर! अजय राय की जगह आराधना मिश्रा मोना को मिल सकती है कमान, 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस का ‘ब्राह्मण दांव’?

आराधना मिश्रा ने 2014 के उपचुनाव में रामपुर खास से जीत दर्ज कर विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की। रामपुर खास को उनके परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। उनके पिता प्रमोद तिवारी भी लंबे समय तक इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्तमान में आराधना मिश्रा कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता भी हैं और विधानसभा में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। ऐसे में प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी मिलने की स्थिति में उनके सामने विधानसभा की राजनीति के अनुभव को पूरे प्रदेश के संगठनात्मक ढांचे तक ले जाने की चुनौती होगी।

Oct 1, 2026 - 17:56
यूपी कांग्रेस में बड़ा उलटफेर! अजय राय की जगह आराधना मिश्रा मोना को मिल सकती है कमान, 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस का ‘ब्राह्मण दांव’?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की जगह अब नया चेहरा सामने लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। चर्चा है कि प्रतापगढ़ की रामपुर खास से कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस पर अभी कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अगर यह बदलाव होता है तो इसे यूपी कांग्रेस के लिए महज संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। आराधना मिश्रा मोना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतती रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल भी उन्हें रामपुर खास की कांग्रेस विधायक और प्रमोद तिवारी की बेटी के रूप में दर्ज करती है।

2014 से लगातार रामपुर खास में कांग्रेस का चेहरा

आराधना मिश्रा ने 2014 के उपचुनाव में रामपुर खास से जीत दर्ज कर विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की। रामपुर खास को उनके परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। उनके पिता प्रमोद तिवारी भी लंबे समय तक इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

वर्तमान में आराधना मिश्रा कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता भी हैं और विधानसभा में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। ऐसे में प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी मिलने की स्थिति में उनके सामने विधानसभा की राजनीति के अनुभव को पूरे प्रदेश के संगठनात्मक ढांचे तक ले जाने की चुनौती होगी।

अजय राय की जगह बदलाव क्यों?

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व यूपी संगठन में बदलाव को लेकर मंथन कर रहा है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर पार्टी में केंद्रीय स्तर पर दूसरी जिम्मेदारी देने की संभावना पर विचार हो सकता है। यानी संभावित बदलाव को जरूरी नहीं कि अजय राय की राजनीतिक भूमिका की समाप्ति के तौर पर देखा जाए।

चर्चा यह भी है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ एक OBC और एक मुस्लिम कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का फॉर्मूला भी विचाराधीन हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस संगठन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करती दिखाई दे सकती है।

आराधना के नाम से क्या बदलेगा सियासी समीकरण?

आराधना मिश्रा मोना का नाम सामने आने के साथ सबसे ज्यादा चर्चा ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को लेकर हो रही है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भूमिहार समुदाय से आते हैं, जबकि आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से हैं। ऐसे में उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस की सामाजिक समीकरण साधने की संभावित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

लेकिन कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ जातीय समीकरण तक सीमित नहीं होगी। 2027 के चुनाव से पहले पार्टी को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाना और सहयोगी दलों के साथ तालमेल को भी जमीन पर प्रभावी बनाना होगा।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम हाल के दिनों में 2027 की तैयारियों, संगठन और गठबंधन को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए गतिविधियां भी तेज की हैं।

अब निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस आलाकमान अजय राय की जगह वास्तव में आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपता है या संगठन के लिए कोई दूसरा चेहरा सामने आता है।

अगर आराधना मिश्रा के नाम पर मुहर लगती है, तो रामपुर खास की क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर यूपी कांग्रेस की प्रदेश स्तरीय कमान तक पहुंचने वाली उनकी राजनीतिक यात्रा का यह एक बड़ा पड़ाव होगा।

फिलहाल फैसला कांग्रेस आलाकमान के हाथ में है और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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