जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी पुलिस कार्रवाई की जांच

कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई इसके सदस्य होंगे।

Aug 20, 2026 - 17:13
Aug 20, 2026 - 18:22
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी पुलिस कार्रवाई की जांच

नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने कहीं जरूरत से ज्यादा बल तो नहीं इस्तेमाल किया।

कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई इसके सदस्य होंगे।

किन आरोपों की होगी जांच?

कमेटी पेलेट गन, इलेक्ट्रिक लाठी, लाठीचार्ज और बिना पर्याप्त चेतावनी आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की निगरानी, निजता के अधिकार के कथित उल्लंघन और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा, उत्पीड़न या छेड़छाड़ के आरोप भी जांच के दायरे में रहेंगे।

घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा और अंतरिम आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी कमेटी विचार करेगी। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित हमलों, सरकारी एवं निजी संपत्ति और वाहनों को हुए नुकसान तथा ड्यूटी के दौरान घायल सुरक्षाकर्मियों और उनके परिवारों की परेशानियों को भी दर्ज किया जाएगा।

CCTV से वायरलेस लॉग तक जुटाए जाएंगे सबूत

जांच को व्यापक बनाने के लिए CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग और वायरलेस लॉग कमेटी को उपलब्ध कराए जाएंगे। पीड़ितों और गवाहों को अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी दी जाएगी।

कमेटी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में विशेष रूप से महिला हिंसा, गंभीर चोटों और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या कहा?

18 अगस्त 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने साफ किया था कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि जिम्मेदार लोगों के लिए कोई बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता और मामले को गंभीरता से लेकर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।

अब 5 सदस्यीय कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर वास्तव में क्या हुआ, किस स्तर पर बल प्रयोग किया गया और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।

मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।

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