PM मोदी की दूसरी बड़ी अपील से मचा हड़कंप! आखिर क्यों बार-बार कह रहे हैं—‘जरूरत न हो तो सोना मत खरीदिए’?
सोने और तेल जैसे बड़े आयात बढ़ते हैं तो भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर Current Account Deficit (CAD) पर पड़ सकता है। हालांकि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने हाल में रिकॉर्ड स्तर छुआ है—21 अगस्त 2026 तक यह 729.33 अरब डॉलर था—लेकिन वैश्विक अस्थिरता के बीच आयात पर नियंत्रण की चिंता खत्म नहीं हुई है। यानी सरकार का संदेश यह नहीं कि भारत की अर्थव्यवस्था टूट रही है, बल्कि यह है कि तेज विकास के बावजूद बाहरी झटकों से बचने के लिए देश को अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों को समझदारी से संभालना होगा। सोना सिर्फ धातु नहीं, भारतीयों की भावना है यही वजह है कि पीएम मोदी की अपील असामान्य है।
नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026
देश की अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की दमदार GDP ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इसी खुशी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने आर्थिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। 1 सितंबर को साझा किए गए वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने देशवासियों से अनावश्यक सोना खरीदने, विदेश घूमने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की। उन्होंने इसे स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और भारत की आर्थिक ताकत से जोड़ते हुए देशवासियों से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब भारत 7.8% की रफ्तार से बढ़ रहा है, तो फिर सोना न खरीदने की अपील क्यों?
सिर्फ 114 दिन में दूसरी बार क्यों?
ये पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने सोने की खरीदारी रोकने की अपील की है। इससे पहले 10 मई 2026 को हैदराबाद की रैली में उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने, गैर-जरूरी विदेश यात्रा रोकने, ईंधन बचाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी।
अब चार महीने के भीतर फिर वही संदेश सामने आया है। फर्क इतना है कि इस बार संदेश के साथ ‘Wed in India’ और घरेलू पर्यटन पर भी जोर दिया गया है।
सबसे बड़ा खतरा: भारत का सोने का आयात
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है, लेकिन घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है। नतीजा यह है कि मांग पूरी करने के लिए भारी मात्रा में सोना विदेश से मंगाना पड़ता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछले साल के करीब 58 अरब डॉलर से लगभग 24% ज्यादा था। यही नहीं, 2022-23 में यह आंकड़ा करीब 35 अरब डॉलर था। यानी कुछ ही वर्षों में सोने पर भारत का विदेशी मुद्रा खर्च बेहद तेजी से बढ़ा है।
यही असली चिंता है।
सोना खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे समय में जब कच्चे तेल समेत जरूरी आयात का बिल भी बढ़ रहा हो, सोने की भारी मांग देश के विदेशी मुद्रा संतुलन और व्यापार घाटे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
दूसरा मोर्चा: पश्चिम एशिया का संकट
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिम एशिया में युद्ध और अस्थिरता के कारण तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।
महंगा तेल मतलब—
ज्यादा डॉलर बाहर → ज्यादा आयात बिल → रुपये पर दबाव → महंगाई का खतरा।
ऐसे माहौल में सरकार चाहती है कि जहां खर्च टाला जा सकता है, वहां विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल कम किया जाए।
तीसरा खतरा: CAD और रुपये पर दबाव
सोने और तेल जैसे बड़े आयात बढ़ते हैं तो भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर Current Account Deficit (CAD) पर पड़ सकता है।
हालांकि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने हाल में रिकॉर्ड स्तर छुआ है—21 अगस्त 2026 तक यह 729.33 अरब डॉलर था—लेकिन वैश्विक अस्थिरता के बीच आयात पर नियंत्रण की चिंता खत्म नहीं हुई है।
यानी सरकार का संदेश यह नहीं कि भारत की अर्थव्यवस्था टूट रही है, बल्कि यह है कि तेज विकास के बावजूद बाहरी झटकों से बचने के लिए देश को अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों को समझदारी से संभालना होगा।
सोना सिर्फ धातु नहीं, भारतीयों की भावना है
यही वजह है कि पीएम मोदी की अपील असामान्य है।
भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं है। यह शादी, त्योहार, परंपरा और परिवार की बचत से जुड़ा हुआ है।
इसलिए प्रधानमंत्री का बार-बार कहना कि जरूरत न हो तो सोना मत खरीदिए—आर्थिक संदेश से कहीं बड़ा संकेत माना जा रहा है।
मई की अपील का क्या हुआ?
मई में पीएम मोदी की अपील के बाद सोने के बाजार में हलचल जरूर हुई। सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई, और 2 अगस्त तक इस बढ़ी हुई ड्यूटी से सरकार को करीब ₹10,040 करोड़ का राजस्व मिला।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका था। यानी लोगों की खरीदारी की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन भारतीयों की सोने के प्रति मजबूत मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
तो क्या पीएम मोदी की अपील सिर्फ सोने तक सीमित है?
बिल्कुल नहीं।
इस पूरे संदेश का केंद्र है—
“पैसा भारत में रहे, खर्च भारत में हो और भारतीय उद्योग मजबूत हों।”
इसीलिए पीएम मोदी ने एक साथ तीन चीजों पर निशाना साधा—
विदेशी यात्रा कम करें।
विदेश में शादी से बचें।
अनावश्यक सोना न खरीदें।
और इसके बदले Swadeshi, Vocal for Local और Wed in India पर जोर दिया।
सबसे बड़ा सवाल—क्या इससे अरबों डॉलर बच सकते हैं?
अगर सोने की खरीद में बड़ी गिरावट आती है, तो भारत का आयात बिल घट सकता है और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है।
लेकिन यहां असली चुनौती त्योहार और शादी का सीजन है।
भारत में सोने की सबसे बड़ी खरीदारी इन्हीं मौकों पर होती है। इसलिए आने वाले महीनों में ही पता चलेगा कि पीएम मोदी की अपील सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रहती है या वास्तव में भारतीय परिवारों के खरीदारी के फैसले बदलती है।
निष्कर्ष
7.8% GDP ग्रोथ के बीच पीएम मोदी की ‘सोना मत खरीदो’ अपील विरोधाभास नहीं, बल्कि सावधानी का संकेत है।
भारत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही युद्ध, ऊर्जा कीमतों, आयात बिल और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। यही वजह है कि सरकार अब विकास की रफ्तार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बचाने और घरेलू खपत को भारत के भीतर रखने पर भी जोर दे रही है।
अब असली परीक्षा आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन में होगी—क्या भारत के लोग प्रधानमंत्री की इस दूसरी अपील को भी गंभीरता से लेते हैं?
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