7 साल बाद दिल्ली में जिनपिंग की एंट्री, मोदी से होगी सीधी मुलाकात; BRICS के मंच पर दुनिया की नजर
इस मुलाकात पर इसलिए भी खास नजर रहेगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और सैन्य तनाव के चलते भारत-चीन संबंधों में काफी तल्खी रही है। ऐसे में मोदी-जिनपिंग की आमने-सामने की बातचीत दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिनपिंग की भारत यात्राओं का सिलसिला शी जिनपिंग ने पहली बार सितंबर 2014 में भारत का दौरा किया था। इसके बाद वह 2016 में गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए। 2019 में मामल्लापुरम में मोदी-जिनपिंग की अनौपचारिक बैठक हुई थी। अब करीब सात साल बाद उनकी नई दिल्ली यात्रा होने जा रही है।
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आखिरकार भारत आ रहे हैं। कई दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
यह दौरा इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति भारत की धरती पर कदम रखेंगे। जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।
दिल्ली में करीब 24 घंटे रहेंगे जिनपिंग
सूत्रों के मुताबिक शी जिनपिंग 12 सितंबर को करीब दोपहर 12 बजे दिल्ली पहुंच सकते हैं। भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 13 सितंबर को दोपहर के आसपास वह चीन के लिए रवाना हो सकते हैं।
इस मुलाकात पर इसलिए भी खास नजर रहेगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और सैन्य तनाव के चलते भारत-चीन संबंधों में काफी तल्खी रही है। ऐसे में मोदी-जिनपिंग की आमने-सामने की बातचीत दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जिनपिंग की भारत यात्राओं का सिलसिला
शी जिनपिंग ने पहली बार सितंबर 2014 में भारत का दौरा किया था। इसके बाद वह 2016 में गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए। 2019 में मामल्लापुरम में मोदी-जिनपिंग की अनौपचारिक बैठक हुई थी। अब करीब सात साल बाद उनकी नई दिल्ली यात्रा होने जा रही है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर दुनिया की नजर
12 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली मोदी-जिनपिंग बैठक सिर्फ भारत और चीन के दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी। यह एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत भी मानी जा रही है।
BRICS सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत सभी 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी रहेगी। ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
सम्मेलन से पहले भारत-चीन संबंधों को लेकर चीन की तरफ से भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के उस बयान को साझा किया, जिसमें कहा गया था कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
BRICS के मंच पर भारत की बड़ी भूमिका
साल 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत अपनी चौथी BRICS अध्यक्षता के दौरान संगठन को अधिक समावेशी, प्रभावी और समाधान-केंद्रित मंच बनाने पर जोर दे रहा है। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का विषय है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.”
BRICS अब सिर्फ एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है। यह चार महाद्वीपों में फैला एक प्रभावशाली जियो-पॉलिटिकल समूह बन चुका है। वर्तमान में इसके 11 सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—हैं।
इन देशों की सामूहिक ताकत दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, 40 फीसदी वैश्विक GDP और 26 फीसदी वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करती है।
एक मंच, दो बड़ी ताकतें और दुनिया की निगाहें
दिल्ली में BRICS का यह मंच ऐसे समय पर सज रहा है, जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगी। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों, व्यापार, रणनीतिक सहयोग और एशिया में बदलते शक्ति संतुलन के बीच इस बैठक से निकलने वाला संदेश बेहद अहम होगा।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जिनपिंग दिल्ली आ रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि भारत मंडपम में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन रिश्तों की अगली तस्वीर कैसी होगी?
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