विपक्ष की रैली के जवाब में BJP का शक्ति प्रदर्शन, 1 नवंबर से देशभर में पदयात्राएं; अमित शाह समेत दिग्गज संभालेंगे मोर्चा
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने एक नवंबर से शुरू होने वाली पदयात्राओं को पूरे महीने जारी रखने की योजना बनाई है। गृह मंत्री अमित शाह भी इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वह 2 नवंबर को हैदराबाद में होने वाली पदयात्रा में शामिल होंगे, जबकि 5 नवंबर को हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में भी उनकी मौजूदगी प्रस्तावित है। भाजपा की रणनीति में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों पर विशेष जोर रहने की बात कही जा रही है। पार्टी इन राज्यों में वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को सक्रिय कर जनसंपर्क बढ़ाने की तैयारी में है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और लोगों की भागीदारी के जरिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि सरकार के प्रति जनसमर्थन कायम है।
नई दिल्ली: देश की राजनीति में सड़क पर शक्ति प्रदर्शन की जंग तेज होती दिखाई दे रही है। एक ओर कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने जा रहा है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी उसी दिन से पदयात्राओं के जरिए विपक्ष को जवाब देने की तैयारी की है। भाजपा की ये पदयात्राएं पूरे नवंबर महीने में चलेंगी, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
सड़क पर आमने-सामने होंगे सत्ता पक्ष और विपक्ष
SIR, पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में भी लिए जा चुके हैं। इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले भी समय-समय पर प्रदर्शन किए गए हैं। अब विपक्ष की एक नवंबर की रैली को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
भाजपा की पदयात्राओं को इसी राजनीतिक माहौल में विपक्ष की रणनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि सड़कों पर विपक्ष के बढ़ते विरोध के बीच अपने संगठन और समर्थकों की सक्रियता के जरिए राजनीतिक बढ़त बनाए रखी जाए।
अमित शाह उतरेंगे मैदान में, कई राज्यों में होगा आयोजन
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने एक नवंबर से शुरू होने वाली पदयात्राओं को पूरे महीने जारी रखने की योजना बनाई है। गृह मंत्री अमित शाह भी इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वह 2 नवंबर को हैदराबाद में होने वाली पदयात्रा में शामिल होंगे, जबकि 5 नवंबर को हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में भी उनकी मौजूदगी प्रस्तावित है।
भाजपा की रणनीति में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों पर विशेष जोर रहने की बात कही जा रही है। पार्टी इन राज्यों में वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को सक्रिय कर जनसंपर्क बढ़ाने की तैयारी में है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और लोगों की भागीदारी के जरिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि सरकार के प्रति जनसमर्थन कायम है।
एक नवंबर की तारीख पर सियासी टकराव, सिख समुदाय पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम में एक नवंबर की तारीख भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है। INDIA गठबंधन ने इसी दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का ऐलान किया है। भाजपा पहले ही इस तारीख को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध चुकी है। पार्टी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार की बरसी के दिन रैली आयोजित करना सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता का सवाल खड़ा करता है।
भाजपा पहले दिन से ही सिख समुदाय को साथ लेकर कार्यक्रम करने की तैयारी में है। खासतौर पर पंजाब में उसकी गतिविधियों को इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश होगी कि 1984 के सिख-विरोधी हिंसा के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को घेरा जाए और सिख समुदाय के बीच अपना राजनीतिक संदेश मजबूत किया जाए।
चुनावी राज्यों पर फोकस, जनसमर्थन दिखाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में भाजपा का विशेष ध्यान रहने की संभावना है। इन राज्यों में संगठन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की तैनाती के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने तथा जनसंपर्क अभियान को गति देने की योजना है। गोवा समेत अन्य राज्यों में भी पदयात्राओं के माध्यम से पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास करेगी।
कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत से देश की राजनीति में सड़क पर शक्ति प्रदर्शन का नया दौर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन जहां विरोध प्रदर्शनों तथा रैली के जरिए सरकार को घेरने की तैयारी में हैं, वहीं भाजपा पदयात्राओं और जनसंपर्क के जरिए जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन कार्यक्रमों में किस पार्टी को अधिक जनसमर्थन मिलता है और सड़क की यह सियासी लड़ाई आने वाले राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में ले जाती है।
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