₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ग्राहकों पर पड़ेगा कितना असर?

अगर आप किसी दुकान या व्यापारी को ₹3,000 UPI से भुगतान करते हैं, तो तय व्यवस्था के तहत आपके खाते से ₹3,000 ही जाएंगे। इस लेनदेन पर 0.4% यानी ₹12 MDR व्यापारी पक्ष पर लगेगा। ₹50,000 के भुगतान पर MDR ₹200 होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन में सामान्य MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। महत्वपूर्ण बात: सरकार ने कहा है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और बैंकों को सलाह दी गई है कि इसका खर्च ग्राहकों पर न डाला जाए।

Sep 16, 2026 - 18:02
₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ग्राहकों पर पड़ेगा कितना असर?

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अंजन दत्ता नाम के याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। याचिका में इसे समानता और व्यापार के मौलिक अधिकार से जुड़ा मामला बताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का दावा किया गया है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए शुल्क से खासकर छोटे और कम मार्जिन वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है, क्योंकि व्यापारी अतिरिक्त लागत को कीमतों में शामिल कर सकते हैं या बड़े भुगतान के लिए नकद विकल्प को प्राथमिकता दे सकते हैं।

हालांकि, मौजूदा नियम के मुताबिक MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना है। 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR व्यापारी पक्ष पर लागू होगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान और Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन इस MDR से बाहर रहेंगे।

ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?

अगर आप किसी दुकान या व्यापारी को ₹3,000 UPI से भुगतान करते हैं, तो तय व्यवस्था के तहत आपके खाते से ₹3,000 ही जाएंगे। इस लेनदेन पर 0.4% यानी ₹12 MDR व्यापारी पक्ष पर लगेगा। ₹50,000 के भुगतान पर MDR ₹200 होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन में सामान्य MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

महत्वपूर्ण बात: सरकार ने कहा है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और बैंकों को सलाह दी गई है कि इसका खर्च ग्राहकों पर न डाला जाए।

किन भुगतानों पर राहत रहेगी?
₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान: MDR नहीं
Person-to-Person भुगतान: MDR नहीं
छोटे पात्र व्यापारियों के कुछ लेनदेन: MDR से छूट
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्र: ₹5 फ्लैट MDR
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर से जुड़े भुगतान: 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 तक

सरकार के अनुसार लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद असली सवाल यही है कि ₹2,000 से ऊपर के डिजिटल भुगतान पर लागू होने वाली इस नई MDR व्यवस्था की कानूनी वैधता क्या है और इसका वास्तविक आर्थिक बोझ आखिर किस पर पड़ेगा? मामले की सुनवाई में सामने आने वाले तर्क इस व्यवस्था की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।

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