सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दिल्ली और एनसीआर में डॉग लवर्स और स्ट्रे डॉग्स को कंट्रोल करने वालों के बीच खड़ी हुई दीवार! डॉग लवर्स ने दिये सुझाव
1.दिल्ली-NCR में इसे अभियान की तरह चलाना होगा, ताकि 2–3 साल में संख्या में स्पष्ट गिरावट दिखे। इसके लिए MCD, NGOs, और पशु चिकित्सकों का संयुक्त नेटवर्क बनाया जाए।

दिल्ली और NCR में डॉग लवर्स और स्ट्रे डॉग्स को कंट्रोल करने वालों के बीच एक दीवार खड़ी हो गई है। डॉग लवर्स इस बात को लेकर परेशान हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्ट्रे डॉग्स पर जुल्म किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 8 हफ्ते में 5 हजार डॉग्स को पकड़ने का आदेश दिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बेजुबानों के साथ बुरा सलूक किया जाएगा। उन्हें बेरहमी से पकड़ कर बंद कर दिया जाएगा, कहीं दूर मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा। इसीलिए Court के इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। स्ट्रे डॉग्स से परेशान लोग बताते हैं कि कैसे कुत्तों ने बच्चों को नोच-नोच कर मार डाला, कैसे एक प्लेयर रेबीज का शिकार होकर हॉस्पिटल में तड़प रही है।
जो एजेंसीज ठीक से Sterilization नहीं कर पाई, वो शेल्टर में डॉग्स की देखभाल कैसे करेगी? ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जिनके जवाब मिलना जरूरी है।
TNR (Trap–Neuter–Return) को तेज़ करना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित हो चुका है कि नसबंदी ही स्ट्रे डॉग पॉपुलेशन को स्थायी रूप से घटाने का सबसे मानवीय तरीका है।
1.दिल्ली-NCR में इसे अभियान की तरह चलाना होगा, ताकि 2–3 साल में संख्या में स्पष्ट गिरावट दिखे।
इसके लिए MCD, NGOs, और पशु चिकित्सकों का संयुक्त नेटवर्क बनाया जाए।
2. ज़ोन वाइज डॉग मैनेजमेंट
हर वार्ड में डॉग फीडिंग ज़ोन तय किए जाएं, ताकि खाने के लिए कुत्ते इधर-उधर भटकें नहीं।
इस ज़ोन में वैक्सीनेटेड और नसबंदी करवाए गए कुत्तों को ही रहने दिया जाए।
नए पाए जाने वाले कुत्तों का तुरंत रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन हो।
3. एंटी-रेबीज और बाइट कंट्रोल प्रोग्राम
सभी पकड़े गए कुत्तों का Anti-Rabies Vaccination (ARV) अनिवार्य।
स्कूलों और मोहल्लों में डॉग सेफ्टी ट्रेनिंग— बच्चों को सिखाया जाए कि स्ट्रे डॉग्स से सुरक्षित कैसे रहें।
बाइट केस रिपोर्टिंग और ट्रीटमेंट सिस्टम को तेज़ और आसान बनाना।
4. कम्युनिटी डॉग केयर टेकर सिस्टम
हर कॉलोनी में 2–3 लोग (NGO या स्थानीय वॉलंटियर) कम्युनिटी डॉग केयर टेकर के रूप में नियुक्त हों।
उनका काम— कुत्तों को फीड करना, हेल्थ चेक कराना, और लोगों की शिकायतों का जवाब देना।
इससे न तो कुत्ते भूख से आक्रामक होंगे, न लोग असुरक्षित महसूस करेंगे।
5. नए शेल्टर नहीं, ‘ट्रांज़िट कैम्प’ मॉडल
स्थायी शेल्टर के बजाय अस्थायी ट्रांज़िट कैम्प बनाएं जहां घायल या बीमार कुत्तों को रखा जा सके।
हेल्थ और नसबंदी के बाद, उन्हें फिर उसी इलाके में छोड़ा जाए।
6. कानूनी और प्रशासनिक बैलेंस
सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू हो, लेकिन ‘क्रूरता’ के खिलाफ सख्त मॉनिटरिंग हो।
पकड़े जाने और छोड़े जाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो—वीडियो रिकॉर्डिंग और पब्लिक डेटा के साथ।
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