राज्यसभा से भी पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, अब देर से रजिस्ट्रेशन पर सख्त नियम लागू
सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से लोगों को जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक, विश्वसनीय और अद्यतन रहेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं, पहचान संबंधी दस्तावेजों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट ब्यूरो
देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा ने भी 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक 31 जुलाई को लोकसभा से मंजूरी प्राप्त कर चुका था।
विपक्ष के हंगामे के बीच दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में बदलाव कर देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त और प्रमाणिक बनाना है।
क्या बदलेगा नए कानून में?
सरकार के अनुसार अब यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देर से दर्ज कराए जाने वाले मामलों की उचित जांच हो और किसी भी प्रकार की फर्जी प्रविष्टि या दस्तावेज़ी अनियमितता को रोका जा सके।
दो वर्ष से अधिक देरी होने पर और कड़े होंगे नियम
विधेयक के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश के बाद ही संभव होगा।
गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी अनुमति देने से पहले प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच करेगा। सत्यापन के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी।
समय पर पंजीकरण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से लोगों को जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक, विश्वसनीय और अद्यतन रहेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं, पहचान संबंधी दस्तावेजों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
लोकसभा से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी
इस विधेयक को 31 जुलाई को लोकसभा ने भी विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित कर दिया था। विपक्षी दलों ने इसे महत्वपूर्ण विधेयक बताते हुए मांग की थी कि अमित शाह स्वयं सदन में उपस्थित होकर इसका जवाब दें। गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष ने नारेबाजी भी की, हालांकि हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब के साथ विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
क्या होगा इसका प्रभाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाएगा। फर्जी प्रमाणपत्रों पर अंकुश लगेगा, सरकारी डेटाबेस की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में नागरिकों को पहचान, उत्तराधिकार, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शी और प्रमाणिक व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
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