अरुणाचल पर चीन की हेकड़ी को भारत का करारा जवाब, 27 जगहों के नाम दर्ज होते ही ड्रैगन बौखलाया

दरअसल, चीन वर्ष 2017 से लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम अपने हिसाब से बदलकर जारी करता रहा है। चीन का नागरिक मामलों का मंत्रालय समय-समय पर इन स्थानों के लिए चीनी नामों की सूची जारी करता है। इस साल अप्रैल में भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नए नामों की सूची जारी की थी। भारत ने चीन की इस हरकत को हमेशा बेबुनियाद, निरर्थक और हास्यास्पद बताया है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि केवल स्थानों के नाम बदल देने से जमीन की वास्तविकता नहीं बदलती।

Aug 11, 2026 - 17:25
अरुणाचल पर चीन की हेकड़ी को भारत का करारा जवाब, 27 जगहों के नाम दर्ज होते ही ड्रैगन बौखलाया

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक भारतीय नाम अपने नक्शे में दर्ज किए तो चीन बुरी तरह तिलमिला उठा। चीन ने भारत के इस कदम को अवैध और अमान्य करार दिया, लेकिन भारत ने भी साफ शब्दों में दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और कोई भी बयान, दावा या कार्रवाई इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

चीन के नाम बदलने की चाल का भारत ने दिया जवाब

दरअसल, चीन वर्ष 2017 से लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम अपने हिसाब से बदलकर जारी करता रहा है। चीन का नागरिक मामलों का मंत्रालय समय-समय पर इन स्थानों के लिए चीनी नामों की सूची जारी करता है। इस साल अप्रैल में भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नए नामों की सूची जारी की थी।

भारत ने चीन की इस हरकत को हमेशा बेबुनियाद, निरर्थक और हास्यास्पद बताया है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि केवल स्थानों के नाम बदल देने से जमीन की वास्तविकता नहीं बदलती।

इसी क्रम में भारत ने पिछले सप्ताह अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया। यह कदम चीन की नाम बदलने की नीति के खिलाफ भारत का स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

भारत के कदम से चीन में मची खलबली

भारत के इस कदम पर चीन ने सोमवार, 10 अगस्त 2026, को तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा कि चीन तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता और उसने अपने दावे को दोहराते हुए इस क्षेत्र को ‘जांगनान’ बताया।

चीन तिब्बत को ‘शीजांग’ और अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है। हालांकि भारत ने चीन की इस शब्दावली और क्षेत्रीय दावे को लगातार खारिज किया है।

‘नक्शे और नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी’

भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—अरुणाचल प्रदेश भारत का था, भारत का है और भारत का ही रहेगा। चीन चाहे कितनी भी बार स्थानों के नाम बदले या अपने नक्शे में बदलाव करे, इससे जमीन पर मौजूद वास्तविकता नहीं बदल सकती।

चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत के इस कदम को लेकर चेतावनी भरे अंदाज में रिपोर्ट प्रकाशित की और दावा किया कि इससे सीमा पर तनाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में भारत पर एकतरफा कदम उठाने का आरोप लगाया गया।

हालांकि भारत के लिए संदेश साफ है कि किसी देश की मनमानी नामकरण नीति उसके क्षेत्रीय दावों का आधार नहीं बन सकती। भारत ने चीन की ऐसी कोशिशों के सामने झुकने के बजाय अपने आधिकारिक नक्शे और रिकॉर्ड में भारतीय नाम दर्ज कराकर अपनी स्थिति और मजबूत तरीके से सामने रखी है।

चीन को भारत का साफ संदेश

भारत ने चीन को यह संकेत दे दिया है कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर अब सिर्फ बयानबाजी से दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश पर भारत का दावा ऐतिहासिक, प्रशासनिक और संवैधानिक रूप से स्पष्ट है।

चीन की आपत्ति के बावजूद भारत का रुख अडिग है—नाम बदलने की राजनीति से न सीमा बदलती है और न ही संप्रभुता। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस सच्चाई पर कोई सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।

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