बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि मेगा फूड एंड हर्बल पार्क नागपुर के मिहान में तैयार! 100 प्रतिशत प्राकृतिक जूस होगा तैयार
सिटरस फलों के अलावा, यहां ट्रॉपिकल फ्रूट्स की भी प्रोसेसिंग की जाएगी. जैसे- आंवला 600 टन (प्रतिदिन), आम 400 टन (प्रतिदिन), अमरूद 200 टन (प्रतिदिन), पपीता 200 टन (प्रतिदिन), गाजर 160 टन (प्रतिदिन), एलोविरा 100 टन (प्रतिदिन) सहित अन्य फलों को भी प्रोसेस किया जा सकता है. वैश्विक मानकों के अनुसार, प्लांट में जूस, पल्प, प्यूरी और पेस्ट का उत्पादन किया जा सकता है. इस प्रक्रिया को प्राइमरी प्रोसेसिंग कहा जाता है.

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि मेगा फूड एंड हर्बल पार्क नागपुर के मिहान में तैयार है. 9 मार्च से कंपनी का परिचालन शुरू हो जाएगा. मिहान में यूनिट स्थापित करने के लिए सितंबर 2016 में भूमिपूजन किया गया था. बता दें, नागपुर स्थित पतंजलि की ये यूनिट फ्रूट्स एंड वैजीटेहबल्स प्रोसेसिंग प्लांट है. यहां ट्रॉपिकल और सिटरस फलों और सब्जियों को प्रोसेस करके जूस, पल्प, पेस्ट और प्यूरी का उत्पादन किया जाएगा.
नागपुर को ऑरेंज सिटी कहा जाता है. नागपुर में संतरा, कीनू, मौसम्मी और नीबूं जैसे खट्टे फल का उत्पादन अधिक है. नागपुर की इसी खासियत को ध्यान में रखते हुए पतंजलि ने यहां सिटरस प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की है. ये जूस 100 प्रतिशत प्राकृतिक होगा. खास बात है कि इसमें किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव्स या शुगर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
सिटरस फलों के अलावा, यहां ट्रॉपिकल फ्रूट्स की भी प्रोसेसिंग की जाएगी. जैसे- आंवला 600 टन (प्रतिदिन), आम 400 टन (प्रतिदिन), अमरूद 200 टन (प्रतिदिन), पपीता 200 टन (प्रतिदिन), गाजर 160 टन (प्रतिदिन), एलोविरा 100 टन (प्रतिदिन) सहित अन्य फलों को भी प्रोसेस किया जा सकता है. वैश्विक मानकों के अनुसार, प्लांट में जूस, पल्प, प्यूरी और पेस्ट का उत्पादन किया जा सकता है. इस प्रक्रिया को प्राइमरी प्रोसेसिंग कहा जाता है. इसके अलावा, रीटेल पैकिंग की प्रक्रिया को सेकेंडरी प्रोसेसिंग कहा जाता है. नागपुर की फैक्ट्री में इसके लिए टेट्रा पैक यूनिट भी तैयार की जाएगी. बता दें, पतंजलि लोगों को आरोग्य देती है. उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में देते हुए टैट्रा पैक एसेप्टिक पैकेजिंग में किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या शुगर के इस्तेमाल का प्रयोग नहीं किया जाएगा.
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