62 वर्षों तक वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाला बहादुर योद्धा मिग-21 विमान हुआ रिटायर
यह 62 वर्षों तक वायुसेना की सेवा करने वाले रूसी मूल के लड़ाकू विमान पर प्रशिक्षित पायलट की कई पीढ़ियों के लिए एक भावुक क्षण था. एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपनी उड़ान के बाद कहा- 'मिग-21 वर्ष 1960 के दशक में अपनी शुरुआत से ही भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान रहा है और हम अब भी इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. यह इतिहास में सबसे अधिक, बड़े पैमाने पर निर्मित किए गए सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसके 11,000 से ज्यादा विमान 60 से अधिक देशों में इस्तेमाल किए जा चुके हैं.'

भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना और बहादुर योद्धा मिग-21 अगले महीने औपचारिक रूप से रिटायर हो रहा है. करीब छह दशकों तक आसमान की रक्षा करने वाला यह लड़ाकू विमान कभी "वायु सेना की रीढ़" कहलाता था. मिग-21 ने 1971 के युद्ध से लेकर कई अहम अभियानों में भारत की जीत का परचम लहराया. लेकिन बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और हादसों ने इसके सफर पर पूर्ण विराम लगा दिया है. अब यह विमान भारतीय रक्षा इतिहास का गौरवशाली अध्याय बनकर हमेशा याद किया जाएगा. सोमवार (25 अगस्त, 2025) को मिग-21 लड़ाकू विमानों ने बीकानेर के नाल स्थित वायुसैनिक अड्डे पर अपनी अंतिम उड़ान भरी. इन विमानों को 26 सितंबर को चंडीगढ़ में आयोजित औपचारिक रिटायरमेंट समारोह में अंतिम विदाई दी जाएगी.
मिग-21 की प्रतीकात्मक विदाई की बेला पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने 18-19 अगस्त को नाल से मिग-21 में उड़ान भरी. यह 62 वर्षों तक वायुसेना की सेवा करने वाले रूसी मूल के लड़ाकू विमान पर प्रशिक्षित पायलट की कई पीढ़ियों के लिए एक भावुक क्षण था. एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपनी उड़ान के बाद कहा- 'मिग-21 वर्ष 1960 के दशक में अपनी शुरुआत से ही भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान रहा है और हम अब भी इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. यह इतिहास में सबसे अधिक, बड़े पैमाने पर निर्मित किए गए सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसके 11,000 से ज्यादा विमान 60 से अधिक देशों में इस्तेमाल किए जा चुके हैं.'
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