दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा पर तीनों आरोप साबित, संसद में जांच रिपोर्ट पेश - जस्टिस वर्मा घर पर मिले थे 500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे

कैश बरामदगी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसके बाद 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। हालांकि, अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। ऐसे में संसद में जांच रिपोर्ट का पेश होना इस पूरे मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

Aug 12, 2026 - 17:28
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा पर तीनों आरोप साबित, संसद में जांच रिपोर्ट पेश - जस्टिस वर्मा घर पर मिले थे  500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर मिले भारी मात्रा में कैश के मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। संसद में पेश की गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोपों को सही ठहराया गया है। कमेटी ने यह भी कहा कि बरामद नकदी को लेकर जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं थे।

मामला 14 मार्च 2025 की रात का है, जब जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद उसे बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को कथित तौर पर 500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे मिले थे। घटना के समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद मामला बेहद गंभीर न्यायिक विवाद में बदल गया और उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया।

कैश बरामदगी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसके बाद 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी।

हालांकि, अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। ऐसे में संसद में जांच रिपोर्ट का पेश होना इस पूरे मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

तीनों आरोपों पर कमेटी की मुहर

लोकसभा में बुधवार को पेश रिपोर्ट में जांच कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को प्रमाणित माना है। रिपोर्ट में बरामद नकदी को लेकर उनके जवाबों को भी असंतोषजनक बताया गया है।

अब इस रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ आगे की संवैधानिक और संसदीय कार्रवाई को लेकर तस्वीर और महत्वपूर्ण हो गई है। मामला न्यायपालिका की जवाबदेही, न्यायिक आचरण और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा होने के कारण इसे बेहद गंभीर माना जा रहा है।

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