भारत में 95 फीसदी महिलाएं ये तक नहीं जानतीं कि सेक्स सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद लेने के लिए भी होता है -अभिनेत्री नीना गुप्ता

कई लोग जहां उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स को उनका बयान ‘ओवर’ भी लग रहा है. कुछ का कहना है कि ऐसी बातें समाज को बदलने के लिए जरूरी हैं, जबकि कुछ को लगता है कि पब्लिक फिगर होकर ऐसा बयान देना ठीक नहीं. अंत में सवाल यही है – क्या अब वक्त आ गया है कि महिलाएं खुद की खुfशियों और इच्छाओं को भी उतना ही महत्व दें जितना समाज उन्हें मर्दों के लिए सिखाता आया है?

Apr 4, 2025 - 18:47
भारत में 95 फीसदी महिलाएं ये तक नहीं जानतीं कि सेक्स सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद लेने के लिए भी होता है -अभिनेत्री नीना गुप्ता

अभिनेत्री नीना गुप्ता (neena gupta news)अपनी बेबाक राय और बोल्ड बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहती हैं. इस बार भी उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. नीना गुप्ता ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि भारत में 95 फीसदी महिलाएं ये तक नहीं जानतीं कि सेक्स सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद लेने के लिए भी होता है . नीना ने बातचीत में कहा कि भारत में सेक्स को या तो बहुत बड़ा बना दिया गया है या पूरी तरह छुपा दिया जाता है. उन्होंने कहा, 'सेक्स को बहुत ज़्यादा बड़ा बना दिया गया है. एक उम्र के बाद ये उतना जरूरी नहीं रह जाता. और वैसे भी भारत में तो 95 प्रतिशत औरतों को ये तक नहीं पता होता कि सेक्स सिर्फ मर्द को खुश करने के लिए नहीं, खुद के लिए भी होता है.' नीना ने इस बात पर अफसोस जताया कि महिलाएं अपनी ही इच्छाओं और जरूरतों को नजरअंदाज कर देती हैं. उन्होंने कहा, 'औरतों को ये तक नहीं बताया गया कि वो क्या चाहती हैं, उन्हें क्या पसंद है. सिर्फ ये सिखाया गया कि मर्द को खुश करना है.' बात अगर नीना गुप्ता के करियर की करें, तो वे हाल ही में वेब सीरीज ‘पंचायत’ में एक अहम भूमिका में दिखी थीं. उन्होंने साबित किया कि अगर आप में हुनर है तो उम्र कोई रुकावट नहीं होती. उनका किरदार, उनका अभिनय और उनकी सादगी दर्शकों को काफी पसंद आई. नीना के इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगल खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई लोग जहां उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स को उनका बयान ‘ओवर’ भी लग रहा है. कुछ का कहना है कि ऐसी बातें समाज को बदलने के लिए जरूरी हैं, जबकि कुछ को लगता है कि पब्लिक फिगर होकर ऐसा बयान देना ठीक नहीं. अंत में सवाल यही है – क्या अब वक्त आ गया है कि महिलाएं खुद की खुfशियों और इच्छाओं को भी उतना ही महत्व दें जितना समाज उन्हें मर्दों के लिए सिखाता आया है?

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