<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:admin="http://webns.net/mvcb/"
     xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
    <title>Delhi Lookout &amp; Latest Posts</title>
    <link>https://delhilookout.com/rss/latest-posts</link>
    <description>Delhi Lookout &amp; Latest Posts</description>
    <dc:language>en</dc:language>
    <dc:creator></dc:creator>
    <dc:rights>Copyright 2024 Delhi Lookout &amp; All Rights Reserved. |  Design and Develop By &amp;lt;a class=&amp;quot; text&amp;light&amp;quot; href=&amp;quot;https://rjinfotechindia.com/&amp;quot;&amp;gt;RJ Infotech&amp;lt;/a&amp;gt;</dc:rights>
    <item>
        <title>आजादी की कीमत: पांच हफ्तों में खींची वो लकीर, जिसने करोड़ों की किस्मत बदल दी</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-Price-of-Freedom:-The-line-drawn-in-five-weeks,-which-changed-the-fate-of-millions</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-Price-of-Freedom:-The-line-drawn-in-five-weeks,-which-changed-the-fate-of-millions</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देशभर में आजादी के जश्न की तैयारियां हैं, तिरंगे से लेकर स्कूलों और टीवी स्टूडियो तक स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां फिर सुनाई जा रही हैं। 15 अगस्त 1947 की आधी रात, आजादी का ऐतिहासिक भाषण और लाल किले पर फहराता तिरंगा भारतीय इतिहास की सबसे गौरवशाली तस्वीरों में शामिल हैं। लेकिन इसी आजादी के साथ एक ऐसी त्रासदी भी जुड़ी है, जिसकी कीमत लाखों परिवारों ने अपना घर, जमीन और अपनों को खोकर चुकाई। यह कहानी है भारत-पाकिस्तान के बंटवारे और उस सीमा रेखा की, जिसने उपमहाद्वीप का भूगोल ही नहीं, करोड़ों लोगों का भविष्य भी बदल दिया।</p>
<p>इस कहानी के केंद्र में थे सर सिरिल जॉन रैडक्लिफ, एक ब्रिटिश वकील, जिन्होंने 1947 से पहले कभी भारत की यात्रा तक नहीं की थी। फिर भी उन्हें ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में बांटने वाली सीमा तय करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी बनाई सीमा को इतिहास में रैडक्लिफ लाइन के नाम से जाना गया।</p>
<p>कौन थे सर सिरिल रैडक्लिफ?</p>
<p>सिरिल जॉन रैडक्लिफ का जन्म 1899 में वेल्स में हुआ था। ऑक्सफर्ड से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने लंदन में कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाईं।</p>
<p>लेकिन 1947 में उन्हें भारत की सबसे कठिन और विवादित जिम्मेदारियों में से एक सौंपे जाने की सबसे बड़ी वजह यही थी कि उनका भारत से कोई पुराना राजनीतिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं था। ब्रिटिश सरकार को उम्मीद थी कि भारत की राजनीति से दूर रहने के कारण वे निष्पक्ष फैसला दे सकेंगे।</p>
<p>विडंबना यह थी कि जिस व्यक्ति ने भारत को पहले कभी देखा तक नहीं था, उसे लाखों लोगों की जिंदगी और भविष्य तय करने वाली सीमा खींचनी थी।</p>
<p>ब्रिटेन को रैडक्लिफ की जरूरत क्यों पड़ी?</p>
<p>1947 में ब्रिटेन ने भारत से सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी थी। लॉर्ड माउंटबेटन ने घोषणा कर दी थी कि अगस्त में ब्रिटिश शासन समाप्त हो जाएगा। भारत के विभाजन का राजनीतिक फैसला हो चुका था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी था—भारत और पाकिस्तान की सीमा आखिर कहां होगी?</p>
<p>सबसे मुश्किल स्थिति पंजाब और बंगाल में थी। दोनों प्रांतों में हिंदू, मुस्लिम और सिख आबादी आपस में मिली-जुली थी। केवल धर्म के आधार पर ऐसी सीमा खींचना लगभग असंभव था, जो हर समुदाय को स्वीकार्य हो।</p>
<p>इसके लिए पंजाब और बंगाल के लिए अलग-अलग बाउंड्री कमीशन बनाए गए। रैडक्लिफ को दोनों आयोगों का अध्यक्ष बनाया गया। जब आयोग के सदस्य किसी मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाते, तो अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी रैडक्लिफ पर आ जाती थी।</p>
<p>सिर्फ पांच हफ्ते और सामने था करोड़ों लोगों का भविष्य</p>
<p>रैडक्लिफ 8 जुलाई 1947 को भारत पहुंचे। उनके पास सीमा तय करने के लिए लगभग पांच सप्ताह का समय था। इस बेहद कम अवधि में उन्हें जनगणना के आंकड़े, जिलों की सीमाएं, नहर और सिंचाई व्यवस्था, रेलवे नेटवर्क, प्रशासनिक संपर्क और दोनों पक्षों के राजनीतिक दावों का अध्ययन करना था।</p>
<p>पंजाब में मामला और जटिल था। सिख समुदाय की धार्मिक और आर्थिक जड़ें कई क्षेत्रों में फैली थीं। नहरों और सिंचाई व्यवस्था को सीमा के बीच बांटना आसान नहीं था। रेलवे लाइनें भी ऐसे शहरों और क्षेत्रों को जोड़ती थीं, जो अचानक अलग-अलग देशों का हिस्सा बनने वाले थे।</p>
<p>बंगाल में भी स्थिति बेहद पेचीदा थी। कलकत्ता के भविष्य को लेकर तीखा विवाद था और पूरा प्रांत आर्थिक तथा सामाजिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था।</p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात—सीमा का ऐलान आजादी के बाद हुआ</p>
<p>भारत और पाकिस्तान का जन्म अगस्त 1947 में हुआ। लेकिन आम लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं था कि अंतिम सीमा कहां से गुजरेगी।</p>
<p>रैडक्लिफ अवार्ड 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया, यानी भारत की आजादी के दो दिन बाद।</p>
<p>इसका मतलब था कि कई परिवारों ने आजादी का सूरज तो देखा, लेकिन यह नहीं जानते थे कि उनका गांव, खेत, शहर या घर आखिर भारत में रहेगा या पाकिस्तान में।</p>
<p>सीमा के ऐलान के बाद हालात तेजी से बदले। लोग अपने घर छोड़कर निकलने लगे। सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर भीड़ उमड़ पड़ी। परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों को अचानक शरणार्थी बनना पड़ा।</p>
<p>एक लकीर नहीं, लाखों जिंदगियों का विभाजन</p>
<p>रैडक्लिफ लाइन सिर्फ नक्शे पर खींची गई सीमा नहीं थी। इसने गांवों, खेतों, सड़कों, रेलवे लाइनों, नदियों और बाजारों को अलग कर दिया। कई जगहों पर परिवारों और समुदायों के बीच भी यह सीमा खिंच गई।</p>
<p>विभाजन के दौरान करीब 1.4 करोड़ लोगों के विस्थापित होने का अनुमान लगाया जाता है। मौतों की संख्या को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं, लेकिन अलग-अलग अनुमानों में यह आंकड़ा कई लाख से लेकर लगभग 20 लाख तक बताया गया है।</p>
<p>पंजाब में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए। बंगाल में भी बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ, जिसका असर आने वाले दशकों तक दिखाई देता रहा।</p>
<p>80 साल बाद भी जिंदा है रैडक्लिफ लाइन का असर</p>
<p>1947 में खींची गई यह सीमा आज भी दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालती है। भारत-पाकिस्तान संबंधों से लेकर सीमा सुरक्षा, लोगों की आवाजाही, कश्मीर विवाद और पानी से जुड़े सवालों तक, विभाजन की विरासत आज भी मौजूद है।</p>
<p>इसलिए भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रैडक्लिफ लाइन को याद करना केवल अतीत को याद करना नहीं है। यह उस विरोधाभास को समझना भी है जिसमें एक तरफ भारत आजादी का उत्सव मना रहा था और दूसरी तरफ लाखों लोग अपने घर, परिवार और पहचान बचाने के लिए अनजान रास्तों पर निकल चुके थे।</p>
<p>15 अगस्त 1947 ने भारत को आजादी दी, लेकिन 17 अगस्त को सामने आई एक सीमा रेखा ने उपमहाद्वीप के इतिहास पर ऐसा निशान छोड़ा, जिसका असर 80 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7f0e4a79840.jpg" length="125740" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:18:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The Price of Freedom: The line drawn in five weeks, which changed the fate of millions</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>लाल किले से बदलेगा स्वतंत्रता दिवस का इतिहास, पहली बार PM के भाषण से पहले गूंजेगा पूरा &amp;apos;वंदे मातरम्&amp;apos;</title>
        <link>https://delhilookout.com/Vande-Mataram-to-be-played-at-Red-Fort-ahead-of-PM-Modis-Independence-Day-speech</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Vande-Mataram-to-be-played-at-Red-Fort-ahead-of-PM-Modis-Independence-Day-speech</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से होने वाले मुख्य समारोह में एक ऐसी नई परंपरा की शुरुआत होगी, जो आजादी के बाद पहली बार देखने को मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से ठीक पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की सामूहिक प्रस्तुति होगी और खास बात यह है कि इसे इसके सभी छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<p>अब तक लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' की प्रस्तुति प्रमुख रूप से होती रही है। लेकिन इस बार समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम्' को विशेष स्थान दिया गया है। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की भावना जगाने का एक बड़ा माध्यम बना था।</p>
<p>क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?</p>
<p>इस फैसले के पीछे 2026 का ऐतिहासिक संयोग सबसे बड़ी वजह है। इस वर्ष 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह कालजयी रचना मूल रूप से उनके उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति का शक्तिशाली प्रतीक बन गई।</p>
<p>दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बदलाव की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम्' ने लाखों भारतीयों में उत्साह और जोश पैदा किया था। इसकी 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से इसे विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>'वंदे मातरम्' को मिला कानूनी संरक्षण</p>
<p>इस वर्ष समारोह से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के बाद 'वंदे मातरम्' को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालने या इसका अपमान करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।</p>
<p>विरासत से विकसित भारत तक—दोहरी थीम</p>
<p>इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम में भारत के अतीत और भविष्य, दोनों को जोड़ने की कोशिश की गई है। आयोजन के दो प्रमुख केंद्र होंगे—'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की भूमिका।</p>
<p>यानी इस बार लाल किले का मंच केवल स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत को याद नहीं करेगा, बल्कि आने वाले भारत के सपने और उसमें युवाओं की भूमिका को भी सामने रखेगा।</p>
<p>समारोह में दिखेंगे कई खास आकर्षण</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। ध्वजारोहण के बाद परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।</p>
<p>समारोह के दौरान फूलों की वर्षा भी आकर्षण का हिस्सा होगी। वहीं 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर विशेष ध्वज के साथ आसमान में उड़ान भरता दिखाई देगा।</p>
<p>दिल्ली में संभावित बारिश को देखते हुए लाल किले परिसर की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। परिसर की नालियों और सीवेज व्यवस्था की विशेष सफाई कराई जा रही है, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में भी समारोह के आयोजन में किसी तरह की बाधा न आए।</p>
<p>इस बार का स्वतंत्रता दिवस इसलिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक विरासत, राष्ट्रभक्ति और विकसित भारत के भविष्य को एक ही मंच पर जोड़ने वाला यादगार अवसर बनने जा रहा है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7f0ba801a11.jpg" length="125577" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:06:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&#039;Vande Mataram &#039;to be played at Red Fort ahead of PM Modi&#039;s Independence Day speech</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>80 साल का सफर: आजादी के वक्त 34 करोड़ से 2026 में 147 करोड़ पार, चार गुने से ज्यादा हुई भारत की आबादी</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-80-year-journey:-Indias-population-to-more-than-quadruple-from-34-crore-at-the-time-of-independence-to-147-crore-in-2026</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-80-year-journey:-Indias-population-to-more-than-quadruple-from-34-crore-at-the-time-of-independence-to-147-crore-in-2026</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: भारत इस साल अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद से देश ने सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। आजादी के समय भारत के सामने जहां विभाजन, गरीबी, भुखमरी और सीमित संसाधनों जैसी गंभीर चुनौतियां थीं, वहीं आज भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है।</p>
<p>आजादी के समय कितनी थी भारत की आबादी?</p>
<p>भारत की आजादी के समय, यानी 1947 में, देश की आबादी करीब 34 करोड़ (340 मिलियन) थी। आजादी के बाद हुई पहली जनगणना यानी 1951 में भारत की आबादी लगभग 36.1 करोड़ दर्ज की गई।</p>
<p>इसके बाद देश की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई। 1981 तक भारत की आबादी बढ़कर करीब 68.3 करोड़ हो गई। यानी महज तीन दशकों में देश की आबादी लगभग दोगुनी हो गई।</p>
<p>1951 से 1981 के बीच सबसे तेज बढ़ी आबादी</p>
<p>1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि का दौर बेहद तेज रहा। उस समय जन्मदर काफी अधिक थी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में लगातार गिरावट आई। इसका सीधा असर जनसंख्या वृद्धि पर पड़ा।</p>
<p>1961 से 1971 के दशक में भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर करीब 24.8 प्रतिशत रही, जिसे देश के इतिहास में सबसे अधिक वृद्धि दरों में गिना जाता है।</p>
<p>2001 में पार हुआ 100 करोड़ का आंकड़ा</p>
<p>1981 के बाद भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आने लगी, लेकिन आबादी का आधार इतना बड़ा हो चुका था कि कुल संख्या लगातार बढ़ती रही।</p>
<p>2001 में भारत की आबादी 100 करोड़ यानी 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। इसके बाद 2011 की जनगणना में देश की आबादी करीब 121 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई।</p>
<p>2026 में 147 करोड़ से ज्यादा आबादी</p>
<p>अब 2026 में भारत की अनुमानित आबादी करीब 147.66 करोड़ बताई जा रही है। यानी 1947 में करीब 34 करोड़ की आबादी के मुकाबले आज देश की आबादी चार गुने से भी ज्यादा हो चुकी है।</p>
<p>आबादी के इस विशाल विस्तार के साथ भारत के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। वहीं बड़ी आबादी भारत के लिए विशाल मानव संसाधन और बाजार का अवसर भी प्रस्तुत करती है।</p>
<p>1947 से 2026 तक का सफर सिर्फ आबादी बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारत की पूरी तस्वीर है—34 करोड़ से करीब 148 करोड़ तक पहुंचा देश अब दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में अपनी नई भूमिका तय कर रहा है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7f0a5161500.jpg" length="136264" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:00:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The 80-year journey: India&#039;s population to more than quadruple from 34 crore at the time of independence to 147 crore in 2026</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रेटिंग: ⭐⭐⭐½/5  &amp;  आवारापन 2 रिव्यू: 19 साल बाद फिर लौटा शिवम पंडित का दर्द, इश्क और इंतकाम</title>
        <link>https://delhilookout.com/Rating-⭐⭐⭐½- --The-2nd-Review:-After-19-years,-Shivam-Pandits-pain,-love-and-longing-return</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Rating-⭐⭐⭐½- --The-2nd-Review:-After-19-years,-Shivam-Pandits-pain,-love-and-longing-return</guid>
        <description><![CDATA[ <p>19 साल पहले जब ‘आवारापन’ पर्दे पर आई थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि शिवम पंडित का दर्द, उसकी खामोशी और अधूरी मोहब्बत आने वाले वर्षों में एक पूरी पीढ़ी की यादों का हिस्सा बन जाएगी। 2007 का वह दौर, इमरान हाशमी का उदास चेहरा और ‘तो फिर आओ’ जैसे गाने आज भी उन दर्शकों के जेहन में ताजा हैं, जिन्होंने उस दौर को जिया है।</p>
<p>अब लंबे इंतजार के बाद ‘आवारापन 2’ उसी भावनात्मक दुनिया में वापसी करती है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह फिल्म कैसी है, बल्कि सवाल यह भी है कि क्या 19 साल बाद शिवम पंडित का जादू पहले जैसा ही असर करता है? जवाब है—काफी हद तक हां।</p>
<p>कहानी: जब शिवम को फिर मिला जीने का मकसद</p>
<p>फिल्म की कहानी शिवम पंडित की उसी टूट चुकी दुनिया से आगे बढ़ती है। अपनी मोहब्बत आलिया को खोने के बाद शिवम अपराध की दुनिया से खुद को दूर कर चुका है। उसकी जिंदगी अब खामोशी, तन्हाई और पुरानी यादों के बीच सिमट गई है।</p>
<p>लेकिन किस्मत उसे एक बार फिर उस मोड़ पर ले आती है, जहां उसके सामने एक मासूम बच्ची आती है। शिवम बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और अपनी पुरानी मोहब्बत की याद में उसका नाम आलिया रख देता है।</p>
<p>शिवम उससे दूर रहने की कोशिश करता है, लेकिन जब बच्ची को गोद लेने वाला परिवार उसे मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह के हवाले कर देता है, तब शिवम के भीतर का पुराना योद्धा फिर जाग उठता है।</p>
<p>अब यह सिर्फ एक बच्ची को बचाने की कहानी नहीं है। यह उस आदमी की कहानी है जिसने एक बार अपना प्यार खोया था और अब दूसरी बार अपनी ‘आलिया’ को खोने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<p>यहीं से फिल्म भावनात्मक ड्रामा से निकलकर एक खूंखार क्राइम-एक्शन थ्रिलर में बदल जाती है और शिवम का सफर बैंकॉक तक पहुंचता है।</p>
<p>इमरान हाशमी: फिल्म की जान और सबसे बड़ा आकर्षण</p>
<p>अगर ‘आवारापन 2’ किसी एक चेहरे के दम पर खड़ी है, तो वह इमरान हाशमी हैं।</p>
<p>शिवम पंडित का किरदार उनके व्यक्तित्व के साथ इस तरह जुड़ चुका है कि स्क्रीन पर उनका चेहरा आते ही दर्शक कहानी से पहले उनकी भावनाओं को पढ़ना शुरू कर देते हैं।</p>
<p>बढ़ी हुई दाढ़ी, लंबे बाल, उदास आंखें, कम संवाद और चेहरे पर जमा हुआ दर्द—इमरान ने शिवम को सिर्फ निभाया नहीं है, बल्कि उसे दोबारा जिया है।</p>
<p>उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि कई जगह वह बिना संवाद बोले ही पूरा दृश्य अपने नाम कर लेते हैं। उनकी चुप्पी में गुस्सा भी है, दर्द भी है और अधूरी मोहब्बत की वह टीस भी, जो किरदार को आम एक्शन हीरो से बिल्कुल अलग बनाती है।</p>
<p>‘आवारापन 2’ देखते हुए साफ महसूस होता है कि शिवम पंडित का किरदार इमरान हाशमी के करियर के सबसे यादगार किरदारों में क्यों गिना जाता है।</p>
<p>दिशा पाटनी ने चौंकाया, विलेन ने पैदा की बेचैनी</p>
<p>दिशा पाटनी फिल्म में जारा के किरदार में नजर आती हैं। शुरुआत में लगता है कि उनका रोल सीमित होगा, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ उन्हें पर्याप्त स्पेस मिलता है। कुछ जगह संवाद अदायगी थोड़ी और प्रभावी हो सकती थी, लेकिन उनका किरदार कहानी को भावनात्मक संतुलन देता है।</p>
<p>वहीं पूरन गब्बी जोरावर के रूप में एक अलग तरह के विलेन को सामने लाते हैं। उनका किरदार सनकी, अस्थिर और अप्रत्याशित है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और अजीब व्यवहार फिल्म के माहौल में असहजता पैदा करते हैं।</p>
<p>हालांकि उनका किरदार एक बेहद डरावने मास्टरमाइंड की तुलना में ज्यादा ‘साइको’ और विचित्र दिखाई देता है। इसके बावजूद इमरान हाशमी जैसे अभिनेता के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराना उनकी बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p>शबाना आजमी नाफिसा के किरदार में कम स्क्रीन टाइम के बावजूद प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं सुविंदर विक्की अपनी परतदार अदाकारी से कहानी में गंभीरता और गहराई जोड़ते हैं।</p>
<p>असली सरप्राइज—नॉस्टैल्जिया</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसका नॉस्टैल्जिया है।</p>
<p>जब पर्दे पर इमरान हाशमी की एंट्री होती है और बैकग्राउंड में ‘तो फिर आओ’ की धुन सुनाई देती है, तो यह सिर्फ एक गाना नहीं रह जाता। यह 2007 के उस दौर में वापस लौटने जैसा महसूस होता है।</p>
<p>यही फिल्म की सबसे बड़ी समझदारी है। मेकर्स ने पुरानी फिल्म की यादों को सिर्फ दिखाया नहीं, बल्कि उन्हें कहानी की भावनात्मक जरूरत के साथ जोड़ा है।</p>
<p>‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’ के नए संस्करण कई भावुक दृश्यों में कहानी के असर को और गहरा करते हैं।</p>
<p>नए ट्रैक ‘ये आवारापन’, ‘वे जुनून’ और ‘पिया घर आया’ भी फिल्म के मूड के साथ अच्छी तरह बैठते हैं।</p>
<p>संगीत यहां सिर्फ मनोरंजन नहीं है—यह शिवम की भावनाओं की आवाज बन जाता है।</p>
<p>एक्शन में भी है इमोशन</p>
<p>‘आवारापन 2’ का एक्शन सिर्फ गोलियां, मारधाड़ और बदला लेने तक सीमित नहीं है।</p>
<p>शिवम जब लड़ता है तो उसके पीछे एक भावनात्मक वजह होती है। हर मुकाबला उसके अंदर दबे दर्द को बाहर निकालता है।</p>
<p>यही वजह है कि फिल्म के कई एक्शन सीक्वेंस दर्शकों को सिर्फ रोमांचित नहीं करते, बल्कि शिवम की बेचैनी भी महसूस कराते हैं।</p>
<p>फिल्म का डार्क विजुअल टोन, क्राइम की दुनिया और बैंकॉक की लोकेशन मिलकर कहानी को एक अलग सिनेमाई माहौल देते हैं।</p>
<p>निर्देशन: पुरानी आत्मा, नई कहानी</p>
<p>नितिन कक्कड़ ने सबसे बड़ा जोखिम यह लिया है कि उन्होंने फिल्म को सिर्फ पहली ‘आवारापन’ की कॉपी नहीं बनाया।</p>
<p>वह जानते हैं कि दर्शक सिर्फ पुराने गाने और इमरान हाशमी को देखने नहीं आए हैं। उन्हें शिवम की कहानी का अगला अध्याय भी चाहिए।</p>
<p>इसलिए फिल्म में पुरानी यादों के साथ एक नई कहानी रखी गई है। यही वजह है कि यह सीक्वल पूरी तरह अतीत के सहारे खड़ा नजर नहीं आता।</p>
<p>हालांकि कुछ जगह स्क्रीनप्ले की रफ्तार कमजोर पड़ती है और इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी खिंची हुई महसूस होती है।</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां</p>
<p>इमरान हाशमी का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। इसके साथ पुराने गानों का शानदार इस्तेमाल, डार्क वातावरण, भावनात्मक एक्शन और मजबूत सपोर्टिंग कास्ट कहानी को प्रभावी बनाते हैं।</p>
<p>सबसे खास बात यह है कि फिल्म अपने जॉनर को लेकर भ्रमित नहीं होती। यह रोमांस, दर्द, क्राइम, एक्शन और नॉस्टैल्जिया—इन सभी को एक ही दुनिया में पिरोने की कोशिश करती है।</p>
<p>कहां कमजोर पड़ती है ‘आवारापन 2’?</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी भी कहीं न कहीं उसकी पहली फिल्म से जुड़ी है।</p>
<p>जिस दर्शक ने 2007 की ‘आवारापन’ नहीं देखी है, उसके लिए शिवम का भावनात्मक सफर उतना प्रभावशाली नहीं हो सकता।</p>
<p>इसके अलावा मानव तस्करी वाला ट्रैक आगे बढ़ने के बाद कहानी के कई मोड़ अनुमानित लगने लगते हैं। इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में फिल्म की गति भी धीमी पड़ती है।</p>
<p>विलेन का किरदार भी जितना भय पैदा कर सकता था, उतना पूरी तरह नहीं कर पाता।</p>
<p>फाइनल वर्डिक्ट: शिवम पंडित अभी खत्म नहीं हुआ</p>
<p>‘आवारापन 2’ परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह एक ईमानदार सीक्वल जरूर है।</p>
<p>यह फिल्म उन दर्शकों के लिए सबसे ज्यादा खास है, जिन्होंने 2007 में शिवम पंडित को पहली बार देखा था और उसके दर्द को अपने भीतर महसूस किया था।</p>
<p>19 साल बाद इमरान हाशमी उसी किरदार में लौटते हैं—उसी खामोशी के साथ, उसी दर्द के साथ और उसी अधूरी मोहब्बत की परछाईं के साथ। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार शिवम के पास खोने के लिए सिर्फ अपनी मोहब्बत नहीं, बल्कि बचाने के लिए एक मासूम जिंदगी भी है।</p>
<p>कुछ कमजोर पटकथा वाले हिस्सों और अनुमानित मोड़ों के बावजूद फिल्म अपने इमोशनल हिस्से में दिल जीत लेती है।</p>
<p>और जब सिनेमाघर में ‘तो फिर आओ’ की धुन गूंजती है, इमरान हाशमी का चेहरा स्क्रीन पर आता है और शिवम पंडित फिर से अपनी दुनिया में लौटता है, तब एक बात साफ हो जाती है—</p>
<p>कुछ किरदार वक्त के साथ पुराने नहीं होते, वे सिर्फ यादों में और गहरे उतर जाते हैं।</p>
<p>‘आवारापन 2’ उन्हीं किरदारों में से एक—शिवम पंडित—की दर्द भरी, खूनी और भावुक वापसी है।</p>
<p>⭐ अंतिम रेटिंग: 3.5/5</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7f08d95c25b.jpg" length="112642" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:54:01 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Rating ⭐⭐⭐½/  - The 2nd Review: After 19 years, Shivam Pandit&#039;s pain, love and longing return</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जनगणना 2027 में पहली बार जाति की गिनती, 40 सवालों से जुटेगा देश का पूरा सामाजिक&amp;आर्थिक डेटा! कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/For-the-first-time-in-Census-2027,-caste-will-be-counted,-full-socio-economic-data-of-the-country-will-be-collected-with-40-questions-Questions-ranging-from-Covid-vaccination-to-bank-accounts-and-mobiles</link>
        <guid>https://delhilookout.com/For-the-first-time-in-Census-2027,-caste-will-be-counted,-full-socio-economic-data-of-the-country-will-be-collected-with-40-questions-Questions-ranging-from-Covid-vaccination-to-bank-accounts-and-mobiles</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना 2027 अब सिर्फ आबादी की गिनती नहीं होगी, बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय ढांचे की विस्तृत तस्वीर सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान लोगों की गिनती के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवाल अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें पहली बार जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।</p>
<p>भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश के अनुसार, लोगों से उनकी वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति की स्थिति, जाति, माता-पिता की जानकारी, मातृभाषा, शिक्षा, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और दिव्यांगता सहित कई अहम जानकारियां ली जाएंगी।</p>
<p>जाति का भी होगा पूरा ब्योरा</p>
<p>जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि पहली बार जातिगत विवरण दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी यह पूछेंगे कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है या नहीं और उसकी जाति क्या है। सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नावली में जातियों की कोई तैयार सूची देने के बजाय उत्तरदाता द्वारा बताई गई जानकारी दर्ज किए जाने की संभावना है।</p>
<p>जातिगत जनगणना कराने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लिया था।</p>
<p>कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल</p>
<p>सरकार द्वारा अधिसूचित सवालों में कई ऐसे प्रश्न भी हैं जो पहली नजर में सामान्य जनगणना से अलग दिखाई देते हैं। लोगों से कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस होने की जानकारी भी मांगी जाएगी।</p>
<p>इसके अलावा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवालों में पूछा जाएगा कि व्यक्ति ने पिछले वर्ष काम किया या नहीं, उसका पेशा क्या है, वह किस उद्योग, व्यापार या सेवा से जुड़ा है और उसकी आर्थिक गतिविधि की श्रेणी क्या है।</p>
<p>पलायन और जन्मस्थान का भी रिकॉर्ड</p>
<p>गणनाकर्मी लोगों से उनका जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, पलायन का कारण, वर्तमान गांव या शहर में रहने की अवधि और स्थायी आवासीय पता भी पूछेंगे। इससे देश में आंतरिक पलायन की तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी।</p>
<p>विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या, वर्तमान विवाह से हुए बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जीवित जन्मे बच्चों की जानकारी भी ली जाएगी।</p>
<p>पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना</p>
<p>भारत की यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के रूप में कराई जाएगी। लोगों को घर-घर जाकर जानकारी देने के अलावा सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 17 से 31 अगस्त के बीच लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे।</p>
<p>हिमपात वाले क्षेत्रों—लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित इलाकों—में लोगों की गिनती 1 से 30 सितंबर के बीच होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया अगले वर्ष होगी।</p>
<p>2021 की जनगणना कोरोना के कारण टली थी</p>
<p>देश में हर दस वर्ष में होने वाली जनगणना वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।</p>
<p>जनगणना का पहला चरण 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना का काम शामिल है।</p>
<p>जाति, शिक्षा, रोजगार, पलायन, डिजिटल साक्षरता और पहचान से जुड़े सवालों के साथ जनगणना 2027 देश की बदलती सामाजिक और आर्थिक तस्वीर का एक बेहद व्यापक डेटाबेस तैयार करने जा रही है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7effd0eee35.jpg" length="148966" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:15:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>For the first time in Census 2027, caste will be counted, full socio-economic data of the country will be collected with 40 questions! Questions ranging from Covid vaccination to bank accounts and mobiles</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CRPF का शौर्य सलाम! भारत  के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर सबसे ज्यादा वीरता पदक किए अपने नाम </title>
        <link>https://delhilookout.com/Salute-to-the-bravery-of-CRPF-Highest-number-of-gallantry-medals-awarded-on-Indias-80th-Independence-Day</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Salute-to-the-bravery-of-CRPF-Highest-number-of-gallantry-medals-awarded-on-Indias-80th-Independence-Day</guid>
        <description><![CDATA[ <p>15 अगस्त 2026 को जब भारत अपनी आजादी के 80 वर्ष पूरे करने जा रहा है, उसी गौरवपूर्ण अवसर पर देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रहरी CRPF के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, CRPF को कुल 86 वीरता एवं सेवा पदक प्रदान किए गए हैं। इनमें 24 वीरता पदक, 5 राष्ट्रपति पदक (विशिष्ट सेवा) और 57 पदक (सराहनीय सेवा) शामिल हैं।</p>
<p>CRPF के जवानों को मिले वीरता पदक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी दो अभियानों और मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए एक अभियान में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए मिले हैं। ये सभी अभियान वर्ष 2024 में हुए थे।</p>
<p>इसी सम्मान सूची में DIG एम. धिनकरन का नाम भी शामिल है, जिन्हें तीन दशक से अधिक की विशिष्ट सेवा, समर्पण, ईमानदारी और उत्कृष्ट पेशेवर योगदान के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया है। वे पहले SPG में सेवा दे चुके हैं और वर्तमान में चेन्नई के अवाडी स्थित CRPF रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर के प्रमुख हैं।</p>
<p>करीब 3.25 लाख कर्मियों वाला CRPF देश की आंतरिक सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<p>80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश उन वीर जवानों को नमन करता है, जिनकी बहादुरी, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा भारत की सुरक्षा और लोकतंत्र की मजबूत ढाल है। ????????</p>
<p>वीरता का सम्मान, राष्ट्र की शान — CRPF को शत-शत नमन।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7efb29ca06c.jpg" length="134829" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 16:55:51 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Salute to the bravery of CRPF! Highest number of gallantry medals awarded on India&#039;s 80th Independence Day</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कंगना का नसीरुद्दीन शाह पर करारा वार: ‘कुत्ता कहलाना मंजूर, लोमड़ी बनना नहीं’—बॉलीवुड की चुप्पी पर छिड़ी जुबानी जंग</title>
        <link>https://delhilookout.com/Kangana-Ranaut-hits-out-at-Naseeruddin-Shah,-says-allowed-to-be-called-a-dog,-not-a-fox-Bollywoods-silence</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Kangana-Ranaut-hits-out-at-Naseeruddin-Shah,-says-allowed-to-be-called-a-dog,-not-a-fox-Bollywoods-silence</guid>
        <description><![CDATA[ <p>बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के उस बयान पर तीखा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलनों के मुद्दे पर बॉलीवुड के बड़े सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया था। नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी के बाद अब कंगना ने सीधे उन पर निशाना साधते हुए उनकी देशभक्ति और कथित राजनीतिक मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>कंगना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए नसीरुद्दीन शाह से सवाल किया कि अगर उन्हें छात्र आंदोलनों और देश के मौजूदा हालात को लेकर इतनी चिंता है, तो वे झारखंड में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। कंगना ने इसी मुद्दे पर पीयूष मिश्रा का एक वीडियो भी शेयर किया और नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर अपनी नाराजगी जाहिर की।</p>
<p>‘कुत्ता कहलाना मंजूर, लोमड़ी बनना नहीं’</p>
<p>कंगना ने बेहद तीखे अंदाज में लिखा कि हर कोई किसी न किसी के प्रति वफादार होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह जिस देश की रोटी खाती हैं, उसकी रक्षा और उसके लिए लड़ने को तैयार हैं। इसके बाद उन्होंने नसीरुद्दीन शाह पर पड़ोसी देश के हित में बोलने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘लोमड़ी’ तक कह दिया।</p>
<p>कंगना ने तंज कसते हुए कहा कि आज के दौर में किसी इंसान को ‘कुत्ता’ कहना भी उनके लिए अपमान नहीं, बल्कि वफादारी और मासूमियत से जुड़ा कॉम्प्लिमेंट है। उन्होंने साफ कहा कि वह नसीरुद्दीन शाह की तरह ‘लोमड़ी’ कहलाने के बजाय वफादार ‘कुत्ता’ कहलाना पसंद करेंगी।</p>
<p>कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?</p>
<p>दरअसल, नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के बीच बॉलीवुड के बड़े सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े चेहरे तब बोलेंगे, जब उनका जमीर उन्हें इसकी इजाजत देगा।</p>
<p>नसीरुद्दीन शाह ने एक उदाहरण देते हुए बॉलीवुड सितारों की तुलना ऐसे कुत्ते से की थी, जिसके मुंह में हड्डी दबी हो। उनका इशारा कथित तौर पर इस बात की ओर था कि जब तक इन सितारों के हित सुरक्षित हैं, तब तक वे खुलकर अपनी आवाज नहीं उठाएंगे।</p>
<p>उनसे जब पूछा गया कि क्या लोग जानबूझकर अपने जमीर को दबाकर चुप रह रहे हैं, तो उन्होंने इस बात से सहमति जताई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सवाल यह है कि वे आखिर कब तक ऐसा कर पाएंगे और इसका जवाब आने वाला वक्त देगा।</p>
<p>अब आमने-सामने कंगना और नसीरुद्दीन शाह</p>
<p>नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी के बाद कंगना का पलटवार सामने आने से बॉलीवुड का यह विवाद और गरमा गया है। एक तरफ नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म इंडस्ट्री की चुप्पी और कलाकारों के जमीर पर सवाल उठाया, तो दूसरी तरफ कंगना ने पलटवार करते हुए उनकी विचारधारा और देश के प्रति प्रतिबद्धता पर ही सवाल खड़े कर दिए।</p>
<p>कंगना इससे पहले भी संसद और राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष को निशाने पर लेकर सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में नसीरुद्दीन शाह के बयान पर उनका यह आक्रामक जवाब बॉलीवुड और राजनीति—दोनों मोर्चों पर नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7c6b686a42b.jpg" length="108037" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 18:17:45 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Kangana Ranaut hits out at Naseeruddin Shah, says&#039; allowed to be called a dog, not a fox&#039; Bollywood&#039;s silence</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>परिसीमन और FCRA पर विजय सरकार का बड़ा वार, तमिलनाडु विधानसभा में मोदी सरकार के खिलाफ दो प्रस्ताव; DMK ने भी दिया साथ</title>
        <link>https://delhilookout.com/Tamil-Nadu-Assembly-passes-two-resolutions-against-Modi-government-on-delimitation,-FCRA</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Tamil-Nadu-Assembly-passes-two-resolutions-against-Modi-government-on-delimitation,-FCRA</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने महज दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार की दो अहम पहलों—परिसीमन और FCRA संशोधन विधेयक—के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराए। खास बात यह रही कि इन दोनों प्रस्तावों को मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी DMK ने भी समर्थन दिया। इस तरह तमिलनाडु इन दोनों मुद्दों पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य बन गया है।</p>
<p>परिसीमन पर विधानसभा में दो घंटे चली तीखी बहस</p>
<p>12 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र से अपील की गई कि लोकसभा में कुल सीटों की संख्या 543 पर ही कायम रखी जाए और जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले राज्यों को परिसीमन का नुकसान न उठाना पड़े।</p>
<p>प्रस्ताव पर विधानसभा में करीब दो घंटे तक जोरदार बहस हुई, जिसके बाद इसे सदन की मंजूरी मिल गई। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन के कारण महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण में और देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण को गंभीरता से लागू किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं मिलना चाहिए।</p>
<p>DMK ने बदला रुख, विजय सरकार के प्रस्ताव का समर्थन</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ DMK का समर्थन रहा। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट रुख है कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का स्वागत करते हुए कहा कि परिसीमन के प्रभाव को लेकर देश को सबसे पहले सचेत करने वाले आंदोलनों में DMK प्रमुख रहा है।</p>
<p>TVK की ओर से मंत्री आधव अर्जुन ने विधानसभा में DMK को धन्यवाद देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए पार्टी आभार की पात्र है।</p>
<p>DMK का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि पार्टी केंद्र के परिसीमन संबंधी प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है। विधानसभा में सामने आए इस रुख ने तमिलनाडु की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।</p>
<p>चिदंबरम ने कहा—543 सीटें नहीं बढ़नी चाहिए</p>
<p>कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने भी तमिलनाडु विधानसभा के कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या 543 पर कायम रहनी चाहिए। उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी को कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि इन राज्यों ने दशकों तक परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियां लागू की हैं।</p>
<p>चिदंबरम ने FCRA विधेयक पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने मांग की कि विधेयक को सिर्फ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला है।</p>
<p>FCRA संशोधन के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव</p>
<p>इससे एक दिन पहले मंगलवार को विजय सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराया था। इस प्रस्ताव को भी DMK का समर्थन मिला।</p>
<p>स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि FCRA में प्रस्तावित बदलाव परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं। खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण संस्थानों के कामकाज पर इसके असर को लेकर चिंता जताई गई।</p>
<p>केंद्र सरकार की ओर से मौजूदा मानसून सत्र में FCRA विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी थी, लेकिन विपक्षी दलों और ईसाई संगठनों के विरोध के बीच इसे फिलहाल JPC के पास भेज दिया गया है।</p>
<p>NEET पर भी केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव</p>
<p>विजय सरकार ने NEET के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में केंद्र से NEET समाप्त करने और 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश देने की मांग की गई।</p>
<p>इस प्रस्ताव को भी व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला। DMK के साथ AIADMK, PMK और वाम दलों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया। वहीं बीजेपी विधायक भोजराजन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।</p>
<p>तमिलनाडु की राजनीति में नई धुरी?</p>
<p>परिसीमन, FCRA और NEET जैसे राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विधानसभा से लगातार प्रस्ताव पारित कराकर विजय सरकार ने केंद्र के साथ टकराव का स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। वहीं परिसीमन के मुद्दे पर DMK का TVK सरकार के साथ खड़ा होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु विधानसभा के इन प्रस्तावों से दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर एक व्यापक राजनीतिक मोर्चा तैयार होगा? आने वाले दिनों में केंद्र और तमिलनाडु के बीच इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7c63ca529a5.jpg" length="117395" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:45:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Tamil Nadu Assembly passes two resolutions against Modi government on delimitation, FCRA</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>GEN Z STYLE &amp; ‘कूचू पुचू’ के बहाने दिल्ली पुलिस का बड़ा संदेश, पतंग उड़ाओ लेकिन चीनी मांझे से रहो दूर!</title>
        <link>https://delhilookout.com/GEN-Z-STYLE-–-Delhi-Police-sends-a-strong-message-using-Kuchu-Puchu:-Fly-kites,-but-stay-away-from-Chinese-manjha</link>
        <guid>https://delhilookout.com/GEN-Z-STYLE-–-Delhi-Police-sends-a-strong-message-using-Kuchu-Puchu:-Fly-kites,-but-stay-away-from-Chinese-manjha</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस जैसे-जैसे करीब आ रहा है, दिल्ली के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों की रौनक बढ़ने लगी है। 15 अगस्त के मौके पर राजधानी में बड़ी संख्या में लोग पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने लोगों को खतरनाक चीनी मांझे से दूर रहने की सलाह देने के लिए सोशल मीडिया पर बेहद दिलचस्प और वायरल अंदाज अपनाया है।</p>
<p>दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहे ‘कूचू पुचू तुम कहां हो’ मीम का इस्तेमाल करते हुए लोगों को जागरूक किया। पुलिस ने अपने पोस्ट में लिखा, “डियर कूचू पुचू, पतंग उड़ाओ लेकिन चीनी मांझा को ना कहो, समझे?” मीम के अंदाज में दिया गया यह संदेश लोगों का ध्यान खींच रहा है और सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।</p>
<p>वायरल चैट के जरिए समझाया खतरा</p>
<p>दिल्ली पुलिस ने एक काल्पनिक बातचीत के जरिए चीनी मांझे के खतरों को बेहद आसान अंदाज में समझाया। बातचीत में एक व्यक्ति पूछता है कि क्या कर रहे हो, जिसके जवाब में दूसरा कहता है कि वह पूरे जोश के साथ पतंग उड़ा रहा है। जब मांझे के बारे में पूछा जाता है तो वह ‘चाइनीज वाला’ बताता है।</p>
<p>इसके बाद उसे चेतावनी दी जाती है कि चीनी मांझा पक्षियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक है। जवाब में दूसरा व्यक्ति सुरक्षित मांझे का इस्तेमाल करने की बात कहता है।</p>
<p>पतंगबाजी का मजा कहीं हादसे में न बदल जाए</p>
<p>चीनी मांझे की तेज धार और मजबूत सिंथेटिक संरचना के कारण यह इंसानों और पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। बाइक या स्कूटर सवारों के गले और चेहरे पर मांझा फंसने से गंभीर चोटें आने की आशंका रहती है। कई बार सड़क पर पैदल चलने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।</p>
<p>इतना ही नहीं, चीनी मांझा पेड़ों, बिजली के तारों और इमारतों में फंसकर लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। इससे पतंगबाजी खत्म होने के बाद भी हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p>पक्षियों के लिए भी जानलेवा</p>
<p>चीनी मांझे का सबसे बड़ा खतरा पक्षियों के लिए भी है। उड़ते समय इसके संपर्क में आने से उनके पंख, पैर या गर्दन कट सकती है। कई पक्षी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और कई मामलों में उनकी जान तक चली जाती है।</p>
<p>आखिर क्यों खतरनाक है चीनी मांझा?</p>
<p>चीनी मांझा सामान्य सूती धागे की तुलना में ज्यादा मजबूत और धारदार होता है। इसे आमतौर पर सिंथेटिक नायलॉन या प्लास्टिक आधारित सामग्री से तैयार किया जाता है और कुछ मामलों में इसे बेहद महीन कांच या अन्य धारदार पदार्थों से कोट किया जाता है। यही वजह है कि यह आसानी से टूटता नहीं और संपर्क में आने पर गहरी चोट पहुंचा सकता है।</p>
<p>पतंग उड़ाइए, त्योहार का आनंद लीजिए, लेकिन ऐसी डोर का इस्तेमाल न करें जो किसी की जिंदगी के लिए खतरा बन जाए। दिल्ली पुलिस का ‘कूचू पुचू’ वाला संदेश इसी सावधानी को मजेदार अंदाज में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7c61a0c4cce.jpg" length="110613" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:35:58 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>GEN Z STYLE – Delhi Police sends a strong message using &#039;Kuchu Puchu&#039;: Fly kites, but stay away from Chinese manjha!</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा पर तीनों आरोप साबित, संसद में जांच रिपोर्ट पेश &amp; जस्टिस वर्मा घर पर मिले थे  500&amp;500 रुपये के नोटों से भरे बोरे</title>
        <link>https://delhilookout.com/All-three-charges-against-former-Delhi-High-Court-Judge-Yashwant-Varma-proven-inquiry-report-tabled-in-Parliament.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/All-three-charges-against-former-Delhi-High-Court-Judge-Yashwant-Varma-proven-inquiry-report-tabled-in-Parliament.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर मिले भारी मात्रा में कैश के मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। संसद में पेश की गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोपों को सही ठहराया गया है। कमेटी ने यह भी कहा कि बरामद नकदी को लेकर जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं थे।</p>
<p>मामला 14 मार्च 2025 की रात का है, जब जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद उसे बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को कथित तौर पर 500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे मिले थे। घटना के समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद मामला बेहद गंभीर न्यायिक विवाद में बदल गया और उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया।</p>
<p>कैश बरामदगी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसके बाद 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी।</p>
<p>हालांकि, अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। ऐसे में संसद में जांच रिपोर्ट का पेश होना इस पूरे मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आया है।</p>
<p>तीनों आरोपों पर कमेटी की मुहर</p>
<p>लोकसभा में बुधवार को पेश रिपोर्ट में जांच कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को प्रमाणित माना है। रिपोर्ट में बरामद नकदी को लेकर उनके जवाबों को भी असंतोषजनक बताया गया है।</p>
<p>अब इस रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ आगे की संवैधानिक और संसदीय कार्रवाई को लेकर तस्वीर और महत्वपूर्ण हो गई है। मामला न्यायपालिका की जवाबदेही, न्यायिक आचरण और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा होने के कारण इसे बेहद गंभीर माना जा रहा है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7c5fd2d08c3.jpg" length="108474" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:28:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>All three charges against former Delhi High Court Judge Yashwant Varma proven; inquiry report tabled in Parliament.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>योगी की दो टूक: यूपी में अपराध किया तो जेल या जहन्नुम की तैयारी रखो, विपक्ष पर भी बरसे CM</title>
        <link>https://delhilookout.com/There-are-two-types-of-yogis:-If-you-commit-a-crime-in-UP,-be-prepared-for-jail-or-hell.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/There-are-two-types-of-yogis:-If-you-commit-a-crime-in-UP,-be-prepared-for-jail-or-hell.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संत कबीर नगर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को संत कबीर नगर में 684 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 201 जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, विकास और सरकार की योजनाओं को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं विपक्षी दलों पर भी जमकर निशाना साधा।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश दंगों, कर्फ्यू, माफियाओं और गुंडागर्दी से परेशान था, लेकिन आज प्रदेश इन समस्याओं से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब कोई अपराधी बेटियों के साथ छेड़खानी नहीं कर सकता और न ही व्यापारियों को लूट सकता है।</p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उनके शब्दों में, “या तो जेल जाना होगा या फिर जहन्नुम की यात्रा के लिए तैयार रहना होगा।” मुख्यमंत्री के इस बयान ने जनसभा में मौजूद लोगों के बीच खासा असर छोड़ा।</p>
<p>‘2017 से पहले आम जनता थी त्रस्त’</p>
<p>मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की जनता बाढ़, बीमारी, दंगे, कर्फ्यू, गुंडागर्दी, जमीनों पर कब्जे और आस्था पर हो रहे प्रहार से त्रस्त रहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता था।</p>
<p>योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि “पाप वे करते थे और भुगतभोगी आप होते थे।” उन्होंने दावा किया कि आज प्रदेश में बिना भेदभाव के पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है।</p>
<p>95 हजार गरीब परिवारों को मिला पक्का मकान</p>
<p>मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संत कबीर नगर में करीब 95 हजार गरीब परिवारों को आवास की सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि बिना किसी सिफारिश के उन्हें पक्का मकान मिल सकेगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि करीब 3.5 लाख परिवारों के घरों में शौचालय का निर्माण कराया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में गरीबों के सपनों को साकार किया जा रहा है।</p>
<p>‘युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार के अवसर’</p>
<p>रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर ‘प्रोपगैंडा’ करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने युवाओं और गरीबों के लिए क्या किया था।</p>
<p>योगी ने कहा कि पहले बीमारी के कारण गरीबों के बच्चों की मौत होती थी और सरकारें मौन रहती थीं। आज उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है और गरीबों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब दंगे, कर्फ्यू और माफिया राज की पहचान से निकलकर विकास, सुरक्षा और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की प्राथमिकता बिना भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b15d79913b.jpg" length="131668" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 18:01:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>There are two types of yogis: If you commit a crime in UP, be prepared for jail or hell.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>PM मोदी का देशवासियों को संदेश: ‘हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा’, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति का महासंकल्प</title>
        <link>https://delhilookout.com/PM-Modis-message-to-the-countrymen:-Har-Ghar-Tiranga,-Har-Dil-Tiranga,-the-great-resolve-of-patriotism-on-80th-Independence-Day</link>
        <guid>https://delhilookout.com/PM-Modis-message-to-the-countrymen:-Har-Ghar-Tiranga,-Har-Dil-Tiranga,-the-great-resolve-of-patriotism-on-80th-Independence-Day</guid>
        <description><![CDATA[ <p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस से पहले देशवासियों में राष्ट्रभक्ति का जोश भरते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन का उत्सव बनाने की अपील की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जारी अपने विशेष वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से 15 अगस्त को अपने घरों पर पूरे सम्मान और गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आह्वान किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ महज कोई सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति हमारी निष्ठा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के उन अनगिनत वीरों को याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके त्याग और बलिदान की वजह से ही आज देशवासी स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।</p>
<p>‘हर घर में तिरंगा, हर दिल में तिरंगा’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि इस स्वतंत्रता दिवस पर भारत के हर घर और हर दिल में तिरंगे का गौरव दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर परिवार राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक फहराए और देश की नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के संघर्ष, शहीदों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों से जोड़े।</p>
<p>15 अगस्त को देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाएगा। ऐसे में प्रधानमंत्री ने इस राष्ट्रीय पर्व को केवल समारोह तक सीमित न रखते हुए इसे देश के प्रति संकल्प और जिम्मेदारी का अवसर बनाने का संदेश दिया।</p>
<p>तिरंगे के साथ ‘विकसित भारत’ का संकल्प</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से तिरंगे के सम्मान के साथ विकसित भारत के निर्माण का नया संकल्प लेने की भी अपील की। उन्होंने संदेश दिया कि देशभक्ति केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प भी इसका हिस्सा होना चाहिए।</p>
<p>इस बार स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के जरिए देशभर में राष्ट्रभक्ति की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिल सकती है, जहां तिरंगा हर घर की शान और हर भारतीय के दिल की पहचान बनेगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b13f61a14e.jpg" length="126644" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 17:52:53 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>PM Modi&#039;s message to the countrymen: &#039;Har Ghar Tiranga, Har Dil Tiranga&#039;, the great resolve of patriotism on 80th Independence Day</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अरुणाचल पर चीन की हेकड़ी को भारत का करारा जवाब, 27 जगहों के नाम दर्ज होते ही ड्रैगन बौखलाया</title>
        <link>https://delhilookout.com/Indias-reply-to-Chinas-attack-on-Arunachal,-as-soon-as-the-name-of-27-places-was-registered,-the-dragon-was-rattled</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Indias-reply-to-Chinas-attack-on-Arunachal,-as-soon-as-the-name-of-27-places-was-registered,-the-dragon-was-rattled</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक भारतीय नाम अपने नक्शे में दर्ज किए तो चीन बुरी तरह तिलमिला उठा। चीन ने भारत के इस कदम को अवैध और अमान्य करार दिया, लेकिन भारत ने भी साफ शब्दों में दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और कोई भी बयान, दावा या कार्रवाई इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।</p>
<p>चीन के नाम बदलने की चाल का भारत ने दिया जवाब</p>
<p>दरअसल, चीन वर्ष 2017 से लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम अपने हिसाब से बदलकर जारी करता रहा है। चीन का नागरिक मामलों का मंत्रालय समय-समय पर इन स्थानों के लिए चीनी नामों की सूची जारी करता है। इस साल अप्रैल में भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नए नामों की सूची जारी की थी।</p>
<p>भारत ने चीन की इस हरकत को हमेशा बेबुनियाद, निरर्थक और हास्यास्पद बताया है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि केवल स्थानों के नाम बदल देने से जमीन की वास्तविकता नहीं बदलती।</p>
<p>इसी क्रम में भारत ने पिछले सप्ताह अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया। यह कदम चीन की नाम बदलने की नीति के खिलाफ भारत का स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।</p>
<p>भारत के कदम से चीन में मची खलबली</p>
<p>भारत के इस कदम पर चीन ने सोमवार, 10 अगस्त 2026, को तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा कि चीन तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता और उसने अपने दावे को दोहराते हुए इस क्षेत्र को ‘जांगनान’ बताया।</p>
<p>चीन तिब्बत को ‘शीजांग’ और अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है। हालांकि भारत ने चीन की इस शब्दावली और क्षेत्रीय दावे को लगातार खारिज किया है।</p>
<p>‘नक्शे और नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी’</p>
<p>भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—अरुणाचल प्रदेश भारत का था, भारत का है और भारत का ही रहेगा। चीन चाहे कितनी भी बार स्थानों के नाम बदले या अपने नक्शे में बदलाव करे, इससे जमीन पर मौजूद वास्तविकता नहीं बदल सकती।</p>
<p>चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत के इस कदम को लेकर चेतावनी भरे अंदाज में रिपोर्ट प्रकाशित की और दावा किया कि इससे सीमा पर तनाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में भारत पर एकतरफा कदम उठाने का आरोप लगाया गया।</p>
<p>हालांकि भारत के लिए संदेश साफ है कि किसी देश की मनमानी नामकरण नीति उसके क्षेत्रीय दावों का आधार नहीं बन सकती। भारत ने चीन की ऐसी कोशिशों के सामने झुकने के बजाय अपने आधिकारिक नक्शे और रिकॉर्ड में भारतीय नाम दर्ज कराकर अपनी स्थिति और मजबूत तरीके से सामने रखी है।</p>
<p>चीन को भारत का साफ संदेश</p>
<p>भारत ने चीन को यह संकेत दे दिया है कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर अब सिर्फ बयानबाजी से दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश पर भारत का दावा ऐतिहासिक, प्रशासनिक और संवैधानिक रूप से स्पष्ट है।</p>
<p>चीन की आपत्ति के बावजूद भारत का रुख अडिग है—नाम बदलने की राजनीति से न सीमा बदलती है और न ही संप्रभुता। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस सच्चाई पर कोई सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b0dafbfd2a.jpg" length="121485" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 17:25:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>India&#039;s reply to China&#039;s attack on Arunachal, as soon as the name of 27 places was registered, the dragon was rattled</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान: JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने को सरकार तैयार</title>
        <link>https://delhilookout.com/Jharkhand-govt-ready-to-cancel-JPSC-Class-14-prelims,-backlog-exams-amid-student-protests</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Jharkhand-govt-ready-to-cancel-JPSC-Class-14-prelims,-backlog-exams-amid-student-protests</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को विधानसभा में सरकार का रुख साफ कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की भी जांच कराई जाएगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भर्ती परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञ सलाह ली जाएगी। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आ रही शिकायतों और संदेहों को गंभीरता से लिया जा रहा है।</p>
<p>TDPL पर उठाए सवाल, एजेंसी की भूमिका की जांच के संकेत</p>
<p>विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान हेमंत सोरेन ने JPSC की परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी उत्तर प्रदेश से जुड़ी है और उसका बिहार से भी संबंध रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बाहरी एजेंसियों के माध्यम से झारखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन परीक्षाओं को लेकर शिकायतें और संदेह सामने आए हैं, उनकी जांच कराने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। सरकार का फैसला केवल राजनीतिक दबाव के कारण नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के व्यापक उद्देश्य के तहत लिया गया है।</p>
<p>विपक्ष पर बरसे मुख्यमंत्री, छात्र आंदोलन को लेकर तीखा हमला</p>
<p>मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच सदन का माहौल गरम रहा। हेमंत सोरेन ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र और सदन की गरिमा की बात करते हैं, वही सदन में हंगामा कर उसकी गरिमा को तार-तार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।</p>
<p>सोरेन ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “गेरुआ पहनकर ढोंग तो करते ही हैं, अब पार्टी के लोग छात्र का चोला पहनकर राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगे हैं।” उनके इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया।</p>
<p>सोमवार के विधानसभा घेराव का भी किया जिक्र</p>
<p>मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सोमवार को हुए विधानसभा घेराव का भी उल्लेख किया। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है और प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पारदर्शिता और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>सरकार की ओर से अब 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की तैयारी तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच के ऐलान को आंदोलन के बीच बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि विपक्ष चाहे जितना हंगामा करे, सरकार अपने फैसलों पर आगे बढ़ेगी और भर्ती परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। आने वाले दिनों में सरकार के इन फैसलों और जांच की प्रक्रिया पर छात्रों तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b063a4ea1f.jpg" length="83113" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 16:53:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Jharkhand govt ready to cancel JPSC Class 14 prelims, backlog exams amid student protests</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>संसद का मकर द्वार बना रणक्षेत्र! NDA&amp;INDIA सांसद आमने.सामने &amp;  राहुल गांधी और अमित शाह पर घमासान</title>
        <link>https://delhilookout.com/Makar-Dwar-of-Parliament-has-become-a-battlefield-NDA-India-MPs-face-off-The-political-slugfest-between-Rahul-Gandhi-and-Amit-Shah-came-out-in-the-open-on-Tuesday-when-MPs-of-the-ruling-NDA-and-the-opposition-INDIA-block-came-face-to-face-at-Makar-Dwar.-Both-the-parties-raised-slogans-against-each-other-over-the-issue.-In-view-of-the-tension,-the-security-forces-had-to-create-a-cordon-between-the-two-groups.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Makar-Dwar-of-Parliament-has-become-a-battlefield-NDA-India-MPs-face-off-The-political-slugfest-between-Rahul-Gandhi-and-Amit-Shah-came-out-in-the-open-on-Tuesday-when-MPs-of-the-ruling-NDA-and-the-opposition-INDIA-block-came-face-to-face-at-Makar-Dwar.-Both-the-parties-raised-slogans-against-each-other-over-the-issue.-In-view-of-the-tension,-the-security-forces-had-to-create-a-cordon-between-the-two-groups.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>संसद के बाहर मंगलवार को सियासी टकराव उस वक्त खुलकर सामने आ गया, जब मकर द्वार पर सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी INDIA ब्लॉक के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा बलों को दोनों गुटों के बीच घेरा बनाना पड़ा।</p>
<p>NDA सांसद संसद पुस्तकालय से अपनी साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद मकर द्वार पहुंचे। इस दौरान भाजपा सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ ‘राहुल गांधी जवाब दो’ और ‘राहुल गांधी भागो मत’ जैसे नारे लगाए। भाजपा सांसदों का आरोप था कि राहुल गांधी देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहे हैं।</p>
<p>वहीं, INDIA ब्लॉक के सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में 20 जुलाई को पेपर लीक के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही अयोध्या में राम मंदिर के चंदे की कथित चोरी के आरोपों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा।</p>
<p>प्रदर्शन में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी सांसद मौजूद रहे। विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट करें।</p>
<p>दरअसल, सरकार ने सोमवार को देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के साथ चर्चा की घोषणा की थी। इसके बाद राहुल गांधी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि देश संसद में गृह मंत्री की ‘सामान्य विषयों’ पर राय नहीं, बल्कि यह जानना चाहता है कि क्या प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन चलाने का आदेश दिया गया था।</p>
<p>झारखंड का मुद्दा बना संसद के बाहर सियासी हथियार</p>
<p>भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए झारखंड में छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो के साथ मारपीट की गई। भाजपा ने इस पूरे मामले को लेकर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार और कांग्रेस पर सवाल खड़े किए।</p>
<p>भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी झारखंड में छात्रों के साथ कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया तथा उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार से जवाब मांगा जाना चाहिए।</p>
<p>रांची में बढ़ा था छात्र आंदोलन का तनाव</p>
<p>झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को और उग्र हो गया था। विधानसभा की ओर मार्च कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति पैदा हो गई।</p>
<p>संसद के बाहर मंगलवार का प्रदर्शन इसी मुद्दे की राजनीतिक गूंज का नया केंद्र बन गया। एक तरफ भाजपा ने झारखंड में छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर विपक्ष को घेरा, तो दूसरी तरफ INDIA ब्लॉक ने केंद्र सरकार से दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर जवाब मांगा।</p>
<p>मकर द्वार पर आमने-सामने आए दोनों राजनीतिक खेमों ने साफ कर दिया कि छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोप अब संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद परिसर के बाहर भी बड़े राजनीतिक मुद्दे बन चुके हैं।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b040e0b368.jpg" length="151395" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 16:45:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Makar Dwar of Parliament has become a battlefield! NDA-India MPs face off The political slugfest between Rahul Gandhi and Amit Shah came out in the open on Tuesday when MPs of the ruling NDA and the opposition INDIA block came face to face at Makar Dwar. Both the parties raised slogans against each other over the issue. In view of the tension, the security forces had to create a cordon between the two groups.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज, ‘जॉम्बी ड्रग’ वीडियो को लेकर हरभजन सिंह और सरकार आमने&amp;सामने</title>
        <link>https://delhilookout.com/Harbhajan-Singh-slams-Punjab-government-over-zombie-drug-video</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Harbhajan-Singh-slams-Punjab-government-over-zombie-drug-video</guid>
        <description><![CDATA[ <p>चंडीगढ़। पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वायरल वीडियो को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चीमा का दावा है कि जिस वीडियो को पंजाब का बताकर प्रचारित किया जा रहा है, वह वास्तव में पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का है।</p>
<p>हरभजन सिंह ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर यह वीडियो साझा करते हुए पंजाब में नशे की स्थिति पर चिंता जताई थी। वीडियो में पगड़ी पहने दो युवक असामान्य अवस्था में खड़े नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे कथित तौर पर ‘जॉम्बी ड्रग’ से जोड़कर देखा जाने लगा। कुछ ऑनलाइन दावों में युवकों की हालत को xylazine और opioids से जुड़े नशीले पदार्थों के सेवन से जोड़ने की कोशिश की गई।</p>
<p>हालांकि, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीडियो की लोकेशन को लेकर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो पंजाब का नहीं है और इसे पंजाब से जोड़कर पेश करना राज्य और पंजाबियों की छवि खराब करने की कोशिश है।</p>
<p>चीमा का आरोप—‘एंटी-पंजाब नैरेटिव’ का हिस्सा है वीडियो</p>
<p>हरपाल सिंह चीमा ने हरभजन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था और उम्मीद की थी कि वह पंजाबी युवाओं के लिए सकारात्मक रोल मॉडल बनेंगे। चीमा का आरोप है कि भाजपा के साथ आने के बाद हरभजन सिंह पंजाब से जुड़े मुद्दों को अलग तरीके से पेश कर रहे हैं।</p>
<p>चीमा ने कहा कि गैर-पंजाब के वीडियो को पंजाब का बताकर साझा करना भाजपा के कथित ‘एंटी-पंजाब और एंटी-पंजाबी’ नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के मुद्दे पर पंजाब को लगातार निशाना बनाकर राज्य की छवि खराब करने का राजनीतिक प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>गुजरात के बंदरगाहों से ड्रग्स पहुंचने का आरोप</p>
<p>नशे के मुद्दे पर पलटवार करते हुए चीमा ने गुजरात के बंदरगाहों पर पकड़ी गई नशीली दवाओं की बड़ी खेपों का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पहुंचने वाला ड्रग्स गुजरात के रास्ते आ रहा है और यह सवाल भी उठाया कि गुजरात में लगातार ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद राजनीतिक चर्चा का केंद्र केवल पंजाब को क्यों बनाया जाता है।</p>
<p>चीमा ने कहा कि गुजरात भाजपा शासित राज्य है और नशे की सप्लाई चेन को लेकर वहां की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।</p>
<p>‘वार ऑन ड्रग्स’ को लेकर सरकार का दावा</p>
<p>पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, ‘वार ऑन ड्रग्स’ अभियान के तहत ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने, तस्करों और पैडलरों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ-साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p>वहीं, विपक्ष और सरकार के बीच नशे के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। ऐसे में हरभजन सिंह द्वारा साझा किए गए वीडियो ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है।</p>
<p>अब बड़ा सवाल यही है कि वायरल वीडियो की वास्तविक लोकेशन क्या है और पंजाब में नशे की समस्या पर राजनीतिक आरोपों से अलग जमीनी सच्चाई कितनी गंभीर है?</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b022f3fc61.jpg" length="88427" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 16:36:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Harbhajan Singh slams Punjab government over &#039;zombie drug&#039; video</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मुख्यमंत्री आवास पर BJP विधायकों का प्रदर्शन या ‘हत्या की साजिश’? झारखंड में मंत्री इरफान अंसारी के गंभीर आरोप से सियासी भूचाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/Protest-by-BJP-MLAs-at-CMs-residence-or-conspiracy-to-murder-Jharkhand-minister-Irfan-Ansari</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Protest-by-BJP-MLAs-at-CMs-residence-or-conspiracy-to-murder-Jharkhand-minister-Irfan-Ansari</guid>
        <description><![CDATA[ <p>रांची। झारखंड की राजनीति में उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकारी आवास के बाहर हुए बीजेपी विधायकों के धरना-प्रदर्शन को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए। मंत्री ने दावा किया कि यह प्रदर्शन महज राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि इसके पीछे मुख्यमंत्री को जान से मारने की साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>इरफान अंसारी ने कहा कि जिस वक्त बीजेपी विधायक मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आवास के अंदर मौजूद थे। मंत्री ने इसे मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है।</p>
<p>‘अगर कोई दीवार फांदकर अंदर चला जाता तो?’</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री का सरकारी आवास सड़क के किनारे स्थित है और अगर प्रदर्शन के दौरान कोई व्यक्ति सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर प्रवेश कर जाता तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ घर में मौजूद थे। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जाए और यह जांच हो कि प्रदर्शन के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।</p>
<p>इरफान अंसारी का बड़ा दावा</p>
<p>मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर एक बड़े खतरे से बाल-बाल बचे। उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायकों का मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर धरना देना सामान्य राजनीतिक प्रदर्शन की श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है।</p>
<p>इरफान अंसारी ने यह भी कहा कि यदि जांच में मुख्यमंत्री को नुकसान पहुंचाने या उनकी हत्या के प्रयास की साजिश के कोई तथ्य सामने आते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p>हालांकि, मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश संबंधी मंत्री के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। बीजेपी की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p>छात्र आंदोलन के बीच बढ़ा सियासी तापमान</p>
<p>यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्रों की मांगों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों पर कहा है कि सरकार उनकी अधिकांश मांगें स्वीकार करने के लिए तैयार है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा और जरूरत पड़ने पर सभी परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी कही है।</p>
<p>अब मुख्यमंत्री आवास के बाहर हुए बीजेपी विधायकों के प्रदर्शन को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों ने झारखंड की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। सवाल सिर्फ विरोध प्रदर्शन का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रदर्शन की कथित मंशा की जांच का भी है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7b005b099a0.jpg" length="124322" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 16:28:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Protest by BJP MLAs at CM&#039;s residence or &#039;conspiracy to murder&#039;? Jharkhand minister Irfan Ansari</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Blinkit पर FDA का बड़ा एक्शन: कॉकरोच, गंदगी और एक्सपायर्ड सामान मिलने पर खाद्य लाइसेंस सस्पेंड</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-FDAs-big-action-on-Blinkit:-Food-license-suspended-for-finding-cockroaches,-filth-and-expired-goods</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-FDAs-big-action-on-Blinkit:-Food-license-suspended-for-finding-cockroaches,-filth-and-expired-goods</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मुंबई | 11 अगस्त 2026</p>
<p>महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जारी सख्त कार्रवाई के बीच Blinkit से जुड़ी कंपनी पर बड़ा एक्शन हुआ है। महाराष्ट्र राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मुंबई के मालाड स्थित Blink Commerce Pvt. Ltd. के प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है।</p>
<p>FDA की जांच में प्रतिष्ठान के अंदर अस्वच्छता, बड़ी संख्या में कॉकरोच, खाद्य पदार्थों का गलत तरीके से भंडारण, एक्सपायर्ड और छेड़छाड़ किए गए पैकेज्ड खाद्य पदार्थ समेत खाद्य सुरक्षा नियमों के कई गंभीर उल्लंघन सामने आए।</p>
<p>7 अगस्त को हुआ था FDA का निरीक्षण</p>
<p>FDA बृहन्मुंबई विभाग की खाद्य सुरक्षा टीम ने 7 अगस्त 2026 को मालाड (West) स्थित Blink Commerce Private Limited के प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों को कई ऐसी खामियां मिलीं, जो सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी हैं।</p>
<p>निरीक्षण में जंग लगे रैक, फर्श पर रखे खाद्य पदार्थ, अपर्याप्त रूप से साफ कोल्ड स्टोरेज, अव्यवस्थित स्टोरेज और खराब स्वच्छता व्यवस्था सामने आई।</p>
<p>फलों और सब्जियों के स्टॉक में कॉकरोच</p>
<p>जांच के दौरान सबसे गंभीर स्थिति फलों और सब्जियों के स्टॉक में सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक वहां बड़ी संख्या में कॉकरोच का प्रकोप पाया गया, जिससे खाद्य पदार्थों के दूषित होने का गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।</p>
<p>कोल्ड रूम में एक्सपायर्ड, खराब और छेड़छाड़ किए गए पैकेज्ड खाद्य पदार्थ भी पाए गए। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के स्टोरेज और हैंडलिंग वाले क्षेत्रों में कीट एवं चूहों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले।</p>
<p>FIFO/FEFO नियमों का भी पालन नहीं</p>
<p>FDA निरीक्षण में खाद्य पदार्थों के स्टॉक को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक FIFO/FEFO प्रणाली का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और रखरखाव में भी गंभीर कमियां पाई गईं।</p>
<p>अधिकारियों को खाद्य पदार्थ संभालने वाले कर्मचारियों की मेडिकल जांच एवं स्वास्थ्य रिकॉर्ड से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं मिले। कर्मचारियों के लिए जरूरी व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था में भी कमी पाई गई।</p>
<p>लाइसेंस सस्पेंड, कारोबार पर रोक</p>
<p>इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए FDA ने Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 32(3) तथा संबंधित खाद्य लाइसेंस एवं पंजीकरण नियमों के तहत Blink Commerce Private Limited का खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।</p>
<p>लाइसेंस निलंबित रहने के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान से खाद्य पदार्थों की बिक्री, वितरण या किसी भी प्रकार का खाद्य कारोबार संचालित करने पर रोक लगा दी गई है।</p>
<p>FDA ने स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि में यदि प्रतिष्ठान में खाद्य कारोबार चलता पाया गया, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>खाद्य सुरक्षा पर प्रशासन का सख्त संदेश</p>
<p>इस कार्रवाई से साफ है कि महाराष्ट्र FDA खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। खासतौर पर ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है, जहां बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थों का भंडारण और वितरण होता है।</p>
<p>उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ FDA की यह कार्रवाई एक सख्त चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a7afe0273b55.jpg" length="131669" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 16:18:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The FDA&#039;s big action on Blinkit: Food license suspended for finding cockroaches, filth and expired goods</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में दिखेगी Gen&amp;Z की ताकत, ‘वंदे मातरम’ से गूंजेगा ऐतिहासिक प्राचीर</title>
        <link>https://delhilookout.com/On-Indias-80th-Independence-Day,-the-power-of-Gen-Z-will-be-seen-in-the-Red-Fort,-the-historic-rampart-will-resonate-with-Vande-Mataram</link>
        <guid>https://delhilookout.com/On-Indias-80th-Independence-Day,-the-power-of-Gen-Z-will-be-seen-in-the-Red-Fort,-the-historic-rampart-will-resonate-with-Vande-Mataram</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_1_0">नई दिल्ली | </span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_2_0">भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को पूरे देशभक्ति के जोश के साथ मनाने जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_2_1">इस बार दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह युवाओं और नई पीढ़ी की भागीदारी के लिए खास रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_2_2">सरकार ने समारोह में ‘युवा शक्ति’ को प्रमुखता देने की व्यापक तैयारी की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_3_0">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_3_1">समारोह में देश की उपलब्धियों, युवा प्रतिभाओं और तकनीकी प्रगति को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_3_2">परमाणु प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत की झलक भी कार्यक्रम में देखने को मिलेगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_4_0">पहली बार लाल किले से गूंजेगा ‘वंदे मातरम’</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_5_0">इस वर्ष का समारोह ऐतिहासिक रूप से भी बेहद खास है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_5_1">‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगान के रूप में ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया जाएगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_6_0">समारोह में महिला उद्यमियों, किसानों, कारीगरों और युवा उपलब्धि हासिल करने वालों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेष अतिथियों को सम्मानित किया जाएगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="bd984c79ad6c5fea_6_1">अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्रों को भी विशेष सम्मान दिया जाएगा।</span></p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a79c17fe0660.jpg" length="129913" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:48:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>On India&#039;s 80th Independence Day, the power of Gen-Z will be seen in the Red Fort, the historic rampart will resonate with &#039;Vande Mataram&#039;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>संसद में घमासान: राम मंदिर चढ़ावा विवाद और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष अड़ा</title>
        <link>https://delhilookout.com/Uproar-in-Parliament:-Opposition-hits-out-at-govt-over-Ram-temple-row,-action-against-students</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Uproar-in-Parliament:-Opposition-hits-out-at-govt-over-Ram-temple-row,-action-against-students</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_1_1">संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_1_2">कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा और चंदा अनियमितताओं तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई—दोनों मुद्दों पर विपक्ष अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_2_0">कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष की दोनों मांगों को अलग-अलग करके विपक्षी एकजुटता तोड़ने की केंद्र सरकार की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_3_0">रमेश के मुताबिक, विपक्ष की पहली मांग प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान और उसके बाद दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_4_0">वहीं दूसरी मांग अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर चंदा और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और संसद के दोनों सदनों में व्यापक चर्चा की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_5_0">कांग्रेस नेता ने दावा किया कि विपक्ष संसद का सत्र शुरू होने के बाद से ही इन दोनों मुद्दों को लगातार और मजबूती से उठा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_5_1">उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में की थी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_6_0">सरकार चर्चा के लिए तैयार, लेकिन विपक्ष से शांति की अपील</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_7_0">इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू ने कहा है कि सरकार छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा कराने और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_7_1">हालांकि, उन्होंने विपक्ष से सदन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_8_0">कांग्रेस का कहना है कि दोनों मुद्दों को अलग-अलग करके देखने की कोशिश विपक्षी एकता को कमजोर करने की रणनीति है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_8_1">जयराम रमेश ने दोहराया कि विपक्ष इन दोनों मांगों को अलग नहीं होने देगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_9_0">अब नजर संसद की अगली कार्यवाही पर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_10_0">एक तरफ सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का संकेत दे रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष दोनों मुद्दों पर अपनी संयुक्त मांग पर कायम है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="2666975e1e340a55_10_1">ऐसे में संसद की अगली कार्यवाही के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।</span></p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a79c15025613.jpg" length="104012" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:47:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Uproar in Parliament: Opposition hits out at govt over Ram temple row, action against students</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रांची में छात्र आंदोलन उग्र: विधानसभा घेराव के दौरान बैरिकेडिंग टूटी, वाटर कैनन और लाठीचार्ज के बीच छात्रों का प्रदर्शन</title>
        <link>https://delhilookout.com/Students-protest-in-Ranchi.-Barricading-broken-during-Assembly-siege,-students-protest-amid-water-cannons-and-lathicharge</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Students-protest-in-Ranchi.-Barricading-broken-during-Assembly-siege,-students-protest-amid-water-cannons-and-lathicharge</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_1_0">रांची | 10 अगस्त 2026</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_2_0">झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार, 10 अगस्त को अपने चरम पर पहुंच गया। </span><span data-hovered="true" data-sentence="1a287fda9c046a79_2_1">पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हजारों छात्रों ने नई विधानसभा की ओर ‘विधानसभा घेराव’ मार्च निकाला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_2_2">प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_3_0">प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_3_1">स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_3_2">जवाब में कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों की ओर चप्पलें और पानी की खाली बोतलें फेंकीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_4_0">JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_5_0">आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_6_0">छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_6_1">उनका कहना है कि यदि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_7_0">वाटर कैनन चला तो डांस करने लगे छात्र</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_8_0">प्रदर्शन के दौरान एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_8_1">जब पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, तो कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच डांस करते नजर आए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_8_2">हालांकि, इसके साथ ही बैरिकेडिंग तोड़ने और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की घटनाओं ने प्रदर्शन की गंभीरता भी बढ़ा दी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_9_0">छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बोले—‘भविष्य दांव पर है’</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_10_0">आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी खराब सेहत के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_10_1">उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य उनकी अपनी सेहत से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_11_0">महतो के अनुसार, “यहां छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, जो मेरी सेहत से ज्यादा दुखद है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_11_1">मेरी सेहत उन छात्रों के भविष्य से ज्यादा जरूरी नहीं है, जिनके मौकों को कथित तौर पर बेचा जा रहा है।</span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_11_2">”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_12_0">उन्होंने आगे कहा कि उनकी सेहत काफी कमजोर है, लेकिन छात्रों के भविष्य को लेकर मौजूदा परिस्थितियां उससे भी अधिक चिंताजनक हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_12_1">उनके मुताबिक, लाखों छात्रों के भविष्य पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_13_0">मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_14_0">देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि छात्र नेताओं की भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। </span><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_14_1">आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार और संबंधित आयोगों को छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_15_0">रांची में सोमवार को हुए विधानसभा घेराव के बाद अब सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती है कि आंदोलनकारी छात्रों की मांगों और कानून-व्यवस्था—दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="1a287fda9c046a79_16_0">फिलहाल रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।</span></p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a79c10c3a525.jpg" length="135115" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:46:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Students protest in Ranchi. Barricading broken during Assembly siege, students protest amid water cannons and lathicharge</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>FSSAI का डाबर पर बड़ा एक्शन: &amp;apos;100% Natural&amp;apos; और &amp;apos;100% Pure&amp;apos; जैसे दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक</title>
        <link>https://delhilookout.com/FSSAIs-big-action-on-Dabur:-Ban-on-sale-of-food-products-with-claims-like-100-Natural-and-100-Pure</link>
        <guid>https://delhilookout.com/FSSAIs-big-action-on-Dabur:-Ban-on-sale-of-food-products-with-claims-like-100-Natural-and-100-Pure</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जा रहे भ्रामक दावों पर सख्त रुख अपनाते हुए डाबर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने कंपनी को उन खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है, जिन पर "100% Natural", "100% Pure", "100% Organic", "100% Purity" और "100% Tender Coconut Water" जैसे दावे किए जा रहे थे।</p>
<p>FSSAI के मुताबिक, कंपनी की वेबसाइट पर कई उत्पाद ऐसे पूर्ण दावों के साथ बेचे जा रहे थे, जो न केवल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं बल्कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित भी नहीं किए जा सकते। नियामक का कहना है कि इस प्रकार के दावे उपभोक्ताओं के खरीद निर्णय को प्रभावित करते हैं और उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता को लेकर गलत धारणा बना सकते हैं।</p>
<p>विज्ञापन नियमों का उल्लंघन</p>
<p>FSSAI ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के तहत किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में किए जाने वाले दावे वैज्ञानिक प्रमाणों और वैध आधार पर होने चाहिए। "100 प्रतिशत" जैसे पूर्ण दावे तभी स्वीकार्य हैं जब उन्हें प्रमाणित किया जा सके। जांच में पाया गया कि संबंधित दावे इन मानकों पर खरे नहीं उतरे।</p>
<p>पहले नोटिस, अब सख्त कार्रवाई</p>
<p>प्राधिकरण ने बताया कि इससे पहले भी डाबर इंडिया को ऐसे भ्रामक दावों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर अब कंपनी को ऐसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश दिया गया है।</p>
<p>उपभोक्ताओं के लिए बड़ा संदेश</p>
<p>FSSAI का यह कदम पूरे खाद्य उद्योग के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि विज्ञापनों और पैकेजिंग पर किए जाने वाले दावों में पारदर्शिता और वैज्ञानिक प्रमाण अनिवार्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से कंपनियों को अपने प्रचार-प्रसार में अधिक जिम्मेदारी बरतनी होगी और उपभोक्ताओं को भी उत्पाद चुनते समय केवल आकर्षक दावों के बजाय प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।</p>
<p>यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बाजार में "नेचुरल", "प्योर" और "ऑर्गेनिक" जैसे शब्दों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। FSSAI ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71e5161e0b8.jpg" length="105145" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:42:00 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>FSSAI&#039;s big action on Dabur: Ban on sale of food products with claims like &#039;100% Natural&#039; and &#039;100% Pure&#039;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>असम CRPF कैंप में फायरिंग: 3 जवानों की मौत, एक गंभीर घायल; घटना की जांच जारी</title>
        <link>https://delhilookout.com/Firing-at-CRPF-camp-in-Assam-One-killed,-3-seriously-injured-Investigation-into-the-incident-is-underway</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Firing-at-CRPF-camp-in-Assam-One-killed,-3-seriously-injured-Investigation-into-the-incident-is-underway</guid>
        <description><![CDATA[ <p><br>असम के नगांव जिले के कतिमारी स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) कैंप में सोमवार को हुई गोलीबारी की दुखद घटना ने पूरे सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैंप के भीतर तैनात एक एएसआई ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से साथी जवानों पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद तीन जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे कैंप को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, फायरिंग में जवान रामनवल सिंह यादव और विष्णु प्रसाद बघेल गंभीर रूप से घायल हुए और उपचार से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद कथित रूप से एएसआई बल्लानी प्रेमाबरम ने स्वयं को भी गोली मार ली, जिससे उसकी भी मौत हो गई। वहीं घायल जवान गोविंद श्रीपुल का नगांव के अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही CRPF के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल को सील कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p>फिलहाल फायरिंग के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां व्यक्तिगत विवाद, मानसिक तनाव, ड्यूटी से जुड़े कारणों और अन्य संभावित पहलुओं सहित सभी कोणों से मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।</p>
<p>इस दर्दनाक घटना से CRPF और अन्य सुरक्षा बलों में शोक का माहौल है। साथ ही यह घटना सुरक्षा बलों के जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल के तनाव और समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की मांग करती है।</p>
<p>दिल्ली लुकआउट दिवंगत जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और घायल जवान के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है। जांच पूरी होने तक घटना के कारणों को लेकर किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना आवश्यक है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71e37c56c8d.jpg" length="110291" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:35:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Firing at CRPF camp in Assam One killed, 3 seriously injured Investigation into the incident is underway</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>KAWAD YATRA 2026 &amp; कांवड़ यात्रा या कानून से टकराव? आस्था की राह पर हिंसा के बढ़ते साए</title>
        <link>https://delhilookout.com/KAWAD-YATRA-2026---Conflict-of-law-or-conflict-of-interest-Violence-on-the-path-of-faith</link>
        <guid>https://delhilookout.com/KAWAD-YATRA-2026---Conflict-of-law-or-conflict-of-interest-Violence-on-the-path-of-faith</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट विशेष</p>
<p>सावन का महीना... "बोल बम" के जयघोष... लाखों शिवभक्तों की आस्था... लेकिन इसी पवित्र यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से सामने आई हिंसा, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान ऐसी तस्वीरें क्यों सामने आती हैं? क्या कुछ लोगों की गुंडागर्दी पूरी यात्रा की पवित्रता पर दाग लगा रही है?</p>
<p>मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और रुड़की में हुई चार अलग-अलग घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आस्था के नाम पर कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति आखिर कब रुकेगी?</p>
<p>मेरठ: पुलिसकर्मियों को जीप से घसीटकर पीटा</p>
<p>सबसे चौंकाने वाली घटना मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र में हुई। हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे दो कांवड़ियों के बीच पहले आपसी टक्कर हुई। इसी दौरान एक बाइक सवार पर टक्कर मारने का आरोप लगा।</p>
<p>सूचना मिलने पर दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में सरकारी वाहन से मौके पर पहुंचे। लेकिन आरोपी के वहां से निकल जाने के बाद कुछ कांवड़ियों का गुस्सा पुलिस पर ही फूट पड़ा।</p>
<p>आरोप है कि पुलिसकर्मियों को सरकारी जीप से बाहर खींचकर उनके साथ मारपीट की गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।</p>
<p>लखनऊ: बच्चों से भरी स्कूल वैन पर बरसे पत्थर</p>
<p>राजधानी लखनऊ के चरक चौराहे के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बच्चों से भरी एक स्कूल वैन पर पथराव कर दिया गया।</p>
<p>पत्थरों की वजह से वैन के शीशे टूट गए और अंदर बैठे मासूम बच्चे डर के मारे रोने लगे। कुछ देर तक सड़क पर हंगामा चलता रहा। बाद में स्थानीय लोगों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी भी विवाद की कीमत मासूम बच्चों को क्यों चुकानी पड़े?</p>
<p>गाजियाबाद: मरीज लेकर जा रही एंबुलेंस 50 मिनट तक जाम में फंसी</p>
<p>गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ मार्ग पर रेलवे रोड के सामने एक एंबुलेंस की हल्की टक्कर कांवड़ियों की ट्रॉली से हो गई, जिससे कांवड़ क्षतिग्रस्त हो गई।</p>
<p>इसके बाद नाराज कांवड़ियों ने एंबुलेंस चालक की पिटाई कर दी और सड़क पर हंगामा शुरू कर दिया।</p>
<p>स्थिति इतनी बिगड़ गई कि करीब 50 मिनट तक लंबा जाम लगा रहा, जिसमें मरीज को लेकर जा रही वही एंबुलेंस भी फंस गई। सड़क पर लगभग एक किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई।</p>
<p>यह घटना केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।</p>
<p>रुड़की: कार में जमकर तोड़फोड़, बाद में सामने आई चौंकाने वाली बात</p>
<p>उत्तराखंड के रुड़की में हरिद्वार से लौट रहे कांवड़ियों की एक कार से टक्कर हो गई, जिससे एक कांवड़ क्षतिग्रस्त हो गई।</p>
<p>गुस्साए कुछ लोगों ने कार में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद हालात काबू में आए।</p>
<p>सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस कार में तोड़फोड़ की गई, उसमें भी कांवड़िए ही सवार थे। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो</p>
<p>चारों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में सड़क पर मारपीट, पथराव, तोड़फोड़ और अफरा-तफरी साफ दिखाई दे रही है।</p>
<p>हालांकि पुलिस का कहना है कि हर घटना की अलग-अलग जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी।</p>
<p>पुलिस की सख्ती, पहचान शुरू</p>
<p>मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और रुड़की पुलिस ने वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी समूह से जुड़ा हो।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल... हर साल आखिर क्यों दोहराई जाती हैं ऐसी घटनाएं?</p>
<p>कांवड़ यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का पर्व है। लाखों लोग शांतिपूर्वक भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर यात्रा पूरी करते हैं।</p>
<p>लेकिन हर वर्ष कुछ असामाजिक तत्वों की हिंसक हरकतें पूरी यात्रा की गरिमा को नुकसान पहुंचाती हैं।</p>
<p>धार्मिक आस्था कभी भी कानून से ऊपर नहीं हो सकती। यदि किसी दुर्घटना या विवाद की स्थिति बनती भी है तो उसका समाधान पुलिस और कानून के माध्यम से होना चाहिए, न कि सड़क पर हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के जरिए।</p>
<p>दिल्ली लुकआउट की बात</p>
<p>आस्था सम्मान की हकदार है, लेकिन अराजकता कभी स्वीकार्य नहीं हो सकती। कांवड़ यात्रा का संदेश भक्ति, अनुशासन और संयम है। यदि कुछ लोग हिंसा का रास्ता चुनते हैं, तो वे केवल कानून ही नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और इस पवित्र परंपरा की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं।</p>
<p>धर्म हमें संयम सिखाता है, उन्माद नहीं। कानून का सम्मान ही किसी भी आस्था की सबसे बड़ी पहचान है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71e2162f4dc.jpg" length="149946" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:29:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>KAWAD YATRA 2026 - Conflict of law or conflict of interest? Violence on the path of faith</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>36 देशों से 274 भगोड़े भारत लौटे: मोदी सरकार ने प्रत्यर्पण को बनाया राष्ट्रीय प्राथमिकता, कानूनों और तकनीक से मिली रफ्तार</title>
        <link>https://delhilookout.com/274-Fugitives-from-36-Countries-Returned-to-India:-Modi-govt-has-made-extradition-a-national-priority.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/274-Fugitives-from-36-Countries-Returned-to-India:-Modi-govt-has-made-extradition-a-national-priority.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट</p>
<p>भारत से फरार होकर विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के मार्गदर्शन में भगोड़ों की वापसी को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।</p>
<p>सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कानूनों में संशोधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका परिणाम यह रहा कि वर्षों से विदेशों में छिपे कई आरोपी अब भारतीय कानून के दायरे में लाए जा सके हैं।</p>
<p>2014 से पहले धीमी थी प्रत्यर्पण प्रक्रिया</p>
<p>सरकार का कहना है कि 2014 से पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई चुनौतियों से घिरी हुई थी। कई मामलों में दस्तावेज अधूरे होते थे, विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी रहती थी और कानूनी प्रक्रियाएं लंबी खिंच जाती थीं।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2004 से 2013 के बीच औसतन हर वर्ष केवल चार भगोड़े अपराधियों को ही भारत वापस लाया जा सका, जबकि बड़ी संख्या में प्रत्यर्पण अनुरोध वर्षों तक लंबित पड़े रहे।</p>
<p>कानूनों में बदलाव से बढ़ी कार्रवाई की ताकत</p>
<p>सरकार ने बताया कि 2019 में एनआईए और यूएपीए कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिससे आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कार्रवाई को मजबूती मिली।</p>
<p>इसके बाद 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भी भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रावधान जोड़े गए। विशेष रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार यह व्यवस्था की गई कि यदि आरोपी जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसकी गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी।</p>
<p>'भारतपोल' से इंटरपोल नेटवर्क हुआ मजबूत</p>
<p>सरकार ने जानकारी दी कि जनवरी 2025 में 'भारतपोल' (Bharatpol) की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से सीधे जोड़ा गया।</p>
<p>सरकार के अनुसार, पहले जहां सूचनाओं के आदान-प्रदान में लंबा समय लगता था, वहीं अब कई मामलों में आवश्यक जानकारी तीन से दस दिनों के भीतर साझा की जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हुई है।</p>
<p>401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी</p>
<p>सरकार ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित अपराधियों की गिरफ्तारी और लोकेशन साझा करने में मदद मिलती है।</p>
<p>सरकार का दावा</p>
<p>केंद्र सरकार का कहना है कि कानूनों में सुधार, एजेंसियों के बेहतर समन्वय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से भारत अब भगोड़े अपराधियों के खिलाफ पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और तेज कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने के अभियान को और अधिक गति दी जाएगी।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71dfb4a0685.jpg" length="70731" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:18:59 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>274 Fugitives from 36 Countries Returned to India: Modi govt has made extradition a national priority.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>फैक्ट चेक: पुराने सिक्कों के बदले 5&amp;10 लाख रुपये देने का दावा फर्जी, पीएम मोदी का वायरल वीडियो निकला मैनिपुलेटेड</title>
        <link>https://delhilookout.com/Fact-Check:-Viral-video-of-PM-Modi-offering-Rs-5-10-lakh-in-exchange-for-old-coins-is-fake</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Fact-Check:-Viral-video-of-PM-Modi-offering-Rs-5-10-lakh-in-exchange-for-old-coins-is-fake</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट</p>
<p>सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुराने सिक्कों की एक कथित सरकारी प्रदर्शनी (Exhibition) का प्रचार करते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार पुराने और दुर्लभ सिक्कों की प्रदर्शनी आयोजित कर रही है, जहां नागरिक अपने पुराने सिक्के बेचकर 5 लाख से 10 लाख रुपये तक प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>हालांकि, यह दावा पूरी तरह भ्रामक और फर्जी है।</p>
<p>वायरल वीडियो में क्या किया जा रहा है दावा?</p>
<p>वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कथित तौर पर लोगों से अपील करते दिखाई देते हैं कि वे अपने पुराने सिक्के सरकारी प्रदर्शनी में लेकर आएं। वीडियो में यह भी दावा किया जाता है कि सरकार इन सिक्कों को सीधे खरीदेगी और बदले में लाखों रुपये का भुगतान करेगी।</p>
<p>वीडियो देखने के बाद कई लोग इसे वास्तविक सरकारी योजना समझकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।</p>
<p>PIB Fact Check ने बताया सच</p>
<p>भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल वीडियो की जांच की और इसे पूरी तरह फर्जी (Fake) करार दिया है।</p>
<p>PIB ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में Twitter) अकाउंट पर स्पष्ट किया कि यह वीडियो डिजिटल रूप से छेड़छाड़ (Manipulated) करके बनाया गया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज और वीडियो का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके।</p>
<p>PIB ने कहा कि सरकार ने पुराने सिक्कों की ऐसी किसी प्रदर्शनी का आयोजन नहीं किया है, न ही किसी अधिकृत खरीदार के माध्यम से लोगों से सिक्के खरीदने की कोई योजना चलाई जा रही है।</p>
<p>लोगों से की गई अपील</p>
<p>PIB Fact Check ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी भी वीडियो या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें।</p>
<p>यदि किसी सरकारी योजना की जानकारी लेनी हो तो केवल सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों या अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही जानकारी प्राप्त करें।</p>
<p>दिल्ली लुकआउट की सलाह<br>सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो को बिना जांचे-परखे सच न मानें।<br>प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या किसी सरकारी संस्था के नाम पर किए जा रहे बड़े आर्थिक दावों की पहले आधिकारिक पुष्टि करें।<br>किसी भी संदिग्ध वीडियो या संदेश की सत्यता जानने के लिए PIB Fact Check या संबंधित सरकारी स्रोतों का सहारा लें।<br>फर्जी वीडियो और AI से तैयार किए गए मैनिपुलेटेड कंटेंट से सतर्क रहें।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71de5bbca4c.jpg" length="102998" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:13:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Fact Check: Viral video of PM Modi offering Rs 5-10 lakh in exchange for old coins is fake</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>राज्यसभा से भी पास हुआ जन्म&amp;मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, अब देर से रजिस्ट्रेशन पर सख्त नियम लागू</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-Rajya-Sabha-also-passed-the-Birth-and-Death-Registration-Amendment-Bill,-now-strict-rules-on-late-registration</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-Rajya-Sabha-also-passed-the-Birth-and-Death-Registration-Amendment-Bill,-now-strict-rules-on-late-registration</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट ब्यूरो</p>
<p>देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा ने भी 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक 31 जुलाई को लोकसभा से मंजूरी प्राप्त कर चुका था।</p>
<p>विपक्ष के हंगामे के बीच दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में बदलाव कर देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त और प्रमाणिक बनाना है।</p>
<p>क्या बदलेगा नए कानून में?</p>
<p>सरकार के अनुसार अब यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।</p>
<p>इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देर से दर्ज कराए जाने वाले मामलों की उचित जांच हो और किसी भी प्रकार की फर्जी प्रविष्टि या दस्तावेज़ी अनियमितता को रोका जा सके।</p>
<p>दो वर्ष से अधिक देरी होने पर और कड़े होंगे नियम</p>
<p>विधेयक के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश के बाद ही संभव होगा।</p>
<p>गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी अनुमति देने से पहले प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच करेगा। सत्यापन के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी।</p>
<p>समय पर पंजीकरण को मिलेगा बढ़ावा</p>
<p>सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से लोगों को जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक, विश्वसनीय और अद्यतन रहेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं, पहचान संबंधी दस्तावेजों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।</p>
<p>लोकसभा से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी</p>
<p>इस विधेयक को 31 जुलाई को लोकसभा ने भी विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित कर दिया था। विपक्षी दलों ने इसे महत्वपूर्ण विधेयक बताते हुए मांग की थी कि अमित शाह स्वयं सदन में उपस्थित होकर इसका जवाब दें। गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष ने नारेबाजी भी की, हालांकि हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब के साथ विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।</p>
<p>क्या होगा इसका प्रभाव?</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाएगा। फर्जी प्रमाणपत्रों पर अंकुश लगेगा, सरकारी डेटाबेस की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में नागरिकों को पहचान, उत्तराधिकार, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शी और प्रमाणिक व्यवस्था का लाभ मिलेगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a71dcd3ed32e.jpg" length="92172" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:06:40 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The Rajya Sabha also passed the Birth and Death Registration Amendment Bill, now strict rules on late registration</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अहंकार, सत्ता&amp;भक्ति और सनसनी से ऊपर उठकर पत्रकारिता को फिर से जनता का विश्वास जीतना होगा। मीडिया को अब आत्ममंथन करना ही होगा</title>
        <link>https://delhilookout.com/Headline---Media-has-to-understand-the-movement-of-youth-on-Jantar-Let-go-of-arrogance-and-flattery,-now-the-media-is-needed-The-Message-of-Self-Realization:-The-media-needs-to-introspect-now.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Headline---Media-has-to-understand-the-movement-of-youth-on-Jantar-Let-go-of-arrogance-and-flattery,-now-the-media-is-needed-The-Message-of-Self-Realization:-The-media-needs-to-introspect-now.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>हेडलाइन- मीड़िया को जंतर पर युवाओं के आंदोलन को गहाई से समझना होगा! अंहकार और चापलूसी छोड़ अब मीड़िया को जरूरत है आत्ममंथन की <br>जंतर-मंतर का संदेश: मीडिया को अब आत्ममंथन करना ही होगा</p>
<p>Headline - Media has to understand the movement of youth on Jantar! Let go of arrogance and flattery, now the media is needed The Message of Self-Realization: The media needs to introspect now.</p>
<p>Rising above arrogance, power-devotion and sensationalism, journalism has to win the trust of the people again.</p>
<p>दिल्ली के जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों और युवाओं का आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित घटना नहीं था। यह आंदोलन देश के लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था और सबसे बढ़कर मीडिया की विश्वसनीयता पर उठे गंभीर सवालों का प्रतीक बन गया। आंदोलन समाप्त हो सकता है, लेकिन उसके दौरान उठी आवाज़ें लंबे समय तक भारतीय लोकतंत्र और पत्रकारिता को झकझोरती रहेंगी।</p>
<p>इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि बड़ी संख्या में युवाओं ने मुख्यधारा के मीडिया के प्रति अपना गहरा असंतोष व्यक्त किया। यह असंतोष किसी एक चैनल या पत्रकार तक सीमित नहीं था, बल्कि उस पत्रकारिता के खिलाफ था जिस पर लगातार सत्ता के पक्ष में खड़े होने, जनसरोकारों की अनदेखी करने और असुविधाजनक सवालों से बचने के आरोप लगते रहे हैं।</p>
<p>निस्संदेह, किसी भी पत्रकार पर शारीरिक हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता। पत्रकारों की सुरक्षा उतनी ही आवश्यक है जितनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। लेकिन इस घटना के पीछे छिपे संदेश को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यदि समाज का एक बड़ा वर्ग मीडिया पर भरोसा खोने लगे, तो यह केवल मीडिया का नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र का संकट बन जाता है।</p>
<p>पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता का प्रचार करना नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछना है। लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसकी भूमिका जनता और सरकार के बीच एक निष्पक्ष प्रहरी की होती है। जब मीडिया सत्ता से कठिन प्रश्न पूछना छोड़ देता है और केवल उसकी उपलब्धियों का प्रसार करने लगता है, तब उसकी विश्वसनीयता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।</p>
<p>भारतीय पत्रकारिता का इतिहास जनसेवा, स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान समाचार पत्र किसी व्यापारिक संस्था से अधिक एक जनआंदोलन का हिस्सा थे। उनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना था। समय के साथ मीडिया का विस्तार हुआ, तकनीक बदली और व्यवसाय भी बढ़ा, लेकिन इसी दौर में बाज़ार, विज्ञापन और राजनीतिक प्रभाव ने पत्रकारिता की प्राथमिकताओं को भी प्रभावित किया।</p>
<p>आज मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी विश्वसनीयता है। दर्शक और पाठक समाचार चाहते हैं, लेकिन पक्षपातपूर्ण या अधूरी जानकारी नहीं। जब किसी महत्वपूर्ण जनआंदोलन को शुरुआती दिनों में पर्याप्त स्थान नहीं मिलता और बाद में वही घटना राष्ट्रीय बहस बन जाती है, तब स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं कि समाचारों का चयन पत्रकारिता के आधार पर हो रहा है या किसी अन्य दबाव के कारण।</p>
<p>व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, टीआरपी की होड़, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सरकारी विज्ञापनों पर बढ़ती निर्भरता ने भी मीडिया की स्वतंत्रता को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में निष्पक्ष पत्रकारिता करना कठिन अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं। आज भी अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद तथ्य आधारित, साहसी और जनपक्षीय रिपोर्टिंग कर रहे हैं। यही पत्रकारिता समाज का विश्वास बचाए हुए है।</p>
<p>डिजिटल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारों की बढ़ती लोकप्रियता भी इसी परिवर्तन का संकेत है। लोग अब केवल बड़े चैनलों पर निर्भर नहीं हैं। वे अनेक स्रोतों से जानकारी लेकर स्वयं सत्य की पड़ताल करना चाहते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि पारंपरिक मीडिया की आवश्यकता समाप्त हो गई है, बल्कि यह कि उसे अपने काम करने के तरीके पर गंभीरता से विचार करना होगा।</p>
<p>मीडिया को यह समझना होगा कि उसकी सबसे बड़ी पूंजी सरकारी विज्ञापन, टीआरपी या राजनीतिक निकटता नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। यदि यह विश्वास एक बार खो गया तो उसे वापस पाना अत्यंत कठिन होगा। पत्रकारिता की प्रतिष्ठा केवल बड़े स्टूडियो, चमकदार ग्राफिक्स या ऊँची आवाज़ वाली बहसों से नहीं बनती; वह बनती है तथ्य, निष्पक्षता, ईमानदारी और साहस से।</p>
<p>जंतर-मंतर का आंदोलन मीडिया के लिए एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि जनता अब सवाल पूछ रही है। अवसर इसलिए कि अभी भी समय है अपनी दिशा सुधारने का। यदि मीडिया सत्ता, बाज़ार और वैचारिक आग्रहों से ऊपर उठकर जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को सर्वोच्च स्थान दे, तो वह खोया हुआ विश्वास फिर से अर्जित कर सकता है।</p>
<p>लोकतंत्र में मजबूत सरकार जितनी आवश्यक है, उतनी ही आवश्यक मजबूत और स्वतंत्र पत्रकारिता भी है। इसलिए आज सबसे अधिक आवश्यकता किसी बहस, बचाव या आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि आत्ममंथन की है। पत्रकारिता का भविष्य उसी दिन सुरक्षित होगा, जिस दिन मीडिया फिर से सत्ता की नहीं, सत्य की पहरेदारी को अपना सबसे बड़ा धर्म मान लेगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a6c9e17be257.jpg" length="114200" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:37:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Headline - Media has to understand the movement of youth on Jantar! Let go of arrogance and flattery, now the media is needed The Message of Self-Realization: The media needs to introspect now.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली दंगे: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्या मामले में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-Delhi-riots:-Tahir-Hussain,-5-others-convicted-in-IB-officer-Ankit-Sharma-murder-case</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-Delhi-riots:-Tahir-Hussain,-5-others-convicted-in-IB-officer-Ankit-Sharma-murder-case</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026: वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।</p>
<p>सजा सुनाते हुए अदालत ने इस हत्या को "अत्यंत गंभीर, निर्मम और समाज को झकझोर देने वाला अपराध" बताया। न्यायालय ने कहा कि पीड़ित की हत्या जिस क्रूरता से की गई, वह सामान्य आपराधिक घटनाओं से कहीं अधिक भयावह थी। अदालत के अनुसार, अंकित शर्मा के शव के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया और उसे घसीटकर चांद बाग के नाले में फेंक दिया गया।</p>
<p>कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां<br>अदालत ने कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था।<br>हत्या के बाद शव के साथ किया गया व्यवहार भी अपराध की गंभीरता को दर्शाता है।<br>यह घटना समाज को झकझोर देने वाली थी और लोगों को सोचने पर मजबूर करती है।<br>दिल्ली पुलिस ने मांगी थी फांसी</p>
<p>सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले को "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी का बताते हुए कहा कि अंकित शर्मा पर बेहद बर्बर हमला किया गया था।</p>
<p>पुलिस के अनुसार:</p>
<p>अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे।<br>इनमें 7 घाव घातक थे।<br>16 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे।<br>मृत्यु के बाद भी उनके शव को क्षति पहुंचाई गई।<br>पहले हो चुके थे दोषी करार</p>
<p>इस मामले में 13 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को हत्या सहित अन्य आरोपों में दोषी ठहराया था। सजा के ऐलान से पहले अदालत परिसर और कोर्ट रूम की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई थी।</p>
<p>बचाव पक्ष का पक्ष</p>
<p>सजा पर बहस के दौरान ताहिर हुसैन के वकील ने मृत्युदंड की मांग का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि केवल शरीर पर मौजूद घावों की संख्या के आधार पर किसी मामले को मृत्युदंड योग्य नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ताहिर हुसैन ने घटना के दौरान स्वयं पुलिस को फोन किया था।</p>
<p>अंततः अदालत ने सभी परिस्थितियों और पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a6c9b45a9b19.jpg" length="115164" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:25:39 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The Delhi riots: Tahir Hussain, 5 others convicted in IB officer Ankit Sharma murder case</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मैं पीएम मोदी गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि मासूम छात्रों पर लाठी चलाने की क्या जरूरत थी. पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया. क्या ये छात्र आतंकवादी थे &amp;प्रियंका गांधी</title>
        <link>https://delhilookout.com/I-want-to-ask-PM-Modi-and-the-Home-Minister:-what-was-the-need-to-lathi-charge-innocent-students-Who-ordered-the-use-of-pellet-guns-Were-these-students-terrorists-—-Priyanka-Gandhi</link>
        <guid>https://delhilookout.com/I-want-to-ask-PM-Modi-and-the-Home-Minister:-what-was-the-need-to-lathi-charge-innocent-students-Who-ordered-the-use-of-pellet-guns-Were-these-students-terrorists-—-Priyanka-Gandhi</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लोकसभा में कई दिनों से जारी गतिरोध के मंगलवार (28 जुलाई) को समाप्त होने और पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाले विधेयक पर चर्चा शुरू होने की संभावना है. सरकार ने लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल सोमवार को पेश कर दिया था, लेकिन विपक्ष ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया था.<br>कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, सरकार नौजवानों से क्यों डरती है. अभी तक एक भी माफिया को सजा नहीं मिली.  शिक्षा तंत्र में आरएसएस के प्रचारकों को भरा जा रहा है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद में लाठी चार्ज के दौरान घायल छात्रों से मिलने का जिक्र किया. उन्होंने कहा, 'किसी की पीड़ा का मजाक न उड़ाया जाए. मैं पीएम मोदी गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि मासूम छात्रों पर लाठी चलाने की क्या जरूरत थी. पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया. क्या ये छात्र आतंकवादी थे.'<br>लोकसभा में अखिलेश यादव ने कहा, 'जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया. सोचिए सदस्यों को कितनी बड़ी राहत मिली होगी और वे किस बड़े संकट से बच गए. एक 'प्रधान' को हटाकर, आपने असल में 'प्रधानमंत्री' को बचा लिया.'<br>अखिलेश यादव ने सदन में एंटी पेपर लीक पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, ' ये पहला आंदोलन देखा जिसमें मां बाप भी जुड़ गए. धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सरकार ने अपने प्रधानमंत्री को बचा लिया. मैं युवाओं के हौसले और एकता को सलाम करता हूं, जिसने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. प्रधान का स्वागत किसी हीरो की तरह किया गया. बीजेपी सांसद इस बात से राहत महसूस कर रहे थे कि प्रधान ने प्रधानमंत्री को बचा लिया.'<br>पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल सोमवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा कराने पर सहमत हुए थे.<br>इस पर विचार-विमर्श के लिए कम से कम छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था.<br>विधेयक में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव है. इसके तहत प्रश्नपत्र लीक कराने या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, प्रश्नपत्र लीक से जुड़े संगठित अपराध के मामलों में कम से कम सात वर्ष के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है.<br>विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्य नीट प्रश्नपत्र लीक के कारण कई बच्चों की कथित आत्महत्या के मामलों, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर सरकार को घेर सकते हैं. वहीं, सत्तापक्ष के सदस्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, विपक्ष शासित राज्यों में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं तथा पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुई ऐसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए जवाबी हमला कर सकते हैं.<br>बीस जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया था, जिसके कारण कोई महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो सका. सोमवार को भी नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर दोनों सदनों में गतिरोध बना रहा.</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a6898920036b.jpg" length="91764" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:25:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>I want to ask PM Modi and the Home Minister: what was the need to lathi-charge innocent students? Who ordered the use of pellet guns? Were these students terrorists? — Priyanka Gandhi</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पेपर लीक पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन: संसद में &amp;apos;एंटी पेपर लीक बिल&amp;apos; पेश, 90 दिन में फैसला और दोषियों को 10 साल तक की सजा का प्रावधान</title>
        <link>https://delhilookout.com/Modi-governments-biggest-action-on-paper-leak:-The-Anti-Paper-Leak-Bill-introduced-in-Parliament,-the-verdict-in-90-days-and-the-punishment-of-up-to-10-years-for-the-culprits-New-Delhi.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Modi-governments-biggest-action-on-paper-leak:-The-Anti-Paper-Leak-Bill-introduced-in-Parliament,-the-verdict-in-90-days-and-the-punishment-of-up-to-10-years-for-the-culprits-New-Delhi.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली।</p>
<p>देशभर में पेपर लीक को लेकर उठे जनआक्रोश और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संसद में 'एंटी पेपर लीक (संशोधन) बिल' पेश कर दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह विधेयक प्रस्तुत किया। सरकार का दावा है कि यह कानून देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर निर्णायक प्रहार करेगा।</p>
<p>जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने तेज़ी से कदम उठाते हुए कानून को पहले से कहीं अधिक सख्त बनाने का फैसला किया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, जहां रोज़ाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाया जाएगा।</p>
<p>संसद से संदेश: छात्रों के भविष्य पर राजनीति नहीं</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने का है।</p>
<p>उन्होंने कहा,</p>
<p>"अब मुद्दे को भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। सरकार छात्रों के हित में जो सुधार लेकर आई है, उस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। बहानेबाज़ी का समय खत्म हो चुका है। छात्रों के भविष्य के लिए यह बिल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे पारित कराया जाएगा।"</p>
<p>पुराने कानून बनाम नया संशोधन: क्या-क्या बदलेगा?<br>1. सजा होगी दोगुनी<br>पहले: 3 से 5 वर्ष तक की सजा<br>अब: 5 से 10 वर्ष तक की सजा<br>2. जुर्माना 1000 गुना तक बढ़ेगा<br>पहले: ₹10 लाख<br>अब: ₹10 करोड़<br>3. जांच एजेंसी में बड़ा बदलाव<br>पहले: केंद्रीय जांच एजेंसी जांच करती थी।<br>अब: विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित होगी।<br>4. जांच की समय सीमा तय<br>पहले: कोई निर्धारित समय नहीं।<br>अब: 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य।<br>5. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई<br>पहले: सामान्य अदालत।<br>अब: विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट।<br>6. 90 दिन में फैसला<br>पहले: निर्णय के लिए कोई समय सीमा नहीं।<br>अब: 3 महीने के भीतर फैसला अनिवार्य।<br>7. हाईकोर्ट में अपील<br>पहले: कोई तय समय नहीं।<br>अब: 30 दिनों के भीतर अपील।<br>8. हाईकोर्ट का भी समयबद्ध फैसला<br>पहले: समय सीमा नहीं।<br>अब: 3 महीने के भीतर हाईकोर्ट का निर्णय।<br>पीएम मोदी लगातार युवाओं से कर रहे संवाद</p>
<p>पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं से संवाद कर रहे हैं।</p>
<p>23 जुलाई: नया सख्त कानून लाने का भरोसा।<br>24 जुलाई: युवाओं के समर्थन के लिए धन्यवाद।<br>26 जुलाई: हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा।<br>नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स</p>
<p>प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई में 6 सदस्यीय हाई पावर टास्क फोर्स बनाई जाएगी।</p>
<p>यह समिति—</p>
<p>परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने के सुझाव देगी।<br>पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय बताएगी।<br>डिजिटल निगरानी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर सरकार को सिफारिशें देगी।<br>भविष्य में पेपर लीक की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए रोडमैप तैयार करेगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि "पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव</p>
<p>जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया।</p>
<p>पदभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास करेंगे।</p>
<p>अब तक सरकार की बड़ी कार्रवाई</p>
<p>पेपर लीक पर सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं—</p>
<p>NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया।<br>संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की तैयारी।<br>शिक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक फेरबदल।<br>NTA की आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव।<br>परीक्षा सुरक्षा के लिए नई तकनीकी व्यवस्था लागू करने की तैयारी।<br>दिल्ली पुलिस द्वारा सभी प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाओं की जांच के लिए विशेष STF का गठन।<br>पेपर लीक मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की कार्रवाई।<br>देश की परीक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा सुधार?</p>
<p>सरकार का दावा है कि यह संशोधन केवल सजा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब निगाहें संसद पर हैं कि यह विधेयक कब पारित होता है और देश के करोड़ों छात्रों को कितनी जल्दी इसका लाभ मिल पाता है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a67383931823.jpg" length="110674" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 16:21:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Modi government&#039;s biggest action on paper leak: The &#039;Anti-Paper Leak Bill&#039; introduced in Parliament, the verdict in 90 days and the punishment of up to 10 years for the culprits New Delhi.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सरकार–CJP वार्ता बेनतीजा: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा आंदोलन, दो मांगों पर बनी सहमति. धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ेगा इस्तीफा!</title>
        <link>https://delhilookout.com/Government-CJP-talks-called-off-Protest-over-Dharmendra-Pradhans-resignation</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Government-CJP-talks-called-off-Protest-over-Dharmendra-Pradhans-resignation</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित विट्ठल हाउस में अहम बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली इस वार्ता में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से बातचीत की।</p>
<p>बैठक में CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को एक बार फिर सरकार के सामने रखा। इनमें पहली और सबसे अहम मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग उन परिवारों को आर्थिक मुआवजा देने की थी, जिनके परिजनों ने कथित तौर पर नीट पेपर लीक प्रकरण से मानसिक रूप से आहत होकर आत्महत्या की। तीसरी मांग आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लेने तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न करने की थी।</p>
<p>दो मांगों पर सकारात्मक संकेत, लेकिन इस्तीफे पर सरकार का साफ इनकार</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, सरकार मुआवजा और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखा रही है। हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार फिलहाल सहमत नहीं है।</p>
<p>सरकारी पक्ष का कहना है कि केवल मंत्री का इस्तीफा समाधान नहीं है। सरकार का फोकस परीक्षा प्रणाली की खामियों को दूर करने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है। इसी दिशा में भविष्य में नीट परीक्षा को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p>CJP का ऐलान: इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन</p>
<p>बैठक के बाद CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि संगठन अपनी पहली मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p>उन्होंने दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं और छात्रों को अब भी हिरासत में लिया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार ने मुआवजे और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक संकेत दिए हैं।</p>
<p>सरकार एक्शन मोड में, कई बड़े फैसलों की घोषणा</p>
<p>इस बीच, नीट पेपर लीक मामले को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।</p>
<p>सरकार ने इस पूरे विवाद के बाद कई अहम कदम उठाने का दावा किया है। इनमें फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई, नकल रोकने के लिए संशोधन विधेयक को मंजूरी तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि इन घोषणाओं के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारी फिलहाल अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a6333934bbda.jpg" length="112943" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:12:50 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Government-CJP talks called off Protest over Dharmendra Pradhan&#039;s resignation</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली में NEETपेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार पर सीजेपी ने कहा कि &amp;quot;इतना अंहकार ठीक नही&amp;quot;</title>
        <link>https://delhilookout.com/On-the-Supreme-Courts-refusal-to-give-an-urgent-hearing-on-the-alleged-police-action-during-a-protest-by-students-over-the-NEET-paper-leak-case-in-Delhi,-the-CJP-said-so-much-arrogance-is-not-right.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/On-the-Supreme-Courts-refusal-to-give-an-urgent-hearing-on-the-alleged-police-action-during-a-protest-by-students-over-the-NEET-paper-leak-case-in-Delhi,-the-CJP-said-so-much-arrogance-is-not-right.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है। अदालत की टिप्पणी—"हमें वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है... अपना और हमारा समय बर्बाद मत कीजिए"—ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब नागरिक कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो को सबूत के रूप में पेश करना चाहते हैं, तो क्या अदालत को कम से कम उन्हें देखने पर विचार नहीं करना चाहिए था।</p>
<p>सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने गुरुवार को मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। वकील ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित बल प्रयोग हुआ और उसके वीडियो उपलब्ध हैं। हालांकि, अदालत ने वीडियो देखने से इनकार करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने अदालत के रुख पर सवाल उठाए। इसी बीच सोशल मीडिया पर सौरव दास की एक पोस्ट भी तेजी से वायरल हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी की आलोचना की। यह पोस्ट व्यापक रूप से साझा की जा रही है, हालांकि यह एक व्यक्तिगत राय है।</p>
<p>यह मामला 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित 'संसद चलो' मार्च से जुड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र और युवा कार्यकर्ता दिल्ली में जुटे थे। उनकी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार किए जाएं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि संवेदनशील मामलों में तत्काल सुनवाई और प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्यों के प्रति न्यायालय का दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए। वहीं, अदालत ने फिलहाल केवल तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया है; इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि याचिका के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय दे दिया गया है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a60b12e5a2cb.jpg" length="141797" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 17:31:55 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>On the Supreme Court&#039;s refusal to give an urgent hearing on the alleged police action during a protest by students over the NEET paper leak case in Delhi, the CJP said &quot;so much arrogance is not right.&quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>&amp;quot;नीट पेपर लीक पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर सीधा हमला: &amp;apos;152 पेपर लीक, छात्रों पर लाठियां... क्या यही नया भारत है?&amp;apos;</title>
        <link>https://delhilookout.com/Rahul-Gandhi-attacks-Modi-govt-over-NEET-paper-leak,-says-152-papers-leaked,-students-lathicharged-Is-this-the-new-India-</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Rahul-Gandhi-attacks-Modi-govt-over-NEET-paper-leak,-says-152-papers-leaked,-students-lathicharged-Is-this-the-new-India-</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी तेज हो गया है। सोमवार को दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प और कथित लाठीचार्ज के बाद बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बेरहमी से अत्याचार किया गया और सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय छात्रों की आवाज दबाने में लगी है।</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देशभर के छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपने भविष्य को बचाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय देने की बजाय पुलिस बल का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हजारों छात्रों ने ऐसा कौन-सा अपराध किया था कि उनके सामने सुरक्षाबलों की बंदूकें और लाठियां खड़ी कर दी गईं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "छात्र सिर्फ इतना चाहते हैं कि देश की शिक्षा व्यवस्था ईमानदार और पारदर्शी हो। वे अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।"</p>
<p>राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कभी भारत की शिक्षा प्रणाली पूरी दुनिया में सम्मानित मानी जाती थी, लेकिन आज यह "रिग्ड एजुकेशन सिस्टम" बन चुकी है, जहां मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य पेपर माफिया और भ्रष्ट व्यवस्था के हवाले कर दिया गया है।</p>
<p>कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन किसी भी बड़े दोषी को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जब तक पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य लगातार खतरे में रहेगा।</p>
<p>राहुल गांधी ने सरकार से मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों को कठोर सजा मिले और छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।</p>
<p>दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि छात्रों को अपनी बात रखने पर लाठियां और बल प्रयोग झेलना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।</p>
<p>नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन ने अब राष्ट्रीय राजनीति का रूप ले लिया है। विपक्ष लगातार सरकार को शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर घेर रहा है, जबकि छात्र संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a60a9e81e869.jpg" length="93873" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 17:00:55 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Rahul Gandhi attacks Modi govt over NEET paper leak, says&#039; 152 papers leaked, students lathicharged&#039; Is this the new India? &quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नीट पेपर लीक मामला: आंदोलन की शुरुआत से आज तक की पूरी घटनाक्रम &amp;quot;नीट विवाद पर बढ़ा बवाल: इस्तीफे की मांग से संसद तक गूंजा विरोध&amp;quot;</title>
        <link>https://delhilookout.com/NEET-paper-leak-case:-The-entire-sequence-of-events-from-the-beginning-of-the-movement-to-todays-uproar-over-the-NEET-controversy:-Opposition-demands-resignation-in-Parliament</link>
        <guid>https://delhilookout.com/NEET-paper-leak-case:-The-entire-sequence-of-events-from-the-beginning-of-the-movement-to-todays-uproar-over-the-NEET-controversy:-Opposition-demands-resignation-in-Parliament</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया। पार्टी ने परीक्षा रद्द करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार धरना, प्रदर्शन और अनशन शुरू किया।</p>
<p>आंदोलन के दौरान CJP के नेता अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं ने सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे। बाद में उन्होंने अनशन समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें रखीं, लेकिन फिलहाल वे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं।</p>
<p>आज CJP ने संसद मार्च और जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस ने जंतर-मंतर को पूरी तरह खाली करा दिया।<br>जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. सोमवार सुबह ही दंगा-रोधी वाहन भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गया था. प्रदर्शनकारियों की संसद की ओर मार्च करने की योजना को देखते हुए अधिकारियों ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी थी और कुछ पाबंदियां भी लगाई थीं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बैरिकेड पार करने से रोकने के लिए बल का इस्तेमाल किया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई और लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर सामने आई.</p>
<p>प्रदर्शन के दौरान CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि पार्टी नेता अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। हालांकि कुछ ही देर बाद उन्होंने स्वयं स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं हुआ था और पहले की जानकारी गलत थी।</p>
<p>इसी बीच आंदोलन से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई कि CJP नेता अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। वहीं CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि सरकार ने पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है।</p>
<p>इसके बाद CJP का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिला और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग रखी।</p>
<p>उधर, आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे पूरे घटनाक्रम के बीच अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल नीट पेपर लीक को लेकर आंदोलन जारी है। CJP सरकार पर दबाव बनाए हुए है, जबकि सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल से बातचीत और शीर्ष स्तर पर बैठकों के बाद आगे की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a5e1a52b7fa3.jpg" length="162865" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 18:23:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>NEET paper leak case: The entire sequence of events from the beginning of the movement to today&#039;s uproar over the NEET controversy: Opposition demands resignation in Parliament</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ईरान के अखबारों की धमकी से मचा हड़कंप, ट्रंप और अमेरिकी नेताओं को लेकर छपी चौंकाने वाली हेडलाइन</title>
        <link>https://delhilookout.com/Uproar-over-threats-from-Iranian-newspapers-shocking-headlines-published-regarding-Trump-and-US-leaders.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Uproar-over-threats-from-Iranian-newspapers-shocking-headlines-published-regarding-Trump-and-US-leaders.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>डोनाल्ड ट्रंप की करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत के बाद अब ईरानी अखबार जश्न मना रहे हैं। ईरानी अखबार 'हमशहरी' ने अपनी हेडलाइन में सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य अमेरिकी अधिकारियों की "अचानक मौत" हो सकती है। अमेरिकी सीनेटर की मौत के बाद, 'हमशहरी' अखबार ने अपने पहले पन्ने पर एक तस्वीर भी छापी है। इस तस्वीर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लिंडसे ग्राहम की तस्वीर के पास घुटने पर बैठे हुए दिखाया गया। साथ ही इस तस्वीर में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य वरिष्ठ अमेरिकी व इजरायली अधिकारी भी थे। इस तस्वीर के ऊपर हेडलाइन थी, जिसमें लिखा था, "अचानक मौत के लिए तैयार रहो"।<br>अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरानी मीडिया ने ऐसा विवादित और भड़काऊ संदेश प्रकाशित किया है जिसने वॉशिंगटन से लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। कुछ अखबारों ने अमेरिकी नेताओं को लेकर ऐसी हेडलाइन छापी है जिसे खुली चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों के साथ प्रकाशित संदेश ने सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छेड़ दी है।<br>रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी अखबार हमशहरी ने पहले पन्ने पर ट्रंप और अन्य नेताओं की तस्वीरों के साथ "अचानक मौत के लिए तैयार रहो" जैसी विवादित हेडलाइन प्रकाशित की। वहीं वतन-ए-एमरोज ने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए "मौत के सौदागर की मौत" शीर्षक इस्तेमाल किया। इन प्रकाशनों के बाद अमेरिका में कई राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a54c6d35f36f.jpg" length="142560" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 16:37:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Uproar over threats from Iranian newspapers; shocking headlines published regarding Trump and US leaders.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोले&amp; &amp;quot;अब शिक्षा में क्रांति का समय</title>
        <link>https://delhilookout.com/Rahul-Gandhi-launches-a-scathing-attack-on-the-Central-Government-over-the-education-system,-says—Now-is-the-time-for-a-revolution-in-education.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Rahul-Gandhi-launches-a-scathing-attack-on-the-Central-Government-over-the-education-system,-says—Now-is-the-time-for-a-revolution-in-education.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गंभीर समस्याओं पर जवाबदेही तय करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>17 जुलाई को देहरादून में आयोजित होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के छात्र आज शिक्षा व्यवस्था को "भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती और बेईमान" मानने लगे हैं। उनके अनुसार, जिस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं का भविष्य संवारना था, वही अब लाखों परिवारों को कर्ज, मानसिक तनाव और निराशा की ओर धकेल रही है।</p>
<p>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार ने "पेपर लीक माफिया" को जन्म दिया है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत को एक पल में बर्बाद कर देता है। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल दोषी वेंडर्स और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ठेके और पदोन्नति का लाभ मिलता है, जबकि इसकी सबसे बड़ी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इन समस्याओं से पूरी तरह अवगत होने के बावजूद जवाबदेही तय करने से बच रही है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यधारा की मीडिया भी पर्याप्त आवाज नहीं उठा रही है।</p>
<p>'छात्रों की गूंज' अभियान के माध्यम से राहुल गांधी लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। इस अभियान का पिछला कार्यक्रम राजस्थान के कोटा में आयोजित किया गया था, जबकि अगला कार्यक्रम 17 जुलाई को देहरादून में होगा।</p>
<p>अपने संदेश के अंत में राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से अपील करते हुए कहा—</p>
<p>"बहुत हो चुका... अब समय है शिक्षा में क्रांति का। आइए, 17 जुलाई को देहरादून में 'छात्रों की गूंज' को और बुलंद करें तथा छात्रों के भविष्य की लड़ाई को मजबूत बनाएं।"</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a54c5fae2ab6.jpg" length="66040" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 16:33:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&quot;Rahul Gandhi launches a scathing attack on the Central Government over the education system, says—&quot;Now is the time for a revolution in education.&quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>एथेनॉल से किसी वाहन को गारंटी अवधि के दौरान कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी डीलर और कंपनी की होगी</title>
        <link>https://delhilookout.com/If-a-vehicle-suffers-any-damage-due-to-ethanol-during-the-warranty-period,-the-dealer-and-the-company-will-be-held-responsible.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/If-a-vehicle-suffers-any-damage-due-to-ethanol-during-the-warranty-period,-the-dealer-and-the-company-will-be-held-responsible.</guid>
        <description><![CDATA[ <p>देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol Blended Fuel) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कई बड़े दावे किए हैं. उन्होंने साफ कहा कि एथेनॉल को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है और उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने अपने बेटे निखिल गडकरी की कंपनी को लेकर सामने आए दावों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी.<br>एथेनॉल को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि शहरों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का माइलेज सामान्य पेट्रोल के बराबर रहता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हाइवे पर माइलेज में कुछ कमी आ सकती है, क्योंकि एथेनॉल की कैलरिक वैल्यू पेट्रोल से कम होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना तथ्यों के कोई राय न बनाएं.<br>गडकरी ने कहा, "मेरे बेटे निखिल गडकरी की कंपनी की आय और मुनाफे को लेकर जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं. जहां से भी आपने ये आंकड़े लिए हैं, चाहे गूगल से ही क्यों न लिए हों, अगर उन्हें दोहराया गया तो मैं मानहानि का केस करूंगा और कोर्ट तक ले जाऊंगा."<br>उन्होंने कहा कि "आत्मनिर्भर भारत" महात्मा गांधी का सपना था और उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सरकार आयात कम करने तथा स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा देने पर काम कर रही है. उनका कहना था कि इस अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य गांवों और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है.<br>गडकरी ने भरोसा दिलाया कि अगर एथेनॉल से किसी वाहन को गारंटी अवधि के दौरान कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी डीलर और कंपनी की होगी. उन्होंने कहा, "कोई भी नुकसान होने पर कंपनी उसे ठीक करेगी. अगर उपभोक्ता संतुष्ट नहीं हैं तो वे उपभोक्ता अदालत में भी मामला ले जा सकते हैं."<br>उन्होंने बताया कि अब तक उनके पास एथेनॉल से जुड़ी कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है. सोशल मीडिया पर जरूर 53 वीडियो सामने आए हैं, लेकिन इनमें कई भ्रामक जानकारियां फैलाई गई हैं. उन्होंने लोगों से कहा कि अगर किसी को शिकायत है तो उसे मंत्रालय की वेबसाइट पर भेजें. "शिकायतों की जांच मैं खुद करूंगा," उन्होंने कहा.<br>गडकरी ने एथेनॉल को सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा विषय बताया. उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनके मुताबिक, "एथेनॉल की बात राष्ट्रहित के साथ जुड़ी है। स्वदेशी, स्वावलंबन और राष्ट्रवाद ही इसका मंत्र है."</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a54c3bcae954.jpg" length="101805" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 16:23:56 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>If a vehicle suffers any damage due to ethanol during the warranty period, the dealer and the company will be held responsible.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बड़ी खबर: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर; चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-big-decision-of-Ram-Mandir-Trust:-Champat-Rais-resignation-accepted</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-big-decision-of-Ram-Mandir-Trust:-Champat-Rais-resignation-accepted</guid>
        <description><![CDATA[ <p>अयोध्या | श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। वहीं ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।</p>
<p>यह बैठक सोमवार दोपहर 3:30 बजे महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p>बैठक की शुरुआत में क्या हुआ?</p>
<p>बैठक की शुरुआत ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने एजेंडा प्रस्तुत करते हुए की। उन्होंने चढ़ावा विवाद पर चर्चा के साथ-साथ चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर विचार करने का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, चर्चा निष्पक्ष रखने के लिए सुझाव दिया गया कि दोनों संबंधित सदस्य प्रारंभिक विचार-विमर्श के दौरान बैठक से अलग रहें। बाद में उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही गई। बताया जा रहा है कि दोनों बैठक में शामिल नहीं हुए।</p>
<p>महंत नृत्य गोपाल दास ने जताया दुख</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान महंत नृत्य गोपाल दास ने पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p>बैठक में इस पूरे घटनाक्रम को "पाप" की संज्ञा देते हुए ट्रस्ट सदस्यों ने इसकी गंभीरता पर चिंता जताई।</p>
<p>अनिल मिश्रा पर फैसला अभी बाकी</p>
<p>जहां चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, वहीं अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर ट्रस्ट की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इस पर आगे की बैठक या विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जा सकता है।</p>
<p>मुख्य बिंदु<br>चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट ने मंजूर किया।<br>अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला फिलहाल लंबित।<br>चढ़ावा विवाद पर ट्रस्ट ने अपनाया सख्त रुख।<br>महंत नृत्य गोपाल दास ने घटना को अत्यंत दुखद बताया।<br>दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202607/image_870x580_6a4b9e37d9ab1.jpg" length="128285" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 17:53:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>#ayodhyarammandir #rmamandirscam #chamaptrai</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>&amp;apos;रामलला के यहां चढ़ावा चोरी, अब माखन चोर के यहां भी?&amp;apos; अखिलेश का योगी सरकार पर तीखा तंज! अयोध्या से मथुरा तक सियासी घमासान: अखिलेश बोले&amp; &amp;apos;रामलला के यहां चोरी नहीं रोक पाए, अब कृष्ण मंदिर की बात</title>
        <link>https://delhilookout.com/Offer-theft-at-Ram-Lallas-place,-now-at-Makhan-Chors-place-too-Akhilesh-Yadav-slams-Yogi-government-From-Ayodhya-to-Mathura,-the-political-tussle--Akhilesh-said,--He-could-not-stop-the-theft-at-Ram-Lallas-place,-now-the-talk-of-Krishna-temple</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Offer-theft-at-Ram-Lallas-place,-now-at-Makhan-Chors-place-too-Akhilesh-Yadav-slams-Yogi-government-From-Ayodhya-to-Mathura,-the-political-tussle--Akhilesh-said,--He-could-not-stop-the-theft-at-Ram-Lallas-place,-now-the-talk-of-Krishna-temple</guid>
        <description><![CDATA[ <p data-pm-slice="1 1 []"><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_2_0">'लखनऊ: </span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_2_1">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को योगी आदित्यनाथ सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_2_2">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को उठाते हुए उन्होंने सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल खड़े किए और आशंका जताई कि इस मामले के तार अनरजिस्टर्ड लोगों और चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगों तक पहुंच सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_3_0">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा में कृष्ण मंदिर को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "प्रभु श्रीराम के यहां चढ़ावा चोरी हो गया, अब क्या 'माखन चोर' के यहां भी चोरी का इरादा है?</span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_3_1">"</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_4_0">NEET समेत अन्य पेपर लीक मामलों पर भी उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि जो सरकार एक सामान्य परीक्षा निष्पक्ष तरीके से नहीं करा सकती, वह दुनिया के सामने क्या उदाहरण पेश करेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_4_1">उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_5_0">लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड का जिक्र करते हुए अखिलेश ने सरकार पर भ्रष्टाचार और अग्निशमन व्यवस्था में आवश्यक संसाधनों की कमी का आरोप लगाया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_5_1">उन्होंने कहा कि यदि समय पर पर्याप्त उपकरण उपलब्ध होते तो नुकसान को कम किया जा सकता था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_6_0">उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस एनकाउंटर को लेकर भी सपा प्रमुख ने सरकार पर निशाना साधा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_6_1">उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हुए अधिकांश फर्जी एनकाउंटर PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समुदाय के लोगों के हुए हैं, जबकि कार्रवाई करने वाले मुख्यमंत्री की जाति के लोग हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_7_0">अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="44a6ba3f489b2b96_7_1">हालांकि, उनके आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</span></p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a426e80d7f9f.jpg" length="158233" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&quot;Offer theft at Ram Lalla&#039;s place, now at Makhan Chor&#039;s place too?&quot; Akhilesh Yadav slams Yogi government From Ayodhya to Mathura, the political tussle &quot;&quot; &quot;Akhilesh said, &quot; &quot;&quot; &quot;He could not stop the theft at Ram Lalla&#039;s place, now the talk of Krishna temple&quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की चिंता को किया दरकिनार; चिकन नेक के करीब बढ़ती ड्रैगन की मौजूदगी से बढ़ा रणनीतिक तनाव</title>
        <link>https://delhilookout.com/Chinas-double-message-on-Teesta-project,-brushing-aside-Indias-concerns-Growing-Dragons-Presence-Near-Chicken-Neck-Raises-Strategic-Tensions</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Chinas-double-message-on-Teesta-project,-brushing-aside-Indias-concerns-Growing-Dragons-Presence-Near-Chicken-Neck-Raises-Strategic-Tensions</guid>
        <description><![CDATA[ <p>तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की चिंता को किया दरकिनार; चिकन नेक के करीब बढ़ती ड्रैगन की मौजूदगी से बढ़ा रणनीतिक तनाव</p>
<p>भारत की आपत्ति के बावजूद तीस्ता प्रोजेक्ट पर अड़ा चीन, बोला- तीसरे पक्ष के दबाव से मुक्त रहेगा सहयोग<br>चिकन नेक के करीब चीन की बढ़ती दखल! तीस्ता प्रोजेक्ट पर ड्रैगन का बड़ा बयान, भारत की सुरक्षा चिंता गहराई<br>तीस्ता नदी प्रोजेक्ट पर चीन का बड़ा ऐलान, भारत की रणनीतिक चिंता के बीच ढाका-बीजिंग की बढ़ी नजदीकियां</p>
<p><br>नई दिल्ली: बांग्लादेश के तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) को लेकर भारत की गंभीर सुरक्षा चिंताओं के बावजूद चीन अपने रुख पर कायम है। बीजिंग ने साफ शब्दों में कहा है कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और न ही किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से संचालित होगा। चीन के इस बयान को भारत की आपत्तियों को सीधे तौर पर खारिज करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>भारत की चिंता पर चीन का जवाब</p>
<p>बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से जब भारत की ओर से जताई गई सुरक्षा चिंताओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,<br>"चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ विकास संबंधी रणनीतियों में बेहतर समन्वय, जल संसाधन प्रबंधन, व्यापार और जनकल्याण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>चीन ने बताया जनकल्याण की परियोजना</p>
<p>गुओ जियाकुन ने तीस्ता परियोजना को बांग्लादेश के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह जनकल्याण से जुड़ी एक बड़ी परियोजना है और चीन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।</p>
<p>भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?</p>
<p>भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तीस्ता नदी का बेसिन सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है। यही संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और इसे भारत की रणनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है।</p>
<p>ऐसे में यदि इस क्षेत्र के आसपास चीन की आर्थिक, तकनीकी या बुनियादी ढांचे से जुड़ी मौजूदगी बढ़ती है तो भविष्य में उसका रणनीतिक प्रभाव भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि भारत इस परियोजना में चीन की बढ़ती भूमिका को केवल विकास परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है।</p>
<p>बढ़ सकता है रणनीतिक तनाव</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन इस परियोजना के जरिए तीस्ता क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक मौजूदगी मजबूत करता है, तो इसका असर केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक मजबूती पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a426c0c06b25.jpg" length="162877" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:28:57 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>China&#039;s double message on Teesta project, brushing aside India&#039;s concerns; Growing Dragon&#039;s Presence Near Chicken Neck Raises Strategic Tensions</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ओड़िशा की आठवीं की किताब में &amp;apos;निंबूड़ा&amp;निंबूड़ा&amp;apos; की एंट्री, नई शिक्षा नीति पर फिर उठे सवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/Nimbuda-Nimbuda-in-Odishas-Class-VIII-book,-questions-raised-again-on-New-Education-Policy</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Nimbuda-Nimbuda-in-Odishas-Class-VIII-book,-questions-raised-again-on-New-Education-Policy</guid>
        <description><![CDATA[ <p>भुवनेश्वर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार की गई ओडिशा की नई स्कूली किताबें एक बार फिर विवादों में हैं। पहले हजारों गलतियों को लेकर सरकार की किरकिरी हुई थी, अब आठवीं कक्षा की कला शिक्षा की पुस्तक 'कृति' में लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' और कश्मीरी लोकगीत 'रिंद पोश माल' के बोल शामिल किए जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है।</p>
<p>पुस्तक के "मो संगीत जगत" अध्याय में इन दोनों गीतों को शामिल किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। यूजर्स का कहना है कि ओडिशा के विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध ओड़िया लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के बजाय बॉलीवुड से लोकप्रिय हुए गीतों को पढ़ाना समझ से परे है।</p>
<p>सोशल मीडिया पर तंज की बौछार</p>
<p>जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और व्यंग्यात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सवाल किया कि क्या अब स्कूली शिक्षा का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना है या बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना?</p>
<p>पहले 1,678 गलतियां, अब नया विवाद</p>
<p>यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां मिलने का मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना था। इनमें तथ्यात्मक, भाषाई और संपादन संबंधी गंभीर गलतियां शामिल थीं, जिसके बाद सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।</p>
<p>मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई कार्रवाई</p>
<p>मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने चार वरिष्ठ SCERT अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिनमें पूर्व निदेशक सहित तीन सहायक निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।</p>
<p>जांच समिति ने भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए 14 अहम सिफारिशें दी हैं। इनमें मास्टर एराटा रजिस्टर, छात्रों तक समय पर संशोधन पहुंचाने की व्यवस्था और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग क्वालिटी एश्योरेंस सेल बनाने का सुझाव शामिल है।</p>
<p>अब उठ रहे बड़े सवाल</p>
<p>ताजा विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि स्कूली पाठ्यक्रम में स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए या देशभर में लोकप्रिय हो चुके गीतों को। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी होना चाहिए।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a426a707c154.jpg" length="165666" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:22:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&#039;Nimbuda-Nimbuda &#039;in Odisha&#039;s Class VIII book, questions raised again on New Education Policy</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारत की ओर से राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा होंगे शामिल 4 से 9 जुलाई तक चलेगा राजकीय अंतिम संस्कार, दुनिया भर के नेताओं और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद</title>
        <link>https://delhilookout.com/Iran-to-bid-farewell-to-Ayatollah-Ali-Khamenei,-India-to-be-represented-by-Governor-Seyyed-Ata-Hasnain-and-Minister-of-State-for-Foreign-Affairs-Pabitra-Margherita</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Iran-to-bid-farewell-to-Ayatollah-Ali-Khamenei,-India-to-be-represented-by-Governor-Seyyed-Ata-Hasnain-and-Minister-of-State-for-Foreign-Affairs-Pabitra-Margherita</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली/तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की स्मृति में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम 4 जुलाई 2026 से शुरू होंगे। इस दौरान दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचेंगे। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा इस समारोह में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि भारत सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया गया है।</p>
<p>4 से 9 जुलाई तक कई शहरों में होंगे कार्यक्रम</p>
<p>श्रद्धांजलि समारोह की शुरुआत 4 और 5 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खुमैनी मोसाला प्रार्थना हॉल में होगी, जहां हजारों लोग दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को तेहरान और पवित्र शहर कोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। अंतिम कार्यक्रम 9 जुलाई को उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में आयोजित होगा, जहां अयातुल्ला खामेनेई को इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।</p>
<p>एयरस्ट्राइक में हुई थी मौत</p>
<p>अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसी वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त एयरस्ट्राइक में हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद मार्च की शुरुआत में उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया। इस घटना को ईरान के 46 वर्ष पुराने इस्लामी शासन के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामरिक मोड़ माना गया।</p>
<p>परिवार के चार सदस्य भी मारे गए</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी-इजरायली हमलों में खामेनेई के परिवार के चार सदस्य भी मारे गए थे। इनमें उनकी बेटी, एक नाती/पोता और उनके दामाद शामिल बताए गए। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से खामेनेई की मौत की पुष्टि की थी।</p>
<p>मध्य पूर्व पर पूरी दुनिया की नजर</p>
<p>ईरान में आयोजित होने वाले इन अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। साथ ही कई देशों के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस ऐतिहासिक आयोजन और उससे जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a42692b0a0f6.jpg" length="224863" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:16:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Iran to bid farewell to Ayatollah Ali Khamenei, India to be represented by Governor Seyyed Ata Hasnain and Minister of State for Foreign Affairs Pabitra Margherita</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>केतन अग्रवाल मर्डर केस: सिया गोयल और चेतन चौधरी 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में ! जांच अभी अधूरी है। मोबाइल फोन से डिलीट डेटा रिकवर कर फॉरेंसिक जांच की जानी है और यह पता लगाना है कि लोहगढ़ किले पर आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया था।</title>
        <link>https://delhilookout.com/Ketan-Agarwal-murder-case-Chetan-Chaudhary-and-Siya-Goel-have-been-sent-to-police-custody-till-July-3.--The-Pune-murder-case--Ketan-Agarwal-murder-case--Recce-of-Lohgarh-Fort--Forensic-examination-of-mobile-data--Searching-for-possible-conspirators</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Ketan-Agarwal-murder-case-Chetan-Chaudhary-and-Siya-Goel-have-been-sent-to-police-custody-till-July-3.--The-Pune-murder-case--Ketan-Agarwal-murder-case--Recce-of-Lohgarh-Fort--Forensic-examination-of-mobile-data--Searching-for-possible-conspirators</guid>
        <description><![CDATA[ <p>केतन अग्रवाल मर्डर केस: सिया गोयल और चेतन चौधरी 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में</p>
<p>Pune Murder Case</p>
<p>केतन अग्रवाल मर्डर केस</p>
<p>लोहगढ़ किले की रेकी की जांच</p>
<p>मोबाइल डेटा की फॉरेंसिक जांच</p>
<p>संभावित साजिशकर्ताओं की तलाश</p>
<p>मावल कोर्ट ने पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी बढ़ाई, जांच में मोबाइल डेटा रिकवरी, लोहगढ़ किले की रेकी और संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका पर फोकस।</p>
<p><br>सबसे बड़ी अपडेट</p>
<p>कोर्ट ने 3 जुलाई तक बढ़ाई पुलिस कस्टडी</p>
<p>लोणावला पुलिस ने दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को मावल कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।</p>
<p>पुलिस की दलील</p>
<p>जांच अभी अधूरी है। मोबाइल फोन से डिलीट डेटा रिकवर कर फॉरेंसिक जांच की जानी है और यह पता लगाना है कि लोहगढ़ किले पर आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया था।</p>
<p>लोहगढ़ किला एंगल</p>
<p>पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या वारदात से पहले लोहगढ़ किले की रेकी की गई थी और क्या साजिश के लिए किसी वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हुआ।</p>
<p>पासपोर्ट और कपड़ों की तलाश</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल का कथित रूप से रास्ते में फेंका गया पासपोर्ट बरामद करना बाकी है। चेतन चौधरी के वारदात के समय पहने कपड़े भी अभी जब्त किए जाने हैं।</p>
<p>बचाव पक्ष का तर्क</p>
<p>बचाव पक्ष ने पुलिस कस्टडी का विरोध करते हुए कहा कि तकनीकी जांच और घटनास्थल का रिक्रिएशन पहले ही हो चुका है, इसलिए आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत जरूरी नहीं है।</p>
<p>वेबसाइट के लिए SEO हेडलाइन विकल्प</p>
<p>केतन अग्रवाल मर्डर केस: सिया गोयल और चेतन चौधरी 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में</p>
<p>पुणे हत्याकांड में बड़ा अपडेट: लोहगढ़ किले की रेकी और मोबाइल डेटा की जांच तेज</p>
<p>केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस को मिली और मोहलत, कोर्ट ने बढ़ाई कस्टडी</p>
<p>पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में नए खुलासों की तलाश, दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में</p>
<p>SEO सबहेडिंग</p>
<p>मावल कोर्ट ने पुलिस को जांच के लिए अतिरिक्त समय दिया; डिलीट मोबाइल डेटा, लोहगढ़ किले की रेकी और संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच जारी।</p>
<p>वेबसाइट न्यूज़ कॉपी</p>
<p>पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में सोमवार (29 जून) को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। लोणावला पुलिस ने दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को मावल कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत से 7 दिन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग करते हुए कहा कि हत्या की साजिश से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच अभी बाकी है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कर उसकी फॉरेंसिक जांच की जानी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लोहगढ़ किले पर आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया था।</p>
<p>जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या वारदात से पहले लोहगढ़ किले की रेकी की गई थी और क्या साजिश रचने के लिए किसी वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि केतन अग्रवाल का कथित रूप से रास्ते में फेंका गया पासपोर्ट अभी बरामद होना बाकी है।</p>
<p>इसके अलावा आरोपी चेतन चौधरी के वारदात के समय पहने गए कपड़े भी अभी जब्त किए जाने हैं। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल का रिक्रिएशन पहले किया जा चुका है, लेकिन दोनों आरोपियों को साथ लेकर दोबारा पूरे घटनाक्रम का रिक्रिएशन करना जरूरी है।</p>
<p>वहीं, बचाव पक्ष ने पुलिस कस्टडी का विरोध करते हुए कहा कि तकनीकी जांच, पूछताछ और घटनास्थल का रिक्रिएशन पहले ही हो चुका है। इसलिए आगे की जांच तकनीकी प्रकृति की है और पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को भी अवैध बताते हुए अदालत से अपना आवेदन स्वीकार करने की मांग की।</p>
<p>BREAKING NEWS</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a4267ec4b0c0.jpg" length="100134" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:11:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Ketan Agarwal murder case Chetan Chaudhary and Siya Goel have been sent to police custody till July 3.  The Pune murder case  Ketan Agarwal murder case  Recce of Lohgarh Fort  Forensic examination of mobile data  Searching for possible conspirators</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जिसे बनाया स्टार, वही बनी चुनौती! ममता की करीबी नेता ने बदले सुर टीएमसी में &amp;apos;ऑपरेशन बगावत&amp;apos;! एक हार ने टीएमसी को कर दिया टुकड़े&amp;टुकड़े?</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-one-who-became-a-star,-became-the-challenge-Mamatas-close-aide-changes-tune-to-Operation-Bagawat-in-TMC-Did-one-defeat-break-the-TMC-into-pieces</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-one-who-became-a-star,-became-the-challenge-Mamatas-close-aide-changes-tune-to-Operation-Bagawat-in-TMC-Did-one-defeat-break-the-TMC-into-pieces</guid>
        <description><![CDATA[ <p>ममता बनर्जी ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को अपने ही अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। लेकिन आज बंगाल की राजनीति में जो कुछ हो रहा है, वह टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों में पार्टी के भीतर बगावत की ऐसी लहर उठी है कि बड़े नेताओं के इस्तीफे और खुले विरोध अब सामान्य घटनाएं लगने लगी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद Sayani Ghosh का नाम भी उन सांसदों में लिया जा रहा है जो पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, सांसद Kakoli Ghosh Dastidar के नेतृत्व में करीब 20 सांसदों का एक समूह लोकसभा में अलग पहचान बनाने और एनडीए को समर्थन देने पर विचार कर रहा है। इस दावे को लेकर टीएमसी और बागी नेताओं के बीच खुली राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई है।</p>
<p>वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया है। बागी खेमे के समर्थन से Ritabrata Banerjee को विपक्ष का नेता बनाए जाने का दावा किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता मिलने की खबरों ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या यह केवल असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी है या फिर टीएमसी वास्तव में अपने सबसे बड़े राजनीतिक विभाजन की ओर बढ़ रही है? अगर सांसदों और विधायकों का यह असंतोष और बढ़ता है, तो बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है।</p>
<p>आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को निकाल पाती हैं या फिर टीएमसी का यह आंतरिक विद्रोह बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a2956f8a21d0.jpg" length="140759" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:52:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The one who became a star, became the challenge! Mamata&#039;s close aide changes tune to &#039;Operation Bagawat&#039; in TMC! Did one defeat break the TMC into pieces?</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CBSE में बड़ा प्रशासनिक भूचाल: OSM टेंडर विवाद पर चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता हटाए गए</title>
        <link>https://delhilookout.com/cbse-osm-tender-row-chairman-rahul-singh-secretary-himanshu-gupta-removed</link>
        <guid>https://delhilookout.com/cbse-osm-tender-row-chairman-rahul-singh-secretary-himanshu-gupta-removed</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में चल रहे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) टेंडर विवाद ने आखिरकार बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई के चेयरमैन Rahul Singh और सचिव Himanshu Gupta को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है। इस कार्रवाई ने शिक्षा जगत और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।</p>
<p>क्या है OSM विवाद?</p>
<p>पूरा मामला CBSE द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप हैं कि इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए टेंडर आवंटन में पारदर्शिता का अभाव था और प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, OSM सेवाओं का ठेका हैदराबाद स्थित कंपनी कोएंप्ट को दिया गया था। इसके बाद से ही टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता और खरीद नियमों के पालन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। सोशल मीडिया, शिक्षा विशेषज्ञों और प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने मामले में हस्तक्षेप किया।</p>
<p>सरकार का सख्त फैसला</p>
<p>विवाद के बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने न केवल CBSE के दोनों शीर्ष अधिकारियों को हटाने का निर्णय लिया, बल्कि पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश भी दे दिए हैं। सरकार ने इस खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय एक-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।</p>
<p>एस. राधा चौहान करेंगी जांच की अगुवाई</p>
<p>जांच समिति की अध्यक्षता S. Radha Chauhan करेंगी, जो वर्तमान में Capacity Building Commission की अध्यक्ष हैं। समिति को आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न सरकारी कार्यालयों और विभागों के अधिकारियों से सहयोग लेने का अधिकार भी दिया गया है।</p>
<p>समिति को सचिवालयी सहायता क्षमता निर्माण आयोग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी और उसे अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक महीने के भीतर Department of Personnel and Training (DoPT) को सौंपनी होगी।</p>
<p>जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें</p>
<p>अब पूरे शिक्षा जगत की निगाहें इस जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि OSM सेवाओं की खरीद और टेंडर आवंटन प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो आने वाले दिनों में और भी बड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।</p>
<p>CBSE जैसे देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।</p>
<p>SEO TAGS:</p>
<p>CBSE News, CBSE Chairman News, OSM Tender Row, Rahul Singh CBSE, Himanshu Gupta CBSE, Education Ministry News, CBSE Procurement Case, S Radha Chauhan, CBSE Controversy, Hindi Education News, Latest Education Updates, CBSE Tender Investigation, Government Action on CBSE, OSM Services Tender, CBSE Breaking News Hindi.</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a1ed468b3059.jpg" length="96452" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:32:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE OSM विवाद, राहुल सिंह हटाए गए, हिमांशु गुप्ता तबादला, CBSE टेंडर घोटाला, ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम, CBSE Chairman Removed, OSM Tender Controversy, CBSE Latest News, Education News Hindi, S Radha Chauhan Committee</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>IIT पासआउट ‘फर्जी बाबा’ का काला सच! प्रवचन की आड़ में युवतियों को बनाता था शिकार, वीडियो से करता था ब्लैकमेल</title>
        <link>https://delhilookout.com/iit-passout-fake-baba-arrested-mathura-sexual-exploitation-blackmail-case</link>
        <guid>https://delhilookout.com/iit-passout-fake-baba-arrested-mathura-sexual-exploitation-blackmail-case</guid>
        <description><![CDATA[ <p>मथुरा पुलिस ने आरोपी अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास को किया गिरफ्तार, कई पीड़िताओं के सामने आने की आशंका; फोन से मिले आपत्तिजनक सबूत</p>
<p>मथुरा से सनसनीखेज खुलासा</p>
<p>धर्म और अध्यात्म की आड़ में कथित तौर पर युवतियों को अपने जाल में फंसाने वाले एक कथित फर्जी बाबा का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मथुरा पुलिस ने 29 वर्षीय अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह ऑनलाइन प्रवचनों और आध्यात्मिक ज्ञान के नाम पर पढ़ी-लिखी युवतियों का विश्वास जीतता था, फिर उनका मानसिक रूप से ब्रेनवॉश कर उनका शोषण करता था।</p>
<p>पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर युवतियों को अपने प्रभाव में लेकर उनसे संबंध बनाता था और बाद में उनके वीडियो व तस्वीरों के जरिए उन्हें तथा उनके परिवारों को ब्लैकमेल करता था। मामले का खुलासा एक पीड़िता की शिकायत के बाद हुआ।</p>
<p>IIT से इंजीनियरिंग, फिर बना ‘आध्यात्मिक गुरु’</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने वर्ष 2017 से 2021 के बीच IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उच्च शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद उसने कथित तौर पर आध्यात्मिक गुरु का रूप धारण कर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया।</p>
<p>‘गंधर्व विवाह’ के नाम पर जाल बिछाने का आरोप</p>
<p>जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर कई युवतियों को ‘गंधर्व विवाह’ जैसी अवधारणाओं का हवाला देकर अपने करीब लाता था। पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से कई लड़कियां उसके प्रभाव में आईं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर कितनी महिलाएं उसकी कथित साजिश का शिकार बनीं।</p>
<p>फोन से मिले अहम सुराग</p>
<p>पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद हुई है। इनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनके आधार पर पुलिस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>यूट्यूब और सोशल मीडिया से बढ़ाया नेटवर्क</p>
<p>आरोप है कि आरोपी ने ‘राधा कृपा अमृता’ नाम से एक यूट्यूब चैनल बनाया था, जहां वह हिंदी और अंग्रेजी में प्रवचन और आध्यात्मिक संदेश साझा करता था। इन्हीं माध्यमों से वह लोगों, खासकर शिक्षित युवतियों तक पहुंच बनाता था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उसकी सक्रिय मौजूदगी बताई जा रही है।</p>
<p>24 लोगों का समूह, कई छोड़ चुके थे साथ</p>
<p>मथुरा स्थित उसके ठिकाने पर करीब 24 युवक-युवतियों के रहने की बात सामने आई है। हालांकि, समय के साथ कई लोगों ने उसकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद उसका साथ छोड़ दिया था। पुलिस अब उन लोगों से भी पूछताछ कर रही है जो किसी समय उसके संपर्क में रहे थे।</p>
<p>पुलिस की जांच जारी</p>
<p>छत्तीसगढ़ की एक युवती की शिकायत के आधार पर हुई गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अन्य पीड़िताएं सामने आती हैं तो मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।</p>
<p>फिलहाल पुलिस डिजिटल सबूतों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित पीड़ितों की पहचान कर मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a1ed15fe0ed4.jpg" length="93944" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:19:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>IT Passout Fake Baba Mathura Fake Baba Arrest Abhishek Mishra Arrest Adikarta Narayan Das Mathura Crime News Online Pravachan Scam Brainwash Case Mathura Blackmail Case Sexual Exploitation Case IIT Roorkee Graduate News Fake Spiritual Guru YouTube Baba Arrested Mathura Police Action Crime News Hindi Breaking News Mathura</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CBSE री&amp;इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़ा साइबर अटैक! 2 मिनट में 15 लाख हिट्स, फिर भी 16 हजार छात्रों ने सफलतापूर्वक किया आवेदन</title>
        <link>https://delhilookout.com/CBSE-Revaluation-Portal-Cyber-Attack:-2-मिनट-में-15-लाख-हिट्स,-16-हजार-छात्रों-ने-सफलतापूर्वक-किया-आवेदन</link>
        <guid>https://delhilookout.com/CBSE-Revaluation-Portal-Cyber-Attack:-2-मिनट-में-15-लाख-हिट्स,-16-हजार-छात्रों-ने-सफलतापूर्वक-किया-आवेदन</guid>
        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर इस समय हजारों छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसी बीच बोर्ड ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पोर्टल को बड़े पैमाने पर साइबर हमलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, CBSE की साइबर सुरक्षा टीम ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया और छात्रों की आवेदन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होने दी।</p>
<p>बोर्ड के अनुसार, मंगलवार दोपहर 3 बजे तक 16,000 से अधिक छात्र सफलतापूर्वक री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर चुके थे। वर्तमान में पोर्टल एक साथ 8,000 से अधिक यूजर्स को संभालने की क्षमता रखता है।</p>
<p>2 मिनट में 15 लाख हिट्स, साइबर हमलावरों ने किया सिस्टम को ठप करने का प्रयास</p>
<p>CBSE ने बताया कि जैसे-जैसे पोर्टल पर छात्रों की संख्या बढ़ी, कुछ शरारती तत्वों ने उसकी सेवाओं को बाधित करने की कोशिश की। हाल ही में हुए एक बड़े साइबर हमले के दौरान केवल दो मिनट के भीतर पोर्टल पर करीब 15 लाख हिट्स दर्ज किए गए। इतना ही नहीं, एक लाख से अधिक बार अनधिकृत तरीके से फाइलों तक पहुंच बनाने की कोशिश भी की गई।</p>
<p>चौबीसों घंटे सक्रिय रही साइबर सुरक्षा टीम</p>
<p>CBSE की साइबर सुरक्षा और तकनीकी टीम लगातार निगरानी करती रही। बोर्ड ने कहा कि विशेषज्ञों ने हमलों को विफल करते हुए पोर्टल को सामान्य रूप से संचालित रखा, जिससे छात्रों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।</p>
<p>छात्रों के फीडबैक पर किए गए बड़े बदलाव</p>
<p>बोर्ड ने छात्रों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई महत्वपूर्ण सुधार भी किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव सेशन टाइम लिमिट को बढ़ाना है, जिससे अब छात्रों को आवेदन भरने और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के लिए पहले से अधिक समय मिल सकेगा।</p>
<p>CBSE का दावा – पूरी तरह सुरक्षित है छात्रों का डेटा</p>
<p>CBSE ने स्पष्ट किया है कि छात्रों और अभिभावकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है। बोर्ड का कहना है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित, विश्वसनीय और बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में साइबर सुरक्षा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।</p>
<p>बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी है और किसी भी तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीमें 24 घंटे सतर्क हैं।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202606/image_870x580_6a1ec9b222b04.jpg" length="158129" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:46:57 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE Revaluation 2026, CBSE Cyber Attack, CBSE Portal News, CBSE Result Rechecking, CBSE Revaluation Application, CBSE Student Data Security, CBSE Latest News, CBSE Board Update, Education News India, CBSE Portal Update.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>NEET पेपर अब सेना की निगरानी में? पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र का बड़ा प्लान! NEET पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा कदम</title>
        <link>https://delhilookout.com/NEET-paper-now-under-Armys-supervision-Centres-big-plan-to-stop-paper-leak</link>
        <guid>https://delhilookout.com/NEET-paper-now-under-Armys-supervision-Centres-big-plan-to-stop-paper-leak</guid>
        <description><![CDATA[ <p>NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार अब परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और संरक्षण की जिम्मेदारी सेना को दी जा सकती है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके और छात्रों का भरोसा फिर से कायम हो।<br>सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई लेवल बैठक<br>Rajnath Singh के आवास पर हुई अहम बैठक में Dharmendra Pradhan, Jyotiraditya Scindia के साथ CBSE और NTA के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को “फुलप्रूफ” बनाने, छात्रों की परेशानियों को कम करने और भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने पर विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p>CBI हिरासत बढ़ी<br>इस बीच, NEET पेपर लीक मामले में दिल्ली की अदालत ने कोचिंग सेंटर संचालक Shivraj Raghunath Motegaonkar की सीबीआई हिरासत एक दिन के लिए बढ़ा दी है। सीबीआई का कहना है कि आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर परीक्षा से पहले रसायन विज्ञान के प्रश्न और उत्तर हासिल किए थे।</p>
<p>CBI का दावा<br>Central Bureau of Investigation के अनुसार, आरोपी 23 अप्रैल 2026 को ही प्रश्नपत्र और उत्तर प्राप्त करने की साजिश में शामिल था। एजेंसी अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।</p>
<p>21 जून को दोबारा परीक्षा<br>National Testing Agency ने 12 मई को NEET परीक्षा को पेपर लीक आरोपों के चलते स्थगित कर दिया था। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202605/image_870x580_6a180f44d117f.jpg" length="148165" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:17:54 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>NEET paper now under Army&#039;s supervision? Centre&#039;s big plan to stop paper leak!</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>“प्रियंका गांधी की एक सलाह और बदल गया कर्नाटक का सत्ता समीकरण!”</title>
        <link>https://delhilookout.com/One-advice-from-Priyanka-Gandhi-and-the-power-equation-of-Karnataka-has-changed</link>
        <guid>https://delhilookout.com/One-advice-from-Priyanka-Gandhi-and-the-power-equation-of-Karnataka-has-changed</guid>
        <description><![CDATA[ <p>कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से चल रहा सियासी घमासान अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने गुरुवार को कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई अहम बैठक में साफ संकेत दे दिए कि वह पार्टी हाईकमान के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करेंगे। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि “राहुल गांधी जो कहेंगे, मैं वही करूंगा” और अगर पार्टी नए नेतृत्व को मौका देना चाहती है तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने सभी कैबिनेट सहयोगियों का आभार भी जताया।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने इस पूरे घटनाक्रम में बेहद अहम भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी लगातार पार्टी नेतृत्व से यह कहती रही थीं कि जो नेता सबसे कठिन समय में भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं, पार्टी को भी उनके साथ उसी मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर D. K. Shivakumar के समर्थन में अपनी राय रखते हुए कहा कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में किसी अन्य चेहरे पर विचार करने के बजाय डीके शिवकुमार को ही मौका दिया जाना चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस के अंदर लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि चुनाव के समय हुए कथित “रोटेशन फॉर्मूले” के तहत ढाई-ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद में बदलाव किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर लगातार खींचतान बनी हुई थी। हालांकि अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।</p>
<p>सूत्र यह भी बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष Sonia Gandhi भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में थे। वहीं Rahul Gandhi ने हाल के दिनों में सिद्धरामैया और डीके शिवकुमार दोनों नेताओं से अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से पार्टी की एकता बनाए रखने और किसी भी तरह का सार्वजनिक विवाद न होने देने की अपील की थी।</p>
<p>अब सिद्धरामैया के इस्तीफे के स्पष्ट संकेतों के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह न केवल कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संतुलन का बड़ा बदलाव होगा, बल्कि पार्टी नेतृत्व में प्रियंका गांधी की बढ़ती राजनीतिक भूमिका का भी मजबूत संकेत माना जाएगा।</p> ]]></description>
        <enclosure url="http://delhilookout.com/uploads/images/202605/image_870x580_6a180d45dca22.jpg" length="147023" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:09:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&quot;One advice from Priyanka Gandhi and the power equation of Karnataka has changed!</media:keywords>
    </item>
    </channel>
</rss>