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    <title>Delhi Lookout &amp; Latest Posts</title>
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    <description>Delhi Lookout &amp; Latest Posts</description>
    <dc:language>en</dc:language>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Delhi Lookout &amp; All Rights Reserved. |  Design and Develop By &amp;lt;a class=&amp;quot; text&amp;light&amp;quot; href=&amp;quot;https://rjinfotechindia.com/&amp;quot;&amp;gt;RJ Infotech&amp;lt;/a&amp;gt;</dc:rights>
    <item>
        <title>CWC बैठक के बाद राहुल गांधी का बड़ा हमला: “ज्ञानेश कुमार को जाना होगा, PM मोदी खुद कराएंगे इस्तीफा!”</title>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_1_0">कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और बीजेपी पर बेहद तीखा हमला बोला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_1_1">राहुल गांधी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त बिना राजनीतिक संरक्षण के काम नहीं कर सकते और आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संरक्षण प्राप्त है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_2_0">राहुल गांधी ने कहा कि “ज्ञानेश कुमार को जाना होगा” और उनका इस्तीफा तय है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_2_1">उनके मुताबिक, आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा कराएंगे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_2_2">उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं से इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का आह्वान किया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_3_0">राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने “वोट चोरी” के आरोप को भी दोहराया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_3_1">उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों को मतदाता सूची से हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_3_2">हाल के दिनों में उन्होंने दिल्ली के बेला एस्टेट का उदाहरण भी दिया, जहां उनके अनुसार SIR के बाद 728 लोगों में से 727 नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए।</span></p>
<p><span data-hovered="true" data-sentence="a0d3f86acec0a811_4_0">राहुल गांधी का आरोप है कि वोट का अधिकार सुरक्षित नहीं रहेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की पूरी श्रृंखला प्रभावित होगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_4_1">वह पहले भी “वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी” की बात कहते हुए चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठा चुके हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_5_0">CWC बैठक में कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_5_1">कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे, SIR से जुड़े फैसलों पर रोक और हटाए गए मतदाताओं के नामों को लेकर पारदर्शिता जैसी मांगें सामने रखीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_6_0">हालांकि, “वोट चोरी” और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक हेरफेर के आरोप राजनीतिक आरोप हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_6_1">चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है, जबकि बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_6_2">इस पूरे विवाद का केंद्र अब चुनावी रोल के पुनरीक्षण, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर उठे सवाल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_7_0">राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित रखने के बजाय जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_7_1">चुनाव आयोग पर उठ रहे सवाल और “वोट चोरी” का मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का प्रमुख विषय बना रह सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a0d3f86acec0a811_7_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 18:11:41 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Gyanesh Kumar has to go, PM Modi himself will resign: Rahul Gandhi after CWC meet &quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>SIR विवाद पर सड़कों पर संग्राम! कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आर&amp;पार की लड़ाई</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-struggle-on-the-streets-over-the-SIR-dispute-Congress-stages-nationwide-protest-against-CEC-Gyanesh-Kumar</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_1_0">नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_1_1">Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस के बीच टकराव अब सड़कों तक पहुंच गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_1_2">कांग्रेस ने शुक्रवार को दिल्ली समेत कई राज्यों में देशव्यापी प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, पद से हटाने और कार्रवाई की मांग की। </span><span data-hovered="true" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_1_3">दिल्ली, लखनऊ, पटना, कोलकाता, गुवाहाटी, देहरादून, जम्मू और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च करते नजर आए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_2_0">दिल्ली में कांग्रेस और इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_2_1">प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_2_2">दिल्ली में कांग्रेस ने “Gyanesh Kumar Hatao, EC Bachao” जैसे नारों और पोस्टरों के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_3_0">गुवाहाटी में प्रदर्शन ने लिया टकराव का रूप। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_3_1">असम कांग्रेस ने राजीव भवन से मार्च निकाला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_3_2">पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को पार करने की कोशिश के दौरान असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_3_3">कांग्रेस ने CEC पर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_4_0">लखनऊ में भारी बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और CEC के इस्तीफे की मांग की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_4_1">वहीं पटना और चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_4_2">पंजाब कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_5_0">जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_5_1">कई जगह प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_6_0">इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान बेहद तीखे शब्दों में CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_6_1">कांग्रेस का आरोप है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े घटनाक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_6_2">हालांकि, ये आरोप कांग्रेस के हैं; </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_6_3">चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर उठाए गए सवालों और आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_7_0">कांग्रेस ने 25 सितंबर के देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान पहले ही कर दिया था और राज्य इकाइयों को चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का निर्देश दिया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_7_1">पार्टी CEC के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए विपक्षी दलों के साथ महाभियोग प्रस्ताव पर भी चर्चा कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_8_0">SIR विवाद ने अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_8_1">कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है, वहीं चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक तथ्यों और स्वतंत्र जांच की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="10cb9a7e3b1dbee4_8_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 17:36:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The struggle on the streets over the SIR dispute! Congress stages nationwide protest against CEC Gyanesh Kumar</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जिस मां ने जन्म दिया, उसी की हत्या… और फिर तीन दिन तक उसी घर में शव के साथ रहना।</title>
        <link>https://delhilookout.com/Killing-the-mother-who-gave-birth...-and-then-living-with-the-corpse-in-the-same-house-for-three-days.</link>
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        <description><![CDATA[ <p>झारखंड की यह घटना सिर्फ एक अपराध की खबर नहीं है। यह हमारे उस समाज के सामने खड़ा एक भयावह सवाल है, जहां कभी रिश्ते इंसान की सबसे बड़ी ताकत हुआ करते थे।<br>एक मां और बेटे के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर गुस्से में बेटे ने अपनी मां के सिर पर लकड़ी के कुंदे से वार कर दिया। मां की मौत हो गई… लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।<br>आरोप है कि बेटा शव को कमरे में छोड़कर कई दिनों तक उसी घर में सामान्य रूप से आता-जाता रहा।</p>
<p>आखिर ऐसा क्या टूट गया है हमारे भीतर कि रिश्तों का दर्द हमें छूना बंद कर रहा है?</p>
<p>आज घर बड़े हो रहे हैं, लेकिन कई बार दिल छोटे होते जा रहे हैं।<br>बातचीत की जगह बहस ने ले ली है, समझने की जगह आरोपों ने और धैर्य की जगह गुस्से ने।</p>
<p>हर विवाद अपराध में नहीं बदलता, लेकिन हर बड़ा विवाद अक्सर किसी छोटे संवाद के टूटने से शुरू होता है।</p>
<p>यह घटना हमें सिर्फ कानून-व्यवस्था के बारे में सोचने पर मजबूर नहीं करती,<br>बल्कि यह भी पूछती है—</p>
<p>क्या हम अपने ही रिश्तों को समय दे रहे हैं?<br>क्या हम अपनों की बात सुन रहे हैं?<br>क्या हम गुस्से से पहले एक पल रुकना सीख रहे हैं?</p>
<p>क्योंकि जिस समाज में रिश्तों में संवेदना बची रहती है, वहां मतभेद हो सकते हैं…<br>लेकिन इंसानियत खत्म नहीं होती।</p>
<p>आज जरूरत सिर्फ अपराध रोकने की नहीं,<br>रिश्तों में फिर से संवाद, धैर्य और संवेदनशीलता लौटाने की भी है।</p>
<p>कभी-कभी किसी रिश्ते को बचाने के लिए बड़ी कोशिश नहीं,<br>बस किसी अपने को समय पर सुन लेना ही काफी होता है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p>Sometimes it is not a big effort to save a relationship, just listening to someone on time is enough.</p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 18:45:41 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Killing the mother who gave birth... and then living with the corpse in the same house for three days.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>14 आपत्तियां, 3 आयुक्त और एक बड़ा सवाल—क्या चुनाव आयोग के फैसलों में सबकी आवाज बराबर सुनी गई?</title>
        <link>https://delhilookout.com/14-objections,-3-commissioners-and-a-big-question---were-all-voices-heard-equally-in-the-ECs-decisions</link>
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        <description><![CDATA[ <p>SIR को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Indian Express की जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में मतदाता अपीलों और गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए और व्यक्तिगत राय या सुझाव को संस्थागत मतभेद नहीं माना जा सकता।</p>
<p>यहीं से असली सवाल शुरू होता है—</p>
<p>अगर आपत्तियां दर्ज हुईं, तो उनका निपटारा कैसे हुआ?<br>अगर फैसले सर्वसम्मत थे, तो दर्ज आपत्तियों की प्रकृति क्या थी?<br>और अगर देश की मतदाता सूची से जुड़ा फैसला है, तो पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी?</p>
<p>लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ नतीजे का नाम नहीं है।<br>चुनाव पर जनता का भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p>
<p>SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना हो सकता है, लेकिन प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब भी उतनी ही स्पष्टता से देना होगा।</p>
<p>क्योंकि सवाल सिर्फ वोटर लिस्ट का नहीं—वोटर के भरोसे का है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 18:23:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>14 objections, 3 commissioners and a big question - were all voices heard equally in the EC&#039;s decisions?</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ सकता है महंगा? अमेरिका के 100% टैरिफ वाले बिल पर दिल्ली का दो टूक जवाब</title>
        <link>https://delhilookout.com/Will-India-have-to-buy-more-oil-from-Russia-Delhis-two-pronged-response-to-Americas-100-tariff-bill</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_1_0">अमेरिका और भारत के रिश्तों के बीच रूस से तेल खरीदने का मुद्दा एक बार फिर बड़ा आर्थिक दबाव बनकर सामने आया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_1_1">अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 262-159 वोटों से मंजूरी दे दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_1_2">अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_2_0">इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के अमेरिकी आयात पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_2_1">भारत और चीन जैसे रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के संभावित दायरे में आ सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_2_2">हालांकि, 100% टैरिफ भारत पर स्वतः लागू नहीं हुआ है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_2_3">इसके वास्तविक इस्तेमाल, दर और दायरे का फैसला आगे अमेरिकी प्रशासन करेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_3_0">भारत ने साफ किया—ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_4_0">अमेरिकी कदम पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_4_1">भारत ने दोहराया कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और बदलती वैश्विक परिस्थितियों तथा बाजार के आधार पर अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करना जारी रखा जाएगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_5_0">भारत ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_5_1">नई दिल्ली के मुताबिक, संभावित टैरिफ का असर केवल भारत-अमेरिका व्यापार पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_5_2">साथ ही भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_6_0">असली चिंता: </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_6_1">तेल, महंगाई और भारत-अमेरिका व्यापार</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_7_0">भारत के लिए मामला सिर्फ अमेरिकी टैरिफ तक सीमित नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_7_1">रूस भारत के कच्चे तेल का एक बड़ा स्रोत बन चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_7_2">ऐसे में यदि अमेरिकी प्रशासन वास्तव में भारी अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारत के निर्यात, व्यापारिक लागत और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_7_3">दूसरी ओर, रूसी तेल की खरीद में बदलाव से भारत के लिए कच्चे तेल की लागत और वैश्विक तेल बाजार की दिशा भी महत्वपूर्ण हो सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_8_0">फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करते हैं, किस दर से करते हैं और किन भारतीय उत्पादों पर इसे लागू किया जाता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_8_1">बिल के कानून बनने के बाद इन पहलुओं पर अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसले पर नजर रहेगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_9_0">यानी मामला सिर्फ रूस से तेल खरीदने का नहीं—भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के अगले दौर का भी है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_9_0"></span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="77329901630cc032_9_0"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 11:40:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Will India have to buy more oil from Russia? Delhi&#039;s two-pronged response to America&#039;s 100% tariff bill</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>भारत पर पाकिस्तान का एयरस्पेस प्रतिबंध फिर बढ़ा, 24 अक्टूबर तक भारतीय विमानों की एंट्री बंद</title>
        <link>https://delhilookout.com/Pakistans-airspace-ban-on-India-extended-till-October-24</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_0">सबहेड: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_1">पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ हवाई प्रतिबंध जारी; </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_2">भारतीय एयरलाइंस और भारतीय पंजीकरण वाले विमानों पर रोक</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_2_0">पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंध को एक बार फिर बढ़ा दिया है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="a38a6150133069d2_2_1">पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण (PAA) के ताजा नोटिस के मुताबिक, यह प्रतिबंध अब 24 अक्टूबर 2026 की सुबह 4:59 बजे तक लागू रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_2_2">इससे पहले मौजूदा प्रतिबंध की अवधि 24 सितंबर को समाप्त होने वाली थी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_0">पाकिस्तान के इस फैसले के तहत भारतीय पंजीकरण वाले विमानों के साथ-साथ भारतीय एयरलाइंस या ऑपरेटरों द्वारा संचालित, स्वामित्व वाले अथवा लीज पर लिए गए विमानों को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_1">नोटिस में सैन्य उड़ानों को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_4_0">यह प्रतिबंध कराची और लाहौर दोनों फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (FIR) में लागू रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_4_1">अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे की विमानन सेवाओं के लिए हवाई क्षेत्र संबंधी पाबंदियां लागू की थीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_0">भारत के नजरिए से यह विस्तार महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर रोक से भारत और पश्चिमी देशों के बीच कुछ उड़ानों के रूट और संचालन पर असर पड़ सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_1">एयरलाइंस को वैकल्पिक हवाई मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे कुछ परिस्थितियों में उड़ान की दूरी, समय और परिचालन लागत बढ़ सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_0">24 सितंबर को खत्म होने वाला प्रतिबंध अब 24 अक्टूबर तक बढ़ना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच विमानन क्षेत्र में लगी पाबंदियां फिलहाल जारी रहने वाली हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_0"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:30:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Pakistan&#039;s airspace ban on India extended till October 24</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>$100 प्रति बैरल के पार कच्चा तेल… क्या शुरू हो गया ‘ग्रेट फ्यूल क्राइसिस’? पेट्रोल&amp;डीजल से लेकर हर सामान की कीमत पर खतरा</title>
        <link>https://delhilookout.com/Crude-Oil-Crosses-100-Per-Barrel...-What-Started-the-Great-Fuel-Crisis-The-price-of-everything-from-petrol-to-diesel-is-at-risk.</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_0">नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_1">कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता बन गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_2">ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह करीब चार महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और $100 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_3">15 सितंबर को ब्रेंट करीब $108.75 पर बंद हुआ, जबकि WTI $105.83 तक पहुंच गया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_4">बुधवार को अमेरिकी क्रूड भंडार बढ़ने के बाद कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई, लेकिन बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_2_0">सवाल सिर्फ तेल के महंगा होने का नहीं है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="a38a6150133069d2_2_1">सवाल यह है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका बोझ आखिर किसकी जेब पर पड़ेगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_0">‘ग्रेट फ्यूल क्राइसिस’ का मतलब क्या है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_4_0">यह कोई आधिकारिक आर्थिक शब्द नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_4_1">मौजूदा हालात को समझाने के लिए इसे एक ऐसे संभावित ऊर्जा संकट के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें युद्ध, समुद्री रास्तों में बाधा और तेल के बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण वैश्विक सप्लाई दबाव में आ जाए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_0">होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट का सबसे अहम हिस्सा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_1">IMF के मुताबिक, इस रास्ते से सामान्य परिस्थितियों में करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं—यानी दुनिया की खपत का लगभग पांचवां हिस्सा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_2">युद्ध के दौरान इस रास्ते में व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर जोखिम में डाल दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_0">अब चिंता सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_1">सऊदी अरब की East-West Pipeline पर हमले और उसके बाद निर्यात मार्गों में बाधा ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_2">यह पाइपलाइन होर्मुज को बायपास करने वाले प्रमुख विकल्पों में से एक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_0">तेल महंगा हुआ तो आपकी जेब पर क्या होगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_8_0">तेल सिर्फ पेट्रोल पंप पर बिकने वाला ईंधन नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_8_1">यह पूरी अर्थव्यवस्था का एक अहम इनपुट है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_9_0">कच्चा तेल महंगा → पेट्रोल-डीजल महंगा → ट्रांसपोर्ट महंगा → माल ढुलाई महंगी → उत्पादन लागत बढ़ी → सामान और सेवाओं की कीमतों पर दबाव।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_10_0">यानी असर सिर्फ कार या बाइक चलाने वाले पर नहीं पड़ता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_10_1">सब्जी, दूध, फल, दवा, ऑनलाइन डिलीवरी, टैक्सी, बस, निर्माण सामग्री—लगभग हर उस चीज पर असर पड़ सकता है जिसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_11_0">और यही वह बिंदु है जहां अंतरराष्ट्रीय तेल संकट सीधे आम परिवार के मासिक बजट में बदल सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_12_0">डीजल पर दबाव क्यों ज्यादा खतरनाक है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_13_0">डीजल महंगा होने का असर कई क्षेत्रों में तेजी से फैलता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_13_1">ट्रक, बस, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई इससे सीधे जुड़े हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_14_0">यूरोप में डीजल की कीमतें सप्लाई की तंगी के कारण रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुकी हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_14_1">रूस की रिफाइनरी आपूर्ति में व्यवधान और मध्य-पूर्व से निर्यात पर दबाव ने स्थिति को और जटिल किया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_15_0">यानी आने वाले समय में सवाल केवल यह नहीं होगा कि “पेट्रोल कितना महंगा हुआ?</span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_15_1">” बल्कि यह भी होगा कि “महंगे डीजल ने बाकी सामान कितना महंगा कर दिया?</span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_15_2">”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_16_0">IMF की चेतावनी: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_16_1">मामला सिर्फ महंगे पेट्रोल तक सीमित नहीं</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_17_0">IMF ने ऊर्जा संकट के अलग-अलग परिदृश्यों का आकलन किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_17_1">उसके adverse scenario में यदि ऊर्जा कीमतों का झटका बना रहता है, तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2026 में 2.5% तक गिर सकती है और महंगाई 5.4% तक पहुंच सकती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_17_2">इससे भी गंभीर स्थिति में वैश्विक वृद्धि करीब 2% और महंगाई 6% से ऊपर जा सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_18_0">इसका सीधा मतलब है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_18_1">तेल महंगा होने पर एक तरफ परिवारों की खरीदारी क्षमता घटती है और दूसरी तरफ कारोबार की लागत बढ़ती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_19_0">यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आर्थिक विकास और महंगाई के बीच मुश्किल संतुलन पैदा हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_20_0">भारत के लिए खतरा क्यों बड़ा है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_21_0">भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_21_1">इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल का असर भारत के आयात बिल, रुपये, महंगाई और व्यापार घाटे पर पड़ सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_22_0">लेकिन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा यह है कि देश ने हाल के महीनों में सप्लाई के वैकल्पिक रास्तों और घरेलू ऊर्जा प्रबंधन पर जोर दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_22_1">IMF भी मानता है कि तेल संकट का असर हर देश पर एक जैसा नहीं पड़ता; </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_22_2">ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा संवेदनशील होती हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_23_0">क्या पेट्रोल-डीजल तुरंत महंगा हो जाएगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_24_0">जरूरी नहीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_25_0">अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत और भारतीय पंप पर खुदरा कीमत के बीच कई स्तर होते हैं—</span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_25_1">रिफाइनिंग लागत, टैक्स, रुपये-डॉलर विनिमय दर, तेल कंपनियों की कीमत नीति और सरकारी फैसले।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_26_0">इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल $100 के पार जाने का मतलब यह नहीं कि अगले ही दिन भारत में पेट्रोल या डीजल उसी अनुपात में महंगा हो जाएगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_27_0">लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_28_0">अभी सबसे बड़ी चिंता क्या है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_29_0">सबसे बड़ा खतरा सिर्फ आज की तेल कीमत नहीं, बल्कि सप्लाई में लंबे समय तक रहने वाला व्यवधान है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_30_0">IMF के अनुसार, शुरुआती झटके को inventories, अतिरिक्त उत्पादन और मांग में बदलाव ने कुछ हद तक संभाला है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_30_1">लेकिन इन सुरक्षा कवचों का इस्तेमाल बढ़ने से भविष्य के झटकों से निपटने की गुंजाइश कम हो सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_31_0">यानी दुनिया के सामने असली सवाल है:</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_32_0">अगर तेल की सप्लाई कई महीनों तक प्रभावित रही तो क्या होगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_33_0">इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं दिखाई देगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_33_1">इसका असर रसोई के बजट, ट्रांसपोर्ट के किराए, सामान की कीमत, उद्योग की लागत और अंततः महंगाई में दिखाई दे सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_34_0">तो क्या दुनिया ‘ग्रेट फ्यूल क्राइसिस’ में पहुंच गई है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_35_0">अभी इसे निश्चित रूप से “ग्रेट फ्यूल क्राइसिस” कहना जल्दबाजी होगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_35_1">मौजूदा स्थिति को ज्यादा सटीक तौर पर गंभीर वैश्विक ऊर्जा-सप्लाई संकट का जोखिम कहा जा सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_36_0">क्योंकि बाजार में कुछ राहत के संकेत भी मौजूद हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_36_1">16 सितंबर को अमेरिकी तेल भंडार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी और सऊदी अरब द्वारा ओमान के रास्ते अतिरिक्त तेल भेजे जाने की खबर से कीमतों पर कुछ दबाव कम हुआ। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_36_2">लेकिन मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और प्रमुख सप्लाई मार्गों पर जोखिम अभी भी बना हुआ है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_37_0">यही वजह है कि आम आदमी के लिए सबसे अहम सवाल आज यह नहीं है कि Brent $108 है या $105। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_37_1">असली सवाल यह है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_37_2">अगर तेल लंबे समय तक $100 के ऊपर रहा, तो बढ़ती लागत का अगला बिल आखिर किसके घर पहुंचेगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_38_0">और उसका जवाब सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा… </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_38_1">वह आपकी रोजमर्रा की खरीदारी की हर रसीद में दिखाई दे सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_38_1"></span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_38_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:08:01 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Crude Oil Crosses 100 Per Barrel... What Started the &#039;Great Fuel Crisis&#039;? The price of everything from petrol to diesel is at risk.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ग्राहकों पर पड़ेगा कितना असर?</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-case-of-0.4-charge-on-UPI-payments-above-₹2,000-has-reached-the-Supreme-Court,-how-will-it-affect-the-customers</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-case-of-0.4-charge-on-UPI-payments-above-₹2,000-has-reached-the-Supreme-Court,-how-will-it-affect-the-customers</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_0">नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_1">₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_2">अंजन दत्ता नाम के याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_1_3">याचिका में इसे समानता और व्यापार के मौलिक अधिकार से जुड़ा मामला बताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का दावा किया गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_2_0">याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए शुल्क से खासकर छोटे और कम मार्जिन वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_2_1">इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है, क्योंकि व्यापारी अतिरिक्त लागत को कीमतों में शामिल कर सकते हैं या बड़े भुगतान के लिए नकद विकल्प को प्राथमिकता दे सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_0">हालांकि, मौजूदा नियम के मुताबिक MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_1">15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR व्यापारी पक्ष पर लागू होगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_3_2">₹2,000 तक के P2M भुगतान और Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन इस MDR से बाहर रहेंगे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_4_0">ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_0">अगर आप किसी दुकान या व्यापारी को ₹3,000 UPI से भुगतान करते हैं, तो तय व्यवस्था के तहत आपके खाते से ₹3,000 ही जाएंगे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_1">इस लेनदेन पर 0.4% यानी ₹12 MDR व्यापारी पक्ष पर लगेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_2">₹50,000 के भुगतान पर MDR ₹200 होगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_5_3">₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन में सामान्य MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_0">महत्वपूर्ण बात: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_6_1">सरकार ने कहा है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और बैंकों को सलाह दी गई है कि इसका खर्च ग्राहकों पर न डाला जाए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_0">किन भुगतानों पर राहत रहेगी?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_1">₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_2">MDR नहीं</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_2">Person-to-Person भुगतान: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_3">MDR नहीं</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_3">छोटे पात्र व्यापारियों के कुछ लेनदेन: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_4">MDR से छूट</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_4">रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्र: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_5">₹5 फ्लैट MDR</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_5">म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर से जुड़े भुगतान: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_7_6">0.02% MDR, अधिकतम ₹300 तक</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_8_0">सरकार के अनुसार लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_9_0">अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद असली सवाल यही है कि ₹2,000 से ऊपर के डिजिटल भुगतान पर लागू होने वाली इस नई MDR व्यवस्था की कानूनी वैधता क्या है और इसका वास्तविक आर्थिक बोझ आखिर किस पर पड़ेगा? </span><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_9_1">मामले की सुनवाई में सामने आने वाले तर्क इस व्यवस्था की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a38a6150133069d2_9_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:02:45 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The case of 0.4% charge on UPI payments above ₹2, 000 has reached the Supreme Court, how will it affect the customers?</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>स्टार पावर नहीं, कहानी का दम! ‘हनुमान अंश’ ने 34वें दिन ‘टॉक्सिक’ को पछाड़ा, बॉक्स ऑफिस पर लिखी नई कहानी</title>
        <link>https://delhilookout.com/Not-the-star-power,-but-the-power-of-the-story-Hanuman-Ansh-beats-Toxic-on-34th-day,-writes-a-new-story-at-the-box-office</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Not-the-star-power,-but-the-power-of-the-story-Hanuman-Ansh-beats-Toxic-on-34th-day,-writes-a-new-story-at-the-box-office</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_0">मुंबई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_1">भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों एक ऐसी फिल्म ने अपनी पकड़ बना रखी है, जिसकी रफ्तार देखकर ट्रेड पंडित भी हैरान हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_2">नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक विरासत और हनुमान भक्ति से जुड़ी ‘हनुमान अंश’ रिलीज के पांचवें हफ्ते में भी सिनेमाघरों में दर्शकों को खींच रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_3">खास बात यह है कि फिल्म की कमाई उस वक्त भी मजबूत बनी हुई है, जब ज्यादातर फिल्में रिलीज के कुछ ही हफ्तों बाद बॉक्स ऑफिस से लगभग गायब हो जाती हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_2_0">फिल्म की सबसे बड़ी चर्चा अब इसके 34वें दिन के कलेक्शन को लेकर हो रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_2_1">सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने रिलीज के 34वें दिन यानी पांचवें बुधवार को 10.25 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_3_0">यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्म ने पांचवें बुधवार की कमाई के मामले में ‘धुरंधर’ के 4.75 करोड़ रुपये को पीछे छोड़ दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_3_1">यानी एक ऐसा दौर, जब किसी फिल्म से रोज करोड़ों की कमाई की उम्मीद भी मुश्किल मानी जाती है, वहां ‘हनुमान अंश’ डबल डिजिट में कमाई कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_4_0">34 दिनों में फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन 153.13 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि इसकी ग्रॉस कमाई 180.73 करोड़ रुपये बताई जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_5_0">‘टॉक्सिक’ को पछाड़ना बना सबसे बड़ी खबर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_6_0">‘हनुमान अंश’ की सफलता की असली कहानी यहां से शुरू होती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_6_1">फिल्म ने यश स्टारर ‘टॉक्सिक’ के हिंदी वर्जन के 143.63 करोड़ रुपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_7_0">यानी जिस फिल्म का बजट करीब 500 करोड़ रुपये बताया गया और जिसके साथ एक बड़े स्टार का नाम जुड़ा था, उसके हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को एक अपेक्षाकृत कम बजट वाली फिल्म ने पीछे छोड़ दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_8_0">इसी के साथ ‘हनुमान अंश’ 2026 की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_8_1">इतना ही नहीं, अगर 35वें दिन इसका कलेक्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, तो ‘आवारापन 2’ के 156.02 करोड़ रुपये को पीछे छोड़ते हुए यह साल की टॉप-5 हिंदी फिल्मों में भी अपनी जगह बना सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_9_0">बॉलीवुड के लिए सिर्फ एक बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं, बड़ा सबक</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_10_0">‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ 153 करोड़ रुपये के कलेक्शन तक सीमित नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_10_1">असली सवाल यह है कि आखिर पांचवें हफ्ते में भी दर्शक इस फिल्म को देखने क्यों पहुंच रहे हैं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_11_0">बॉक्स ऑफिस का यह ट्रेंड एक बार फिर उस बहस को मजबूत करता है कि दर्शक सिर्फ बड़े बजट, बड़े स्टार और महंगे विजुअल्स के लिए सिनेमाघर नहीं जाता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_11_1">अगर कहानी दर्शक से जुड़ जाए, भावनात्मक कनेक्शन बने और फिल्म उसे कुछ महसूस करा सके, तो उसका असर रिलीज के कई हफ्तों बाद भी कायम रह सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_12_0">‘हनुमान अंश’ ने शायद बॉलीवुड को यही सबसे बड़ा सबक दिया है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_12_1">बजट फिल्म को बड़ा बना सकता है, लेकिन दर्शकों का प्यार ही उसे लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर जिंदा रखता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_0">और यही वजह है कि पांचवें हफ्ते में भी ‘हनुमान अंश’ की गूंज सिनेमाघरों में सुनाई दे रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_0"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 18:06:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Not the star power, but the power of the story! &#039;Hanuman Ansh &#039;beats&#039; Toxic &#039;on 34th day, writes a new story at the box office</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>7 साल बाद दिल्ली में जिनपिंग की एंट्री, मोदी से होगी सीधी मुलाकात; BRICS के मंच पर दुनिया की नजर</title>
        <link>https://delhilookout.com/Jinpings-entry-in-Delhi-after-7-years,-there-will-be-a-direct-meeting-with-Modi-The-worlds-view-on-the-BRICS-platform</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Jinpings-entry-in-Delhi-after-7-years,-there-will-be-a-direct-meeting-with-Modi-The-worlds-view-on-the-BRICS-platform</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_1">चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आखिरकार भारत आ रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_2">कई दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_1_3">चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_2_0">यह दौरा इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति भारत की धरती पर कदम रखेंगे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_2_1">जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_3_0">दिल्ली में करीब 24 घंटे रहेंगे जिनपिंग</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_4_0">सूत्रों के मुताबिक शी जिनपिंग 12 सितंबर को करीब दोपहर 12 बजे दिल्ली पहुंच सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_4_1">भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_4_2">इसके बाद जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_4_3">13 सितंबर को दोपहर के आसपास वह चीन के लिए रवाना हो सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_5_0">इस मुलाकात पर इसलिए भी खास नजर रहेगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और सैन्य तनाव के चलते भारत-चीन संबंधों में काफी तल्खी रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_5_1">ऐसे में मोदी-जिनपिंग की आमने-सामने की बातचीत दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_6_0">जिनपिंग की भारत यात्राओं का सिलसिला</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_7_0">शी जिनपिंग ने पहली बार सितंबर 2014 में भारत का दौरा किया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_7_1">इसके बाद वह 2016 में गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_7_2">2019 में मामल्लापुरम में मोदी-जिनपिंग की अनौपचारिक बैठक हुई थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_7_3">अब करीब सात साल बाद उनकी नई दिल्ली यात्रा होने जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_8_0">मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर दुनिया की नजर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_9_0">12 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली मोदी-जिनपिंग बैठक सिर्फ भारत और चीन के दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_9_1">यह एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत भी मानी जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_10_0">BRICS सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत सभी 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी रहेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_10_1">ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_11_0">सम्मेलन से पहले भारत-चीन संबंधों को लेकर चीन की तरफ से भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_11_1">भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के उस बयान को साझा किया, जिसमें कहा गया था कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_12_0">BRICS के मंच पर भारत की बड़ी भूमिका</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_0">साल 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_1">भारत अपनी चौथी BRICS अध्यक्षता के दौरान संगठन को अधिक समावेशी, प्रभावी और समाधान-केंद्रित मंच बनाने पर जोर दे रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_2">इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का विषय है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.</span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_13_3">”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_14_0">BRICS अब सिर्फ एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_14_1">यह चार महाद्वीपों में फैला एक प्रभावशाली जियो-पॉलिटिकल समूह बन चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_14_2">वर्तमान में इसके 11 सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_15_0">इन देशों की सामूहिक ताकत दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, 40 फीसदी वैश्विक GDP और 26 फीसदी वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_16_0">एक मंच, दो बड़ी ताकतें और दुनिया की निगाहें</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_17_0">दिल्ली में BRICS का यह मंच ऐसे समय पर सज रहा है, जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_17_1">ऐसे में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_17_2">सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों, व्यापार, रणनीतिक सहयोग और एशिया में बदलते शक्ति संतुलन के बीच इस बैठक से निकलने वाला संदेश बेहद अहम होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_18_0">अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जिनपिंग दिल्ली आ रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_18_1">बड़ा सवाल यह है कि भारत मंडपम में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन रिश्तों की अगली तस्वीर कैसी होगी?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_18_1"></span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="5e721dec80c1a38a_18_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 17:56:01 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Jinping&#039;s entry in Delhi after 7 years, there will be a direct meeting with Modi; The world&#039;s view on the BRICS platform</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>लखनऊ एयरपोर्ट पर AI&amp;1717 की लैंडिंग से पहले बड़ा मोड़: अनस्टेबल एप्रोच पर पायलट ने रोकी लैंडिंग, दूसरी कोशिश में सुरक्षित उतरा विमान</title>
        <link>https://delhilookout.com/Big-twist-before-landing-of-AI-1717-at-Lucknow-airport:-Pilot-aborts-landing,-lands-safely-on-second-attempt</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Big-twist-before-landing-of-AI-1717-at-Lucknow-airport:-Pilot-aborts-landing,-lands-safely-on-second-attempt</guid>
        <description><![CDATA[ <p>लखनऊ। अमौसी एयरपोर्ट पर मंगलवार को दिल्ली से लखनऊ आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को लैंडिंग से ठीक पहले गो-अराउंड करना पड़ा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसी विमान में सवार थे। पहली लैंडिंग के दौरान विमान का एप्रोच निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थिर नहीं होने पर पायलट ने जोखिम लेने के बजाय लैंडिंग रोकने का फैसला किया और विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर नए एप्रोच के लिए तैयार किया।</p>
<p>सवाल भी उठे, लेकिन सुरक्षा फैसला बना सबसे अहम</p>
<p>घटना ने लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग प्रक्रिया और परिचालन व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे एयरपोर्ट की तकनीकी या प्रशासनिक विफलता कहना जल्दबाजी होगी। विमानन क्षेत्र में अनस्टेबल एप्रोच की स्थिति में गो-अराउंड करना एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया मानी जाती है।</p>
<p>यानी पहली कोशिश में लैंडिंग न करना किसी लापरवाही का संकेत जरूरी नहीं, बल्कि इसके उलट यह पायलट की ओर से संभावित जोखिम से बचने के लिए लिया गया एहतियाती निर्णय हो सकता है।</p>
<p>दूसरी कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग</p>
<p>पहली कोशिश के बाद विमान ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा लखनऊ एयरपोर्ट की ओर एप्रोच लिया। दूसरी कोशिश में AI-1717 की सुरक्षित लैंडिंग हुई। विमान में सवार यात्रियों और क्रू के सुरक्षित होने की जानकारी है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि राहुल गांधी भी इसी फ्लाइट से दिल्ली से लखनऊ पहुंचे। गो-अराउंड के बाद दूसरी कोशिश में विमान के सुरक्षित उतरने के साथ स्थिति सामान्य हो गई।</p>
<p>दोपहर 2:20 बजे दिल्ली से हुआ था टेकऑफ</p>
<p>जानकारी के अनुसार AI-1717 ने दिल्ली से करीब दोपहर 2:20 बजे उड़ान भरी थी और इसके लगभग 3:30 बजे लखनऊ पहुंचने का निर्धारित समय था। लैंडिंग के पहले प्रयास में अनस्टेबल एप्रोच के कारण विमान को गो-अराउंड करना पड़ा।</p>
<p>अब असली सवाल—ऐसी स्थिति क्यों बनी?</p>
<p>घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि विमान का एप्रोच अस्थिर क्यों हुआ और क्या उस समय मौसम, हवा की दिशा, रनवे की स्थिति, एयर ट्रैफिक या किसी अन्य परिचालन कारण की भूमिका थी?</p>
<p>फिलहाल किसी आधिकारिक बयान से ऐसी किसी तकनीकी खराबी या एयरपोर्ट-स्तरीय चूक की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घटना को लेकर अटकलों के बजाय आधिकारिक जांच या एयरलाइन/एयरपोर्ट की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।</p>
<p>हालांकि एक बात स्पष्ट है—पायलट ने अस्थिर एप्रोच में लैंडिंग को जोखिम में डालने के बजाय गो-अराउंड का फैसला लिया और दूसरी कोशिश में विमान को सुरक्षित उतारा। विमानन सुरक्षा में यही सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 18:03:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Big twist before landing of AI-1717 at Lucknow airport: Pilot aborts landing, lands safely on second attempt</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Google का नया AI मॉडल मचाएगा तहलका! Coding की रेस में OpenAI और Anthropic को टक्कर देने आ रहा Gemini 3.8 Flash</title>
        <link>https://delhilookout.com/Googles-new-AI-model-will-make-a-splash-Gemini-3.8-Flash-to-compete-with-OpenAI-and-Anthropic-in-the-race-for-coding</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_0">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_1">OpenAI और Anthropic जैसे दिग्गज जहां AI Coding के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके हैं, वहीं अब Google भी बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_2">खबर है कि Google एक नए AI मॉडल पर काम कर रहा है, जो खास तौर पर Coding और Software Development में अपनी क्षमता के लिए चर्चा में है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_0">मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Google के अंदर इस नए मॉडल को फिलहाल ‘Skimaki’ नाम से जाना जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_1">माना जा रहा है कि कंपनी इसे बाजार में Gemini 3.8 Flash के नाम से पेश कर सकती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_2">हालांकि, इस मॉडल को लेकर Google की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_3_0">Coding पर होगा सबसे ज्यादा फोकस</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_0">Gemini 3.8 Flash को लेकर सामने आई जानकारी में सबसे ज्यादा चर्चा इसकी Coding क्षमता की हो रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_1">AI Coding अब टेक कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_2">Developers तेजी से AI मॉडल्स का इस्तेमाल Code लिखने, Debugging, Software Development और दूसरे तकनीकी कामों के लिए कर रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_5_0">ऐसे में Google का नया Flash मॉडल कंपनी के लिए रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_6_0">तेज और कम लागत वाले मॉडल की ताकत</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_0">Google की Gemini Flash सीरीज को आमतौर पर तेज Response और कम लागत वाले AI मॉडल्स के तौर पर देखा जाता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_1">ये मॉडल बड़े Frontier या Pro मॉडल्स की तुलना में हल्के हो सकते हैं, लेकिन उनकी Speed और कम लागत उन्हें बड़े पैमाने पर Commercial इस्तेमाल के लिए उपयोगी बनाती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_0">छोटे मॉडल्स का एक और फायदा यह है कि इन्हें लेकर कंपनियां ज्यादा तेजी से प्रयोग कर सकती हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_1">वहीं, बड़े AI मॉडल्स को Train और Update करने के लिए काफी ज्यादा Computing Power और संसाधनों की जरूरत होती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_9_0">Anthropic के Opus मॉडल से हुई तुलना</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_10_0">रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Google के Coding प्लेटफॉर्म Jetski में हुए कुछ इंटरनल टेस्ट के दौरान इंजीनियर्स ने Gemini 3.8 Flash को Anthropic के Opus मॉडल की तुलना में बेहतर पसंद किया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_0">हालांकि, इसे Google की हर Benchmark में जीत नहीं माना जा सकता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_1">इंटरनल टेस्ट के नतीजे किसी मॉडल की पूरी क्षमता या वास्तविक दुनिया के प्रदर्शन की अंतिम तस्वीर नहीं देते।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_12_0">OpenAI और Anthropic के साथ बढ़ेगा मुकाबला</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_13_0">Google के सामने चुनौती सिर्फ OpenAI और Anthropic तक सीमित नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_13_1">AI Coding का बाजार तेजी से फैल रहा है और कई बड़ी टेक कंपनियां इस क्षेत्र में अपने मॉडल और Coding Agents ला रही हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_0">Elon Musk की कंपनी xAI भी Coding पर फोकस करने वाले Grok मॉडल्स के साथ इस दौड़ में आगे बढ़ रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_1">वहीं Meta ने भी Muse Code नाम का AI Coding Agent पेश किया है, जिसे Alexandr Wang की Superintelligence Labs टीम से जोड़ा गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_15_0">ऐसे में अगर Google Gemini 3.8 Flash को Coding के लिए मजबूत और तेज मॉडल के तौर पर बाजार में उतारता है, तो यह AI Coding की रेस में कंपनी की स्थिति को फिर से मजबूत करने वाला बड़ा कदम साबित हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_0">फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Gemini 3.8 Flash वास्तव में OpenAI और Anthropic के मजबूत Coding मॉडल्स को पीछे छोड़ पाएगा, या Google को अभी और लंबी दूरी तय करनी होगी?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_0"></span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_0"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 19:29:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Google&#039;s new AI model will make a splash! Gemini 3.8 Flash to compete with OpenAI and Anthropic in the race for coding</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>‘मिर्जापुर: द मूवी’ की रिलीज से पहले बॉक्स ऑफिस पर मचा घमासान! एडवांस बुकिंग ने बढ़ाई उम्मीदें, पहले दिन ₹15 करोड़ तक कमा सकती है फिल्म</title>
        <link>https://delhilookout.com/Mirzapur:-The-Movie-is-on-a-roll-at-the-box-office.-Advance-booking-increases-expectations,-the-film-can-earn-up-to-₹15-crore-on-the-first-day</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Mirzapur:-The-Movie-is-on-a-roll-at-the-box-office.-Advance-booking-increases-expectations,-the-film-can-earn-up-to-₹15-crore-on-the-first-day</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_0">कालीन भैया और मुन्ना भैया की वापसी का फैंस को बेसब्री से इंतजार है और अब ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_1">4 सितंबर को रिलीज होने जा रही इस फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है और शुरुआती आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच अच्छी दिलचस्पी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_2">ट्रेड एक्सपर्ट्स की नजर अब इसके ओपनिंग डे और वीकेंड कलेक्शन पर टिकी है।</span></p>
<p><span data-hovered="true" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_0">फिल्म की एडवांस बुकिंग बुधवार शाम 5 बजे तक ब्लॉक सीटों समेत करीब ₹3.92 करोड़ तक पहुंच गई थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_1">वहीं ब्लॉक सीटों को हटाकर फिल्म ने करीब ₹2.39 करोड़ की एडवांस कमाई दर्ज की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_2">अब तक लगभग 83,933 टिकट बिक चुके हैं, जबकि फिल्म को करीब 4,866 शोज मिले हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_3_0">पहले दिन ₹13-15 करोड़ की ओपनिंग का अनुमान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_0">ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े के मुताबिक फिल्म की एडवांस बुकिंग फिलहाल बहुत ज्यादा तेज नहीं है, लेकिन औसत से बेहतर जरूर है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_1">उन्होंने अनुमान लगाया कि ‘मिर्जापुर: द मूवी’ रिलीज के पहले दिन ₹13 से ₹15 करोड़ तक का कारोबार कर सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_5_0">गिरीश वानखेड़े का मानना है कि फिल्म को अगर दर्शकों से जबरदस्त पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ मिलता है, तो इसका असर पूरे वीकेंड पर दिखाई दे सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_5_1">ऐसी स्थिति में फिल्म का ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन करीब ₹50 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_6_0">A सर्टिफिकेट और 3 घंटे 17 मिनट की लंबाई बन सकती है चुनौती</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_0">फिल्म के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_1">‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी अपनी हिंसा, खून-खराबे और बोल्ड कंटेंट के लिए जानी जाती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_2">फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है, ऐसे में फैमिली ऑडियंस का एक बड़ा वर्ग सिनेमाघरों से दूरी बना सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_0">इसके अलावा फिल्म की लंबाई भी चर्चा में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_1">3 घंटे 17 मिनट लंबी फिल्म के लिए दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचना और उन्हें अंत तक जोड़े रखना महत्वपूर्ण होगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_2">हालांकि, अगर फिल्म को मजबूत माउथ पब्लिसिटी मिलती है तो ये दोनों फैक्टर इसकी कमाई के रास्ते में बड़ी बाधा नहीं बन सकते।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_9_0">कालीन भैया-मुन्ना भैया के साथ फिर दिखेगा ‘मिर्जापुर’ का वही दबदबा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_10_0">फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया के किरदार में नजर आएंगे, जबकि दिव्येंदु मुन्ना त्रिपाठी के रूप में वापसी कर रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_10_1">इनके अलावा अली फजल, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, शीबा चड्ढा, रवि किशन और जितेंद्र जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_0">फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसका निर्माण रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर कर रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_1">फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसे दर्शकों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_2">खासतौर पर रवि किशन की दमदार एंट्री ने ट्रेलर को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_12_0">2018 में शुरू हुआ था ‘मिर्जापुर’ का सफर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_13_0">‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज का पहला सीजन साल 2018 में आया था और देखते ही देखते यह भारत की सबसे चर्चित क्राइम-ड्रामा फ्रेंचाइजी में शामिल हो गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_13_1">इसके बाद 23 अक्टूबर 2020 को दूसरा सीजन रिलीज हुआ, जिसे भी दर्शकों ने खूब पसंद किया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_0">फ्रेंचाइजी का तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को आया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_1">अब इसी लोकप्रिय कहानी को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाते हुए ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को रिलीज किया जा रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_15_0">अब असली परीक्षा सिनेमाघरों में होगी</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_0">एडवांस बुकिंग के आंकड़े फिलहाल फिल्म के लिए औसत से बेहतर शुरुआत का संकेत दे रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_1">पहले दिन ₹13-15 करोड़ और ओपनिंग वीकेंड में करीब ₹50 करोड़ का अनुमान सामने आ चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_2">लेकिन असली तस्वीर 4 सितंबर को फिल्म के सिनेमाघरों में उतरने के बाद साफ होगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_17_0">कालीन भैया और मुन्ना भैया की वापसी, ‘मिर्जापुर’ ब्रांड की जबरदस्त लोकप्रियता और ट्रेलर को मिली प्रतिक्रिया—इन सबके बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘मिर्जापुर: द मूवी’ बॉक्स ऑफिस पर वैसा ही भौकाल मचा पाएगी, जैसा इस फ्रेंचाइजी ने OTT पर मचाया था?</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 19:11:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा होंगे पहले CEO, 38 साल का शानदार सैन्य अनुभव आएगा काम ऑपरेशन सिंदूर से लेकर कारगिल तक निभा चुके हैं अहम भूमिका, पश्चिमी वायु कमान के चीफ भी रह चुके हैं जितेंद्र मिश्रा</title>
        <link>https://delhilookout.com/Major-changes-in-Ram-Mandir-Trust:-Retired-Air-Marshal-Jitendra-Mishra-will-be-the-first-CEO,-38-years-of-military-experience-will-come.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Major-changes-in-Ram-Mandir-Trust:-Retired-Air-Marshal-Jitendra-Mishra-will-be-the-first-CEO,-38-years-of-military-experience-will-come.</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_0">अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_1">रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किए जाने का फैसला किया गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_1_2">ट्रस्ट की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने के लिए CEO का नया पद बनाया गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_2_0">कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_3_0">देवरिया के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में 38 साल से ज्यादा का शानदार करियर पूरा कर चुके हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_3_1">वह 30 अप्रैल 2026 को रिटायर हुए थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_3_2">अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई बेहद महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_0">जितेंद्र मिश्रा वायुसेना की पश्चिमी कमान के चीफ भी रह चुके हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_4_1">इसके अलावा उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) के चीफ टेस्ट पायलट, दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और ASTE के कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_5_0">वह एयर मुख्यालय में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) जैसे पदों पर भी रहे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_5_1">इसके अलावा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग से जुड़े वरिष्ठ पद की जिम्मेदारी भी संभाली।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_6_0">मौजूदा जिम्मेदारी से पहले वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_7_0">ऑपरेशन सिंदूर और कारगिल से जुड़ा अनुभव</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_0">जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर की खास बात उनका व्यापक ऑपरेशनल अनुभव है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_8_1">उन्होंने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_9_0">उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_10_0">यानी राम मंदिर ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को दी गई है, जिसके पास नेतृत्व, रणनीतिक योजना, संचालन और बड़े स्तर के प्रशासन का लंबा अनुभव है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_11_0">क्यों बदली जा रही है राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_12_0">राम मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आए दान और प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत महसूस की गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_12_1">इसी क्रम में ट्रस्ट की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक CEO नियुक्त करने का फैसला लिया गया था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_13_0">अब 2 सितंबर 2026 को रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगने की जानकारी सामने आई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_0">CEO पद के लिए कई नामों पर विचार किया गया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_1">इनमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे, पूर्व IAS अधिकारी दिनेश चंद्र, रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा और पूर्व IPS अधिकारी परेश सक्सेना के नाम भी शामिल थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_14_2">हालांकि अंतिम रूप से जितेंद्र मिश्रा का नाम तय किया गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_15_0">राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_0">CEO की नियुक्ति से पहले ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति भी की गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_16_1">इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_17_0">खबरों के मुताबिक, महेश भागचंदका का संबंध विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के परिवार से बताया जाता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_17_1">ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में तीनों नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_18_0">CEO की नियुक्ति के बाद क्या बदलेगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_19_0">राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रोफेशनल, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_19_1">जितेंद्र मिश्रा के लंबे सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव से मंदिर की विशाल व्यवस्थाओं, संचालन और भविष्य की योजनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="95f82a42a76e4500_20_0">अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में राम मंदिर ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह आकार लेती है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 19:02:41 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Major changes in Ram Mandir Trust: Retired Air Marshal Jitendra Mishra will be the first CEO, 38 years of military experience will come.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>क्या अब हीरो का धर्म भी बॉक्स ऑफिस तय करेगा? ‘बंटवारा 1947’ पर शबाना आजमी की थ्योरी को राजकुमार संतोषी ने नकारा, छिड़ी बड़ी बहस</title>
        <link>https://delhilookout.com/Now-will-the-heros-religion-also-decide-the-box-office-Rajkumar-Santoshi-rubbishes-Shabana-Azmis-theory-on-BATWARA-1947</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Now-will-the-heros-religion-also-decide-the-box-office-Rajkumar-Santoshi-rubbishes-Shabana-Azmis-theory-on-BATWARA-1947</guid>
        <description><![CDATA[ <p>Sunny Deol को मुस्लिम किरदार में देखना दर्शकों को क्यों मुश्किल लगा? क्या फिल्म की कहानी कमजोर थी या फिर दर्शकों के मन में बनी स्टार की छवि कहानी पर भारी पड़ गई? ‘बंटवारा 1947’ के कमजोर बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन ने अब सिनेमा से कहीं बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।</p>
<p>राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ इन दिनों सिर्फ अपने बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के कारण चर्चा में नहीं है। फिल्म को लेकर अब एक ऐसी बहस छिड़ गई है, जो सीधे दर्शकों की सोच, कलाकारों की छवि और समाज में बढ़ती धार्मिक दूरी तक पहुंचती है। फिल्म में Sunny Deol ने सिकंदर मिर्जा नाम के एक भारतीय मुस्लिम व्यक्ति का किरदार निभाया है, जिसकी जिंदगी भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी के बीच उलट-पुलट हो जाती है। फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं और इसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।</p>
<p>इसी बीच दिग्गज अभिनेत्री Shabana Azmi ने फिल्म के कमजोर प्रदर्शन को लेकर एक ऐसी बात कही, जिसने पूरी बहस को नया मोड़ दे दिया। उनका मानना था कि शायद दर्शक Sunny Deol को मुस्लिम किरदार में स्वीकार नहीं कर पाए। शबाना ने इसके लिए Sunny Deol की लंबे समय से बनी हुई एक्शन और देशभक्त हीरो वाली छवि को भी एक संभावित वजह माना।</p>
<p>शबाना आजमी ने उठाया बड़ा सवाल</p>
<p>शबाना आजमी ने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी है कि जिन लोगों ने फिल्म देखी, उनमें से कई ने इसकी कहानी और संदेश की तारीफ की, लेकिन बड़ी संख्या में दर्शक थिएटर तक पहुंचे ही नहीं। उनके मुताबिक, शायद Sunny Deol को मुस्लिम किरदार में देखने में दर्शकों को परेशानी हुई।</p>
<p>उन्होंने इसके लिए Amitabh Bachchan के पुराने किरदारों का उदाहरण भी दिया। शबाना ने याद दिलाया कि ‘कुली’ में अमिताभ बच्चन ने मुस्लिम किरदार निभाया था और ‘दीवार’ में 786 का इस्तेमाल भी दर्शकों ने सहजता से स्वीकार किया था। ऐसे में उनका सवाल था कि आज वही सहजता क्यों दिखाई नहीं देती।</p>
<p>शबाना की बात यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें ऐसे दर्शकों के बारे में सुनने को मिला, जो Sunny Deol के किरदार को पाकिस्तानी समझ बैठे, जबकि फिल्म में उनका किरदार पाकिस्तानी नहीं, बल्कि भारतीय मुस्लिम है।</p>
<p>यही बात इस पूरे विवाद को और गंभीर बना देती है—अगर दर्शक फिल्म देखने से पहले ही अभिनेता की पुरानी छवि के आधार पर उसके किरदार की पहचान तय कर लें, तो क्या सिनेमा के जरिए किसी नई सोच को दर्शकों तक पहुंचाना मुश्किल होता जा रहा है?</p>
<p>अब राजकुमार संतोषी ने दी सीधी चुनौती</p>
<p>शबाना आजमी की इस थ्योरी से फिल्म के निर्देशक Rajkumar Santoshi सहमत नहीं हैं। उन्होंने साफ तौर पर इस विचार को खारिज किया कि किसी अभिनेता का दूसरे धर्म का किरदार निभाना फिल्म की असफलता का कारण हो सकता है। संतोषी का तर्क है कि किसी कलाकार को उसकी असली जिंदगी या उसके पुराने फिल्मी किरदारों के धर्म से बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<p>दरअसल, संतोषी के लिए Sunny Deol को मुस्लिम किरदार में लेना शुरुआत से ही एक जोखिम था। उन्होंने पहले भी बताया था कि जब फिल्म की कल्पना करीब 15 साल पहले की गई थी, तब भी इंडस्ट्री में यह सवाल उठ रहा था कि Sunny Deol जैसा अभिनेता मुस्लिम नायक की भूमिका में दर्शकों को कैसे स्वीकार्य होगा।</p>
<p>लेकिन संतोषी ने इसी कथित जोखिम को फिल्म की ताकत माना। उनका मानना था कि Sunny Deol की लोकप्रिय और मजबूत छवि के जरिए ही फिल्म का संदेश ज्यादा प्रभावशाली तरीके से सामने आ सकता है।</p>
<p>Sunny Deol का किरदार मुस्लिम था, पाकिस्तानी नहीं</p>
<p>यहां फिल्म से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण भ्रम भी सामने आता है। सिकंदर मिर्जा पाकिस्तानी किरदार नहीं है। वह एक भारतीय मुस्लिम है, जो विभाजन की उथल-पुथल के बीच अपनी इंसानियत और रिश्तों को बचाने की कोशिश करता है।</p>
<p>यानी फिल्म का मूल सवाल भारत बनाम पाकिस्तान नहीं, बल्कि इंसान बनाम कट्टरता है।</p>
<p>और शायद यही वह बिंदु है जिसे लेकर संतोषी सबसे ज्यादा मुखर हैं। उनके मुताबिक फिल्म का मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि जब धर्म और राष्ट्र की पहचान के नाम पर इंसानियत पीछे छूटने लगे, तब सबसे ज्यादा नुकसान आम इंसान का होता है।</p>
<p>क्या दर्शक स्टार को देखते हैं या किरदार को?</p>
<p>‘बंटवारा 1947’ का विवाद अब एक दिलचस्प सवाल सामने ला रहा है।</p>
<p>जब कोई अभिनेता दशकों तक एक खास तरह की भूमिकाओं के लिए पहचाना जाता है, तो क्या दर्शक उसे उससे बिल्कुल अलग भूमिका में स्वीकार कर पाते हैं?</p>
<p>Sunny Deol की स्क्रीन इमेज लंबे समय तक देशभक्ति, एक्शन और पाकिस्तान विरोधी किरदारों से जुड़ी रही है। इसलिए जब वही अभिनेता पर्दे पर एक भारतीय मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभाता है, तो क्या दर्शक अनजाने में उसके पुराने किरदारों को नए किरदार के साथ मिला देते हैं?</p>
<p>अगर ऐसा है, तो समस्या सिर्फ एक फिल्म की नहीं है।</p>
<p>यह सवाल भारतीय सिनेमा के सामने खड़ा होता है कि क्या अभिनेता को सिर्फ उसकी पिछली छवि के आधार पर स्वीकार किया जाएगा या फिर उसके अभिनय को किरदार के आधार पर परखा जाएगा?</p>
<p>और यहीं से बहस सिनेमा से समाज तक पहुंचती है</p>
<p>राजकुमार संतोषी ने इस पूरे मामले में समाज में कम होती tolerance और inclusivity को लेकर भी चिंता जताई है। उनका सवाल मूल रूप से यही है कि अगर एक कलाकार दूसरे धर्म के व्यक्ति का किरदार निभाता है तो उसमें समस्या क्या है?</p>
<p>क्या किसी हिंदू अभिनेता को मुस्लिम किरदार निभाने के लिए मुस्लिम होना जरूरी है?</p>
<p>क्या मुस्लिम अभिनेता को हिंदू किरदार निभाने के लिए हिंदू होना जरूरी है?</p>
<p>अगर जवाब 'नहीं' है, तो फिर सवाल यह होना चाहिए कि किरदार कैसा निभाया गया, न कि अभिनेता किस धर्म से आता है।</p>
<p>यही सिनेमा की सबसे बड़ी ताकत भी रही है—एक अभिनेता अपने शरीर, आवाज और अभिनय के जरिए ऐसी जिंदगी जी सकता है, जो उसकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग हो।</p>
<p>फिल्म फ्लॉप हुई तो असली वजह क्या है?</p>
<p>यह कहना कि फिल्म का कमजोर बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन सिर्फ Sunny Deol के मुस्लिम किरदार की वजह से हुआ, शायद बहुत आसान निष्कर्ष होगा।</p>
<p>फिल्म की रिलीज, प्रतिस्पर्धा, कहानी की प्रस्तुति, स्क्रीनप्ले, दर्शकों की पसंद, प्रमोशन और मौजूदा बॉक्स ऑफिस माहौल जैसे कई कारण किसी फिल्म के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। ‘बंटवारा 1947’ को लेकर भी समीक्षाएं पूरी तरह एकमत नहीं रहीं।</p>
<p>इसलिए संभव है कि Sunny Deol की स्टार इमेज ने कुछ दर्शकों की धारणा को प्रभावित किया हो, लेकिन इसे फिल्म की असफलता का एकमात्र कारण मान लेना भी जल्दबाजी होगी।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल: क्या हमने किरदारों को भी धर्म में बांटना शुरू कर दिया है?</p>
<p>‘बंटवारा 1947’ का विवाद शायद बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह हमें अपने बारे में सोचने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p>क्या हम अभिनेता को किरदार निभाते हुए देखते हैं या उसके धर्म को?</p>
<p>क्या Sunny Deol का मुस्लिम किरदार देखकर हमें सिकंदर मिर्जा दिखाई देता है या फिर हमें वही पुराना Sunny Deol दिखाई देता है?</p>
<p>और अगर एक अभिनेता को पर्दे पर किसी दूसरे धर्म के इंसान के रूप में स्वीकार करना भी मुश्किल हो जाए, तो फिर सवाल सिर्फ बॉलीवुड का नहीं—हमारी अपनी सामाजिक सोच का भी है।</p>
<p>फिल्में हमेशा समाज का आईना कही जाती रही हैं। लेकिन शायद इस बार ‘बंटवारा 1947’ ने आईना हमारे सामने रख दिया है।</p>
<p>अब देखना यह है कि दर्शक उसमें फिल्म की असफलता देखते हैं…<br>या अपने भीतर बदलती हुई सोच की एक तस्वीर।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 18:02:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Now will the hero&#039;s religion also decide the box office? Rajkumar Santoshi rubbishes Shabana Azmis theory on &quot;BATWARA 1947&quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>PM मोदी की दूसरी बड़ी अपील से मचा हड़कंप! आखिर क्यों बार&amp;बार कह रहे हैं—‘जरूरत न हो तो सोना मत खरीदिए’?</title>
        <link>https://delhilookout.com/PM-Modis-second-big-appeal-Why-are-you-repeatedly-saying---Dont-buy-gold-if-you-dont-need-it</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026</p>
<p>देश की अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की दमदार GDP ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इसी खुशी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने आर्थिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। 1 सितंबर को साझा किए गए वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने देशवासियों से अनावश्यक सोना खरीदने, विदेश घूमने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की। उन्होंने इसे स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और भारत की आर्थिक ताकत से जोड़ते हुए देशवासियों से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यही है—जब भारत 7.8% की रफ्तार से बढ़ रहा है, तो फिर सोना न खरीदने की अपील क्यों?</p>
<p>सिर्फ 114 दिन में दूसरी बार क्यों?</p>
<p>ये पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने सोने की खरीदारी रोकने की अपील की है। इससे पहले 10 मई 2026 को हैदराबाद की रैली में उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने, गैर-जरूरी विदेश यात्रा रोकने, ईंधन बचाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी।</p>
<p>अब चार महीने के भीतर फिर वही संदेश सामने आया है। फर्क इतना है कि इस बार संदेश के साथ ‘Wed in India’ और घरेलू पर्यटन पर भी जोर दिया गया है।</p>
<p>सबसे बड़ा खतरा: भारत का सोने का आयात</p>
<p>भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है, लेकिन घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है। नतीजा यह है कि मांग पूरी करने के लिए भारी मात्रा में सोना विदेश से मंगाना पड़ता है।</p>
<p>वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछले साल के करीब 58 अरब डॉलर से लगभग 24% ज्यादा था। यही नहीं, 2022-23 में यह आंकड़ा करीब 35 अरब डॉलर था। यानी कुछ ही वर्षों में सोने पर भारत का विदेशी मुद्रा खर्च बेहद तेजी से बढ़ा है।</p>
<p>यही असली चिंता है।</p>
<p>सोना खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे समय में जब कच्चे तेल समेत जरूरी आयात का बिल भी बढ़ रहा हो, सोने की भारी मांग देश के विदेशी मुद्रा संतुलन और व्यापार घाटे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।</p>
<p>दूसरा मोर्चा: पश्चिम एशिया का संकट</p>
<p>भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिम एशिया में युद्ध और अस्थिरता के कारण तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।</p>
<p>महंगा तेल मतलब—</p>
<p>ज्यादा डॉलर बाहर → ज्यादा आयात बिल → रुपये पर दबाव → महंगाई का खतरा।</p>
<p>ऐसे माहौल में सरकार चाहती है कि जहां खर्च टाला जा सकता है, वहां विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल कम किया जाए।</p>
<p>तीसरा खतरा: CAD और रुपये पर दबाव</p>
<p>सोने और तेल जैसे बड़े आयात बढ़ते हैं तो भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर Current Account Deficit (CAD) पर पड़ सकता है।</p>
<p>हालांकि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने हाल में रिकॉर्ड स्तर छुआ है—21 अगस्त 2026 तक यह 729.33 अरब डॉलर था—लेकिन वैश्विक अस्थिरता के बीच आयात पर नियंत्रण की चिंता खत्म नहीं हुई है।</p>
<p>यानी सरकार का संदेश यह नहीं कि भारत की अर्थव्यवस्था टूट रही है, बल्कि यह है कि तेज विकास के बावजूद बाहरी झटकों से बचने के लिए देश को अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों को समझदारी से संभालना होगा।</p>
<p>सोना सिर्फ धातु नहीं, भारतीयों की भावना है</p>
<p>यही वजह है कि पीएम मोदी की अपील असामान्य है।</p>
<p>भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं है। यह शादी, त्योहार, परंपरा और परिवार की बचत से जुड़ा हुआ है।</p>
<p>इसलिए प्रधानमंत्री का बार-बार कहना कि जरूरत न हो तो सोना मत खरीदिए—आर्थिक संदेश से कहीं बड़ा संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>मई की अपील का क्या हुआ?</p>
<p>मई में पीएम मोदी की अपील के बाद सोने के बाजार में हलचल जरूर हुई। सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई, और 2 अगस्त तक इस बढ़ी हुई ड्यूटी से सरकार को करीब ₹10,040 करोड़ का राजस्व मिला।</p>
<p>लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।</p>
<p>पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका था। यानी लोगों की खरीदारी की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन भारतीयों की सोने के प्रति मजबूत मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई।</p>
<p>तो क्या पीएम मोदी की अपील सिर्फ सोने तक सीमित है?</p>
<p>बिल्कुल नहीं।</p>
<p>इस पूरे संदेश का केंद्र है—</p>
<p>“पैसा भारत में रहे, खर्च भारत में हो और भारतीय उद्योग मजबूत हों।”</p>
<p>इसीलिए पीएम मोदी ने एक साथ तीन चीजों पर निशाना साधा—</p>
<p>विदेशी यात्रा कम करें।<br>विदेश में शादी से बचें।<br>अनावश्यक सोना न खरीदें।</p>
<p>और इसके बदले Swadeshi, Vocal for Local और Wed in India पर जोर दिया।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल—क्या इससे अरबों डॉलर बच सकते हैं?</p>
<p>अगर सोने की खरीद में बड़ी गिरावट आती है, तो भारत का आयात बिल घट सकता है और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है।</p>
<p>लेकिन यहां असली चुनौती त्योहार और शादी का सीजन है।</p>
<p>भारत में सोने की सबसे बड़ी खरीदारी इन्हीं मौकों पर होती है। इसलिए आने वाले महीनों में ही पता चलेगा कि पीएम मोदी की अपील सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रहती है या वास्तव में भारतीय परिवारों के खरीदारी के फैसले बदलती है।</p>
<p>निष्कर्ष</p>
<p>7.8% GDP ग्रोथ के बीच पीएम मोदी की ‘सोना मत खरीदो’ अपील विरोधाभास नहीं, बल्कि सावधानी का संकेत है।</p>
<p>भारत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही युद्ध, ऊर्जा कीमतों, आयात बिल और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। यही वजह है कि सरकार अब विकास की रफ्तार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बचाने और घरेलू खपत को भारत के भीतर रखने पर भी जोर दे रही है।</p>
<p>अब असली परीक्षा आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन में होगी—क्या भारत के लोग प्रधानमंत्री की इस दूसरी अपील को भी गंभीरता से लेते हैं?</p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:53:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>PM Modi&#039;s second big appeal Why are you repeatedly saying - &#039;Don&#039;t buy gold if you don&#039;t need it&#039;?</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा भरोसा, CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन लिया वापस</title>
        <link>https://delhilookout.com/Centres-big-confidence-in-Supreme-Court,-CJP-withdraws-proposed-protest-on-September-5</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर तीन अहम आश्वासन दिए गए। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, आगे नई एफआईआर नहीं दर्ज करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने के अपने वादे पर पूरी तरह कायम है। केंद्र के इन आश्वासनों के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च और प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान किया।</p>
<p>छात्रों पर दर्ज 13 FIR आगे नहीं बढ़ाएगी दिल्ली पुलिस</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान तीन प्रमुख मुद्दों पर भरोसा दिया गया था। उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी, भविष्य में ऐसी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएंगी और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।</p>
<p>मेहता ने कहा कि दिल्ली पुलिस छात्रों से जुड़ी 13 एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। हालांकि, पुलिस 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग एफआईआर दर्ज करना चाहती है, जिनका आपराधिक इतिहास रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी इसी तरह की अर्जियां अदालत में दाखिल की गई हैं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत FIR रद्द करने पर कर सकता है विचार</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि संभव है कि कुछ अन्य राज्यों में भी इसी तरह की एफआईआर दर्ज हों। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत 20 जुलाई से संबंधित सभी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया जाए।</p>
<p>उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने के अपने वादे से पीछे नहीं हट रही है। हालांकि, मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया और नियम तय करने के लिए सरकार को कुछ समय की आवश्यकता होगी।</p>
<p>तीन महीने में मुआवजा देने का आश्वासन</p>
<p>तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मुआवजा योजना की पूरी प्रक्रिया तैयार करने के लिए सरकार को तीन महीने का समय चाहिए। इस पर CJP की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि क्या तीन महीने की समयसीमा का मतलब मुआवजे का भुगतान भी इसी अवधि में कर दिया जाएगा?</p>
<p>इस पर सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट रूप से कहा—हां, भुगतान भी इसी समयसीमा के भीतर किया जाएगा।</p>
<p>केंद्र के भरोसे के बाद CJP ने वापस लिया प्रदर्शन</p>
<p>सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने सभी आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और अब CJP इस पर अपना फैसला ले सकती है।</p>
<p>इसके बाद CJP नेता सौरभ दास ने अदालत में कहा कि संगठन 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला कर रहा है।</p>
<p>इस तरह सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के तीन बड़े आश्वासनों के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन टल गया। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि एफआईआर वापसी और मुआवजे की प्रक्रिया सरकार किस समयसीमा में पूरी करती है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:45:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Centre&#039;s big confidence in Supreme Court, CJP withdraws proposed protest on September 5</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>सिंधु जल संधि पर भारत का दोटूक ऐलान: रोक अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी, पाकिस्तान के ‘आर्बिट्रेशन कोर्ट’ को बताया गैरकानूनी</title>
        <link>https://delhilookout.com/Indus-Waters-Treaty:-Indias-suspension-to-continue-indefinitely,-calls-Pakistans-arbitration-court-illegal</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_0">भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर अपना रुख बेहद स्पष्ट और सख्त कर दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_1">पाकिस्तान की ओर से मामले को तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में ले जाने के बीच भारत ने साफ कहा है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला अनिश्चितकाल तक लागू रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_2">भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उसके संप्रभु फैसलों और भारत में चल रही जल परियोजनाओं पर किसी बाहरी संस्था को फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_2_0">विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान के मुताबिक, तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि से जुड़े अंतरिम उपायों और मौजूदा स्थिति को लेकर एक अवॉर्ड जारी किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_2_1">भारत ने इस अवॉर्ड को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_3_0">विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तथाकथित कोर्ट का गठन विश्व बैंक द्वारा संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_3_1">भारत ने इसे “गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई तथाकथित संस्था” करार देते हुए कहा कि उसने कभी भी इस बॉडी के अस्तित्व को मान्यता नहीं दी है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_4_0">भारत का सीधा संदेश—हमारे संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार नहीं</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_5_0">भारत ने स्पष्ट किया कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_5_1">भारत न तो इस संस्था के सामने पेश हुआ है और न ही इसके पहले दिए गए फैसलों को स्वीकार किया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_6_0">नई दिल्ली ने यह भी साफ कर दिया कि इस तथाकथित कोर्ट के किसी भी फैसले का वर्तमान या भविष्य में भारत की ओर से संचालित या बनाए जा रहे जल परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_7_0">सिंधु जल संधि पर रोक जारी रहेगी</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_8_0">भारत का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सिंधु जल संधि को लेकर है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_8_1">विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला प्रभावी रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_8_2">यानी पाकिस्तान की आपत्तियों या तथाकथित आर्बिट्रेशन प्रक्रिया के बावजूद भारत अपने फैसले से पीछे हटने के मूड में नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_9_0">भारत का रुख साफ है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_9_1">संधि पर लिया गया संप्रभु फैसला बरकरार रहेगा और किसी गैरकानूनी या तथाकथित आर्बिट्रेशन संस्था के फैसले से भारत की नीति या परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 17:54:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Indus Waters Treaty: India&#039;s suspension to continue indefinitely, calls Pakistan&#039;s&#039; arbitration court &#039;illegal</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>यूपी चुनाव 2027: छह महीने पहले ही सियासी संग्राम तेज, BJP–SP–BSP ने कसी कमर</title>
        <link>https://delhilookout.com/UP-elections-in-2027:-The-political-battle-is-heating-up-between-the-BJP-and-the-SP-BSP-alliance.</link>
        <guid>https://delhilookout.com/UP-elections-in-2027:-The-political-battle-is-heating-up-between-the-BJP-and-the-SP-BSP-alliance.</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_0">लखनऊ: </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_1">उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_2">चुनाव में अभी करीब छह महीने का वक्त बाकी है, लेकिन बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_1_3">सोमवार को राजधानी लखनऊ में तीनों प्रमुख दलों की अलग-अलग अहम बैठकें हुईं, जिनमें बूथ मैनेजमेंट से लेकर मतदाता सूची और चुनावी रणनीति तक पर मंथन किया गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_2_0">बीजेपी ने बनाई बूथ से लेकर जनता तक पहुंचने की रणनीति</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_3_0">लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बीजेपी की प्रदेश स्तरीय ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यशाला आयोजित हुई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_3_1">करीब 700 पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई। </span><span data-hovered="true" data-sentence="3558bd98aa04790f_3_2">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी और दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल हुए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_4_0">बैठक में आगामी राजनीतिक अभियानों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_4_1">पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को घर-घर तक पहुंचाने पर बीजेपी का खास फोकस रहा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_5_0">सपा का फोकस वोटर लिस्ट और बूथ नेटवर्क पर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_6_0">वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी 2027 की तैयारियों को लेकर अपने संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_6_1">लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में जिला और महानगर अध्यक्षों की बैठक हुई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_6_2">मतदाता सूची की समीक्षा, नए मतदाताओं को जोड़ने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने को लेकर पार्टी ने विस्तृत रणनीति पर चर्चा की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_7_0">अखिलेश यादव के निर्देशन में हुई इस बैठक में विधानसभा क्षेत्रों से कंप्यूटर की जानकारी रखने वाले और फॉर्म-6 से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_7_1">साफ है कि सपा चुनाव से पहले अपने वोटर नेटवर्क को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_8_0">BSP ने 75 जिलाध्यक्षों को दिया चुनावी टास्क</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_9_0">बहुजन समाज पार्टी ने भी लखनऊ में प्रदेश के सभी 75 जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_9_1">संगठन विस्तार, आर्थिक स्थिति मजबूत करने, जनाधार बढ़ाने और बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने पर चर्चा हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_10_0">बैठक में संभावित प्रत्याशियों और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक को लेकर भी मंथन हुआ। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_10_1">मायावती ने योगी सरकार और अखिलेश यादव पर महिलाओं को लेकर की जा रही कैश योजनाओं की घोषणाओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के समय ‘रेवड़ियां’ बांटकर महिलाओं को लुभाने की कोशिश की जाती है और बाद में जनता को धोखा मिलता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_11_0">छह महीने पहले ही शुरू हुआ ‘मिशन 2027’</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_12_0">तीनों दलों की सोमवार की बैठकों से एक बात साफ है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_12_1">यूपी की सियासी जंग अब सिर्फ चुनाव की तारीख घोषित होने का इंतजार नहीं कर रही। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_12_2">बीजेपी जहां सरकार के काम और संगठन की ताकत के सहारे मैदान तैयार कर रही है, वहीं सपा वोटर लिस्ट और बूथ नेटवर्क को धार देने में जुटी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_12_3">दूसरी ओर बसपा अपने संगठन और खोए जनाधार को मजबूत करने की कोशिश में है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_13_0">2027 का चुनाव अभी दूर जरूर है, लेकिन यूपी में उसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="3558bd98aa04790f_13_1">आने वाले महीनों में संगठन, वोटर और बूथ—इन तीनों मोर्चों पर होने वाली तैयारियां ही तय करेंगी कि चुनावी मुकाबले में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत जमीन तैयार कर पाती है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 17:44:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>UP elections in 2027: The political battle is heating up between the BJP and the SP-BSP alliance.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>महंगाई की चिंता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% MoSPI के ताजा आंकड़ों ने चौंकाया; अप्रैल&amp;जून तिमाही में वास्तविक GDP 7.8% बढ़ी, नॉमिनल GDP में 10.3% की तेजी</title>
        <link>https://delhilookout.com/Indias-economy-picks-up-pace-amid-inflation-concerns,-GDP-growth-in-the-first-quarter-at-7.8-shocked-by-the-latest-MoSPI-data-Real-GDP-grows-7.8-per-cent-in-April-June-quarter,-nominal-GDP-up-10.3-per-cent</link>
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        <description><![CDATA[ <p data-pm-slice="1 1 []"><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_1_1">देश में बढ़ती महंगाई को लेकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़ों ने तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_1_2">सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से सोमवार, 31 अगस्त को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_2_0">सरकार के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में बनी चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास गति को बरकरार रखा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_2_1">इसी अवधि में नॉमिनल GDP में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_3_0">महंगाई के बीच मजबूत आर्थिक प्रदर्शन</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_4_0">हाल के दिनों में महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंकाएं जताई जा रही थीं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_4_1">ऐसे समय में पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि को अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_5_0">GDP के आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि देश में उत्पादन, खपत, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की स्थिति किस दिशा में जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_6_0">2022-23 अब GDP का नया बेस ईयर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_7_0">इस बार GDP के आंकड़ों की गणना वित्त वर्ष 2022-23 को नए बेस ईयर के रूप में लेकर की गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_7_1">सरकार ने 27 फरवरी 2026 को GDP की वार्षिक और तिमाही गणना के लिए नई सीरीज जारी की थी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_8_0">इसके बाद 5 जून 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के GDP के शुरुआती यानी प्रोविजनल आंकड़े जारी किए गए थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_8_1">नई सीरीज के तहत अब अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर को अधिक व्यापक और अपडेटेड डेटा के आधार पर पेश किया जा रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_9_0">पुराने GDP आंकड़ों में भी संशोधन</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_10_0">MoSPI ने केवल पहली तिमाही के आंकड़े ही जारी नहीं किए हैं, बल्कि पिछले वर्षों के आंकड़ों को भी अपडेट किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_10_1">मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के वार्षिक GDP आंकड़ों को संशोधित किया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_11_0">इसके लिए नए उपलब्ध डेटा के साथ विभिन्न सरकारी विभागों और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_12_0">इसके अलावा वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही से लेकर 2025-26 की चौथी तिमाही तक के तिमाही GDP आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_12_1">वित्त वर्ष 2025-26 के प्रोविजनल GDP आंकड़ों में भी नए डेटा को शामिल किया गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_13_0">GDP की गणना में किन आंकड़ों का इस्तेमाल?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_14_0">GDP की गणना एक व्यापक प्रक्रिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_14_1">इसमें औद्योगिक उत्पादन, कीमतों, बैंकिंग सेवाओं और विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया जाता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_15_0">MoSPI ने GDP के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में खपत, निवेश और अन्य खर्चों से जुड़े आंकड़े भी जारी किए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_15_1">ये आंकड़े दो आधारों पर उपलब्ध कराए गए हैं—</span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_15_2">2022-23 की स्थिर कीमतों और मौजूदा कीमतों पर।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_16_0">क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_17_0">पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_17_1">ऐसे में ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती, आर्थिक गतिविधियों और विकास की गति को लेकर सकारात्मक संकेत देते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_18_0">हालांकि, आने वाली तिमाहियों में महंगाई, वैश्विक बाजार की स्थिति, निवेश और घरेलू मांग जैसे कारक भारत की आर्थिक वृद्धि की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_19_0">फिलहाल पहली तिमाही के आंकड़ों ने एक बात साफ कर दी है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="58d3bdfc6122b432_19_1">महंगाई की चिंता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत रफ्तार के साथ की है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 17:42:38 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>India&#039;s economy picks up pace amid inflation concerns, GDP growth in the first quarter at 7.8% shocked by the latest MoSPI data; Real GDP grows 7.8 per cent in April-June quarter, nominal GDP up 10.3 per cent</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नेपाल में कुदरत का कहर: बाढ़ ने मचाई तबाही, हजारों घर तबाह; 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक लापता</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-Nature-of-Nature-in-Nepal:-Floods-have-destroyed-thousands-of-homes.-590-foreign-nationals-from-39-countries-missing</link>
        <guid>https://delhilookout.com/The-Nature-of-Nature-in-Nepal:-Floods-have-destroyed-thousands-of-homes.-590-foreign-nationals-from-39-countries-missing</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_1_0">काठमांडू: </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_1_1">नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_1_2">कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_1_3">हजारों लोगों के बेघर होने के बीच राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_1_4">नेपाल को इस मुश्किल घड़ी में भारत, चीन समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद मिल रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_2_0">39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_3_0">नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 323 से अधिक विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_4_0">लापता लोगों की तलाश और उनके परिजनों से समन्वय के लिए विदेश मंत्रालय ने एक विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_4_1">राजनयिक मिशनों के जरिए विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी लगातार अपडेट की जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_5_0">भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें संभाल रही हैं मोर्चा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_6_0">नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_7_0">भारत के 11 और चीन के 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में लगे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_7_1">भारत की टीम मेलुंग (चिलिमे) और स्याफ्रुबेसी में, जबकि चीन की टीम अपर त्रिशूली-3ए में सुरंग बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_7_2">दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीम भी राहत अभियान में शामिल है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_8_0">इसके अलावा भारत से 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम डीएनए विश्लेषण के लिए 29 अगस्त से नेपाल में मौजूद है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_9_0">कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_10_0">नेपाल की इस भयावह त्रासदी के बीच भारत, चीन, जापान, अमेरिका, UAE, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने राहत एवं बचाव सामग्री उपलब्ध कराई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_11_0">राहत सामग्री में ब्रिज यूनिट, जनरेटर, सोलर लैंप, डीएनए टेस्टिंग किट, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाद्य सामग्री और दवाइयां शामिल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_12_0">इसके अलावा म्यांमार, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया और सिंगापुर समेत कई अन्य देशों से भी सहायता पहुंचाई जा रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_13_0">संयुक्त राष्ट्र (UN), WHO, WFP और UNICEF जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_14_0">तबाही के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती पुनर्निर्माण</span></p>
<p>बाढ़ ने सिर्फ जनजीवन को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं।</p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_16_0">नेपाल सरकार फिलहाल नुकसान और जरूरतों का प्रारंभिक आकलन कर रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="e1b1b5a0fda8854d_16_1">इसके बाद Post-Disaster Needs Assessment (PDNA) के जरिए वास्तविक नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।</span></p>
<p>सरकार को आशंका है कि बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से व्यापक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।</p>
<p>शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल सुरक्षित</p>
<p>आपदा के बीच मृतकों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण जिन शवों की तत्काल पहचान संभव नहीं हो पा रही है, उनके DNA सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं।</p>
<p>जरूरत पड़ने पर भविष्य में इन नमूनों का परिवारों के DNA रिकॉर्ड से मिलान कर मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री खुद संभाल रहे राहत अभियान की निगरानी</p>
<p>नेपाल के प्रधानमंत्री राहत, बचाव और समन्वय अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं। सरकार विभिन्न एजेंसियों, पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने में जुटी है।</p>
<p>नेपाल इस समय एक बड़ी मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देशों का सहयोग राहत और पुनर्निर्माण की उम्मीद को मजबूत कर रहा है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 17:40:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>जाति जनगणना पर कांग्रेस का बड़ा सवाल: OBC कॉलम क्यों नहीं?</title>
        <link>https://delhilookout.com/Congress-raises-big-question-on-caste-census-Why-not-the-OBC-column</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_1">जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_2">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मांग की है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जाति जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए और बिहार व तेलंगाना में अपनाई गई सर्वे की पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_0">जयराम रमेश के मुताबिक, बिहार में 2 अक्टूबर 2023 को और तेलंगाना में फरवरी 2025 में सामने आए जातीय सर्वे के मॉडल से सीख लेते हुए देशव्यापी जाति जनगणना कराई जानी चाहिए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_1">उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार का अभी भी समय है, क्योंकि जनगणना की प्रक्रिया फिलहाल कुछ ही क्षेत्रों में शुरू हुई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_3_0">कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा योजना में बदलाव कर OBC को SC और ST की तरह स्पष्ट श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। </span><span data-hovered="true" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_3_1">पार्टी का तर्क है कि यदि जाति का नाम लोगों से खुले तौर पर लिखवाया गया तो अलग-अलग उपनाम और स्थानीय पहचान दर्ज होने से आंकड़ों में भारी बिखराव पैदा हो सकता है और वास्तविक जातीय तस्वीर सामने लाना मुश्किल होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_0">जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर अंतिम फैसला किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की राय भी ली जानी चाहिए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_1">कांग्रेस के अनुसार राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यही मांग रखी है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_0">अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार जाति जनगणना की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर OBC के लिए अलग कॉलम और स्पष्ट विकल्प शामिल करेगी? </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_1">विपक्ष इसे सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीतियों के लिए जरूरी कदम बता रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_2">वहीं, इस संबंध में लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_2"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 17:10:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>नौकरी छोड़ने की तैयारी में हर दूसरा कर्मचारी! बदलते वर्कप्लेस की बड़ी तस्वीर</title>
        <link>https://delhilookout.com/Every-other-employee-preparing-to-leave-the-job-The-big-picture-of-the-changing-workplace</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_0">भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ नई प्रतिभाओं को नौकरी देना नहीं, बल्कि उन्हें कंपनी में बनाए रखना बन गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_1">Great Place to Work की नई रिपोर्ट ने भारतीय कॉर्पोरेट वर्कप्लेस की बदलती तस्वीर को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_0">130 से ज्यादा संगठनों और 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों पर आधारित इस अध्ययन के मुताबिक, करीब हर दूसरा कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में है, जबकि 75% कर्मचारी अगले 12 महीनों में मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_1">यानी कंपनियों के सामने आने वाले समय में टैलेंट रिटेंशन की चुनौती और बड़ी हो सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_3_0">Gen Z ने बदल दिया ऑफिस का माहौल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_0">इस बदलाव के केंद्र में तेजी से बढ़ती Gen Z workforce है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_1">प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में Gen Z की हिस्सेदारी महज दो साल में 17% से बढ़कर 34% हो गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_0">यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय वर्कप्लेस के बदलते व्यवहार का संकेत है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_1">नई पीढ़ी नौकरी को केवल सैलरी से नहीं देखती। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_5_2">उसके लिए करियर ग्रोथ, सम्मान, पहचान, पारदर्शिता, सीखने के अवसर और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_6_0">और जब ये उम्मीदें पूरी नहीं होतीं, तो नौकरी बदलने का फैसला लेने में ज्यादा वक्त भी नहीं लगता।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_7_0">अब 'जितना काम, उतना ही' का दौर?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_8_0">रिपोर्ट का एक और संकेत कंपनियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_8_1">कर्मचारी अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त काम करने को पहले की तुलना में कम तैयार दिखाई दे रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_9_0">यानी बिना स्पष्ट पहचान, विकास या उचित संतुलन के 'एक कदम और आगे बढ़कर काम करने' की संस्कृति कमजोर पड़ रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_10_0">कर्मचारी अब यह सवाल ज्यादा मजबूती से पूछ रहे हैं—</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_10_0">“मेरी जिम्मेदारी जितनी है, क्या कंपनी उसके बदले उतना ही सम्मान और विकास भी दे रही है?</span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_10_1">”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_11_0">सबसे ज्यादा बेचैनी मैनेजरों में</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_12_0">दिलचस्प बात यह है कि नौकरी बदलने की इच्छा सिर्फ जूनियर कर्मचारियों में नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_12_1">रिपोर्ट के मुताबिक 86% फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी तलाश रहे हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53% है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_13_0">यह कंपनियों के लिए गंभीर संकेत है, क्योंकि मैनेजर ही नेतृत्व और कर्मचारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_13_1">अगर यही स्तर असंतुष्ट है, तो उसका असर पूरी टीम की उत्पादकता और संस्कृति पर पड़ सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_14_0">ऑफिस में AI आ गया, लेकिन कर्मचारी कितने तैयार हैं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_15_0">AI तेजी से भारतीय कंपनियों का हिस्सा बन रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_15_1">रिपोर्ट के अनुसार करीब 60% संगठन रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_16_0">लेकिन यहां एक बड़ा अंतर दिखाई देता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_16_1">AI अपनाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है, जबकि सिर्फ 20% कर्मचारियों का मानना है कि उन्हें AI के फायदे और जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_17_0">मतलब साफ है—</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_17_1">कंपनियां AI को तो तेजी से अपना रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को AI के साथ काम करने के लिए उतनी तेजी से तैयार नहीं कर रही हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_18_0">कंपनियों के लिए असली चुनौती क्या है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_19_0">अब कर्मचारी को रोकने के लिए सिर्फ अच्छी सैलरी, शानदार ऑफिस या सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_19_1">कंपनियों को यह समझना होगा कि अलग-अलग पीढ़ियों की अपेक्षाएं अलग हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_20_0">कर्मचारी जानना चाहते हैं:</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_21_0">क्या मेरा काम मायने रखता है?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_21_1">क्या यहां मेरा करियर आगे बढ़ेगा?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_21_2">क्या मेरी मेहनत को पहचान मिलेगी?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_21_3">क्या कंपनी मेरे भविष्य को लेकर स्पष्ट है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_22_0">अगर इन सवालों के जवाब कमजोर हैं, तो बेहतर अवसर मिलने पर कर्मचारी कंपनी बदलने से पीछे नहीं हटेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_23_0">भारतीय वर्कप्लेस एक नए दौर में</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_24_0">Gen Z की बढ़ती हिस्सेदारी, AI का बढ़ता प्रभाव और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बदलती सोच ने भारतीय कॉर्पोरेट संस्कृति को तेजी से बदल दिया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_25_0">आने वाले समय में सफलता सिर्फ उस कंपनी की नहीं होगी जो सबसे ज्यादा लोगों को भर्ती करेगी, बल्कि उस कंपनी की होगी जो अपने कर्मचारियों को समझेगी, उन्हें विकसित करेगी और उन्हें यह महसूस कराएगी कि उनका भविष्य उसी संगठन के साथ सुरक्षित और बेहतर है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_26_0">क्योंकि आज की नौकरी सिर्फ “कितनी सैलरी?</span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_26_1">” का सवाल नहीं है—</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_26_2">अब सवाल है, “इस कंपनी में मेरा भविष्य कितना बेहतर है?</span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_26_3">”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_26_3"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 16:45:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Every other employee preparing to leave the job! The big picture of the changing workplace</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>एक ही ब्रांड, लेकिन स्वाद और सेहत में कितना फर्क? भारत में पैकेज्ड फूड के दोहरे मानकों पर बड़ा सवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/Same-brand,-but-how-much-difference-between-taste-and-health-Double-standards-for-packaged-food-in-India</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Same-brand,-but-how-much-difference-between-taste-and-health-Double-standards-for-packaged-food-in-India</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="true" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_0">एक ही कंपनी, एक ही ब्रांड और लगभग एक जैसी पैकेजिंग—लेकिन भारत और विदेशों में बिकने वाले कई पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स की रेसिपी, सामग्री और लेबलिंग में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_1">सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि उपभोक्ता की सेहत और उसे मिलने वाली जानकारी का भी है।</span></p>
<p><span data-hovered="true" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_1_0">फैंटा से समझिए फर्क</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_0">ब्रिटेन में बिकने वाली फैंटा और भारत में बिकने वाली फैंटा की पोषण संरचना में अंतर को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_2_1">यूरोप में कुछ आर्टिफिशियल कलर्स वाले उत्पादों पर पैकेज के सामने स्पष्ट चेतावनी दी जाती है, जबकि भारत में ऐसी जानकारी आमतौर पर पीछे छोटे अक्षरों में दी जाती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_3_0">चॉकलेट में कोको का अंतर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_0">किटकैट जैसे लोकप्रिय उत्पादों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की तुलना सामने आती रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_1">भारत में बिकने वाले कुछ वर्जन में कोको सॉलिड की मात्रा कम होने और ऑस्ट्रेलियाई वर्जन में अधिक होने की बात कही जाती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_4_2">इससे सवाल उठता है कि अलग-अलग बाजारों के लिए एक ही ब्रांड की रेसिपी कितनी बदलती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_6_0">मैगी पर भी उठे सवाल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_7_0">मैगी के मामले में भी भारत और ब्रिटेन के पैकेजिंग नियमों का अंतर चर्चा में रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_7_1">ब्रिटेन में बिकने वाले कई पैकेटों पर फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबल के जरिए नमक, चीनी और फैट की मात्रा को आसानी से समझने योग्य तरीके से दिखाया जाता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_7_2">भारत में उपभोक्ता को इसी जानकारी के लिए पैकेट पलटकर पीछे लिखी पोषण तालिका देखनी पड़ती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_8_0">बेबी फूड से जुड़ा विवाद</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_9_0">नेस्ले के सेरेलैक को लेकर भी भारत में लंबे समय तक बहस होती रही। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_9_1">2024 में कंपनी ने भारत में बिना अतिरिक्त चीनी वाले सेरेलैक वर्जन की पेशकश शुरू की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_9_2">इससे पहले भारत में उपलब्ध उत्पादों में अतिरिक्त चीनी को लेकर सवाल उठते रहे थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_10_0">कंपनियों का तर्क क्या है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_11_0">कंपनियों का कहना है कि हर देश का स्वाद, उपभोक्ता व्यवहार, कीमत और स्थानीय नियम अलग होते हैं, इसलिए उत्पादों की रेसिपी में बदलाव जरूरी हो सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_11_1">उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, कीमत नियंत्रित रखने के लिए कच्चे माल का चुनाव भी अलग हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_12_0">लेकिन असली सवाल यहीं से उठता है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_12_1">क्या कीमत और स्थानीय स्वाद के नाम पर उपभोक्ता को महत्वपूर्ण पोषण संबंधी जानकारी कम दिखाई देनी चाहिए?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_13_0">भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग की लड़ाई</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_14_0">दुनिया के कई देशों में पैकेज के सामने ही रंगों या चेतावनी संकेतों के जरिए बताया जाता है कि किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की मात्रा अधिक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_15_0">भारत में भी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को लेकर वर्षों से बहस चल रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_15_1">प्रस्तावित व्यवस्थाओं में स्टार रेटिंग और रंगीन चेतावनी जैसे विकल्प शामिल रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_15_2">हालांकि, भारत में अभी तक ऐसा स्पष्ट चेतावनी सिस्टम लागू नहीं हुआ है, जिस तरह कुछ अन्य देशों में दिखाई देता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_16_0">मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_16_1">अदालत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी सरल और स्पष्ट तरीके से मिलनी चाहिए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_17_0">दांव सिर्फ लेबल का नहीं, स्वास्थ्य का है</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_18_0">भारत में मोटापा, डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_18_1">ऐसे में पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट पोषण जानकारी सिर्फ उपभोक्ता अधिकार का मुद्दा नहीं, बल्कि पब्लिक हेल्थ का सवाल भी बन गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_19_0">तब तक ग्राहक क्या करें?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_20_0">जब तक पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी नहीं आती, उपभोक्ताओं को खुद सतर्क रहना होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_21_0">पैकेट खरीदने से पहले तीन चीजें जरूर देखें—</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_22_0">100 ग्राम में कितनी चीनी है।</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_22_1">नमक/सोडियम की मात्रा कितनी है।</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_22_2">किस प्रकार का तेल या फैट इस्तेमाल हुआ है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_23_0">इसके अलावा सामग्री सूची भी ध्यान से पढ़ें। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_23_1">जो सामग्री सूची में सबसे पहले लिखी होती है, उसकी मात्रा आमतौर पर सबसे अधिक होती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_24_0">आखिर सवाल यह नहीं है कि भारत में बिकने वाला हर उत्पाद खराब है या विदेश का हर उत्पाद बेहतर। </span><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_24_1">असली सवाल है—क्या भारतीय उपभोक्ता को भी वही स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली जानकारी मिलनी चाहिए, जो दुनिया के कई दूसरे बाजारों में दी जा रही है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="a90dbcd3f21f0059_24_1"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 16:38:45 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Same brand, but how much difference between taste and health? Double standards for packaged food in India</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>BPSC अधिकारी का विवादित बयान: आंदोलनकारी छात्रों पर ‘कुत्ता भौंके हजार’ टिप्पणी से भड़का आक्रोश, तेजस्वी ने जताया कड़ा विरोध</title>
        <link>https://delhilookout.com/BPSC-officials-dog-barked-thousand-remark-on-agitating-students-sparks-outrage</link>
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        <description><![CDATA[ <p>पटना: बिहार में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच सोमवार को उस वक्त आक्रोश और बढ़ गया, जब बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी विवादों में आ गई। BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा, “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।”</p>
<p>परीक्षा नियंत्रक की इस टिप्पणी को लेकर गर्दनीबाग में धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने BPSC के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। छात्रों का कहना है कि अपनी मांगों और परीक्षा से जुड़े सवाल उठाने वाले अभ्यर्थियों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बेहद आपत्तिजनक है। छात्रों ने आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि “आज जिन्हें कुत्ता कहा जा रहा है, वही कल अफसर बनेंगे।”</p>
<p>70वीं BPSC के सवाल पर दिया जवाब</p>
<p>दरअसल, सोमवार को BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस में TRE-4 की परीक्षा को लेकर कई अहम जानकारियां दी गईं। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षक भर्ती परीक्षा दो चरणों में आयोजित होगी और निगेटिव मार्किंग का प्रावधान जारी रहेगा।</p>
<p>इसी दौरान 70वीं BPSC परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को लेकर आंदोलनकारी छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर परीक्षा नियंत्रक से सवाल किया गया। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आरोपों में तथ्य हैं तो अभ्यर्थियों को कोर्ट जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने विवादित कहावत का इस्तेमाल किया।</p>
<p>छात्रों ने जताया कड़ा विरोध</p>
<p>बयान सामने आने के बाद गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। छात्रों ने BPSC के खिलाफ “BPSC चोर है” के नारे लगाए और परीक्षा नियंत्रक की टिप्पणी को छात्रों का अपमान बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आयोग के अधिकारियों को अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि आंदोलन कर रहे छात्रों को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना चाहिए।</p>
<p>छात्रों ने यह भी कहा कि “कॉकरोच” वाले बयान पर प्रधान गए, अब सचिव की बारी है, यानी आयोग के अधिकारियों की भाषा और रवैये को लेकर छात्र अब और आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दे रहे हैं।</p>
<p>तेजस्वी यादव ने भी की आलोचना</p>
<p>विवादित बयान पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती और बयान देने वाले को माफी मांगनी चाहिए।</p>
<p>TRE-4 को लेकर पहले से ही अभ्यर्थी कई दिनों से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं। ऐसे में BPSC परीक्षा नियंत्रक की यह टिप्पणी आंदोलन को और तूल दे सकती है। अब छात्रों की मांग है कि आयोग इस बयान पर सफाई दे और जिम्मेदार अधिकारी अभ्यर्थियों से माफी मांगें।</p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 17:40:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>BPSC official&#039;s&#039; dog barked thousand &#039;remark on agitating students sparks outrage</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जयशंकर&amp;पुतिन मुलाकात: दिल्ली में BRICS समिट के लिए भारत तैयार, पुतिन ने मोदी से मुलाकात की जताई इच्छा</title>
        <link>https://delhilookout.com/Jaishankar-Putin-meeting-India-ready-for-BRICS-summit-in-Delhi,-Putin-expresses-desire-to-meet-Modi</link>
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        <description><![CDATA[ <p class="isSelectedEnd"><strong><span>मॉस्को:</span></strong><span> विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस अहम बैठक में भारत-रूस संबंधों, द्विपक्षीय व्यापार और आगामी BRICS शिखर सम्मेलन समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि </span><strong><span>भारत दिल्ली में BRICS समिट की मेजबानी और सदस्य देशों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>जयशंकर ने पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं भी पहुंचाईं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति के लिए एक निजी संदेश दिया है, जिसे वह उन्हें सौंपना चाहते हैं। विदेश मंत्री ने भारत-रूस इंटरगवर्नमेंटल कमीशन की बैठक का भी जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के पास बैठक के बाद साझा करने के लिए एक अच्छी रिपोर्ट है।</span></p>
<h3><span>पुतिन ने मोदी से आमने-सामने मुलाकात की जताई इच्छा</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>बैठक के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी शुभकामनाएं भेजीं। उन्होंने कहा कि वह आगामी </span><strong><span>किर्गिस्तान में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन</span></strong><span> के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से आमने-सामने मुलाकात करना चाहते हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>पुतिन की यह इच्छा ऐसे समय सामने आई है, जब भारत और रूस के संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर बनी हुई है। अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाए जाने के बावजूद नई दिल्ली ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संबंधों को लेकर स्पष्ट रुख कायम रखा है।</span></p>
<h3><span>भारत-रूस व्यापार बढ़ने का पुतिन ने दिया मोदी को श्रेय</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने जयशंकर से कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार में हुई वृद्धि में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>पुतिन ने जयशंकर की रूस यात्रा को भी भारत-रूस संबंधों की मजबूती का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री की मौजूदा यात्रा दोनों देशों के बीच दशकों पुराने और मजबूत रिश्तों को दर्शाती है।</span></p>
<h3><span>BRICS समिट पर टिकी नजर</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>जयशंकर की पुतिन से मुलाकात को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में मोदी-पुतिन की संभावित मुलाकात और भारत-रूस के बीच बढ़ता रणनीतिक संवाद वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></p>
<p><span>भारत की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति के फैसले लेता है। ऐसे में जयशंकर-पुतिन बैठक ने एक बार फिर </span><strong><span>भारत-रूस की मजबूत रणनीतिक साझेदारी और नई दिल्ली की स्वतंत्र कूटनीतिक नीति</span></strong><span> को केंद्र में ला दिया है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 17:31:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Jaishankar-Putin meeting India ready for BRICS summit in Delhi, Putin expresses desire to meet Modi</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>80 साल बाद भी सरकारी स्कूल बदहाल क्यों? अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्रियों से मांगा 6 सवालों का जवाब</title>
        <link>https://delhilookout.com/Why-are-government-schools-in-a-state-of-disrepair-even-after-80-years-Abhijit-Dipke-seeks-answers-to-6-questions-from-education-ministers</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_1">देश की आजादी के 80 साल पूरे होने के बावजूद सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर अब सीधे राज्य सरकारों से जवाब मांगने की आवाज तेज हो गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_2">कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को चिट्ठी लिखकर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति से जुड़ी छह अहम जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_0">दीपके ने सवाल उठाया है कि जब शिक्षा को देश के भविष्य की नींव माना जाता है, तो आखिर सरकारी स्कूलों में बच्चों को आज भी साफ पीने का पानी, इस्तेमाल योग्य शौचालय, बेहतर क्लासरूम और बैठने के लिए पर्याप्त बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों जूझना पड़ रहा है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_0">उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे सिर्फ किसी एक स्कूल की समस्या नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर कमियों की ओर इशारा करती हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_1">बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर करना बेहद चिंताजनक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_0">शिक्षा मंत्रियों से मांगा छह बिंदुओं पर पूरा हिसाब</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_0">अभिजीत दीपके ने राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से पिछले पांच वर्षों का विस्तृत रिकॉर्ड साझा करने की मांग की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_1">उन्होंने पूछा है कि राज्य में पिछले पांच साल के दौरान कितने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया और वर्तमान में कितने स्कूल ऐसे हैं जिन्हें तत्काल मरम्मत या पूरी तरह से कायाकल्प की जरूरत है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_6_0">उन्होंने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की स्थिति पर भी स्पष्ट आंकड़े मांगे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_6_1">सवाल है कि इस समय कितने शिक्षण पद स्वीकृत हैं, उनमें से कितने पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और कितने पद अभी भी खाली पड़े हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_7_0">इसके साथ ही उन्होंने पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए जारी किए गए बजट और वास्तविक खर्च का भी पूरा ब्यौरा मांगा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_7_1">यानी सरकार ने स्कूलों के लिए कितना पैसा तय किया और उसमें से वास्तव में कितना खर्च हुआ, इसका हिसाब सामने आना चाहिए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_8_0">हर बच्चे के लिए पर्याप्त स्कूल हैं या नहीं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_9_0">दीपके ने राज्यों से यह भी बताने को कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा स्कूलों के अलावा कितने नए सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_9_1">उनका सवाल सीधे तौर पर स्कूलों की संख्या और बच्चों की शिक्षा तक पहुंच से जुड़ा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_10_0">उन्होंने शिक्षकों से कराए जा रहे गैर-शैक्षणिक कार्यों पर भी जानकारी मांगी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_10_1">पढ़ाने के अलावा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को किन-किन नॉन-टीचिंग जिम्मेदारियों में लगाया जाता है, इसका भी पूरा विवरण मांगा गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_11_0">छठे सवाल में उन्होंने स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक और बुनियादी सुविधाओं का आंकड़ा मांगा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_11_1">इसमें कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग की सुविधा, साफ और उपयोग में आने वाले शौचालय तथा बच्चों के लिए खेल सुविधाएं और खेल उपकरण शामिल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_12_0">“बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता”</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_13_0">दीपके ने सरकारी स्कूलों की वायरल हो रही तस्वीरों को लेकर तीखी चिंता जताई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_13_1">उनका कहना है कि स्कूलों की ऐसी हालत को सामान्य मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_13_2">जिन बच्चों के हाथों में देश का भविष्य है, उन्हें जर्जर और असुविधाजनक माहौल में पढ़ने के लिए मजबूर करना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_14_0">उन्होंने यहां तक कहा कि कई जगह स्कूलों में बच्चों के साथ जानवरों से भी बदतर परिस्थितियों में व्यवहार किया जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_14_1">उनका सवाल है कि आखिर सरकारें शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी कमियों को कब तक नजरअंदाज करती रहेंगी?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_0">अब गेंद राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के पाले में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_1">दीपके की चिट्ठी ने सरकारी स्कूलों की मरम्मत, शिक्षक भर्ती, बजट खर्च, स्कूलों की जरूरत और डिजिटल सुविधाओं जैसे मुद्दों पर सरकारों से आंकड़ों के साथ जवाब देने की मांग सामने रख दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_2">सवाल सिर्फ स्कूलों का नहीं, बल्कि उन करोड़ों बच्चों के भविष्य का है जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_2"></span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:31:00 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Why are government schools in a state of disrepair even after 80 years? Abhijit Dipke seeks answers to 6 questions from education ministers</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नासिक कुंभ के ₹34,000 करोड़ पर सुप्रीम कोर्ट के जज का सवाल: “सिर्फ 0.1% शिक्षा पर खर्च होता तो बच जाते 125 मराठी स्कूल!”</title>
        <link>https://delhilookout.com/SC-judges-question-on-Nashik-Kumbhs-₹34,000-crore:-If-only-0.1-was-spent-on-education,-125-Marathi-schools-would-have-been-saved-</link>
        <guid>https://delhilookout.com/SC-judges-question-on-Nashik-Kumbhs-₹34,000-crore:-If-only-0.1-was-spent-on-education,-125-Marathi-schools-would-have-been-saved-</guid>
        <description><![CDATA[ <p class="isSelectedEnd"><strong><span>मुंबई:</span></strong><span> महाराष्ट्र में शिक्षा के घटते बजट और बंद होते मराठी माध्यम के स्कूलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने बेहद गंभीर टिप्पणी की है। धुले में एक हाई स्कूल में ‘स्मार्ट क्लासेस’ के उद्घाटन समारोह में उन्होंने नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित हजारों करोड़ रुपये के बजट और राज्य की स्कूली शिक्षा की स्थिति के बीच बड़ा सवाल खड़ा किया।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>जस्टिस वराले ने कहा कि </span><strong><span>नासिक कुंभ के लिए 32,000 से 34,000 करोड़ रुपये तक का प्रावधान किया जा रहा है, जबकि इस राशि का महज 0.1 फीसदी यानी करीब 32-34 करोड़ रुपये शिक्षा पर खर्च किए जाएं तो महाराष्ट्र के 100 से 125 बंद हो चुके मराठी माध्यम के स्कूलों को बचाया जा सकता था।</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>उन्होंने साफ किया कि उन्हें विकास परियोजनाओं या बड़े आयोजनों पर सरकारी खर्च से कोई आपत्ति नहीं है। उनका सवाल प्राथमिकताओं को लेकर है। उन्होंने कहा कि जब सरकार हजारों करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट्स और कॉरिडोर पर खर्च कर सकती है, तो बुनियादी शिक्षा और सरकारी स्कूलों के लिए पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं?</span></p>
<h3><strong><span>“शिक्षा का बजट बढ़ने के बजाय घट रहा है”</span></strong></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>जस्टिस वराले ने महाराष्ट्र में शिक्षा के बजट में कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा के लिए आवंटित बजट लगातार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। कई वर्षों से यह राज्य के कुल बजट का 13 फीसदी तक भी नहीं पहुंचा है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे उन लाखों बच्चों के भविष्य का आधार हैं, जिनके परिवार महंगी निजी शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते।</span></p>
<h3><strong><span>जज ने सुनाया अपना अनुभव</span></strong></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>जस्टिस वराले ने क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा के महत्व को अपने व्यक्तिगत अनुभव से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई म्यूनिसिपल और जिला परिषद के मराठी माध्यम के स्कूलों से की है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>उन्होंने कहा कि मराठी माध्यम से पढ़ाई करने से उनके करियर में कोई बाधा नहीं आई। इसके उलट, क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा ने उनकी सोच को व्यापक बनाने में मदद की।</span></p>
<h3><strong><span>आश्रम स्कूल की घटना का किया जिक्र</span></strong></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताते हुए जस्टिस वराले ने एक आश्रम स्कूल की दर्दनाक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण जमीन पर सो रही तीन छात्राओं की सांप के काटने से मौत हो गई थी।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>यह उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुरक्षा और सुविधाएं तक सुनिश्चित नहीं की जा रही हैं, तो विकास का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?</span></p>
<h3><strong><span>कुंभ, कॉरिडोर और स्कूलों के बीच खर्च का सवाल</span></strong></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>जस्टिस वराले ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के साथ-साथ कॉरिडोर और अन्य बड़ी विकास परियोजनाओं पर होने वाले भारी सार्वजनिक खर्च का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए भी करीब </span><strong><span>₹11,000 करोड़</span></strong><span> तक का आवंटन किया जा रहा है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>उनका कहना था कि सरकार को विकास कार्य करने चाहिए और बड़े आयोजनों पर खर्च भी करना चाहिए, लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र पीछे न छूट जाएं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>उनकी टिप्पणी का सार यही था कि हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं के बीच अगर सिर्फ 0.1 फीसदी राशि भी सरकारी स्कूलों के लिए निकाल दी जाए, तो सैकड़ों नहीं तो कम से कम 100-125 मराठी माध्यम के स्कूलों को बंद होने से बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।</span></strong></p>
<p><span>जस्टिस वराले की यह टिप्पणी महाराष्ट्र में विकास की प्राथमिकताओं, क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ सकती है।</span></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:22:39 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>SC judge&#039;s question on Nashik Kumbh&#039;s ₹34, 000 crore: &quot;If only 0.1% was spent on education, 125 Marathi schools would have been saved! &quot;</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>कोलकाता एयरपोर्ट के पास कार शोरूम में भीषण आग, 30 गाड़ियां जलकर खाक; तीन घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू</title>
        <link>https://delhilookout.com/Fire-breaks-out-at-car-showroom-near-Kolkata-airport,-30-vehicles-gutted-It-was-found-after-three-hours-of-effort.</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_0">कोलकाता इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जेसोर रोड इलाके में सोमवार तड़के एक कार शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_1">देखते ही देखते आग ने शोरूम के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और वहां खड़ी करीब 30 गाड़ियां जलकर पूरी तरह राख हो गईं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_2">घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_0">आग की सूचना मिलने के बाद दमकल की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लगातार कई घंटे तक आग बुझाने का अभियान चलाया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_1">तेज लपटों और शोरूम में मौजूद वाहनों के कारण आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण रहा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_2">करीब दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया जा सका।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_0">इस हादसे की जानकारी वाहन मालिक समर कौर को सुबह करीब 4 बजे उनके एक दोस्त ने फोन पर दी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_1">कौर की कार भी आग की जगह के बिल्कुल पास खड़ी थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_2">सूचना मिलते ही वह अपनी गाड़ी बचाने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां की स्थिति देखकर उनके लिए कार निकालना संभव नहीं था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_0">कौर के मुताबिक, जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो आग इतनी विकराल थी कि वह करीब 10 फीट के दायरे में भी जाने की स्थिति में नहीं थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_1">आग उनके वाहन के ठीक सामने तक पहुंच चुकी थी, जिसके चलते कार को सुरक्षित निकालने की कोशिश भी नाकाम रही।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_0">दमकलकर्मियों ने आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_1">राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_6_0">फिलहाल आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_6_1">अधिकारियों की ओर से घटना की जांच की जा रही है और आग के स्रोत तथा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।</span></p>
<p></p>
<p></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:15:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Fire breaks out at car showroom near Kolkata airport, 30 vehicles gutted It was found after three hours of effort.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>गोविंदा&amp;सुनीता के रिश्ते में फिर आया नया ट्विस्ट! अनफॉलो के बाद दोबारा किया फॉलो, तलाक से लेकर ‘शुगर डैडी’ विवाद तक मचा बवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/There-is-a-new-twist-in-the-Govinda-Sunita-relationship.-Followed-again-after-unfollowing,-from-divorce-to-Sugar-Daddy-controversy</link>
        <guid>https://delhilookout.com/There-is-a-new-twist-in-the-Govinda-Sunita-relationship.-Followed-again-after-unfollowing,-from-divorce-to-Sugar-Daddy-controversy</guid>
        <description><![CDATA[ <p class="isSelectedEnd"><span>बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा की शादीशुदा जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले काफी समय से दोनों के रिश्ते में अनबन और तनाव की खबरें सामने आ रही थीं। सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने की खबर ने इस विवाद को और हवा दे दी थी। लेकिन अब कहानी ने अचानक नया मोड़ ले लिया है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>अनफॉलो के बाद फिर एक-दूसरे को किया फॉलो</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>खबरों के मुताबिक, गोविंदा और सुनीता ने इंस्टाग्राम पर दोबारा एक-दूसरे को फॉलो कर लिया है। दोनों की फॉलोइंग लिस्ट में अब एक-दूसरे के अकाउंट दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या दोनों के बीच चल रहा तनाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है?</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>हालांकि, सोशल मीडिया पर दोबारा फॉलो करने से रिश्ते की स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, लेकिन इस घटनाक्रम ने फैंस और बॉलीवुड गलियारों में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>तलाक की खबरों से मचा था हड़कंप</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>गोविंदा और सुनीता के रिश्ते को लेकर सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया, जब सुनीता द्वारा तलाक का केस दायर करने की खबरें आईं। बाद में रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सुनीता ने यह केस वापस ले लिया है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>सुनीता ने कथित तौर पर राखी सावंत से फोन पर बातचीत के दौरान इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई थी। बातचीत में उन्होंने दावा किया था कि गोविंदा दूसरी शादी की योजना बना रहे थे और इसी वजह से उन्होंने तलाक का केस वापस लेने का फैसला किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>रानी स्वर्णकार को लेकर भी बढ़ा विवाद</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>गोविंदा का नाम अभिनेत्री रानी स्वर्णकार के साथ जोड़ा जा रहा है। रानी बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं और गोविंदा की आगामी फिल्म ‘रूपा’ से जुड़ी हैं। फिल्म को गोविंदा के कमबैक प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>गोविंदा और रानी को साथ देखे जाने के बाद सुनीता की कथित टिप्पणियों ने विवाद को और भड़का दिया। सुनीता ने गोविंदा को लेकर ‘शुगर डैडी’ तक कह दिया था और कम उम्र की अभिनेत्री के साथ घूमने पर नाराजगी जाहिर की थी।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>गोविंदा ने भी दिया था पलटवार</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>सुनीता की टिप्पणियों के बाद गोविंदा ने भी वीडियो के जरिए जवाब दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुनीता उनका नाम खराब करने की कोशिश कर रही हैं। गोविंदा का कहना था कि फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता अक्सर अपने से कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ काम करते हैं और उनके मामले को अलग नजरिए से देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>उन्होंने सुनीता को अपनी सीमाओं में रहने की सलाह भी दी थी। दोनों की सार्वजनिक बयानबाजी ने उनके रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं को और ज्यादा गरमा दिया।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>परिवार भी नहीं चाहता विवाद बढ़े</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>मामा-मामी के इस विवाद पर कृष्णा अभिषेक और आरती सिंह भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। कृष्णा अभिषेक ने साफ कहा कि घर की बातें घर में ही रहनी चाहिए और वह अपने मामा-मामी दोनों से प्यार करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों के बीच सबकुछ जल्द ठीक हो जाए।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>39 साल की शादी, लेकिन अब रिश्ते पर सवाल</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>गोविंदा और सुनीता ने 11 मार्च 1987 को लव मैरिज की थी। दोनों ने शुरुआत में अपनी शादी को करीब एक-दो साल तक सार्वजनिक नहीं किया था। इस शादी से उनके दो बच्चे हैं—बेटी टीना और बेटा यशवर्धन आहूजा।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>करीब चार दशक लंबे इस रिश्ते में अब सोशल मीडिया का ‘फॉलो-अनफॉलो’ खेल, तलाक की खबरें, दूसरी शादी के दावे और रानी स्वर्णकार को लेकर विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या दोबारा फॉलो करना सुलह का संकेत है या सिर्फ सोशल मीडिया का एक और मोड़?</span></strong></p>
<p><span>गोविंदा और सुनीता की तरफ से रिश्ते की मौजूदा स्थिति पर कोई स्पष्ट संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। इसलिए सोशल मीडिया गतिविधियों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:08:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>There is a new twist in the Govinda-Sunita relationship. Followed again after unfollowing, from divorce to &#039;Sugar Daddy&#039; controversy</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बीकानेर से कोटपुतली अब सिर्फ 3 घंटे! राजस्थान में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बदलेगी कनेक्टिविटी की तस्वीर</title>
        <link>https://delhilookout.com/Bikaner-to-Kotputli-is-now-just-3-hours-The-proposed-greenfield-expressway-in-Rajasthan-will-change-the-picture-of-connectivity</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_0">जयपुर/बीकानेर। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_1">राजस्थान के लोगों के लिए प्रस्तावित बीकानेर-कोटपुतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_2">करीब 295 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बीकानेर से कोटपुतली का सफर करीब 3 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="52b9182d3b7611ce_1_3">फिलहाल यही दूरी तय करने में यात्रियों को करीब 6 से 7 घंटे तक लग जाते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_0">हालांकि, NHAI की ओर से इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक नया अपडेट जारी नहीं किया गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_2_1">ऐसे में परियोजना से जुड़ी समयसीमा और निर्माण की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_3_0">आधे समय में पूरा होगा सफर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_0">मौजूदा रूट से बीकानेर और कोटपुतली के बीच दूरी करीब 340 किलोमीटर है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_1">सड़क मार्ग की स्थिति और मौजूदा यातायात के कारण इस सफर में 6 घंटे से अधिक समय लग सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_4_2">प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने पर दूरी घटकर करीब 295 किलोमीटर रह सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_0">सबसे बड़ा फायदा इसकी तेज और बेहतर कनेक्टिविटी का होगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_5_1">एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार यातायात के चलते बीकानेर से कोटपुतली का सफर लगभग आधे समय में पूरा होने की उम्मीद है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_6_0">दिल्ली-NCR तक पहुंच होगी आसान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_7_0">इस परियोजना का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा पश्चिमी राजस्थान को दिल्ली-NCR और उत्तर भारत से बेहतर कनेक्टिविटी के रूप में मिल सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_7_1">प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बीकानेर क्षेत्र को दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_8_0">इसके आगे कोटपुतली के आसपास से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अंबाला-कोटपुतली एक्सप्रेसवे (NH-152D) जैसे प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी मिलने पर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब की ओर आवाजाही भी आसान हो सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_9_0">इन 10 शहरों-कस्बों को मिलेगा फायदा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_10_0">प्रस्तावित एक्सप्रेसवे राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों और कस्बों को कनेक्ट करेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_10_1">इनमें—</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_11_0">बीकानेर, नापासर, श्रीडूंगरगढ़, रतनगढ़, फतेहपुर शेखावाटी, मंडावा, झुंझुनू, उदयपुरवाटी, नीम का थाना और कोटपुतली शामिल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_12_0">इससे न केवल इन क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर हो सकता है, बल्कि व्यापार, पर्यटन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को भी गति मिलने की उम्मीद है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_13_0">पश्चिमी राजस्थान के लिए बन सकता है बड़ा कॉरिडोर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_14_0">बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान को दिल्ली-NCR से तेज कनेक्टिविटी मिलने का असर स्थानीय कारोबार से लेकर माल परिवहन तक कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_14_1">खासकर बीकानेर जैसे महत्वपूर्ण शहर के लिए दिल्ली और उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंच आसान होना आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_0">हालांकि फिलहाल यह परियोजना प्रस्तावित स्तर पर है और NHAI की ओर से कोई ताजा आधिकारिक अपडेट नहीं आया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="52b9182d3b7611ce_15_1">इसलिए एक्सप्रेसवे की लंबाई, रूट, निर्माण शुरू होने और पूरा होने की समयसीमा को आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम माना जाना चाहिए।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:02:40 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Bikaner to Kotputli is now just 3 hours! The proposed greenfield expressway in Rajasthan will change the picture of connectivity</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>2036 तक चीन से आगे निकलेगा भारत! 10.8 करोड़ ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ बदल देंगे दुनिया का बाजार</title>
        <link>https://delhilookout.com/India-will-overtake-China-by-2036.-10.8-crore-Affluent-Consumers-will-change-the-worlds-market</link>
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        <description><![CDATA[ <p class="isSelectedEnd"><span>भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो आने वाले दशक में देश के उपभोक्ता बाजार की पूरी तस्वीर बदल सकती है। NielsenIQ (NIQ) और World Data Lab की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, </span><strong><span>2036 तक भारत में ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ की संख्या चीन से अधिक हो सकती है।</span></strong><span> यह बदलाव सिर्फ उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि वैश्विक कंपनियों, निवेशकों और ब्रांड्स के लिए भारत के बढ़ते बाजार की ताकत का संकेत है।</span></p>
<h2><span>आखिर कौन होता है ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’?</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘एफ्लुएंट कंज्यूमर’ का मतलब सीधे तौर पर करोड़पति या बेहद अमीर व्यक्ति नहीं होता। यह </span><strong><span>संपत्ति या आय नहीं, बल्कि रोजाना खर्च करने की क्षमता पर आधारित कैटेगरी</span></strong><span> है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>NIQ और World Data Lab के मुताबिक, जो व्यक्ति रोजाना </span><strong><span>90 डॉलर यानी करीब 7,500 रुपये से अधिक</span></strong><span> खर्च करता है, उसे इस कैटेगरी में रखा जाता है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>इसका मतलब यह है कि 2036 तक भारत में अगर 10.8 करोड़ एफ्लुएंट कंज्यूमर होते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में 10.8 करोड़ करोड़पति पैदा हो जाएंगे। इसका मतलब है कि इतने लोगों की </span><strong><span>दैनिक उपभोग और खर्च करने की क्षमता</span></strong><span> उस स्तर तक पहुंच जाएगी, जहां वे प्रीमियम और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स एवं सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेंगे।</span></p>
<h2><span>भारत की अगली बड़ी ताकत—मिडिल क्लास से एफ्लुएंट क्लास तक का सफर</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल आबादी और तेजी से बदलता उपभोक्ता वर्ग है। आय बढ़ने, शहरीकरण, रोजगार के नए अवसरों, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवनशैली में बदलाव के साथ बड़ी संख्या में भारतीय परिवार धीरे-धीरे उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ता वर्ग में प्रवेश कर रहे हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>रिपोर्ट में </span><strong><span>‘कोर कंज्यूमर’</span></strong><span> भी एक महत्वपूर्ण श्रेणी है। इसमें वे लोग आते हैं जो रोजाना 13 से 90 डॉलर के बीच खर्च करते हैं। 2026 में भारत में ऐसे करीब </span><strong><span>64.9 करोड़ कोर कंज्यूमर</span></strong><span> बताए गए हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>यही विशाल उपभोक्ता आधार आने वाले वर्षों में भारत के एफ्लुएंट कंज्यूमर वर्ग के विस्तार की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।</span></p>
<h2><span>चीन के मुकाबले भारत क्यों बढ़ रहा है?</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>भारत और चीन दोनों दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में हैं, लेकिन दोनों की जनसांख्यिकीय और आर्थिक दिशा अलग-अलग हो रही है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>भारत में अपेक्षाकृत युवा आबादी, बढ़ता शहरीकरण, बढ़ती आय और तेजी से विस्तार करता उपभोक्ता बाजार कंपनियों के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रहा है। दूसरी ओर, चीन में जनसंख्या संबंधी चुनौतियां और बदलती आर्थिक परिस्थितियां उसके उपभोक्ता बाजार की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>यही अंतर आने वाले वर्षों में भारत को एफ्लुएंट कंज्यूमर के मामले में चीन से आगे ले जा सकता है।</span></p>
<h2><span>इसका सबसे बड़ा फायदा किन सेक्टर्स को होगा?</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>अगर भारत में उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, तो इसका सीधा असर कई उद्योगों पर दिखाई देगा।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>प्रीमियम कारों से लेकर स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, ज्वेलरी, ट्रैवल, होटल, रेस्टोरेंट, हेल्थकेयर, एजुकेशन, रियल एस्टेट और डिजिटल सेवाओं तक—कंपनियों के लिए भारतीय ग्राहक पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>खासकर </span><strong><span>प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड्स के लिए भारत आने वाले दशक में दुनिया के सबसे आकर्षक बाजारों में शामिल हो सकता है।</span></strong></p>
<h2><span>निवेशकों के लिए क्यों बड़ा संकेत है?</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>किसी भी कंपनी के लिए सिर्फ आबादी मायने नहीं रखती, बल्कि यह मायने रखता है कि उस आबादी के पास </span><strong><span>खर्च करने के लिए कितना पैसा और कितनी क्षमता है।</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>अगर भारत में 2036 तक करोड़ों लोग उच्च खर्च क्षमता वाले उपभोक्ता वर्ग में पहुंचते हैं, तो कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीति में भारत को और ज्यादा प्राथमिकता दे सकती हैं।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>इसका मतलब भारत में नए स्टोर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, होटल, रिटेल नेटवर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रीमियम सेवाओं में निवेश बढ़ सकता है।</span></p>
<h2><span>भारत के लिए असली कहानी सिर्फ संख्या नहीं है</span></h2>
<p class="isSelectedEnd"><span>2036 का यह अनुमान भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश के बदलते आर्थिक चरित्र की तस्वीर पेश करता है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>भारत अब सिर्फ </span><strong><span>कम लागत वाला बड़ा बाजार</span></strong><span> नहीं रहना चाहता। तेजी से बढ़ता उपभोक्ता वर्ग उसे एक ऐसे बाजार में बदल सकता है जहां ग्राहक बेहतर क्वालिटी, ब्रांड, सुविधा और प्रीमियम अनुभव के लिए अधिक खर्च करने को तैयार होंगे।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>यानी आने वाले वर्षों में भारत की कहानी सिर्फ </span><strong><span>‘कितने लोग हैं’</span></strong><span> की नहीं होगी, बल्कि </span><strong><span>‘कितने लोग कितना खर्च कर सकते हैं’</span></strong><span> की होगी।</span></p>
<p><span>और अगर अनुमान सही साबित होता है, तो </span><strong><span>2036 वह दौर हो सकता है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक के रूप में चीन को एक अहम पैमाने पर पीछे छोड़ देगा।</span></strong></p> ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:00:59 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली&amp;NCR में संक्रमण का बढ़ता खतरा: H1N1 ने बढ़ाई टेंशन, हर तीसरे टेस्ट में संक्रमण की आहट!</title>
        <link>https://delhilookout.com/Viral-nfection-is-increasing-in-Delhi-NCR.-H1N1-increases-the-risk-of-infection-every-third-test.</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_0">दिल्ली-NCR में इन दिनों सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, इंफ्लूएंजा और H1N1 जैसे श्वसन संक्रमणों के मामले लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_1">बदलते मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच अस्पतालों में खांसी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_2">रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में H1N1 के अब तक 1,449 मामले दर्ज किए गए हैं। </span><span data-hovered="true" data-sentence="b60c324589292916_1_3">बढ़ते मरीजों को देखते हुए RML अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में विशेष वॉर्ड की व्यवस्था भी की गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_0">बताया जा रहा है कि जांच के दौरान करीब हर तीन में से एक मरीज का टेस्ट पॉजिटिव मिल रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_1">बच्चों में भी H1N1 और फ्लू जैसे संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_2">दिल्ली से सटे गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में भी सर्दी-खांसी और फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने से दवाओं की उपलब्धता पर दबाव देखने को मिल रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_0">कौन-कौन से संक्रमण बढ़ा रहे हैं चिंता?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_1">H1N1 यानी स्वाइन फ्लू</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_0">H1N1 इंफ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_1">इसके मामले मौसमी बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान बढ़ सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_2">तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और नाक बहना इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_0">वायरल फीवर और इंफ्लूएंजा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_0">बुखार, गले में खराश, खांसी, नाक बहना, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण वायरल इंफेक्शन और फ्लू में देखे जा सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_1">कई बार शुरुआती लक्षण इतने मिलते-जुलते होते हैं कि केवल लक्षणों के आधार पर संक्रमण की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_0">कोविड-19</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_0">कोविड-19 में भी बुखार, खांसी, गले में खराश, थकान और बदन दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_1">कुछ मरीजों में स्वाद या गंध कम महसूस होना भी देखा जा सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_2">केवल लक्षणों के आधार पर कोविड और फ्लू में निश्चित अंतर करना संभव नहीं होता; </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_3">जरूरत पड़ने पर टेस्ट जरूरी हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_0">कॉमन कोल्ड</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_0">सामान्य सर्दी-</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_1">जुकाम में छींक आना, नाक बहना या बंद होना और गले में खराश सबसे आम शिकायतें हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_2">इसके लक्षण आमतौर पर फ्लू की तुलना में हल्के होते हैं और धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_11_0">Cold, Flu, H1N1 और COVID में क्या फर्क?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_0">कॉमन कोल्ड में नाक और गले से जुड़े लक्षण प्रमुख होते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_1">फ्लू में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द अधिक महसूस हो सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_2">H1N1 भी फ्लू के ही एक प्रकार के वायरस से जुड़ा संक्रमण है और इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में बीमारी अधिक गंभीर हो सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_0">वहीं कोविड-19 के लक्षण भी फ्लू और अन्य रेस्पिरेटरी संक्रमणों से काफी मिल सकते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_1">इसलिए गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार जांच महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">H1N1 के प्रमुख लक्षण</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">बुखार या ठंड लगना</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">सूखी खांसी</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">गले में खराश</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">सिरदर्द</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">शरीर और मांसपेशियों में दर्द</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">नाक बहना या बंद होना</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">अत्यधिक कमजोरी और थकान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_0">आमतौर पर संक्रमण के संपर्क में आने के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_16_0">किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_0">बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को रेस्पिरेटरी संक्रमणों से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_1">स्कूल जाने वाले बच्चों में भी संक्रमण तेजी से फैल सकता है, क्योंकि वे लगातार दूसरे बच्चों के संपर्क में रहते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_18_0">अस्थमा और COPD जैसी सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों को फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमणों से विशेष रूप से बचाव करना चाहिए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_19_0">संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_0">भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_1">बीमार होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचें। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_2">पर्याप्त आराम और पानी का सेवन भी जरूरी है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_0">अगर तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति या बच्चों में गंभीर सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_22_0">फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_22_1">हर खांसी को सामान्य सर्दी समझकर नजरअंदाज न करें। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_22_2">दिल्ली-NCR में संक्रमण बढ़ने के बीच लक्षणों पर नजर रखें, सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच व उपचार की सलाह लें।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Viral nfection is increasing in Delhi-NCR. H1N1 increases the risk of infection every third test.</media:keywords>
    </item>
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        <title>BSE शेयर पर संकट के बादल! 3 महीने में ₹30,000 करोड़ मार्केट कैप घटा, ऑप्शंस कारोबार में गिरावट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता</title>
        <link>https://delhilookout.com/Crisis-in-the-stock-market-of-BSE-Market-cap-dips-by-Rs-30,000-crore-in-3-months,-fall-in-options-trading-worries-investors</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_0">भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE के शेयर ने पिछले दो वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था, लेकिन अब इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_1">पिछले तीन महीनों में BSE का मार्केट कैप करीब ₹30,000 करोड़ घट गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_2">शेयर पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और बाजार में यह सवाल उठने लगा है कि क्या BSE की तेज ग्रोथ का दौर अब कमजोर पड़ रहा है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_0">विशेषज्ञों के मुताबिक, BSE के कारोबार के सामने फिलहाल तीन बड़ी चुनौतियां हैं—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_1">नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS), इंडेक्स ऑप्शंस में घटता कारोबार और ब्रोकर्स के लिए RBI के सख्त बैंक गारंटी नियम। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_2">इन तीनों का असर एक्सचेंज के डेरिवेटिव्स कारोबार और भविष्य की कमाई पर पड़ सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_0">ऑप्शंस कारोबार में आई गिरावट</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_0">BSE की कमाई में डेरिवेटिव्स कारोबार, खासकर इंडेक्स ऑप्शंस, की अहम भूमिका है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_1">लेकिन अगस्त में अब तक BSE का औसत दैनिक ऑप्शंस टर्नओवर जुलाई की तुलना में करीब 12% कम रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_0">ब्रोकरेज फर्म Nuvama के आंकड़ों के मुताबिक, BSE का प्रीमियम टर्नओवर करीब 22.7% घटकर ₹18,100 करोड़ रह गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_1">इसके साथ ही ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या में भी करीब 30.5% की गिरावट दर्ज की गई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_0">बाजार विशेषज्ञ इस गिरावट के पीछे नए Closing Auction Session (CAS) को प्रमुख कारणों में से एक मान रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_1">इस व्यवस्था में दिन के अंत में शेयर या ऑप्शन की क्लोजिंग कीमत ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए तय होती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_2">इससे खासकर एक्सपायरी के समय ऑप्शंस की कीमतों में होने वाले बदलाव का अनुमान लगाना ट्रेडर्स के लिए पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_0">BSE पर CAS का असर ज्यादा क्यों?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_0">BSE के लिए एक्सपायरी डे बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके डेरिवेटिव्स कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी दिन केंद्रित रहता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_0">जुलाई में BSE के करीब 72.6% कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायरी डे पर हुए थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_1">ऐसे में यदि एक्सपायरी वाले दिन ऑप्शंस ट्रेडिंग कमजोर होती है, तो इसका असर BSE के कुल कारोबार और कमाई पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_0">BSE के शेयर में पिछले दौर की तेजी के पीछे Sensex ऑप्शंस में लगातार बढ़ती बाजार हिस्सेदारी भी एक महत्वपूर्ण वजह रही है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="b60c324589292916_10_1">लेकिन अब यदि इस हिस्सेदारी और कारोबार की ग्रोथ धीमी पड़ती है, तो कंपनी की मौजूदा ऊंची वैल्यूएशन को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_11_0">ब्रोकरेज ने घटाए कमाई के अनुमान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_0">बदलते कारोबारी माहौल का असर ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों पर भी दिखाई देने लगा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_0">Jefferies ने FY27 से FY29 के लिए BSE के EPS अनुमान में करीब 5-12% की कटौती की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_1">वहीं Nuvama ने FY27 और FY28 के EPS अनुमान को क्रमशः 6.3% और 15% कम किया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">इसका सीधा मतलब है कि ब्रोकरेज फर्मों को आने वाली तिमाहियों में BSE की कमाई को लेकर पहले की तुलना में कम भरोसा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_0">RBI के बैंक गारंटी नियम भी बन सकते हैं चुनौती</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_16_0">BSE के लिए एक और चिंता ब्रोकर्स को लेकर RBI के नए बैंक गारंटी नियम हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_16_1">इन नियमों से ब्रोकर्स के कारोबार और खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग पर दबाव पड़ने की आशंका है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_0">Jefferies का अनुमान है कि अगले एक साल में इन बदलावों के कारण प्रीमियम टर्नओवर में 10% तक की कमी आ सकती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_1">यदि ऐसा होता है तो इसका असर डेरिवेटिव्स वॉल्यूम और अंततः BSE की आय पर पड़ सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_18_0">क्या BSE में वापसी की गुंजाइश खत्म हो गई है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_19_0">हालांकि BSE की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_19_1">एक्सचेंज के पास कारोबार में सुधार के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_0">BSE अपनी ऑप्शन फीस बढ़ाकर प्रति ट्रेड कमाई बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_1">इसके अलावा यदि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, ट्रेडर्स नए CAS सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से एडजस्ट होते हैं और ऑक्शन में लिक्विडिटी बढ़ती है, तो ऑप्शंस कारोबार दोबारा मजबूत हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_0">यानी मौजूदा गिरावट को BSE की लंबी अवधि की कहानी का अंत नहीं माना जा सकता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_1">लेकिन निवेशकों के लिए अब केवल पिछले दो वर्षों के शानदार रिटर्न को देखकर शेयर में दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_22_0">Jefferies और Nuvama ने घटाए टारगेट</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_23_0">BSE के शेयर पर बढ़ते दबाव के बीच ब्रोकरेज फर्मों ने अपने टारगेट प्राइस भी कम किए हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_24_0">Jefferies ने BSE को 'Underperform' रेटिंग देते हुए अपना टारगेट प्राइस ₹3,520 से घटाकर ₹2,940 कर दिया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_25_0">वहीं Nuvama ने BSE पर 'Hold' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹4,090 से घटाकर ₹3,240 कर दिया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_26_0">इन संशोधनों से संकेत मिलता है कि ब्रोकरेज फिलहाल BSE के कारोबार में आने वाली चुनौतियों को लेकर सतर्क हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_27_0">निवेशकों को अब किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_28_0">BSE के निवेशकों के लिए आने वाले महीनों में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_28_1">इंडेक्स ऑप्शंस का कारोबार, CAS के बाद एक्सपायरी डे की गतिविधियां और कंपनी की वास्तविक कमाई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_29_0">अगर BSE ऑप्शंस मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखता है, ट्रेडिंग वॉल्यूम दोबारा बढ़ता है और CAS का असर समय के साथ कम होता है, तो शेयर में रिकवरी की संभावना बन सकती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_29_1">लेकिन अगर ऑप्शंस कारोबार में गिरावट जारी रहती है और ब्रोकर्स पर नए नियमों का असर बढ़ता है, तो BSE की कमाई और वैल्यूएशन दोनों पर दबाव बना रह सकता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_30_0">निवेशकों के लिए बड़ा सवाल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_31_0">BSE ने बीते वर्षों में जिस तेजी से निवेशकों को रिटर्न दिया, वह निश्चित रूप से आकर्षक रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_31_1">लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि आगे का प्रदर्शन सिर्फ पुराने रिटर्न के आधार पर तय नहीं होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_32_0">निवेशकों को अब BSE के ऑप्शंस वॉल्यूम, Sensex डेरिवेटिव्स में बाजार हिस्सेदारी, CAS के प्रभाव, प्रीमियम टर्नओवर और आने वाली तिमाहियों की कमाई पर बारीकी से नजर रखनी होगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_33_0">ऐसे में BSE शेयर में निवेश का फैसला करते समय 'पिछला रिटर्न कितना मिला' से ज्यादा जरूरी यह देखना होगा कि कंपनी की भविष्य की कमाई और डेरिवेटिव्स कारोबार किस दिशा में जा रहा है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:51:42 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Crisis in the stock market of BSE! Market cap dips by Rs 30, 000 crore in 3 months, fall in options trading worries investors</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आखिरकार राहुल गांधी के धरने से झुकी सरकार? दिल्ली पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर गरजा विपक्ष, पैलेट गन मामले में FIR पर बढ़ा दबाव</title>
        <link>https://delhilookout.com/Has-Rahul-Gandhi-finally-resigned-as-Congress-president-Protest-outside-Delhi-Police-HQ-over-pellet-case</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Has-Rahul-Gandhi-finally-resigned-as-Congress-president-Protest-outside-Delhi-Police-HQ-over-pellet-case</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_1">दिल्ली में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सियासी टकराव शुक्रवार को उस वक्त और तेज हो गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंच गए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_2">राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर मामले में FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_0">मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_1">साहिल लोचब का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से उन्हें चोट लगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_2">कांग्रेस का कहना है कि शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_3">इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पहले पुलिस अधिकारियों से मिले और बाद में पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_0">राहुल गांधी के धरने के बाद संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_1">प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता वहां पहुंचे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_2">कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_0">‘FIR करो, जवाब दो’—राहुल का सीधा दबाव</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_0">राहुल गांधी का रुख साफ रहा कि जब तक घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_1">उन्होंने पुलिस से यह भी जानना चाहा कि कथित पैलेट फायरिंग के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और कार्रवाई क्यों नहीं हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_0">हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया गया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_1">पुलिस पहले पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही है, जबकि घायल प्रदर्शनकारियों की मेडिकल रिपोर्ट और चल रही जांच ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_2">इस पूरे मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी भी गठित है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_0">बीजेपी का पलटवार—‘अराजक राजनीति’ का आरोप</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_0">राहुल गांधी के धरने पर बीजेपी ने भी तीखा हमला बोला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_1">बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने इसे अराजक राजनीति बताते हुए सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के नेता कानून और नियमों का सम्मान करते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_2">बीजेपी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मौजूदा राजनीतिक विवादों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_0">लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह किसी राजनीतिक स्टंट का मामला नहीं, बल्कि घायल छात्र को न्याय दिलाने और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय कराने की लड़ाई है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_0">फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_1">क्या राहुल गांधी के पुलिस स्टेशन के बाहर धरने ने दिल्ली पुलिस और सरकार पर इतना दबाव बना दिया है कि अब पैलेट गन मामले में FIR और कार्रवाई का रास्ता खुलेगा? </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_2">राजनीतिक गलियारों में राहुल के इस कदम को सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ विपक्ष के सबसे आक्रामक प्रदर्शनों में से एक के तौर पर देखा जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_3">हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक धरने के समय तक FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:43:56 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Has Rahul Gandhi finally resigned as Congress president? Protest outside Delhi Police HQ over pellet case</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली की हवा पर सख्ती: 2,011 औद्योगिक इकाइयों की जांच, 106 नियमों के उल्लंघन में मिलीं; सरकार का संदेश—‘प्रदूषण पर अब कोई नरमी नहीं’</title>
        <link>https://delhilookout.com/Delhis-air-pollution:-Investigation-of-2,011-industrial-units,-106-found-in-violation-of-rules-Governments-message---No-more-leniency-on-pollution</link>
        <guid>https://delhilookout.com/Delhis-air-pollution:-Investigation-of-2,011-industrial-units,-106-found-in-violation-of-rules-Governments-message---No-more-leniency-on-pollution</guid>
        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_0">दिल्ली की जहरीली होती हवा को लेकर आम आदमी की चिंता के बीच राजधानी की सरकार ने औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती का दावा किया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_1">मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार का कहना है कि स्वच्छ हवा को लेकर कार्रवाई अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर सीधे शिकंजा कसा जाएगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_2">जनवरी से जुलाई 2026 के बीच सरकार ने 2,011 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया, जिनमें 106 इकाइयां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करती नहीं मिलीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_0">सबसे गंभीर बात यह रही कि 78 औद्योगिक इकाइयां दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी DPCC की वैध Consent to Operate (CTO) के बिना संचालित पाई गईं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_1">सरकार के मुताबिक ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_2">44 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया, जबकि 33 गैर-अनुपालन वाली इकाइयों के खिलाफ क्लोजर ऑर्डर जारी किए गए हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_0">कार्रवाई से आगे राजनीतिक संदेश भी साफ</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_0">दिल्ली में प्रदूषण लंबे समय से सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी बड़ा विषय रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_1">हर साल सर्दियों में खराब होती वायु गुणवत्ता के साथ सरकारों पर सवाल उठते रहे हैं कि प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_2">ऐसे में औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई के आंकड़े सामने रखकर दिल्ली सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसकी रणनीति केवल प्रदूषण पर बयानबाजी तक सीमित नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_0">मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को सरकार सहयोग देगी, लेकिन नियम तोड़कर दिल्ली की हवा को नुकसान पहुंचाने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_1">सरकार के इस रुख में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक संदेश भी दिखाई देता है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_2">प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने रखने के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_0">सवाल सिर्फ फैक्ट्रियों का नहीं, पूरी दिल्ली की हवा का है</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_0">हालांकि दिल्ली का प्रदूषण केवल औद्योगिक इकाइयों से पैदा नहीं होता। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_1">सड़क की धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण और तोड़फोड़, खुले में कचरा जलाना तथा अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियां भी राजधानी की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_2">इसलिए सरकार का अभियान औद्योगिक प्रदूषण से आगे बढ़ाकर इन सभी स्रोतों पर कार्रवाई की बात कर रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_0">यही इस अभियान की सबसे बड़ी सामाजिक चुनौती भी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_1">दिल्ली के आम नागरिक के लिए प्रदूषण किसी राजनीतिक दल की जीत या हार का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, स्वास्थ्य और शहर में रहने की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_2">इसलिए सरकार की वास्तविक परीक्षा इस बात से होगी कि निरीक्षण और जुर्माने के आंकड़े जमीन पर साफ हवा में कितना बदलाव ला पाते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_0">जनता को भी बनाया जा रहा है निगरानी का हिस्सा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_0">सरकार ने नागरिकों से भी प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की सूचना देने की अपील की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_1">औद्योगिक प्रदूषण, खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने, धूल फैलाने, अवैध रूप से कचरा डालने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की शिकायत ग्रीन दिल्ली ऐप या MCD 311 ऐप के जरिए की जा सकती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_11_0">यह पहल सामाजिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली जैसे विशाल महानगर में केवल सरकारी निरीक्षण तंत्र के भरोसे हर प्रदूषणकारी गतिविधि पर नजर रखना आसान नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_11_1">अगर शिकायत व्यवस्था प्रभावी और जवाबदेह रहती है, तो नागरिक सीधे निगरानी तंत्र का हिस्सा बन सकते हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_0">असली कसौटी: </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_1">आंकड़ों से आगे दिखे बदलाव</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_0">दिल्ली सरकार ने निरीक्षण व्यवस्था, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और नागरिकों की भागीदारी मजबूत करने की बात कही है। </span><span data-hovered="true" data-sentence="b60c324589292916_13_1">लेकिन राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस अभियान की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि कितनी इकाइयों पर जुर्माना लगा या कितने क्लोजर ऑर्डर जारी हुए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">असली सवाल यह रहेगा कि क्या इन कार्रवाइयों के बाद प्रदूषण के स्तर में स्थायी कमी आती है? </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_1">क्या नियम तोड़ने वाले उद्योगों पर लगातार निगरानी रहती है? </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_2">क्या छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक नियमों का समान रूप से पालन कराया जाता है? </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_3">और क्या आम दिल्लीवासी आने वाले महीनों में अपनी हवा में वास्तविक सुधार महसूस कर पाएगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_0">फिलहाल सरकार का संदेश स्पष्ट है—दिल्ली की हवा से खिलवाड़ करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_1">लेकिन इस सख्ती को राजनीतिक दावे से आगे एक स्थायी पर्यावरणीय नीति में बदलना ही सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_2">क्योंकि दिल्ली की जनता अब सिर्फ कार्रवाई की खबर नहीं, सांस लेने लायक हवा का ठोस नतीजा चाहती है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:33:37 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Delhi&#039;s air pollution: Investigation of 2, 011 industrial units, 106 found in violation of rules; Government&#039;s message - &#039;No more leniency on pollution&#039;</media:keywords>
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    <item>
        <title>विवादों से कंगना का पुराना नाता! ‘वंदे मातरम’ पर फिर गरजीं, शर्मिला टैगोर की राय से जताई खुली असहमति</title>
        <link>https://delhilookout.com/Kanganas-old-relationship-with-controversies-Sharmila-Tagore-on-Vande-Mataram</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_1_1">‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी सियासी और सामाजिक बहस अब बॉलीवुड तक पहुंच गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_1_2">दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुलकर अपनी असहमति जाहिर की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_1_3">कंगना ने शर्मिला टैगोर के अपने विचार रखने के अधिकार का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही उनकी कविता की व्याख्या को मानने से इनकार कर दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_2_0">कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो साझा करते हुए कहा कि कविता और गीतों को केवल उनके शब्दों के शाब्दिक अर्थ से नहीं समझा जाना चाहिए। </span><span data-hovered="true" data-sentence="650ee34ae69d760d_2_1">उनके मुताबिक, साहित्य में प्रतीकों और रूपकों के जरिए गहरे भाव व्यक्त किए जाते हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_2_2">उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और देश की शक्ति को जगाने वाली रचना के तौर पर देखने की बात कही।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_3_0">‘वंदे मातरम’ पर कंगना की अलग दलील, फिर सुर्खियों में बयान</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_4_0">कंगना ने शक्ति के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान के नजरिए से देखना उचित नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_4_1">उन्होंने लोगों से ‘हिंदू-मुस्लिम मानसिकता’ से ऊपर उठकर इस रचना के व्यापक राष्ट्रीय भाव को समझने की अपील की।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_5_0">हालांकि, कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पहले ही तेज है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_5_1">बीजेपी ने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े कांग्रेस मुख्यालय के एक वीडियो को लेकर कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान का आरोप लगाया है और सार्वजनिक माफी की मांग की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_6_0">हर संवेदनशील मुद्दे पर कंगना की एंट्री, फिर क्यों छिड़ती है बहस?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_7_0">कंगना रनौत का नाम विवादित और संवेदनशील मुद्दों पर मुखर बयान देने वाले फिल्मी चेहरों में लगातार सामने आता रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_7_1">यही वजह है कि उनका कोई भी राजनीतिक या सामाजिक बयान अक्सर चर्चा और तीखी प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन जाता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_7_2">‘वंदे मातरम’ पर उनका ताजा बयान भी इसी सिलसिले की नई कड़ी बन गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_8_0">एक तरफ कंगना अपनी बात को राष्ट्रवाद और साहित्यिक प्रतीकों की व्याख्या के रूप में रख रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आलोचक सवाल उठा सकते हैं कि क्या हर संवेदनशील मुद्दे पर इतनी मुखर राजनीतिक प्रतिक्रिया बहस को और ज्यादा गरम नहीं कर देती?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="650ee34ae69d760d_9_0">फिलहाल ‘वंदे मातरम’ पर जारी विवाद में कंगना की एंट्री ने बहस को एक बार फिर बॉलीवुड, राजनीति और राष्ट्रवाद के चौराहे पर ला खड़ा किया है।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:20:56 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Kangana&#039;s old relationship with controversies! Sharmila Tagore on &#039;Vande Mataram&#039;</media:keywords>
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    <item>
        <title>चीनी महंगी, किसान बेहाल: E20 की मिठास में किसका फायदा, किसका नुकसान?</title>
        <link>https://delhilookout.com/Sugar-is-expensive,-farmers-are-suffering.-In-the-sweetness-of-E20,-whose-benefit,-whose-harm</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_0">भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_1">लेकिन अगस्त 2026 में देश के आम आदमी के लिए चीनी की मिठास कड़वाहट में बदलती दिखाई दे रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_2">पिछले दो महीनों में कीमतों में करीब 40 फीसदी तक उछाल आया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_3">18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 52.30 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यही कीमत 46.34 रुपये थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_1_4">कई शहरों में भाव 65 रुपये किलो तक पहुंच चुका है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_0">सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चीनी महंगी क्यों हो गई? </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_2_1">असली सवाल यह है कि जब चीनी के दाम बढ़ रहे हैं तो गन्ना किसान की जेब क्यों खाली है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_0">E20: </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_3_1">पेट्रोल में मिठास, चीनी बाजार में कड़वाहट?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_0">सरकार की E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का लक्ष्य पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाना है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_1">इसके लिए देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाई गई है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_4_2">गन्ना भी इथेनॉल उत्पादन का एक महत्वपूर्ण फीडस्टॉक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_5_0">यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_0">अगर गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की जगह इथेनॉल बनाने में जा रहा है, तो बाजार में चीनी की उपलब्धता घटेगी ही। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_6_1">कांग्रेस नेता जयराम रमेश का दावा है कि करीब 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने को इथेनॉल की ओर डायवर्ट किया गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_7_0">सरकार के सामने अब सीधा सवाल है—क्या पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल का लक्ष्य हासिल करने की कीमत देश का उपभोक्ता महंगी चीनी खरीदकर चुकाएगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_0">बारिश कम, स्टॉक कम और मांग ज्यादा—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_8_1">संकट की तिकड़ी</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_0">कमजोर मानसून ने स्थिति और बिगाड़ दी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_1">जून के अंत में बारिश की कमी 40 फीसदी से ज्यादा थी और कुल मानसून सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बताया जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_9_2">गन्ने की पैदावार पर इसका असर पड़ने की आशंका है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_0">दूसरी तरफ चीनी का शुरुआती स्टॉक भी लगातार दबाव में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_1">2026-27 सीजन की शुरुआत में स्टॉक 40-42 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि कुछ अनुमानों में यह 32-35 लाख टन तक बताया जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_10_2">देश की सालाना जरूरत करीब 50 लाख टन है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_11_0">और सामने है त्योहारों का मौसम—गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_12_0">यानी उत्पादन पर दबाव, स्टॉक कम और मांग बढ़ती हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_13_0">ऐसे में कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_14_0">निर्यात बंद किया, फिर भी चीनी सस्ती क्यों नहीं हुई?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_0">सरकार ने सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_1">डीलरों के स्टॉक पर भी सीमा लगाई गई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_15_2">कालाबाजारी और सट्टेबाजी रोकने के लिए मिलों से बिक्री का ब्योरा भी मांगा गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_16_0">लेकिन इसके बावजूद कीमतें ऊपर चली गईं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_0">यही वह बिंदु है जहां सरकार की नीति पर सबसे बड़ा सवाल उठता है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_17_1">अगर निर्यात रोकने और स्टॉक लिमिट लगाने के बावजूद बाजार में राहत नहीं आई, तो समस्या सिर्फ जमाखोरी की है या उत्पादन और आपूर्ति की पूरी नीति में ही कहीं गड़बड़ी है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_18_0">अब सरकार ने 10 लाख टन आयात का रास्ता खोला</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_19_0">20 अगस्त को सरकार ने करीब एक दशक बाद 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_19_1">आयात 31 अक्टूबर तक शुल्क-मुक्त रहेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_0">यह कदम बाजार में आपूर्ति बढ़ा सकता है और कीमतों पर कुछ दबाव कम कर सकता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_20_1">लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_0">क्योंकि आयातित चीनी को बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_1">त्योहारों के दौरान मांग पहले ही बढ़ रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_21_2">और 31 अक्टूबर के बाद फिर वही सवाल सामने होगा—देश में पर्याप्त चीनी है या नहीं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_22_0">यानी सरकार फिलहाल आग बुझाने के लिए पानी डाल रही है, लेकिन आग लगने की वजहों पर कितनी गंभीरता से काम हो रहा है, यह बड़ा सवाल है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_23_0">सबसे बड़ा विरोधाभास: </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_23_1">चीनी महंगी, किसान फिर भी गरीब</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_24_0">इस पूरे संकट का सबसे चौंकाने वाला पहलू किसान है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_25_0">चीनी महंगी हो रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_25_1">मिलों का कारोबार बढ़ रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_25_2">इथेनॉल अर्थव्यवस्था का विस्तार हो रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_26_0">लेकिन गन्ना किसान?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_27_0">16 फरवरी 2026 तक देशभर में गन्ना किसानों का करीब 16,087 करोड़ रुपये बकाया बताया गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_27_1">महाराष्ट्र में लगभग 4,898 करोड़ रुपये का बकाया, उत्तर प्रदेश में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान अटका होने और कर्नाटक के बेलगावी में 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाये जैसे आंकड़े सामने आ रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_28_0">कानून किसानों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान का अधिकार देता है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_28_1">फिर सवाल है—</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_29_0">जब उपभोक्ता महंगा खरीद रहा है और बाजार में चीनी महंगी बिक रही है, तो किसान को उसका पैसा समय पर क्यों नहीं मिल रहा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_30_0">यह सिर्फ चीनी का संकट नहीं, नीति के संतुलन का संकट है</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_31_0">E20 नीति का उद्देश्य ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाना, इथेनॉल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और किसानों के लिए वैकल्पिक बाजार पैदा करना है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_31_1">यह उद्देश्य अपने आप में महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_32_0">लेकिन किसी भी नीति की सफलता सिर्फ उसके लक्ष्य से नहीं, उसके परिणाम से तय होती है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_33_0">अगर गन्ना इथेनॉल की ओर डायवर्ट हो रहा है, चीनी का स्टॉक घट रहा है, उपभोक्ता महंगी चीनी खरीद रहा है और किसान फिर भी भुगतान के लिए आंदोलन कर रहा है, तो सरकार को आंकड़ों से आगे जाकर पूरी व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_34_0">सवाल E20 के खिलाफ या पक्ष में होने का नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_34_1">सवाल यह है कि E20 के साथ खाद्य सुरक्षा, चीनी की कीमत और किसान भुगतान का संतुलन कैसे बनाया जाए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_35_0">सरकार को अब तीन सवालों का जवाब देना होगा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_36_0">पहला— </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_36_1">क्या इथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन की सीमा तय करते समय घरेलू चीनी मांग और त्योहारों की अतिरिक्त मांग का सही अनुमान लगाया गया था?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_37_0">दूसरा— </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_37_1">जब चीनी की खुदरा कीमत बढ़ रही है, तब गन्ना किसान को उसका बकाया समय पर दिलाने के लिए सरकार की जवाबदेही कहां तय होगी?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_38_0">तीसरा— </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_38_1">क्या सरकार का समाधान हर बार आयात, स्टॉक लिमिट और निर्यात प्रतिबंध तक ही सीमित रहेगा, या चीनी उद्योग की वित्तीय संरचना और किसान भुगतान व्यवस्था में भी स्थायी सुधार होगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_39_0">सबसे कड़वा सच</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_40_0">आज देश में एक अजीब तस्वीर दिखाई दे रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_41_0">चीनी की कीमत बढ़ रही है, लेकिन किसान की आमदनी नहीं।</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_41_1">इथेनॉल का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन गन्ने का बकाया खत्म नहीं हो रहा।</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_41_2">उपभोक्ता महंगा खरीद रहा है, लेकिन किसान अपने पैसे के लिए आंदोलन कर रहा है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_42_0">अगर यही स्थिति बनी रही तो यह सिर्फ चीनी की कीमतों का संकट नहीं रहेगा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_42_1">यह सवाल बन जाएगा कि किसान, उपभोक्ता और सरकार की नीतियों के बीच फायदा आखिर किसके हिस्से में जा रहा है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_43_0">सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात का फैसला करके तत्काल राहत की कोशिश जरूर की है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_43_1">लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि अक्टूबर के नए चीनी सीजन में वह ऐसा संतुलन कैसे बनाती है, जिसमें पेट्रोल में E20 भी पहुंचे, बाजार में चीनी भी पर्याप्त रहे, उपभोक्ता को राहत मिले और गन्ना किसान को उसका पैसा भी समय पर मिले।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_44_0">क्योंकि देश को ऐसी नीति नहीं चाहिए जिसमें पेट्रोल में इथेनॉल की मिठास बढ़े और रसोई में चीनी की कड़वाहट।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="b60c324589292916_45_0">अब सरकार को तय करना होगा—नीति का फायदा आंकड़ों में दिखेगा या किसान और आम आदमी की जेब में भी?</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:19:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Sugar is expensive, farmers are suffering. In the sweetness of E20, whose benefit, whose harm?</media:keywords>
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        <title>PM CARES Fund: दो साल बाद ऑडिट रिपोर्ट जारी, 8,452 करोड़ रुपये पर उठे बड़े सवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-PM-CARES-Fund:-Audit-report-released-after-two-years,-questions-raised-on-Rs-8,452-crore</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_1">दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_2">रिपोर्ट के मुताबिक फंड में फिलहाल 8,452.06 करोड़ रुपये जमा हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_3">इनमें 7,846.6 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में और करीब 605.4 करोड़ रुपये सेविंग अकाउंट में रखे गए हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_0">कोरोना महामारी के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए इस फंड को लेकर शुरुआत से ही पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_1">अब ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतने बड़े फंड की पूरी जानकारी सार्वजनिक होने में दो साल क्यों लगे?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_0">8,452 करोड़ रुपये की रकम, लेकिन हिसाब-किताब पर सवाल क्यों?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_0">PM CARES Fund की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और केंद्रीय मंत्री इसके ट्रस्टी के तौर पर जुड़े हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_1">ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस फंड की संरचना में देश के शीर्ष संवैधानिक पदों से जुड़े लोग शामिल हैं, उसकी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर इतनी लंबी चुप्पी क्यों रही?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_0">अगर फंड पूरी तरह जनहित और आपदा राहत के लिए बनाया गया था, तो इसके संचालन, खर्च और निवेश की जानकारी सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों हुई?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_0">सरकारी फंड नहीं, तो फिर जनता के सवालों का जवाब कौन देगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_0">सबसे बड़ा विवाद इसी बिंदु पर है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_1">सरकार का रुख रहा है कि PM CARES Fund एक सरकारी फंड नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_2">इसी आधार पर इसे RTI के दायरे से बाहर माना गया है और संसद में भी इसके लेनदेन से जुड़े सवालों पर सीमित जानकारी उपलब्ध कराई जाती रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_0">लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_1">अगर प्रधानमंत्री इस फंड के अध्यक्ष हैं, केंद्रीय मंत्री इसके सदस्य हैं और फंड का गठन राष्ट्रीय आपदा जैसी परिस्थिति से निपटने के लिए किया गया था, तो फिर इसे सार्वजनिक जवाबदेही से दूर रखने का आधार क्या है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_0">क्या केवल यह कह देना पर्याप्त है कि फंड सरकारी नहीं है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_0">दो साल की देरी पर भी सवाल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_0">ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में हुई देरी भी सवालों के घेरे में है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_1">आखिर रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे सार्वजनिक करने में इतना लंबा समय क्यों लगा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_0">क्या जनता को अपने ही नाम पर जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये की जानकारी मांगने के लिए दो साल इंतजार करना चाहिए?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_0">PM CARES Fund में देश-विदेश से बड़े पैमाने पर योगदान आया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_1">ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि कितना पैसा आया, कितना खर्च हुआ, कहां खर्च हुआ और अभी कितनी रकम किस रूप में मौजूद है?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_0">अब सरकार से सीधे सवाल</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_0">PM CARES Fund की पूरी वित्तीय जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_1">ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने में दो साल की देरी क्यों हुई?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_2">8,452.06 करोड़ रुपये में से अब तक कितनी राशि और किन मदों में खर्च की गई?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_3">फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी 7,846.6 करोड़ रुपये की रकम से कितना ब्याज अर्जित हुआ?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_4">इस फंड में आने वाले प्रत्येक बड़े योगदान और उसके उपयोग की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होनी चाहिए?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_5">जब प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री इसके शीर्ष स्तर पर मौजूद हैं, तो इसे RTI और संसदीय सवालों से बाहर रखने का तर्क क्या है?</span><br><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_6">क्या PM CARES Fund को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कोई नया नियम लाएगी?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_0">PM CARES Fund को लेकर बहस सिर्फ 8,452 करोड़ रुपये की रकम की नहीं है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_1">असली सवाल है पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे का।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_0">जब पैसा जनता की मदद के नाम पर जुटाया गया, तो जनता को उसके हर बड़े खर्च और हर बड़े फैसले की जानकारी क्यों नहीं मिलनी चाहिए?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_17_0">Delhi Lookout का सीधा सवाल है—</span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_17_1">PM CARES Fund का पूरा हिसाब जनता के सामने कब आएगा?</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 18:19:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The PM CARES Fund: Audit report released after two years, questions raised on Rs 8, 452 crore</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>वंदे मातरम विवाद पर पवन खेड़ा का अमित शाह पर तीखा हमला, बोले&amp; क्या शाह गांधी, पटेल और अंबेडकर से भी बड़े हो गए?</title>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_1">वंदे मातरम को लेकर देश में जारी सियासी बहस अब और तीखी होती जा रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_2">कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर जोरदार हमला बोलते हुए 1937 में वंदे मातरम को लेकर पारित प्रस्ताव का हवाला दिया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_3">खेड़ा ने सवाल उठाया कि जिस प्रस्ताव में सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेता शामिल थे, आज अमित शाह उसकी आलोचना कैसे कर सकते हैं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_0">पवन खेड़ा ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर 1937 में पारित प्रस्ताव ही वह ऐतिहासिक प्रस्ताव था, जिसके आधार पर आगे की व्यवस्था बनी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_1">उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद लिया गया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_2">ऐसे में उन्होंने अमित शाह पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब वे सरदार पटेल, गांधी, नेहरू और टैगोर से भी बड़े हो गए हैं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_0">'क्या अमित शाह संविधान सभा से भी बड़े हो गए?</span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_1">'</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_0">खेड़ा ने कहा कि संविधान सभा में भी वंदे मातरम के दो अंतरों को गाए जाने को लेकर निर्णय हुआ था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_1">उन्होंने सवाल किया कि क्या अमित शाह अब संविधान सभा के फैसले से भी ऊपर हो गए हैं?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_0">कांग्रेस नेता ने तीखे अंदाज में कहा कि देश को यह तय करना होगा कि वह अमित शाह की बात माने या सरदार पटेल की, गांधी की माने या संविधान सभा की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_1">उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, "आखिर ये अपने आपको क्या समझते हैं? </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_2">खुदा समझते हैं, भगवान समझते हैं? </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_3">हैं कौन ये?</span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_4">"</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_0">'20 दिन बाद संसद में प्रकट हुए'</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_0">पवन खेड़ा ने अपने हमले को यहीं नहीं रोका। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_1">उन्होंने संसद से अमित शाह की कथित गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_2">खेड़ा ने आरोप लगाया कि अमित शाह करीब 20 दिनों तक संसद से दूर रहे और अब अचानक वंदे मातरम के मुद्दे पर सामने आए हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_0">उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को उन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए जो सीधे उनकी जिम्मेदारी से जुड़े हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_1">खेड़ा ने फायरिंग और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि नौजवानों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और लड़कियों पर लाठीचार्ज किसके आदेश पर हुआ?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_0">'पहले अपना काम करके दिखाइए'</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_0">कांग्रेस सांसद ने अमित शाह को घेरते हुए कहा कि देश ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, पहले उन्हें उस जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_1">उन्होंने आरोप लगाया कि अपने काम से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय अमित शाह महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे ऐतिहासिक नेताओं के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_0">वंदे मातरम को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक बहस अब केवल राष्ट्रगीत से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक टकराव का नया मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_1">पवन खेड़ा के तीखे बयान के बाद इस विवाद के और गरमाने के आसार हैं।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:51:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Is Amit Shah bigger than Gandhi, Patel and Ambedkar?</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली की सियासत के चर्चित चेहरे का अंत: 1984 दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन</title>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_0">नई दिल्ली: </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_1">1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_2">तिहाड़ जेल में बंद सज्जन कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_0">तीन बार लोकसभा सांसद रहे सज्जन कुमार कभी दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_1">बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से राजनीति करने वाले कुमार की पहचान खास तौर पर जाट समुदाय के एक मजबूत नेता के तौर पर बनी थी। </span><span data-hovered="true" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_2">हालांकि, 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों ने उनके राजनीतिक जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_0">1984 के दंगों ने बदल दी राजनीतिक तस्वीर</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_0">31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_1">अगले कई दिनों तक सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_2">घरों, दुकानों और गुरुद्वारों में आगजनी की गई और बड़ी संख्या में लोगों की हत्या हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_0">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अकेले दिल्ली में करीब 3,000 लोगों की जान गई थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_1">हालांकि, पीड़ित परिवारों और विभिन्न संगठनों की ओर से मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक होने का दावा किया जाता रहा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_0">तीन दशक बाद फिर खुली जांच की फाइल</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_0">दंगों के बाद सज्जन कुमार पर हिंसा भड़काने और भीड़ को उकसाने के आरोप लगे, लेकिन लंबे समय तक उनके खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_1">कई जांच आयोगों और पैनलों की रिपोर्टों में भी उनका नाम प्रमुख आरोपी के तौर पर सामने नहीं आया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_0">करीब तीन दशक बाद 2015 में केंद्र सरकार ने 1984 के दंगों से जुड़े बंद मामलों की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_1">इसके बाद पुराने मामलों की फाइलें फिर खुलीं और सज्जन कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हुई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_0">2018 में मिली पहली बड़ी सजा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_0">सज्जन कुमार के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 17 दिसंबर 2018 को आया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_1">दिल्ली हाई कोर्ट ने पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगजनी के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_0">सजा के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_1">इसके बाद उनका राजनीतिक करियर लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_0">2025 में एक और मामले में उम्रकैद</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_0">मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_1">फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के दंगों के दौरान दो सिखों की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में भी सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_0">उन्हें अप्रैल 2022 में दंगों से जुड़े एक मामले में जमानत मिली थी, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_1">इस तरह वह करीब सात वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_0">पत्नी से मिलने की भी नहीं मिली थी जमानत</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_0">इस वर्ष अप्रैल में सज्जन कुमार ने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_1">हालांकि, अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_17_0">अब 80 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ दिल्ली की राजनीति के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया है, जिसकी शुरुआत सत्ता और प्रभाव से हुई थी, लेकिन जिसका सबसे गहरा संबंध देश के सबसे दर्दनाक साम्प्रदायिक हिंसा के अध्यायों में से एक से जुड़ गया।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:44:01 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The face of Delhi politics 1984 riots convict Sajjan Kumar passes away</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>लखनऊ में रिश्तों का खूनी अंत: पत्नी को ऑफिस के बाहर मारी गोली, घर लौटकर बहन की हत्या… फिर खुद भी किया सुसाइड</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-bloody-end-of-relationships-in-Lucknow-He-shot-his-wife-outside-her-office-and-then-killed-himself.</link>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_0">लखनऊ: </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_1">उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर में गुरुवार को एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_2">मानस बाजपेयी नाम के एक शख्स ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा की ऑफिस के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_3">इसके बाद वह अपने घर पहुंचा, जहां उसने अपनी 28 वर्षीय बहन तूलिका उर्फ शिबा को गोली मार दी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_4">आखिर में मानस ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_0">बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम करीब आधे घंटे के भीतर हुआ। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_1">पुलिस अब इस खौफनाक वारदात के पीछे की वजहों की जांच कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_0">ऑफिस के बाहर पत्नी को मारी गोली</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_0">जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजे मानस अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा को गोमती नगर स्थित उनके ऑफिस के बाहर मिलने के लिए बुलाने पहुंचा था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_1">दिव्या ICICI बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_0">दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_1">इसके बाद मानस ने कथित तौर पर पिस्टल निकालकर दिव्या को गोली मार दी और मौके से फरार हो गया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_0">गोली चलने की आवाज सुनकर बैंक के कर्मचारी और आसपास मौजूद लोग बाहर आए। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_1">गंभीर हालत में दिव्या को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_0">दो पिस्टल लेकर आया था मानस?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_0">एक चश्मदीद के मुताबिक, मानस के हाथ में दो पिस्टल थीं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_1">उसने बातचीत के दौरान अचानक दोनों हथियार निकालकर गोली चला दी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_2">गोली चलने के बाद बैंक के कर्मचारी बाहर आने लगे तो उसने उनकी तरफ भी पिस्टल तान दी, जिसके बाद कर्मचारी डरकर वापस बैंक के अंदर चले गए।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_0">एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मानस ऑटो से वहां पहुंचा था और वारदात को अंजाम देने के बाद उसी ऑटो से फरार हो गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_1">बताया गया कि ऑटो के पीछे नंबर प्लेट भी नहीं थी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_0">पत्नी की हत्या के बाद घर पहुंचा</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_0">दिव्या की हत्या के बाद मानस हुसड़िया चौराहे के पास स्थित अपने किराये के मकान पर पहुंचा। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_1">स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह करीब 12:30 बजे घर पहुंचा और उस समय काफी घबराया हुआ और पसीने से भीगा था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_0">फास्ट फूड की दुकान चलाने वाले लवकुश ने बताया कि मानस घर के अंदर गया और कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_1">कुछ देर बाद कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_0">जब पुलिस मौके पर पहुंची तो अंदर मानस और उसकी बहन तूलिका उर्फ शिबा के शव मिले।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_0">WhatsApp स्टेटस में पत्नी पर लगाया धोखे का आरोप</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_0">इस वारदात के पीछे पति-पत्नी के बीच चल रहे कथित विवाद को वजह माना जा रहा है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_1">पत्नी की हत्या के बाद मानस ने WhatsApp पर एक स्टेटस भी लगाया था, जिसमें उसने हत्या की बात कबूल करने के साथ पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_0">उसके स्टेटस में कथित तौर पर लिखा था कि उसने अपनी पत्नी को इसलिए मारा क्योंकि उसने उसके साथ धोखा किया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_1">उसने आगे खुद और अपनी बहन को भी मारने की बात लिखी थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_16_2">साथ ही कुछ अन्य लोगों के इस मामले की जानकारी होने का भी जिक्र किया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_17_0">पुलिस अब इस WhatsApp स्टेटस और उसमें लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_18_0">12 साल की शादी, एक साल पहले तलाक की अर्जी</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_19_0">जानकारी के मुताबिक, मानस और दिव्या की शादी करीब 12 साल पहले हुई थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_19_1">दोनों की कोई संतान नहीं थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_19_2">बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनके रिश्तों में तनाव चल रहा था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_20_0">दिव्या ने करीब एक साल पहले पति मानस से तलाक के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_20_1">इसके बाद वह अलग रह रही थीं और आलमबाग में रहती थीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_21_0">बहन की हत्या क्यों की?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_22_0">सबसे बड़ा सवाल यह है कि पत्नी की हत्या के बाद मानस ने अपनी ही बहन को क्यों मार डाला?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_23_0">बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय तूलिका उर्फ शिबा मानसिक रूप से कमजोर थीं और उनकी देखभाल मानस करता था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_23_1">पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, पत्नी की हत्या के बाद मानस ने कथित तौर पर यह सोचकर अपनी बहन की भी हत्या कर दी कि उसके बाद उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहेगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_24_0">हालांकि, बहन की हत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_25_0">दोनों बैंक में करते थे नौकरी</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_26_0">इस पूरे मामले का एक और पहलू यह है कि मानस और दिव्या दोनों बैंकिंग सेक्टर से जुड़े हुए थे। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_26_1">दिव्या ICICI बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर थीं, जबकि मानस SBI में कार्यरत था।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_27_0">दिव्या सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर प्रज्ञा मिश्रा की बहन भी थीं।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_28_0">पुलिस जांच में सामने आएंगे कई सवालों के जवाब</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_29_0">एक ही दिन में पत्नी, बहन और खुद की मौत से जुड़े इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_29_1">मानस ने पत्नी की हत्या क्यों की? </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_29_2">WhatsApp स्टेटस में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है? </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_29_3">बहन को निशाना बनाने की वास्तविक वजह क्या थी? </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_29_4">और वारदात में इस्तेमाल हथियार उसके पास कहां से आए?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_30_0">पुलिस अब घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, WhatsApp स्टेटस और पारिवारिक विवाद से जुड़े तथ्यों को जोड़कर पूरे मामले की जांच कर रही है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_31_0">गोमती नगर की इस खौफनाक वारदात ने एक बार फिर दिखा दिया कि घरेलू और वैवाहिक विवाद किस तरह बेहद खतरनाक मोड़ ले सकते हैं।</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:38:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The bloody end of relationships in Lucknow He shot his wife outside her office and then killed himself.</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल जनसेवा के: देशभर में BJP का मेगा अभियान, 7 अक्टूबर को होगा शक्ति प्रदर्शन</title>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी देशभर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में जुट गई है। इसी सिलसिले में शनिवार को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन सभी प्रदेश अध्यक्षों, संगठन महामंत्रियों, प्रभारियों और सह-प्रभारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा करेंगे।</p>
<p>7 अक्टूबर से देशभर में दिखेगा ‘25 साल जनसेवा’ का असर</p>
<p>7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इसके बाद से वह लगातार सार्वजनिक पद पर रहे हैं—करीब 13 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री और अब 12 वर्ष से अधिक समय से प्रधानमंत्री के रूप में देश की राजनीति के केंद्र में हैं।</p>
<p>बीजेपी अब इस लंबे सार्वजनिक जीवन को देशभर में बड़े जनसंपर्क अभियान के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। 10 जून को एनडीए की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 7 अक्टूबर के अवसर पर देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही थी।</p>
<p>‘सेवा संकल्प महोत्सव’ से लेकर सेवा पखवाड़े तक</p>
<p>बीजेपी इस दौरान 2 अक्टूबर तक ‘सेवा पखवाड़ा’ भी चलाएगी। साथ ही पार्टी ‘सेवा संकल्प महोत्सव’ के तहत 15 दिनों तक देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है।</p>
<p>अभियान की राष्ट्रीय कमान बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े को सौंपी गई है। प्रत्येक राज्य में सात सदस्यीय टीम अभियान को आगे बढ़ाएगी, जिसमें प्रदेश सरकार का एक मंत्री, संगठन का एक महामंत्री और पांच अन्य नेता शामिल होंगे।</p>
<p>स्वच्छता से स्वास्थ्य तक, गांव-गांव पहुंचेगा अभियान</p>
<p>अभियान के दौरान स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण और स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ‘नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष’ थीम पर डिजिटल और फोटो प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।</p>
<p>इसके साथ ही सुशासन, विकास और अंत्योदय को केंद्र में रखते हुए प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन होंगे। युवाओं और समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>पार्टी केंद्र और राज्य सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर भी लगाएगी।</p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_0">यानी मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को बीजेपी केवल जश्न तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे सेवा, जनसंपर्क और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में पेश करने की तैयारी में है। </span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:28:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>25 years of public service: BJP&#039;s mega campaign across the country, a show of strength on October 7</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>JPSC अभ्यर्थियों को बड़ी राहत: 22 परीक्षाएं रद्द करने के सरकारी फैसले पर हाईकोर्ट की रोक</title>
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        <description><![CDATA[ <p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_0">रांची। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_1">झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_2">सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत JPSC और एक बाहरी एजेंसी द्वारा आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_1_3">साथ ही 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए गए थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_0">राज्य सरकार ने मंगलवार, 18 अगस्त, को अधिसूचना जारी कर इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_1">सरकार के इस निर्णय के बाद चयनित अभ्यर्थियों और नौकरी कर रहे उम्मीदवारों के बीच भारी असंतोष देखने को मिला। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_2_2">कई अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग कर रहे थे।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_0">‘मेरी नौकरी हुई है, बिना जांच कैसे छीन ली?</span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_3_1">’</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_0">सरकार के फैसले से प्रभावित एक सफल अभ्यर्थी ने कहा कि बिना किसी ठोस जांच और व्यक्तिगत स्तर पर आरोप साबित किए नौकरी छीन लेना उनके साथ अन्याय है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_4_1">अभ्यर्थी का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार की भूमिका संदिग्ध है तो उसके खिलाफ प्रमाण के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_0">अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट में स्थान हासिल किया और चयन के बाद नियुक्ति प्राप्त की। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_1">बड़ी संख्या में चयनित उम्मीदवार सरकारी सेवा में योगदान भी दे चुके हैं। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_5_2">ऐसे में अचानक नियुक्तियां रद्द किए जाने से उनके भविष्य और रोजगार पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_6_0">याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में क्या कहा?</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_0">हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को एकतरफा बताया है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_7_1">उनका तर्क है कि सरकार ने परीक्षा और नियुक्ति रद्द करने से पहले प्रभावित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_0">याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में किसी विशेष अभ्यर्थी, अधिकारी या प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_8_1">लेकिन बिना जांच पूरी किए सभी सफल अभ्यर्थियों की परीक्षा और नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_9_0">प्रदीप यादव बोले—‘कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे’</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_0">झारखंड CLP नेता प्रदीप यादव ने हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार भी अदालत के फैसले का सम्मान करेगी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_10_1">उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही एक-एक करके पूरी स्थिति सामने आएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_0">उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया सरकार को परीक्षाओं में कुछ गड़बड़ियों की आशंका लगी होगी, जिसके आधार पर परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया गया। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_11_1">हालांकि, उन्होंने उन अभ्यर्थियों के प्रति भी सहानुभूति जताई जिन्होंने मेहनत और अपने परिवार की आर्थिक क्षमता के अनुसार खर्च कर नौकरी हासिल की है।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_12_0">अब आगे क्या?</span></p>
<p><span data-hovered="true" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_0">हाईकोर्ट की रोक के बाद उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी परीक्षा या नियुक्ति सरकार के आदेश से प्रभावित हुई थी। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_13_1">अब मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया में यह तय होना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच किस तरीके से होगी और यदि गड़बड़ी मिलती है तो उसकी जिम्मेदारी किन लोगों पर तय की जाएगी।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_0">फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने JPSC अभ्यर्थियों की नौकरी और नियुक्तियों को लेकर पैदा हुए संकट पर तत्काल राहत की स्थिति पैदा कर दी है। </span><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_14_1">वहीं सरकार के लिए भी अब परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और आगे की कार्रवाई को कानूनी कसौटी पर स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।</span></p>
<p><span data-hovered="false" data-sentence="7f4fb17b53b368c9_15_0">Delhi Lookout | झारखंड से बड़ी खबर</span></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:23:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Good news for JPSC candidates! HC stays govt decision to cancel 22 exams</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जंतर&amp;मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी पुलिस कार्रवाई की जांच</title>
        <link>https://delhilookout.com/Supreme-Court-orders-5-member-committee-to-probe-police-action-at-Jantar-Mantar</link>
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        <description><![CDATA[ <p class="isSelectedEnd"><strong><span>नई दिल्ली | दिल्ली लुकआउट</span></strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए </span><strong><span>5 सदस्यीय हाई-पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी</span></strong><span> गठित की है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने कहीं जरूरत से ज्यादा बल तो नहीं इस्तेमाल किया।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>कमेटी की अध्यक्षता </span><strong><span>सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी</span></strong><span> करेंगे। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस </span><strong><span>रवि शंकर झा</span></strong><span>, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज </span><strong><span>जस्टिस शालिंदर कौर</span></strong><span>, CBI के पूर्व निदेशक </span><strong><span>ऋषि कुमार शुक्ला</span></strong><span> और मेघालय के रिटायर्ड DGP </span><strong><span>डॉ. एल.आर. बिश्नोई</span></strong><span> इसके सदस्य होंगे।</span></p>
<h3><span>किन आरोपों की होगी जांच?</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>कमेटी पेलेट गन, इलेक्ट्रिक लाठी, लाठीचार्ज और बिना पर्याप्त चेतावनी आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की निगरानी, निजता के अधिकार के कथित उल्लंघन और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा, उत्पीड़न या छेड़छाड़ के आरोप भी जांच के दायरे में रहेंगे।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा और अंतरिम आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी कमेटी विचार करेगी। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित हमलों, सरकारी एवं निजी संपत्ति और वाहनों को हुए नुकसान तथा ड्यूटी के दौरान घायल सुरक्षाकर्मियों और उनके परिवारों की परेशानियों को भी दर्ज किया जाएगा।</span></p>
<h3><span>CCTV से वायरलेस लॉग तक जुटाए जाएंगे सबूत</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>जांच को व्यापक बनाने के लिए </span><strong><span>CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग और वायरलेस लॉग</span></strong><span> कमेटी को उपलब्ध कराए जाएंगे। पीड़ितों और गवाहों को अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी दी जाएगी।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>कमेटी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में विशेष रूप से </span><strong><span>महिला हिंसा, गंभीर चोटों और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही</span></strong><span> से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देगी।</span></p>
<h3><span>सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में क्या कहा?</span></h3>
<p class="isSelectedEnd"><span>18 अगस्त 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने साफ किया था कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच</span></strong><span> ने कहा था कि जिम्मेदार लोगों के लिए कोई बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता और मामले को गंभीरता से लेकर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><span>अब 5 सदस्यीय कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर वास्तव में क्या हुआ, किस स्तर पर बल प्रयोग किया गया और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।</span></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong><span>मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।</span></strong></p>
<p><strong><span>दिल्ली लुकआउट | निष्पक्ष खबर, सीधे सवाल</span></strong></p> ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:13:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Supreme Court orders 5-member committee to probe police action at Jantar Mantar</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आजादी की कीमत: पांच हफ्तों में खींची वो लकीर, जिसने करोड़ों की किस्मत बदल दी</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-Price-of-Freedom:-The-line-drawn-in-five-weeks,-which-changed-the-fate-of-millions</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देशभर में आजादी के जश्न की तैयारियां हैं, तिरंगे से लेकर स्कूलों और टीवी स्टूडियो तक स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां फिर सुनाई जा रही हैं। 15 अगस्त 1947 की आधी रात, आजादी का ऐतिहासिक भाषण और लाल किले पर फहराता तिरंगा भारतीय इतिहास की सबसे गौरवशाली तस्वीरों में शामिल हैं। लेकिन इसी आजादी के साथ एक ऐसी त्रासदी भी जुड़ी है, जिसकी कीमत लाखों परिवारों ने अपना घर, जमीन और अपनों को खोकर चुकाई। यह कहानी है भारत-पाकिस्तान के बंटवारे और उस सीमा रेखा की, जिसने उपमहाद्वीप का भूगोल ही नहीं, करोड़ों लोगों का भविष्य भी बदल दिया।</p>
<p>इस कहानी के केंद्र में थे सर सिरिल जॉन रैडक्लिफ, एक ब्रिटिश वकील, जिन्होंने 1947 से पहले कभी भारत की यात्रा तक नहीं की थी। फिर भी उन्हें ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में बांटने वाली सीमा तय करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी बनाई सीमा को इतिहास में रैडक्लिफ लाइन के नाम से जाना गया।</p>
<p>कौन थे सर सिरिल रैडक्लिफ?</p>
<p>सिरिल जॉन रैडक्लिफ का जन्म 1899 में वेल्स में हुआ था। ऑक्सफर्ड से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने लंदन में कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाईं।</p>
<p>लेकिन 1947 में उन्हें भारत की सबसे कठिन और विवादित जिम्मेदारियों में से एक सौंपे जाने की सबसे बड़ी वजह यही थी कि उनका भारत से कोई पुराना राजनीतिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं था। ब्रिटिश सरकार को उम्मीद थी कि भारत की राजनीति से दूर रहने के कारण वे निष्पक्ष फैसला दे सकेंगे।</p>
<p>विडंबना यह थी कि जिस व्यक्ति ने भारत को पहले कभी देखा तक नहीं था, उसे लाखों लोगों की जिंदगी और भविष्य तय करने वाली सीमा खींचनी थी।</p>
<p>ब्रिटेन को रैडक्लिफ की जरूरत क्यों पड़ी?</p>
<p>1947 में ब्रिटेन ने भारत से सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी थी। लॉर्ड माउंटबेटन ने घोषणा कर दी थी कि अगस्त में ब्रिटिश शासन समाप्त हो जाएगा। भारत के विभाजन का राजनीतिक फैसला हो चुका था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी था—भारत और पाकिस्तान की सीमा आखिर कहां होगी?</p>
<p>सबसे मुश्किल स्थिति पंजाब और बंगाल में थी। दोनों प्रांतों में हिंदू, मुस्लिम और सिख आबादी आपस में मिली-जुली थी। केवल धर्म के आधार पर ऐसी सीमा खींचना लगभग असंभव था, जो हर समुदाय को स्वीकार्य हो।</p>
<p>इसके लिए पंजाब और बंगाल के लिए अलग-अलग बाउंड्री कमीशन बनाए गए। रैडक्लिफ को दोनों आयोगों का अध्यक्ष बनाया गया। जब आयोग के सदस्य किसी मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाते, तो अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी रैडक्लिफ पर आ जाती थी।</p>
<p>सिर्फ पांच हफ्ते और सामने था करोड़ों लोगों का भविष्य</p>
<p>रैडक्लिफ 8 जुलाई 1947 को भारत पहुंचे। उनके पास सीमा तय करने के लिए लगभग पांच सप्ताह का समय था। इस बेहद कम अवधि में उन्हें जनगणना के आंकड़े, जिलों की सीमाएं, नहर और सिंचाई व्यवस्था, रेलवे नेटवर्क, प्रशासनिक संपर्क और दोनों पक्षों के राजनीतिक दावों का अध्ययन करना था।</p>
<p>पंजाब में मामला और जटिल था। सिख समुदाय की धार्मिक और आर्थिक जड़ें कई क्षेत्रों में फैली थीं। नहरों और सिंचाई व्यवस्था को सीमा के बीच बांटना आसान नहीं था। रेलवे लाइनें भी ऐसे शहरों और क्षेत्रों को जोड़ती थीं, जो अचानक अलग-अलग देशों का हिस्सा बनने वाले थे।</p>
<p>बंगाल में भी स्थिति बेहद पेचीदा थी। कलकत्ता के भविष्य को लेकर तीखा विवाद था और पूरा प्रांत आर्थिक तथा सामाजिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था।</p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात—सीमा का ऐलान आजादी के बाद हुआ</p>
<p>भारत और पाकिस्तान का जन्म अगस्त 1947 में हुआ। लेकिन आम लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं था कि अंतिम सीमा कहां से गुजरेगी।</p>
<p>रैडक्लिफ अवार्ड 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया, यानी भारत की आजादी के दो दिन बाद।</p>
<p>इसका मतलब था कि कई परिवारों ने आजादी का सूरज तो देखा, लेकिन यह नहीं जानते थे कि उनका गांव, खेत, शहर या घर आखिर भारत में रहेगा या पाकिस्तान में।</p>
<p>सीमा के ऐलान के बाद हालात तेजी से बदले। लोग अपने घर छोड़कर निकलने लगे। सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर भीड़ उमड़ पड़ी। परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों को अचानक शरणार्थी बनना पड़ा।</p>
<p>एक लकीर नहीं, लाखों जिंदगियों का विभाजन</p>
<p>रैडक्लिफ लाइन सिर्फ नक्शे पर खींची गई सीमा नहीं थी। इसने गांवों, खेतों, सड़कों, रेलवे लाइनों, नदियों और बाजारों को अलग कर दिया। कई जगहों पर परिवारों और समुदायों के बीच भी यह सीमा खिंच गई।</p>
<p>विभाजन के दौरान करीब 1.4 करोड़ लोगों के विस्थापित होने का अनुमान लगाया जाता है। मौतों की संख्या को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं, लेकिन अलग-अलग अनुमानों में यह आंकड़ा कई लाख से लेकर लगभग 20 लाख तक बताया गया है।</p>
<p>पंजाब में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए। बंगाल में भी बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ, जिसका असर आने वाले दशकों तक दिखाई देता रहा।</p>
<p>80 साल बाद भी जिंदा है रैडक्लिफ लाइन का असर</p>
<p>1947 में खींची गई यह सीमा आज भी दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालती है। भारत-पाकिस्तान संबंधों से लेकर सीमा सुरक्षा, लोगों की आवाजाही, कश्मीर विवाद और पानी से जुड़े सवालों तक, विभाजन की विरासत आज भी मौजूद है।</p>
<p>इसलिए भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रैडक्लिफ लाइन को याद करना केवल अतीत को याद करना नहीं है। यह उस विरोधाभास को समझना भी है जिसमें एक तरफ भारत आजादी का उत्सव मना रहा था और दूसरी तरफ लाखों लोग अपने घर, परिवार और पहचान बचाने के लिए अनजान रास्तों पर निकल चुके थे।</p>
<p>15 अगस्त 1947 ने भारत को आजादी दी, लेकिन 17 अगस्त को सामने आई एक सीमा रेखा ने उपमहाद्वीप के इतिहास पर ऐसा निशान छोड़ा, जिसका असर 80 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:18:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The Price of Freedom: The line drawn in five weeks, which changed the fate of millions</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>लाल किले से बदलेगा स्वतंत्रता दिवस का इतिहास, पहली बार PM के भाषण से पहले गूंजेगा पूरा &amp;apos;वंदे मातरम्&amp;apos;</title>
        <link>https://delhilookout.com/Vande-Mataram-to-be-played-at-Red-Fort-ahead-of-PM-Modis-Independence-Day-speech</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली। भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से होने वाले मुख्य समारोह में एक ऐसी नई परंपरा की शुरुआत होगी, जो आजादी के बाद पहली बार देखने को मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से ठीक पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की सामूहिक प्रस्तुति होगी और खास बात यह है कि इसे इसके सभी छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<p>अब तक लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' की प्रस्तुति प्रमुख रूप से होती रही है। लेकिन इस बार समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम्' को विशेष स्थान दिया गया है। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की भावना जगाने का एक बड़ा माध्यम बना था।</p>
<p>क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?</p>
<p>इस फैसले के पीछे 2026 का ऐतिहासिक संयोग सबसे बड़ी वजह है। इस वर्ष 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह कालजयी रचना मूल रूप से उनके उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति का शक्तिशाली प्रतीक बन गई।</p>
<p>दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बदलाव की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम्' ने लाखों भारतीयों में उत्साह और जोश पैदा किया था। इसकी 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से इसे विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>'वंदे मातरम्' को मिला कानूनी संरक्षण</p>
<p>इस वर्ष समारोह से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के बाद 'वंदे मातरम्' को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालने या इसका अपमान करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।</p>
<p>विरासत से विकसित भारत तक—दोहरी थीम</p>
<p>इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम में भारत के अतीत और भविष्य, दोनों को जोड़ने की कोशिश की गई है। आयोजन के दो प्रमुख केंद्र होंगे—'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की भूमिका।</p>
<p>यानी इस बार लाल किले का मंच केवल स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत को याद नहीं करेगा, बल्कि आने वाले भारत के सपने और उसमें युवाओं की भूमिका को भी सामने रखेगा।</p>
<p>समारोह में दिखेंगे कई खास आकर्षण</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। ध्वजारोहण के बाद परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।</p>
<p>समारोह के दौरान फूलों की वर्षा भी आकर्षण का हिस्सा होगी। वहीं 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर विशेष ध्वज के साथ आसमान में उड़ान भरता दिखाई देगा।</p>
<p>दिल्ली में संभावित बारिश को देखते हुए लाल किले परिसर की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। परिसर की नालियों और सीवेज व्यवस्था की विशेष सफाई कराई जा रही है, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में भी समारोह के आयोजन में किसी तरह की बाधा न आए।</p>
<p>इस बार का स्वतंत्रता दिवस इसलिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक विरासत, राष्ट्रभक्ति और विकसित भारत के भविष्य को एक ही मंच पर जोड़ने वाला यादगार अवसर बनने जा रहा है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:06:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>&#039;Vande Mataram &#039;to be played at Red Fort ahead of PM Modi&#039;s Independence Day speech</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>80 साल का सफर: आजादी के वक्त 34 करोड़ से 2026 में 147 करोड़ पार, चार गुने से ज्यादा हुई भारत की आबादी</title>
        <link>https://delhilookout.com/The-80-year-journey:-Indias-population-to-more-than-quadruple-from-34-crore-at-the-time-of-independence-to-147-crore-in-2026</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: भारत इस साल अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद से देश ने सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। आजादी के समय भारत के सामने जहां विभाजन, गरीबी, भुखमरी और सीमित संसाधनों जैसी गंभीर चुनौतियां थीं, वहीं आज भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है।</p>
<p>आजादी के समय कितनी थी भारत की आबादी?</p>
<p>भारत की आजादी के समय, यानी 1947 में, देश की आबादी करीब 34 करोड़ (340 मिलियन) थी। आजादी के बाद हुई पहली जनगणना यानी 1951 में भारत की आबादी लगभग 36.1 करोड़ दर्ज की गई।</p>
<p>इसके बाद देश की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई। 1981 तक भारत की आबादी बढ़कर करीब 68.3 करोड़ हो गई। यानी महज तीन दशकों में देश की आबादी लगभग दोगुनी हो गई।</p>
<p>1951 से 1981 के बीच सबसे तेज बढ़ी आबादी</p>
<p>1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि का दौर बेहद तेज रहा। उस समय जन्मदर काफी अधिक थी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में लगातार गिरावट आई। इसका सीधा असर जनसंख्या वृद्धि पर पड़ा।</p>
<p>1961 से 1971 के दशक में भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर करीब 24.8 प्रतिशत रही, जिसे देश के इतिहास में सबसे अधिक वृद्धि दरों में गिना जाता है।</p>
<p>2001 में पार हुआ 100 करोड़ का आंकड़ा</p>
<p>1981 के बाद भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आने लगी, लेकिन आबादी का आधार इतना बड़ा हो चुका था कि कुल संख्या लगातार बढ़ती रही।</p>
<p>2001 में भारत की आबादी 100 करोड़ यानी 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। इसके बाद 2011 की जनगणना में देश की आबादी करीब 121 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई।</p>
<p>2026 में 147 करोड़ से ज्यादा आबादी</p>
<p>अब 2026 में भारत की अनुमानित आबादी करीब 147.66 करोड़ बताई जा रही है। यानी 1947 में करीब 34 करोड़ की आबादी के मुकाबले आज देश की आबादी चार गुने से भी ज्यादा हो चुकी है।</p>
<p>आबादी के इस विशाल विस्तार के साथ भारत के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। वहीं बड़ी आबादी भारत के लिए विशाल मानव संसाधन और बाजार का अवसर भी प्रस्तुत करती है।</p>
<p>1947 से 2026 तक का सफर सिर्फ आबादी बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारत की पूरी तस्वीर है—34 करोड़ से करीब 148 करोड़ तक पहुंचा देश अब दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में अपनी नई भूमिका तय कर रहा है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:00:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>The 80-year journey: India&#039;s population to more than quadruple from 34 crore at the time of independence to 147 crore in 2026</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>रेटिंग: ⭐⭐⭐½/5  &amp;  आवारापन 2 रिव्यू: 19 साल बाद फिर लौटा शिवम पंडित का दर्द, इश्क और इंतकाम</title>
        <link>https://delhilookout.com/Rating-⭐⭐⭐½- --The-2nd-Review:-After-19-years,-Shivam-Pandits-pain,-love-and-longing-return</link>
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        <description><![CDATA[ <p>19 साल पहले जब ‘आवारापन’ पर्दे पर आई थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि शिवम पंडित का दर्द, उसकी खामोशी और अधूरी मोहब्बत आने वाले वर्षों में एक पूरी पीढ़ी की यादों का हिस्सा बन जाएगी। 2007 का वह दौर, इमरान हाशमी का उदास चेहरा और ‘तो फिर आओ’ जैसे गाने आज भी उन दर्शकों के जेहन में ताजा हैं, जिन्होंने उस दौर को जिया है।</p>
<p>अब लंबे इंतजार के बाद ‘आवारापन 2’ उसी भावनात्मक दुनिया में वापसी करती है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह फिल्म कैसी है, बल्कि सवाल यह भी है कि क्या 19 साल बाद शिवम पंडित का जादू पहले जैसा ही असर करता है? जवाब है—काफी हद तक हां।</p>
<p>कहानी: जब शिवम को फिर मिला जीने का मकसद</p>
<p>फिल्म की कहानी शिवम पंडित की उसी टूट चुकी दुनिया से आगे बढ़ती है। अपनी मोहब्बत आलिया को खोने के बाद शिवम अपराध की दुनिया से खुद को दूर कर चुका है। उसकी जिंदगी अब खामोशी, तन्हाई और पुरानी यादों के बीच सिमट गई है।</p>
<p>लेकिन किस्मत उसे एक बार फिर उस मोड़ पर ले आती है, जहां उसके सामने एक मासूम बच्ची आती है। शिवम बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और अपनी पुरानी मोहब्बत की याद में उसका नाम आलिया रख देता है।</p>
<p>शिवम उससे दूर रहने की कोशिश करता है, लेकिन जब बच्ची को गोद लेने वाला परिवार उसे मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह के हवाले कर देता है, तब शिवम के भीतर का पुराना योद्धा फिर जाग उठता है।</p>
<p>अब यह सिर्फ एक बच्ची को बचाने की कहानी नहीं है। यह उस आदमी की कहानी है जिसने एक बार अपना प्यार खोया था और अब दूसरी बार अपनी ‘आलिया’ को खोने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<p>यहीं से फिल्म भावनात्मक ड्रामा से निकलकर एक खूंखार क्राइम-एक्शन थ्रिलर में बदल जाती है और शिवम का सफर बैंकॉक तक पहुंचता है।</p>
<p>इमरान हाशमी: फिल्म की जान और सबसे बड़ा आकर्षण</p>
<p>अगर ‘आवारापन 2’ किसी एक चेहरे के दम पर खड़ी है, तो वह इमरान हाशमी हैं।</p>
<p>शिवम पंडित का किरदार उनके व्यक्तित्व के साथ इस तरह जुड़ चुका है कि स्क्रीन पर उनका चेहरा आते ही दर्शक कहानी से पहले उनकी भावनाओं को पढ़ना शुरू कर देते हैं।</p>
<p>बढ़ी हुई दाढ़ी, लंबे बाल, उदास आंखें, कम संवाद और चेहरे पर जमा हुआ दर्द—इमरान ने शिवम को सिर्फ निभाया नहीं है, बल्कि उसे दोबारा जिया है।</p>
<p>उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि कई जगह वह बिना संवाद बोले ही पूरा दृश्य अपने नाम कर लेते हैं। उनकी चुप्पी में गुस्सा भी है, दर्द भी है और अधूरी मोहब्बत की वह टीस भी, जो किरदार को आम एक्शन हीरो से बिल्कुल अलग बनाती है।</p>
<p>‘आवारापन 2’ देखते हुए साफ महसूस होता है कि शिवम पंडित का किरदार इमरान हाशमी के करियर के सबसे यादगार किरदारों में क्यों गिना जाता है।</p>
<p>दिशा पाटनी ने चौंकाया, विलेन ने पैदा की बेचैनी</p>
<p>दिशा पाटनी फिल्म में जारा के किरदार में नजर आती हैं। शुरुआत में लगता है कि उनका रोल सीमित होगा, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ उन्हें पर्याप्त स्पेस मिलता है। कुछ जगह संवाद अदायगी थोड़ी और प्रभावी हो सकती थी, लेकिन उनका किरदार कहानी को भावनात्मक संतुलन देता है।</p>
<p>वहीं पूरन गब्बी जोरावर के रूप में एक अलग तरह के विलेन को सामने लाते हैं। उनका किरदार सनकी, अस्थिर और अप्रत्याशित है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और अजीब व्यवहार फिल्म के माहौल में असहजता पैदा करते हैं।</p>
<p>हालांकि उनका किरदार एक बेहद डरावने मास्टरमाइंड की तुलना में ज्यादा ‘साइको’ और विचित्र दिखाई देता है। इसके बावजूद इमरान हाशमी जैसे अभिनेता के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराना उनकी बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p>शबाना आजमी नाफिसा के किरदार में कम स्क्रीन टाइम के बावजूद प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं सुविंदर विक्की अपनी परतदार अदाकारी से कहानी में गंभीरता और गहराई जोड़ते हैं।</p>
<p>असली सरप्राइज—नॉस्टैल्जिया</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसका नॉस्टैल्जिया है।</p>
<p>जब पर्दे पर इमरान हाशमी की एंट्री होती है और बैकग्राउंड में ‘तो फिर आओ’ की धुन सुनाई देती है, तो यह सिर्फ एक गाना नहीं रह जाता। यह 2007 के उस दौर में वापस लौटने जैसा महसूस होता है।</p>
<p>यही फिल्म की सबसे बड़ी समझदारी है। मेकर्स ने पुरानी फिल्म की यादों को सिर्फ दिखाया नहीं, बल्कि उन्हें कहानी की भावनात्मक जरूरत के साथ जोड़ा है।</p>
<p>‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’ के नए संस्करण कई भावुक दृश्यों में कहानी के असर को और गहरा करते हैं।</p>
<p>नए ट्रैक ‘ये आवारापन’, ‘वे जुनून’ और ‘पिया घर आया’ भी फिल्म के मूड के साथ अच्छी तरह बैठते हैं।</p>
<p>संगीत यहां सिर्फ मनोरंजन नहीं है—यह शिवम की भावनाओं की आवाज बन जाता है।</p>
<p>एक्शन में भी है इमोशन</p>
<p>‘आवारापन 2’ का एक्शन सिर्फ गोलियां, मारधाड़ और बदला लेने तक सीमित नहीं है।</p>
<p>शिवम जब लड़ता है तो उसके पीछे एक भावनात्मक वजह होती है। हर मुकाबला उसके अंदर दबे दर्द को बाहर निकालता है।</p>
<p>यही वजह है कि फिल्म के कई एक्शन सीक्वेंस दर्शकों को सिर्फ रोमांचित नहीं करते, बल्कि शिवम की बेचैनी भी महसूस कराते हैं।</p>
<p>फिल्म का डार्क विजुअल टोन, क्राइम की दुनिया और बैंकॉक की लोकेशन मिलकर कहानी को एक अलग सिनेमाई माहौल देते हैं।</p>
<p>निर्देशन: पुरानी आत्मा, नई कहानी</p>
<p>नितिन कक्कड़ ने सबसे बड़ा जोखिम यह लिया है कि उन्होंने फिल्म को सिर्फ पहली ‘आवारापन’ की कॉपी नहीं बनाया।</p>
<p>वह जानते हैं कि दर्शक सिर्फ पुराने गाने और इमरान हाशमी को देखने नहीं आए हैं। उन्हें शिवम की कहानी का अगला अध्याय भी चाहिए।</p>
<p>इसलिए फिल्म में पुरानी यादों के साथ एक नई कहानी रखी गई है। यही वजह है कि यह सीक्वल पूरी तरह अतीत के सहारे खड़ा नजर नहीं आता।</p>
<p>हालांकि कुछ जगह स्क्रीनप्ले की रफ्तार कमजोर पड़ती है और इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी खिंची हुई महसूस होती है।</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां</p>
<p>इमरान हाशमी का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। इसके साथ पुराने गानों का शानदार इस्तेमाल, डार्क वातावरण, भावनात्मक एक्शन और मजबूत सपोर्टिंग कास्ट कहानी को प्रभावी बनाते हैं।</p>
<p>सबसे खास बात यह है कि फिल्म अपने जॉनर को लेकर भ्रमित नहीं होती। यह रोमांस, दर्द, क्राइम, एक्शन और नॉस्टैल्जिया—इन सभी को एक ही दुनिया में पिरोने की कोशिश करती है।</p>
<p>कहां कमजोर पड़ती है ‘आवारापन 2’?</p>
<p>फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी भी कहीं न कहीं उसकी पहली फिल्म से जुड़ी है।</p>
<p>जिस दर्शक ने 2007 की ‘आवारापन’ नहीं देखी है, उसके लिए शिवम का भावनात्मक सफर उतना प्रभावशाली नहीं हो सकता।</p>
<p>इसके अलावा मानव तस्करी वाला ट्रैक आगे बढ़ने के बाद कहानी के कई मोड़ अनुमानित लगने लगते हैं। इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में फिल्म की गति भी धीमी पड़ती है।</p>
<p>विलेन का किरदार भी जितना भय पैदा कर सकता था, उतना पूरी तरह नहीं कर पाता।</p>
<p>फाइनल वर्डिक्ट: शिवम पंडित अभी खत्म नहीं हुआ</p>
<p>‘आवारापन 2’ परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह एक ईमानदार सीक्वल जरूर है।</p>
<p>यह फिल्म उन दर्शकों के लिए सबसे ज्यादा खास है, जिन्होंने 2007 में शिवम पंडित को पहली बार देखा था और उसके दर्द को अपने भीतर महसूस किया था।</p>
<p>19 साल बाद इमरान हाशमी उसी किरदार में लौटते हैं—उसी खामोशी के साथ, उसी दर्द के साथ और उसी अधूरी मोहब्बत की परछाईं के साथ। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार शिवम के पास खोने के लिए सिर्फ अपनी मोहब्बत नहीं, बल्कि बचाने के लिए एक मासूम जिंदगी भी है।</p>
<p>कुछ कमजोर पटकथा वाले हिस्सों और अनुमानित मोड़ों के बावजूद फिल्म अपने इमोशनल हिस्से में दिल जीत लेती है।</p>
<p>और जब सिनेमाघर में ‘तो फिर आओ’ की धुन गूंजती है, इमरान हाशमी का चेहरा स्क्रीन पर आता है और शिवम पंडित फिर से अपनी दुनिया में लौटता है, तब एक बात साफ हो जाती है—</p>
<p>कुछ किरदार वक्त के साथ पुराने नहीं होते, वे सिर्फ यादों में और गहरे उतर जाते हैं।</p>
<p>‘आवारापन 2’ उन्हीं किरदारों में से एक—शिवम पंडित—की दर्द भरी, खूनी और भावुक वापसी है।</p>
<p>⭐ अंतिम रेटिंग: 3.5/5</p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:54:01 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>Rating ⭐⭐⭐½/  - The 2nd Review: After 19 years, Shivam Pandit&#039;s pain, love and longing return</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>जनगणना 2027 में पहली बार जाति की गिनती, 40 सवालों से जुटेगा देश का पूरा सामाजिक&amp;आर्थिक डेटा! कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल</title>
        <link>https://delhilookout.com/For-the-first-time-in-Census-2027,-caste-will-be-counted,-full-socio-economic-data-of-the-country-will-be-collected-with-40-questions-Questions-ranging-from-Covid-vaccination-to-bank-accounts-and-mobiles</link>
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        <description><![CDATA[ <p>नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना 2027 अब सिर्फ आबादी की गिनती नहीं होगी, बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय ढांचे की विस्तृत तस्वीर सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान लोगों की गिनती के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवाल अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें पहली बार जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।</p>
<p>भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश के अनुसार, लोगों से उनकी वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति की स्थिति, जाति, माता-पिता की जानकारी, मातृभाषा, शिक्षा, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और दिव्यांगता सहित कई अहम जानकारियां ली जाएंगी।</p>
<p>जाति का भी होगा पूरा ब्योरा</p>
<p>जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि पहली बार जातिगत विवरण दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्मी यह पूछेंगे कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है या नहीं और उसकी जाति क्या है। सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नावली में जातियों की कोई तैयार सूची देने के बजाय उत्तरदाता द्वारा बताई गई जानकारी दर्ज किए जाने की संभावना है।</p>
<p>जातिगत जनगणना कराने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लिया था।</p>
<p>कोविड वैक्सीनेशन से लेकर बैंक खाते और मोबाइल तक सवाल</p>
<p>सरकार द्वारा अधिसूचित सवालों में कई ऐसे प्रश्न भी हैं जो पहली नजर में सामान्य जनगणना से अलग दिखाई देते हैं। लोगों से कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस होने की जानकारी भी मांगी जाएगी।</p>
<p>इसके अलावा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवालों में पूछा जाएगा कि व्यक्ति ने पिछले वर्ष काम किया या नहीं, उसका पेशा क्या है, वह किस उद्योग, व्यापार या सेवा से जुड़ा है और उसकी आर्थिक गतिविधि की श्रेणी क्या है।</p>
<p>पलायन और जन्मस्थान का भी रिकॉर्ड</p>
<p>गणनाकर्मी लोगों से उनका जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, पलायन का कारण, वर्तमान गांव या शहर में रहने की अवधि और स्थायी आवासीय पता भी पूछेंगे। इससे देश में आंतरिक पलायन की तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी।</p>
<p>विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या, वर्तमान विवाह से हुए बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जीवित जन्मे बच्चों की जानकारी भी ली जाएगी।</p>
<p>पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना</p>
<p>भारत की यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के रूप में कराई जाएगी। लोगों को घर-घर जाकर जानकारी देने के अलावा सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 17 से 31 अगस्त के बीच लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे।</p>
<p>हिमपात वाले क्षेत्रों—लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित इलाकों—में लोगों की गिनती 1 से 30 सितंबर के बीच होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया अगले वर्ष होगी।</p>
<p>2021 की जनगणना कोरोना के कारण टली थी</p>
<p>देश में हर दस वर्ष में होने वाली जनगणना वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।</p>
<p>जनगणना का पहला चरण 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना का काम शामिल है।</p>
<p>जाति, शिक्षा, रोजगार, पलायन, डिजिटल साक्षरता और पहचान से जुड़े सवालों के साथ जनगणना 2027 देश की बदलती सामाजिक और आर्थिक तस्वीर का एक बेहद व्यापक डेटाबेस तैयार करने जा रही है।</p> ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:15:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>admin</dc:creator>
        <media:keywords>For the first time in Census 2027, caste will be counted, full socio-economic data of the country will be collected with 40 questions! Questions ranging from Covid vaccination to bank accounts and mobiles</media:keywords>
    </item>
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